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खासम-खास

केरल की चेतावनी - सम्भावित कारण

Submitted by editorial on Sat, 09/15/2018 - 15:16
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
इडुक्की में सूखी पेरियार नदीइडुक्की में सूखी पेरियार नदी (फोटो साभार - फर्स्टपोस्ट)भोपाल से प्रकाशित दैनिक अखबार भास्कर (13 सितम्बर, 2018) में ‘केरल की नई मुसीबत’ के शीर्षक से खबर छपी है। इस खबर के अनुसार जहाँ बाढ़ ने तबाही मचाई थी वहाँ नदियाँ और कुएँ सूखे। अखबार आगे लिखता है कि पिछले माह की 100 साल में सबसे भीषण बाढ़ से गुजरे केरल में अब सूखे का संकट मँडरा रहा है। मात्र तीन सप्ताह के अन्दर बाढ़ग्रस्त इलाकों की नदियों और कुओं का जलस्तर गिरना प्रारम्भ हो चुका है।

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सरस्वती की तरह कहीं विलुप्त न हो जाएँ गंगा, यमुना - प्रदीप टम्टा

Submitted by editorial on Sat, 08/04/2018 - 18:11
Author
प्रेम पंचोली
टिहरी बाँध
छात्र राजनीति से अपने जीवन की राजनीतिक पारी शुरू करने वाले राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा से प्रेम पंचोली ने उत्तराखण्ड के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और दोहन से जुड़े मुद्दों पर लम्बी बातचीत की।

उत्तराखण्ड के मंडुआ की पहुँच विदेशों तक

Submitted by editorial on Fri, 08/03/2018 - 18:50
Author
नमिता
मंडुआ (कोदो)जैसे-जैसे खाद्य पदार्थों में कीटनाशक पदार्थों का प्रयोग बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे लोगों का शरीर बीमारियों का घर बन गया है।

प्राकृतिक संसाधनों पर जलविद्युत परियोजनाओं का साया

Submitted by editorial on Fri, 08/03/2018 - 17:35
Author
प्रेम पंचोली
भिलंगना घाटी में बाँध

उत्तराखण्ड राज्य 53,484 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में बसा है। पर्यटन व तीर्थाटन का यह एक अद्भुत केन्द्र भी है।

प्रयास

आदिवासियों ने सहेजे माता नु वन

Submitted by editorial on Mon, 09/03/2018 - 14:32
Author
मनीष वैद्य
आदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलआदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलमध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में अपढ़ समझे जाने वाले आदिवासी समाज ने अपने जंगल को सहेजकर पढ़े-लिखे समाज को एक बड़ा सन्देश दिया है। जिले के 110 गाँवों में खुद आदिवासियों ने अपने बूते आसपास के जंगलों को न सिर्फ सहेजा, बल्कि वहाँ 41 हजार नए पौधों को रोपकर घना जंगल खड़ा करने के लिये भी जतन शुरू कर दिया है।

नोटिस बोर्ड

हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर एकदिवसीय कार्यशाला

Submitted by editorial on Fri, 09/14/2018 - 18:39
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
दिनांक- 15 सितम्बर 2018,
स्थान - मसीही ध्यान केन्द्र, राजपुर, देहरादून
समय - 10-05 बजे तक
दिन - शनिवार

विषय - उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अध्ययन रिपोर्ट के प्रस्तुतिकरण एवं एक दिवसीय कार्यशाला हेतु सादर निमंत्रण


माउंटेन फोरम हिमालय (mountain forum himalayas - MFH) विगत पन्द्रह वर्षों से पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड और हिमाचल में स्थानीय स्वशासन में महिलाओं, वंचित वर्ग और आमजन की भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थानीय समुदाय, ग्राम स्तरीय संगठन, स्वयंसेवी संगठन के साथ ही सरकार के भी सहयोग ले रही है। एम.एफ.एच. द्वारा समय-समय पर पंचायत प्रतिनिधियों का क्षमता का विकास, पंचायतों का सूक्ष्म नियोजन एवं चुनाव पूर्व मतदाता जागरुकता अभियान जैसी गतिविधियों के माध्यम से राज्य की पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने का कार्य पिछले काफी सालों से किया जाता रहा है।

युवा वैज्ञानिकों के लिये विज्ञान संचार से जुड़ने का अवसर

Submitted by editorial on Mon, 08/13/2018 - 17:18
Author
उमाशंकर मिश्र
Source
इंडिया साइंस वायर, 13 अगस्त, 2018
विज्ञान संचारकविज्ञान संचारक (फोटो साभार - अवसर) नई दिल्ली। विज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने के लिये अब युवा वैज्ञानिकों का सहारा लिया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस सम्बन्ध में एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता की घोषणा की है।

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केरल की चेतावनी - सम्भावित कारण

Submitted by editorial on Sat, 09/15/2018 - 15:16
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
इडुक्की में सूखी पेरियार नदीइडुक्की में सूखी पेरियार नदी (फोटो साभार - फर्स्टपोस्ट)भोपाल से प्रकाशित दैनिक अखबार भास्कर (13 सितम्बर, 2018) में ‘केरल की नई मुसीबत’ के शीर्षक से खबर छपी है। इस खबर के अनुसार जहाँ बाढ़ ने तबाही मचाई थी वहाँ नदियाँ और कुएँ सूखे। अखबार आगे लिखता है कि पिछले माह की 100 साल में सबसे भीषण बाढ़ से गुजरे केरल में अब सूखे का संकट मँडरा रहा है। मात्र तीन सप्ताह के अन्दर बाढ़ग्रस्त इलाकों की नदियों और कुओं का जलस्तर गिरना प्रारम्भ हो चुका है।

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सरस्वती की तरह कहीं विलुप्त न हो जाएँ गंगा, यमुना - प्रदीप टम्टा

Submitted by editorial on Sat, 08/04/2018 - 18:11
Author
प्रेम पंचोली
टिहरी बाँध
छात्र राजनीति से अपने जीवन की राजनीतिक पारी शुरू करने वाले राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा से प्रेम पंचोली ने उत्तराखण्ड के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और दोहन से जुड़े मुद्दों पर लम्बी बातचीत की।

उत्तराखण्ड के मंडुआ की पहुँच विदेशों तक

Submitted by editorial on Fri, 08/03/2018 - 18:50
Author
नमिता
मंडुआ (कोदो)जैसे-जैसे खाद्य पदार्थों में कीटनाशक पदार्थों का प्रयोग बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे लोगों का शरीर बीमारियों का घर बन गया है।

प्राकृतिक संसाधनों पर जलविद्युत परियोजनाओं का साया

Submitted by editorial on Fri, 08/03/2018 - 17:35
Author
प्रेम पंचोली
भिलंगना घाटी में बाँध

उत्तराखण्ड राज्य 53,484 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में बसा है। पर्यटन व तीर्थाटन का यह एक अद्भुत केन्द्र भी है।

प्रयास

आदिवासियों ने सहेजे माता नु वन

Submitted by editorial on Mon, 09/03/2018 - 14:32
Author
मनीष वैद्य
आदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलआदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलमध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में अपढ़ समझे जाने वाले आदिवासी समाज ने अपने जंगल को सहेजकर पढ़े-लिखे समाज को एक बड़ा सन्देश दिया है। जिले के 110 गाँवों में खुद आदिवासियों ने अपने बूते आसपास के जंगलों को न सिर्फ सहेजा, बल्कि वहाँ 41 हजार नए पौधों को रोपकर घना जंगल खड़ा करने के लिये भी जतन शुरू कर दिया है।

नोटिस बोर्ड

हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर एकदिवसीय कार्यशाला

Submitted by editorial on Fri, 09/14/2018 - 18:39
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
दिनांक- 15 सितम्बर 2018,
स्थान - मसीही ध्यान केन्द्र, राजपुर, देहरादून
समय - 10-05 बजे तक
दिन - शनिवार

विषय - उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अध्ययन रिपोर्ट के प्रस्तुतिकरण एवं एक दिवसीय कार्यशाला हेतु सादर निमंत्रण


माउंटेन फोरम हिमालय (mountain forum himalayas - MFH) विगत पन्द्रह वर्षों से पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड और हिमाचल में स्थानीय स्वशासन में महिलाओं, वंचित वर्ग और आमजन की भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थानीय समुदाय, ग्राम स्तरीय संगठन, स्वयंसेवी संगठन के साथ ही सरकार के भी सहयोग ले रही है। एम.एफ.एच. द्वारा समय-समय पर पंचायत प्रतिनिधियों का क्षमता का विकास, पंचायतों का सूक्ष्म नियोजन एवं चुनाव पूर्व मतदाता जागरुकता अभियान जैसी गतिविधियों के माध्यम से राज्य की पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने का कार्य पिछले काफी सालों से किया जाता रहा है।

युवा वैज्ञानिकों के लिये विज्ञान संचार से जुड़ने का अवसर

Submitted by editorial on Mon, 08/13/2018 - 17:18
Author
उमाशंकर मिश्र
Source
इंडिया साइंस वायर, 13 अगस्त, 2018
विज्ञान संचारकविज्ञान संचारक (फोटो साभार - अवसर) नई दिल्ली। विज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने के लिये अब युवा वैज्ञानिकों का सहारा लिया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस सम्बन्ध में एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता की घोषणा की है।

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