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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

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Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
Source:
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l
Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 10:26
Source:
योजना, जनवरी 2020
प्रो. एमएस स्वामीनाथन
एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक की मेधा पहले जैसी ही है और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने, आम किसान का जीवन स्तर सुधारने तथा जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए स्वयं को तैयार करने के सुझाव देने का जुनून उनके भीतर अब भी वैसा ही है...चेन्नई में योजना (तमिल) के वरिष्ठ सम्पादक व सहायक निदेशक संजय घोष द्वारा प्रोफेसर स्वामीनाथन से साक्षात्कार के मुख्य अंश यहां प्रस्तुत हैं-
Submitted by HindiWater on Sat, 01/18/2020 - 15:53
Source:
हिन्दुस्तान (अनोखी) 18 जनवरी, 2020
गुनगुने (lukewarm) पानी के फायदे
पानी जरूरी है, धरती के लिए भी और हमारे शरीर के लिए भी। पर, ठंड के मौसम में हम आठ गिलास पानी हर दिन पीने की नसीहत को भूलने लगते हैं। गुनगुने पानी की मदद से ठंड में कैसे पिएं पर्याप्त पानी और क्या है इसका फायदा, बता रही हैं न्यूट्रिशनिस्ट प्रीति त्यागी

प्रयास

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 11:33
लेविस पुग
लेविस पुग का जन्म पांस दिसंबर 1969 को इंग्लैंड के प्लाईमाउथ में हुआ था। बचपन से ही पर्यावरण के प्रति काफी लगाव होने के साथ ही तैराकी में काफी रूचि थी। अपनी इस रूचि को जीवन का अहम हिस्सा बनाया और वर्ष 1986 में पहली बार 17 वर्ष की आयु में तैराकी की। इसी के एक महीने बाद पुग ने राॅबेल आइलैंड से केपटाउन तक तैराकी की थी।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
Source:
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l
Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
Source:
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।
Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
Source:
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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खासम-खास

नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

Content

मीडिया महोत्सव-2020

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

हरित क्रान्ति के जनक प्रो. एमएस स्वामीनाथन से बातचीत

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 10:26
Source
योजना, जनवरी 2020
प्रो. एमएस स्वामीनाथन
एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक की मेधा पहले जैसी ही है और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने, आम किसान का जीवन स्तर सुधारने तथा जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए स्वयं को तैयार करने के सुझाव देने का जुनून उनके भीतर अब भी वैसा ही है...चेन्नई में योजना (तमिल) के वरिष्ठ सम्पादक व सहायक निदेशक संजय घोष द्वारा प्रोफेसर स्वामीनाथन से साक्षात्कार के मुख्य अंश यहां प्रस्तुत हैं-

गुनगुने (lukewarm) पानी के फायदे

Submitted by HindiWater on Sat, 01/18/2020 - 15:53
Source
हिन्दुस्तान (अनोखी) 18 जनवरी, 2020
गुनगुने (lukewarm) पानी के फायदे
पानी जरूरी है, धरती के लिए भी और हमारे शरीर के लिए भी। पर, ठंड के मौसम में हम आठ गिलास पानी हर दिन पीने की नसीहत को भूलने लगते हैं। गुनगुने पानी की मदद से ठंड में कैसे पिएं पर्याप्त पानी और क्या है इसका फायदा, बता रही हैं न्यूट्रिशनिस्ट प्रीति त्यागी

प्रयास

लेविस पुग ने अंटार्कटिका की पिघलती बर्फ के बीच तैरकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 11:33
लेविस पुग
लेविस पुग का जन्म पांस दिसंबर 1969 को इंग्लैंड के प्लाईमाउथ में हुआ था। बचपन से ही पर्यावरण के प्रति काफी लगाव होने के साथ ही तैराकी में काफी रूचि थी। अपनी इस रूचि को जीवन का अहम हिस्सा बनाया और वर्ष 1986 में पहली बार 17 वर्ष की आयु में तैराकी की। इसी के एक महीने बाद पुग ने राॅबेल आइलैंड से केपटाउन तक तैराकी की थी।

नोटिस बोर्ड

मीडिया महोत्सव-2020

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन

Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।

पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला

Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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