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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Mon, 05/09/2022 - 12:20
कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal.org
नीति आयोग के सन 2018 के अनुमान के अनुसार 60 करोड़ लोग शुद्ध पेयजल की गंभीर से अतिगंभीर कमी से ग्रसित हैं और हर साल लगभग दो लाख लोगों की अकाल मृत्यु, शुद्ध पानी की अनुपलब्धता के कारण होती है। नीति आयोग के अनुसार सन 2030 तक भारत की पानी की मांग के दो गुना होने का अनुमान है। नीति आयोग के इन अनुमानों और जमीनी हकीकत को ध्यान में रख सरकारों ने शुद्ध पानी पर अनेक योजनाओं पर काम प्रारंभ किया है। इसी कड़ी में पिछले दिनों, प्रधानमंत्री जी ने,

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Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 12:21
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धधकते जंगल झुलसता जीवन
जंगल मे आग लगते ही ग्रामीण ही सबसे पहले आग बुझाने आते थे, क्योंकि उस जमाने गांव की समूची आर्थिकी जंगलों पर ही निर्भर थी। जंगलों से घास, लकड़ी, जलाऊ , इमारती, खेती बाड़ी, खेत खलियान, हवा , पानी, सिंचाई के लिए, पीने के लिए, पशुओं के लिये,,चारा पत्तियों से लेकर कृषि से
Submitted by Shivendra on Mon, 04/25/2022 - 15:13
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कैसे होता है गंगा का पानी दूषित
गंगा भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदियों में से एक है। यह उत्तर भारत के मैदानों की विशाल नदी है। गंगा भारत और बांग्लादेश में मिलकर 2,510 किलोमीटर की दूरी तय करती है। उत्तरांचल में हिमालय से निकलकर यह भारत के लगभग एक-चौथाई भू-क्षेत्र से प्रवाहित होती हुई बंगाल की खाड़ी में मिलती है। गंगा नदी को उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था का मेरुदण्ड भी कहा गया है। आज हम आपको गंगा की एक ऐसी तस्वीर दिखाने जा रहे है जिसे देख कर आपको इसकी पवित्रता पर संदेह होने लगेगा  ,ऋषिकेश में चंद्रभागा और शीशमझाड़ी के गांडेय नाले इस पवित्र नदी को न सिर्फ प्रदूषित कर रहे है
Submitted by Shivendra on Fri, 04/22/2022 - 15:18
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हर घर नल योजना की हकीकत आई सामने 
सरकार हर घर जल हर घर नल* का दावा तो डंके की चोट पर करती है, इसे अपनी बड़ी उपलब्धि तक बताती है, मगर ग्राउंड जीरो पर हकीकत कुछ और ही है, ग्रामीण अदद एक बूंद पानी को भी तरस रहें है, जी हां ऐसा ही हाल है देव भूमि उत्तराखंड के पौड़ी जिले में स्थित चौबट्टाखाल विधानसभा के जहां ग्राम सभा अमोठा और केशरपुरा के करीब सौ परिवार पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं

प्रयास

Submitted by Editorial Team on Sat, 04/16/2022 - 11:51
बाढ़ की आपदा पर पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए कार्यशाला का आयोजन
देहरादून की रिस्पना और बिंदाल नदी बरसात में कभी भी कहर बरपाने लगती हैं। इन नदियों में किनारे पर बसी लगभग 30-40 बस्तियां खतरे की जद में आ जाती हैं। एक्सट्रीम वेदर कंडीशन अब ‘न्यू नार्मल’ है। बादल फटना यानी भारी बरसात की वजह से ये नदियां कब उफान पर आ जाएं कहना मुश्किल होता है। इसके अलावा शहर के ज्यादातर नालों पर भी अतिक्रमण व अवैध कब्जे हैं।  ऐसे में नदी के बहाव की वजह से यहां कब कोई बड़ा हादसा हो जाए, ये चिंता का विषय है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।
Submitted by Editorial Team on Mon, 03/21/2022 - 11:47
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विश्व जल दिवस पर सेमिनार का आयोजन
आज जल संकट समूचे विश्व की गंभीर समस्या है। हालात इतने खराब हैं कि दुनिया के 37 देश पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। इनमें सिंगापुर, पश्चिमी सहारा, कतर, बहरीन, जमैका, सऊदी अरब और कुवैत समेत 19 देश ऐसे हैं जहां पानी की आपूर्ति मांग से बेहद कम है। दुख की बात यह है कि हमारा देश इन देशों से सिर्फ एक पायदान पीछे है। असलियत यह है कि दुनिया में पांच में से एक व्यक्ति की साफ पानी तक पहुंच ही नहीं है। यह सब सेवा एवं उद्योग क्षेत्र से योगदान बढ़ने के कारण घरेलू और औद्योगिक क्षेत्र में पानी की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी का नतीजा है। यह विचार आज विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में एनवायरमेंट सोशल डेवलपमेंट एसोसिएशन दिल्ली द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी, गाजियाबाद के सभागार में ग्लोबल वाटर कांग्रेस के तकनीकी सत्र के दौरान वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, पर्यावरणविद एवं राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा समिति के अध्यक्ष श्री ज्ञानेन्द्र रावत ने व्यक्त किये।
Submitted by Shivendra on Wed, 02/16/2022 - 16:08
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Cseindia
जल एवं स्वच्छता कार्यक्रम के लिए निदेशक की आवश्यकता
संस्था को एक ऐसे व्यक्ति की तलाश है जिसकी कल्पना और प्रेरणा उस बदलाव का हिस्सा बने जिसकी आज दुनिया को जरूरत है। उनके पास उस परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए शोध,लेखन और कन्वेन्स करने की प्रतिबद्धता के साथ-साथ योग्यता भी होना चाहिए। भारत में प्रभावी सेप्टेज कीचड़ प्रबंधन और सीवेज उपचार सहित शहरों को जल संवेदनशील बनाने पर ध्यान दें

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खासम-खास

आजादी के 75 साल की सौगात: अमृत सरोवर योजना

Submitted by Editorial Team on Mon, 05/09/2022 - 12:20
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
azadi-ke-75-saal-ki-saugat:-amrit-sarovar-yojana
 कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal.org
नीति आयोग के सन 2018 के अनुमान के अनुसार 60 करोड़ लोग शुद्ध पेयजल की गंभीर से अतिगंभीर कमी से ग्रसित हैं और हर साल लगभग दो लाख लोगों की अकाल मृत्यु, शुद्ध पानी की अनुपलब्धता के कारण होती है। नीति आयोग के अनुसार सन 2030 तक भारत की पानी की मांग के दो गुना होने का अनुमान है। नीति आयोग के इन अनुमानों और जमीनी हकीकत को ध्यान में रख सरकारों ने शुद्ध पानी पर अनेक योजनाओं पर काम प्रारंभ किया है। इसी कड़ी में पिछले दिनों, प्रधानमंत्री जी ने,

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धधकते जंगल झुलसता जीवन

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 12:21
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धधकते जंगल झुलसता जीवन
जंगल मे आग लगते ही ग्रामीण ही सबसे पहले आग बुझाने आते थे, क्योंकि उस जमाने गांव की समूची आर्थिकी जंगलों पर ही निर्भर थी। जंगलों से घास, लकड़ी, जलाऊ , इमारती, खेती बाड़ी, खेत खलियान, हवा , पानी, सिंचाई के लिए, पीने के लिए, पशुओं के लिये,,चारा पत्तियों से लेकर कृषि से

कैसे होता है गंगा का पानी दूषित

Submitted by Shivendra on Mon, 04/25/2022 - 15:13
kaise-hota-hai-ganga-ka-pani-dushit
कैसे होता है गंगा का पानी दूषित
गंगा भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदियों में से एक है। यह उत्तर भारत के मैदानों की विशाल नदी है। गंगा भारत और बांग्लादेश में मिलकर 2,510 किलोमीटर की दूरी तय करती है। उत्तरांचल में हिमालय से निकलकर यह भारत के लगभग एक-चौथाई भू-क्षेत्र से प्रवाहित होती हुई बंगाल की खाड़ी में मिलती है। गंगा नदी को उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था का मेरुदण्ड भी कहा गया है। आज हम आपको गंगा की एक ऐसी तस्वीर दिखाने जा रहे है जिसे देख कर आपको इसकी पवित्रता पर संदेह होने लगेगा  ,ऋषिकेश में चंद्रभागा और शीशमझाड़ी के गांडेय नाले इस पवित्र नदी को न सिर्फ प्रदूषित कर रहे है

हर घर नल योजना की हकीकत आई सामने 

Submitted by Shivendra on Fri, 04/22/2022 - 15:18
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हर घर नल योजना की हकीकत आई सामने 
सरकार हर घर जल हर घर नल* का दावा तो डंके की चोट पर करती है, इसे अपनी बड़ी उपलब्धि तक बताती है, मगर ग्राउंड जीरो पर हकीकत कुछ और ही है, ग्रामीण अदद एक बूंद पानी को भी तरस रहें है, जी हां ऐसा ही हाल है देव भूमि उत्तराखंड के पौड़ी जिले में स्थित चौबट्टाखाल विधानसभा के जहां ग्राम सभा अमोठा और केशरपुरा के करीब सौ परिवार पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं

प्रयास

बिंदाल नदी क्षेत्र में पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित किए जाने के लिए शोध परियोजना

Submitted by Editorial Team on Sat, 04/16/2022 - 11:51
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Source
पीपुल्स साइंस इंस्टीट्यूट
बाढ़ की आपदा पर पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए कार्यशाला का आयोजन
देहरादून की रिस्पना और बिंदाल नदी बरसात में कभी भी कहर बरपाने लगती हैं। इन नदियों में किनारे पर बसी लगभग 30-40 बस्तियां खतरे की जद में आ जाती हैं। एक्सट्रीम वेदर कंडीशन अब ‘न्यू नार्मल’ है। बादल फटना यानी भारी बरसात की वजह से ये नदियां कब उफान पर आ जाएं कहना मुश्किल होता है। इसके अलावा शहर के ज्यादातर नालों पर भी अतिक्रमण व अवैध कब्जे हैं।  ऐसे में नदी के बहाव की वजह से यहां कब कोई बड़ा हादसा हो जाए, ये चिंता का विषय है।

नोटिस बोर्ड

स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

विश्व जल दिवस पर सेमिनार का आयोजन : वक्ताओं ने वर्षा जल संचयन समय की मांग बताया

Submitted by Editorial Team on Mon, 03/21/2022 - 11:47
विश्व जल दिवस पर सेमिनार का आयोजन
आज जल संकट समूचे विश्व की गंभीर समस्या है। हालात इतने खराब हैं कि दुनिया के 37 देश पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। इनमें सिंगापुर, पश्चिमी सहारा, कतर, बहरीन, जमैका, सऊदी अरब और कुवैत समेत 19 देश ऐसे हैं जहां पानी की आपूर्ति मांग से बेहद कम है। दुख की बात यह है कि हमारा देश इन देशों से सिर्फ एक पायदान पीछे है। असलियत यह है कि दुनिया में पांच में से एक व्यक्ति की साफ पानी तक पहुंच ही नहीं है। यह सब सेवा एवं उद्योग क्षेत्र से योगदान बढ़ने के कारण घरेलू और औद्योगिक क्षेत्र में पानी की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी का नतीजा है। यह विचार आज विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में एनवायरमेंट सोशल डेवलपमेंट एसोसिएशन दिल्ली द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी, गाजियाबाद के सभागार में ग्लोबल वाटर कांग्रेस के तकनीकी सत्र के दौरान वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, पर्यावरणविद एवं राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा समिति के अध्यक्ष श्री ज्ञानेन्द्र रावत ने व्यक्त किये।

जल एवं स्वच्छता कार्यक्रम के लिए निदेशक की आवश्यकता

Submitted by Shivendra on Wed, 02/16/2022 - 16:08
Source
Cseindia
जल एवं स्वच्छता कार्यक्रम के लिए निदेशक की आवश्यकता
संस्था को एक ऐसे व्यक्ति की तलाश है जिसकी कल्पना और प्रेरणा उस बदलाव का हिस्सा बने जिसकी आज दुनिया को जरूरत है। उनके पास उस परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए शोध,लेखन और कन्वेन्स करने की प्रतिबद्धता के साथ-साथ योग्यता भी होना चाहिए। भारत में प्रभावी सेप्टेज कीचड़ प्रबंधन और सीवेज उपचार सहित शहरों को जल संवेदनशील बनाने पर ध्यान दें

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