नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Tue, 10/04/2022 - 16:13
कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal
परम्परागत तालाबों पर अनुपम मिश्र की किताब ‘आज भी खरे हैं तालाब’, पहली बार, वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब में अनुपम ने समाज से प्राप्त जानकारी के आधार पर भारत के विभिन्न भागों में बने तालाबों के बारे में व्यापक विवरण प्रस्तुत किया है। अर्थात आज भी खरे हैं तालाब में दर्ज विवरण परम्परागत तालाबों पर समाज की राय है। उनका दृष्टिबोध है। उन विवरणों में समाज की भावनायें, आस्था, मान्यतायें, रीति-रिवाज तथा परम्परागत तालाबों के निर्माण से जुड़े कर्मकाण्ड दर्ज हैं। प्रस्तुति और शैली अनुपम की है।

Content

Submitted by Shivendra on Fri, 09/06/2019 - 11:19
Source:
web
desertification in maharashtra
खेती लायक नहीं रही 5200 हेक्टेयर जमीन। फोटो स्त्रोत-डाउन टू अर्थ झारखंड के बाद महाराष्ट्र में मरुस्थलीकरण तेजी से बढ़ रहा है। यहां सबसे भयावह स्थिति धुले जिले की है, जहां 64.2 प्रतिशत भूमि निम्नीकरण की चपेट में है। तो वहीं बीते आठ वर्षों में 5200 हेक्टेयर जमीन निम्नीकृत हो गई है। मरुस्थलीकरण पर विचार विमर्श  करने के लिए ही संयुक्त राष्ट्र का कन्वेंशन टु कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी) का काॅप 14 (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज) 2 से 13 सितंबर के बीच भारत में हो रहा है।
Submitted by Shivendra on Thu, 09/05/2019 - 18:10
Source:
इंडिया साइंस वायर, 04 सितंबर
bio diversity in annamalai
अन्नामलाई का पहाड़ी क्षेत्र। जैव विविधता क्षेत्रों में छेड़छाड़ के कारण नए संक्रमण का खतरा हो सकता है। पश्चिमी घाट के अन्नामलाई पहाड़ियों के जैव विविधता क्षेत्र में किए गए एक नए अध्ययन के आधार पर भारतीय वैज्ञानिकों ने यह बात कही है। वैज्ञानिकों को अन्नामलाई के जैव विविधता क्षेत्र की वन्यजीव प्रजातियों में ऐसे परजीवी सूक्ष्मजीव मिले हैं, जो मूल रूप से पालतू पशुओं और मनुष्यों में पाए जाते हैं।
Submitted by Shivendra on Thu, 09/05/2019 - 17:16
Source:
web
desertification and rajasthan
भारत में 32 मिलियन हेक्टेयर शुष्क क्षेत्र है, जिसमें राजस्थान देश के सबसे शुष्क जोन में आता है। राजस्थान में देश के कुल शुष्क क्षेत्र का 62 प्रतिशत यानी 20.8 मिलियन हेक्टेयर से अधिक हिस्सा शामिल है। यहां गर्मियों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जबकि सर्दियों में -4 डिग्री सेल्सियस से तक तापमान कम हो जाता है। राजस्थान में औसत से कम वर्षा होती है।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Tue, 09/06/2022 - 14:16
Source:
चरखा फीचर
'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022
कार्य अनुभव के विवरण के साथ संक्षिप्त पाठ्यक्रम जीवन लगभग 800-1000 शब्दों का एक प्रस्ताव, जिसमें उस विशेष विषयगत क्षेत्र को रेखांकित किया गया हो, जिसमें आवेदक काम करना चाहता है. प्रस्ताव में अध्ययन की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, कार्यप्रणाली, चयनित विषय की प्रासंगिकता के साथ-साथ इन लेखों से अपेक्षित प्रभाव के बारे में विवरण शामिल होनी चाहिए. साथ ही, इस बात का उल्लेख होनी चाहिए कि देश के विकास से जुड़ी बहस में इसके योगदान किस प्रकार हो सकता है? कृपया आलेख प्रस्तुत करने वाली भाषा भी निर्दिष्ट करें। लेख अंग्रेजी, हिंदी या उर्दू में ही स्वीकार किए जाएंगे
Submitted by Shivendra on Tue, 08/23/2022 - 17:19
Source:
यूसर्क
जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आज दिनांक 23.08.22 को तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूसर्क की निदेशक प्रो.(डॉ.) अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा जल के महत्व को देखते हुए विगत वर्ष 2021 को संयुक्त राष्ट्र की विश्व पर्यावरण दिवस की थीम "ईको सिस्टम रेस्टोरेशन" के अंर्तगत आयोजित कार्यक्रम के निष्कर्षों के क्रम में जल विज्ञान विषयक लेक्चर सीरीज एवं जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रारंभ किया गया
Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
Source:
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

Latest

खासम-खास

तालाब ज्ञान-संस्कृति : नींव से शिखर तक

Submitted by Editorial Team on Tue, 10/04/2022 - 16:13
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
talab-gyan-sanskriti-:-ninv-se-shikhar-tak
कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal
परम्परागत तालाबों पर अनुपम मिश्र की किताब ‘आज भी खरे हैं तालाब’, पहली बार, वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब में अनुपम ने समाज से प्राप्त जानकारी के आधार पर भारत के विभिन्न भागों में बने तालाबों के बारे में व्यापक विवरण प्रस्तुत किया है। अर्थात आज भी खरे हैं तालाब में दर्ज विवरण परम्परागत तालाबों पर समाज की राय है। उनका दृष्टिबोध है। उन विवरणों में समाज की भावनायें, आस्था, मान्यतायें, रीति-रिवाज तथा परम्परागत तालाबों के निर्माण से जुड़े कर्मकाण्ड दर्ज हैं। प्रस्तुति और शैली अनुपम की है।

Content

काॅप 14 : महाराष्ट्र में खेती लायक नहीं रही 5200 हेक्टेयर जमीन

Submitted by Shivendra on Fri, 09/06/2019 - 11:19
Source
web
desertification in maharashtra
खेती लायक नहीं रही 5200 हेक्टेयर जमीन। फोटो स्त्रोत-डाउन टू अर्थ खेती लायक नहीं रही 5200 हेक्टेयर जमीन। फोटो स्त्रोत-डाउन टू अर्थ झारखंड के बाद महाराष्ट्र में मरुस्थलीकरण तेजी से बढ़ रहा है। यहां सबसे भयावह स्थिति धुले जिले की है, जहां 64.2 प्रतिशत भूमि निम्नीकरण की चपेट में है। तो वहीं बीते आठ वर्षों में 5200 हेक्टेयर जमीन निम्नीकृत हो गई है। मरुस्थलीकरण पर विचार विमर्श  करने के लिए ही संयुक्त राष्ट्र का कन्वेंशन टु कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी) का काॅप 14 (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज) 2 से 13 सितंबर के बीच भारत में हो रहा है।

जैव विविधता क्षेत्रों में छेड़छाड़ से नए संक्रमण का खतरा 

Submitted by Shivendra on Thu, 09/05/2019 - 18:10
Source
इंडिया साइंस वायर, 04 सितंबर
bio diversity in annamalai
अन्नामलाई का पहाड़ी क्षेत्र।अन्नामलाई का पहाड़ी क्षेत्र। जैव विविधता क्षेत्रों में छेड़छाड़ के कारण नए संक्रमण का खतरा हो सकता है। पश्चिमी घाट के अन्नामलाई पहाड़ियों के जैव विविधता क्षेत्र में किए गए एक नए अध्ययन के आधार पर भारतीय वैज्ञानिकों ने यह बात कही है। वैज्ञानिकों को अन्नामलाई के जैव विविधता क्षेत्र की वन्यजीव प्रजातियों में ऐसे परजीवी सूक्ष्मजीव मिले हैं, जो मूल रूप से पालतू पशुओं और मनुष्यों में पाए जाते हैं।

काॅप 14 : मरुस्थलीकरण के मुद्दे पर राजस्थान ने दिखाई राह

Submitted by Shivendra on Thu, 09/05/2019 - 17:16
Source
web
desertification and rajasthan
भारत में 32 मिलियन हेक्टेयर शुष्क क्षेत्र है, जिसमें राजस्थान देश के सबसे शुष्क जोन में आता है। राजस्थान में देश के कुल शुष्क क्षेत्र का 62 प्रतिशत यानी 20.8 मिलियन हेक्टेयर से अधिक हिस्सा शामिल है। यहां गर्मियों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जबकि सर्दियों में -4 डिग्री सेल्सियस से तक तापमान कम हो जाता है। राजस्थान में औसत से कम वर्षा होती है।

प्रयास

उदयपुर के इस गांव को वेटलैंड घोषित किया जाना तय

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
udayapur-ke-is-gaon-ko-weightland-ghoshit-kiya-jana-tay
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022

Submitted by Shivendra on Tue, 09/06/2022 - 14:16
sanjoy-ghosh-media-awards-–-2022
Source
चरखा फीचर
'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022
कार्य अनुभव के विवरण के साथ संक्षिप्त पाठ्यक्रम जीवन लगभग 800-1000 शब्दों का एक प्रस्ताव, जिसमें उस विशेष विषयगत क्षेत्र को रेखांकित किया गया हो, जिसमें आवेदक काम करना चाहता है. प्रस्ताव में अध्ययन की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, कार्यप्रणाली, चयनित विषय की प्रासंगिकता के साथ-साथ इन लेखों से अपेक्षित प्रभाव के बारे में विवरण शामिल होनी चाहिए. साथ ही, इस बात का उल्लेख होनी चाहिए कि देश के विकास से जुड़ी बहस में इसके योगदान किस प्रकार हो सकता है? कृपया आलेख प्रस्तुत करने वाली भाषा भी निर्दिष्ट करें। लेख अंग्रेजी, हिंदी या उर्दू में ही स्वीकार किए जाएंगे

​यूसर्क द्वारा तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ

Submitted by Shivendra on Tue, 08/23/2022 - 17:19
USERC-dvara-tin-divasiy-jal-vigyan-prashikshan-prarambh
Source
यूसर्क
जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आज दिनांक 23.08.22 को तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूसर्क की निदेशक प्रो.(डॉ.) अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा जल के महत्व को देखते हुए विगत वर्ष 2021 को संयुक्त राष्ट्र की विश्व पर्यावरण दिवस की थीम "ईको सिस्टम रेस्टोरेशन" के अंर्तगत आयोजित कार्यक्रम के निष्कर्षों के क्रम में जल विज्ञान विषयक लेक्चर सीरीज एवं जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रारंभ किया गया

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
28-july-ko-ayojit-hone-vale-jal-shiksha-vyakhyan-shrinkhala-par-bhag-lene-ke-liye-panjikaran-karayen
Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

Upcoming Event

Popular Articles