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खासम-खास

नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018 और कुछ सुझाव

Submitted by editorial on Mon, 10/22/2018 - 12:35
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018 (फोटो साभार - विकिपीडिया)द्वितीय एडमिनिस्ट्रेटिव रीफार्म कमीशन (second administrative reform commission) की फरवरी 2008 की सातवीं रिपोर्ट जिसका शीर्षक विवाद निपटारे के लिये क्षमता विकास (Capacity Building for Conflict Resolution-Fiction to Fusion) है, ने नदी बोर्ड अधिनियम 1956 को प्रतिस्थापित कर उसके स्थान पर प्रत्येक अन्तरराज्यीय नदी घाटी के लिये अलग-अलग नदी घाटी संगठन (River Basin Organisations - RBOs) बनाने की सिफारिश की थी।

Content

भूकम्प के साये में है उत्तराखण्ड

Submitted by editorial on Sat, 08/25/2018 - 12:15
Author
नमिता
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजीवाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (फोटो साभार - डब्ल्यूआईएचजी)उत्तराखण्ड भूकम्प की दृष्टि से अति-संवेदनशील है और राज्य के विभिन्न हिस्सों में अक्सर महसूस किये जाने वाले भूकम्प के झटकों को गम्भीरता से लेने की जरूरत है यह कहना है वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (Wadia Institute of Himalayan Geology) से जुड़े भू-वैज्ञानिकों का।

पानी को सियासी हथियार बनाना है खतरनाक

Submitted by editorial on Thu, 08/23/2018 - 18:21
Source
अमर उजाला, 23 अगस्त 2018
भारतीय नदी जल विवादनभारतीय नदी जल विवाद (फोटो साभार - सीडब्ल्यूसी)आन्तरिक जल विवाद भविष्य में भारत के लिये गम्भीर चिन्ता का विषय हो सकते हैं जिसकी चेतावनी लगभग पन्द्रह वर्ष पूर्व केन्द्रीय जल आयोग दे चुका है। आयोग ने कहा था कि पानी की सियासत देश के संघवादी ढाँचे के लिये खतरा पैदा कर रही है।

बरसाती पानी में छुपा है बीहड़ों का इलाज

Submitted by editorial on Thu, 08/23/2018 - 15:26
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
बीहड़ में तब्दील होती उपजाऊ जमीनबीहड़ में तब्दील होती उपजाऊ जमीन (फोटो साभार - आईएएस अभियान)मिट्टी के कटाव का सबसे बदनुमा चेहरा यदि कहीं दिखता है तो वह बीहड़ में दिखाई देता है। बरसाती पानी से कटी-पिटी धरती ऊबड़-खाबड़ तथा पूरी तरह उद्योग, बसाहट या खेती के लिये अनुपयुक्त होती है। दूर से ही पहचान में आ जाती है। भारत में उन्हें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और बिहार में देखा जा सकता है।

प्रयास

अनूठा पर्यावरण प्रेमी

Submitted by editorial on Mon, 10/29/2018 - 20:11
Author
मनीष वैद्य
जंगल का रूप लेते हाथीपावा के पौधेजंगल का रूप लेते हाथीपावा के पौधेदावा है कि कभी आपने ऐसा पुलिस अफसर नहीं देखा होगा, आज तक आपने जितने भी पुलिस अफसर देखे होंगे, अपराधों पर सख्ती से अंकुश लगाने या नरम-गरम छवि की वजह से पहचाने जाते रहे हैं। आमतौर पर खाकी वर्दी और रौब झाड़ना ही पुलिस की पहचान होती है लेकिन एक आईपीएस अफसर ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया।

नोटिस बोर्ड

गंगा भक्तों के अनशन के 16 दिन हुए पूरे

Submitted by editorial on Thu, 11/08/2018 - 11:05
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथस्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता और निर्मलता की माँग को लेकर मातृसदन के दो संतों ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद और स्वामी पुण्यानंद का अनशन वृहस्पतिवार को भी जारी रहा। ये दोनों 24 अक्टूबर से अनशन पर हैं।

जानिये आँकड़ों के विश्लेषण की बारीकियाँ

Submitted by editorial on Sun, 10/28/2018 - 16:33
Author
सीएसई
Source
सीएसई
जलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन के दौर में विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषण अति आवश्यक हो गया है। कहा जाता है जिसे मापा जाता है उसका प्रबन्धन किया जाता है। परन्तु यह तभी सम्भव है जब मापी गई वस्तु से सम्बन्धित आँकड़े का सही विश्लेषण हो। आज हर क्षेत्र में आँकड़ों की बाढ़ है लेकिन आप इनका विश्लेषण तभी कर सकते हैं जब इसके लिये आपने समुचित प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।

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नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018 और कुछ सुझाव

Submitted by editorial on Mon, 10/22/2018 - 12:35
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018 (फोटो साभार - विकिपीडिया)द्वितीय एडमिनिस्ट्रेटिव रीफार्म कमीशन (second administrative reform commission) की फरवरी 2008 की सातवीं रिपोर्ट जिसका शीर्षक विवाद निपटारे के लिये क्षमता विकास (Capacity Building for Conflict Resolution-Fiction to Fusion) है, ने नदी बोर्ड अधिनियम 1956 को प्रतिस्थापित कर उसके स्थान पर प्रत्येक अन्तरराज्यीय नदी घाटी के लिये अलग-अलग नदी घाटी संगठन (River Basin Organisations - RBOs) बनाने की सिफारिश की थी।

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भूकम्प के साये में है उत्तराखण्ड

Submitted by editorial on Sat, 08/25/2018 - 12:15
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नमिता
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजीवाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (फोटो साभार - डब्ल्यूआईएचजी)उत्तराखण्ड भूकम्प की दृष्टि से अति-संवेदनशील है और राज्य के विभिन्न हिस्सों में अक्सर महसूस किये जाने वाले भूकम्प के झटकों को गम्भीरता से लेने की जरूरत है यह कहना है वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (Wadia Institute of Himalayan Geology) से जुड़े भू-वैज्ञानिकों का।

पानी को सियासी हथियार बनाना है खतरनाक

Submitted by editorial on Thu, 08/23/2018 - 18:21
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अमर उजाला, 23 अगस्त 2018
भारतीय नदी जल विवादनभारतीय नदी जल विवाद (फोटो साभार - सीडब्ल्यूसी)आन्तरिक जल विवाद भविष्य में भारत के लिये गम्भीर चिन्ता का विषय हो सकते हैं जिसकी चेतावनी लगभग पन्द्रह वर्ष पूर्व केन्द्रीय जल आयोग दे चुका है। आयोग ने कहा था कि पानी की सियासत देश के संघवादी ढाँचे के लिये खतरा पैदा कर रही है।

बरसाती पानी में छुपा है बीहड़ों का इलाज

Submitted by editorial on Thu, 08/23/2018 - 15:26
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
बीहड़ में तब्दील होती उपजाऊ जमीनबीहड़ में तब्दील होती उपजाऊ जमीन (फोटो साभार - आईएएस अभियान)मिट्टी के कटाव का सबसे बदनुमा चेहरा यदि कहीं दिखता है तो वह बीहड़ में दिखाई देता है। बरसाती पानी से कटी-पिटी धरती ऊबड़-खाबड़ तथा पूरी तरह उद्योग, बसाहट या खेती के लिये अनुपयुक्त होती है। दूर से ही पहचान में आ जाती है। भारत में उन्हें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और बिहार में देखा जा सकता है।

प्रयास

अनूठा पर्यावरण प्रेमी

Submitted by editorial on Mon, 10/29/2018 - 20:11
Author
मनीष वैद्य
जंगल का रूप लेते हाथीपावा के पौधेजंगल का रूप लेते हाथीपावा के पौधेदावा है कि कभी आपने ऐसा पुलिस अफसर नहीं देखा होगा, आज तक आपने जितने भी पुलिस अफसर देखे होंगे, अपराधों पर सख्ती से अंकुश लगाने या नरम-गरम छवि की वजह से पहचाने जाते रहे हैं। आमतौर पर खाकी वर्दी और रौब झाड़ना ही पुलिस की पहचान होती है लेकिन एक आईपीएस अफसर ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया।

नोटिस बोर्ड

गंगा भक्तों के अनशन के 16 दिन हुए पूरे

Submitted by editorial on Thu, 11/08/2018 - 11:05
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथस्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता और निर्मलता की माँग को लेकर मातृसदन के दो संतों ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद और स्वामी पुण्यानंद का अनशन वृहस्पतिवार को भी जारी रहा। ये दोनों 24 अक्टूबर से अनशन पर हैं।

जानिये आँकड़ों के विश्लेषण की बारीकियाँ

Submitted by editorial on Sun, 10/28/2018 - 16:33
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सीएसई
Source
सीएसई
जलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन के दौर में विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषण अति आवश्यक हो गया है। कहा जाता है जिसे मापा जाता है उसका प्रबन्धन किया जाता है। परन्तु यह तभी सम्भव है जब मापी गई वस्तु से सम्बन्धित आँकड़े का सही विश्लेषण हो। आज हर क्षेत्र में आँकड़ों की बाढ़ है लेकिन आप इनका विश्लेषण तभी कर सकते हैं जब इसके लिये आपने समुचित प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।

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