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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

जलवायु परिवर्तन खेती के लिए बड़ी चुनौती

Submitted by UrbanWater on Wed, 07/10/2019 - 10:52
Source
गांव कनेक्शन, 07-13 जुलाई 2019
जलवायु परिवर्तन कृषि के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जलवायु परिवर्तन कृषि के लिए सबसे बड़ा खतरा है। फसल उत्पादन के फेल होने, फसल की उत्पादकता कम होने, खड़ी फसलों का नुकसान होना, नये फसली कीटों और बदलते खेती के तरीके की वजह से खेती में नुकसान उठाना पड़ता है। महाराष्ट्र, जो हाल-फिलहाल फिलहाल भयंकर सूखे से गुजर रहा है। किसान बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन कृषि के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जलवायु परिवर्तन से मतलब है कि जलवायु की अवस्था में काफी समय के लिए बदलाव। जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक आंतरिक बदलावों या बाहरी कारणों जैसे ज्वालामुखियों में बदलाव या इंसानों की वजह से जलवायु में होने वाले बदलावों से माना जाता है।

जल प्रबंधन प्रणाली एवं उपेक्षित आदर्श मूल्य

Submitted by UrbanWater on Tue, 07/09/2019 - 11:16
Source
 दैनिक अंबर, 7 मार्च 2016
जल की समस्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है।जल की समस्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। गर्मी आते ही कुछ समाचारों का सिलसिला शुरू हो जाता है जैसे ‘आज फलां जगह पर पानी की किल्लत से धरना, हंगामा हुआ, मटके फोड़े गए, जल विभागाधिकारी का पुतला फूंका गया। इतना ही नहीं आजकल तो मोबाइल टावर टावर पर चढ़कर पानी की पूर्ति करने की धमकी देते हुए भी देखे जा सकते हैं'। क्या यह सब पानी की किल्लत दूर करने के सही कदम हैं? क्या हम आने वाली पीढ़ियों के लिए इस तरह कोई स्थाई हल निकल पाएंगे, बिल्कुल नहीं। हमारे पास ना तो ऐसा सोचने की शक्ति रही है और ना ही इतना दृढ़ निश्चय कि कुछ करके इसका स्थायी समाधान निकाल सकें।

जलते मानव बाल बिगड़ती हवा

Submitted by HindiWater on Tue, 07/09/2019 - 10:12
Source
विज्ञान प्रगति

जलते मानव बाल बिगड़ती हवा।जलते मानव बाल बिगड़ती हवा।

‘हाड़ जले ज्यों लकड़ी, केस जले ज्यों घास‘, कबीर दास की उदासी का कारण आज फिर उभर कर सामने आ रहा है। मानव के कटे बाल व्यर्थ माने जाते रहे हैं और उन्हें जला दिया जाता है। मगर इधर वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि इन बालों का जलाया जाना गंभीर वायु प्रदूषण का कारण बन रहा है। कुछ व्यवसाय ऐसे भी हैं जहां मानव बालों को जलाया जा रहा है। वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चला है कि मानव बालों का जलाया जाना प्रदूषणकारी है, जो मानव ही नहीं अन्य जीवों के लिए भी जानलेवा है। मानव बालों को प्रयोगशाला में जलाने के बाद किए गए विश्लेषण से पता चला है कि मात्र 100 ग्राम बाल जलने पर आसपास के वातावरण में इतनी जहरीली गैस पैदा करते हैं कि दम घुटने लगता है और त्वचा में जलन की हालत बन जाती है।

प्रयास

इंजेक्शन पद्धति से सूख चुके हैंडपंपों को किया जा रहा रिचार्ज

Submitted by UrbanWater on Fri, 07/19/2019 - 12:53
Source
दैनिक जागरण, 19 जुलाई 2019
देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है।देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। भूजल स्तर घटने के कारण सूख चुके हैंडपंपों से एक बूंद पानी नहीं निकलता। देशभर में ऐसे सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। लेकिन आपसे यदि कहा जाए कि यही हैंडपंप धरती को लाखों लीटर पानी लौटा सकते हैं, तो सुनकर अचंभा होगा। श्योपुर, मध्यप्रदेश के आदिवासी विकास खंड कराहल के चार गांवों में ऐसा होते हुए देखा जा सकता है। इन चारों गांवों के 11 सूखे हैंडपंप और दो कुएं जमीन के अंदर बारिश और गांव से उपयोग के बाद निकलने वाले दूषित पानी को फिल्टर करके जमीन के अंदर पहुंचा रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि क्षेत्र का भूजल स्तर लौट आया। गांव में जो हैंडपंप और कुएं सूखे पड़े थे, उन्होंने पानी देना शुरू कर दिया।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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जलवायु परिवर्तन खेती के लिए बड़ी चुनौती

Submitted by UrbanWater on Wed, 07/10/2019 - 10:52
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गांव कनेक्शन, 07-13 जुलाई 2019
जलवायु परिवर्तन कृषि के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जलवायु परिवर्तन कृषि के लिए सबसे बड़ा खतरा है। फसल उत्पादन के फेल होने, फसल की उत्पादकता कम होने, खड़ी फसलों का नुकसान होना, नये फसली कीटों और बदलते खेती के तरीके की वजह से खेती में नुकसान उठाना पड़ता है। महाराष्ट्र, जो हाल-फिलहाल फिलहाल भयंकर सूखे से गुजर रहा है। किसान बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन कृषि के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जलवायु परिवर्तन से मतलब है कि जलवायु की अवस्था में काफी समय के लिए बदलाव। जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक आंतरिक बदलावों या बाहरी कारणों जैसे ज्वालामुखियों में बदलाव या इंसानों की वजह से जलवायु में होने वाले बदलावों से माना जाता है।

जल प्रबंधन प्रणाली एवं उपेक्षित आदर्श मूल्य

Submitted by UrbanWater on Tue, 07/09/2019 - 11:16
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 दैनिक अंबर, 7 मार्च 2016
जल की समस्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है।जल की समस्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। गर्मी आते ही कुछ समाचारों का सिलसिला शुरू हो जाता है जैसे ‘आज फलां जगह पर पानी की किल्लत से धरना, हंगामा हुआ, मटके फोड़े गए, जल विभागाधिकारी का पुतला फूंका गया। इतना ही नहीं आजकल तो मोबाइल टावर टावर पर चढ़कर पानी की पूर्ति करने की धमकी देते हुए भी देखे जा सकते हैं'। क्या यह सब पानी की किल्लत दूर करने के सही कदम हैं? क्या हम आने वाली पीढ़ियों के लिए इस तरह कोई स्थाई हल निकल पाएंगे, बिल्कुल नहीं। हमारे पास ना तो ऐसा सोचने की शक्ति रही है और ना ही इतना दृढ़ निश्चय कि कुछ करके इसका स्थायी समाधान निकाल सकें।

जलते मानव बाल बिगड़ती हवा

Submitted by HindiWater on Tue, 07/09/2019 - 10:12
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विज्ञान प्रगति

जलते मानव बाल बिगड़ती हवा।जलते मानव बाल बिगड़ती हवा।

‘हाड़ जले ज्यों लकड़ी, केस जले ज्यों घास‘, कबीर दास की उदासी का कारण आज फिर उभर कर सामने आ रहा है। मानव के कटे बाल व्यर्थ माने जाते रहे हैं और उन्हें जला दिया जाता है। मगर इधर वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि इन बालों का जलाया जाना गंभीर वायु प्रदूषण का कारण बन रहा है। कुछ व्यवसाय ऐसे भी हैं जहां मानव बालों को जलाया जा रहा है। वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चला है कि मानव बालों का जलाया जाना प्रदूषणकारी है, जो मानव ही नहीं अन्य जीवों के लिए भी जानलेवा है। मानव बालों को प्रयोगशाला में जलाने के बाद किए गए विश्लेषण से पता चला है कि मात्र 100 ग्राम बाल जलने पर आसपास के वातावरण में इतनी जहरीली गैस पैदा करते हैं कि दम घुटने लगता है और त्वचा में जलन की हालत बन जाती है।

प्रयास

इंजेक्शन पद्धति से सूख चुके हैंडपंपों को किया जा रहा रिचार्ज

Submitted by UrbanWater on Fri, 07/19/2019 - 12:53
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दैनिक जागरण, 19 जुलाई 2019
देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है।देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। भूजल स्तर घटने के कारण सूख चुके हैंडपंपों से एक बूंद पानी नहीं निकलता। देशभर में ऐसे सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। लेकिन आपसे यदि कहा जाए कि यही हैंडपंप धरती को लाखों लीटर पानी लौटा सकते हैं, तो सुनकर अचंभा होगा। श्योपुर, मध्यप्रदेश के आदिवासी विकास खंड कराहल के चार गांवों में ऐसा होते हुए देखा जा सकता है। इन चारों गांवों के 11 सूखे हैंडपंप और दो कुएं जमीन के अंदर बारिश और गांव से उपयोग के बाद निकलने वाले दूषित पानी को फिल्टर करके जमीन के अंदर पहुंचा रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि क्षेत्र का भूजल स्तर लौट आया। गांव में जो हैंडपंप और कुएं सूखे पड़े थे, उन्होंने पानी देना शुरू कर दिया।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
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दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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