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खासम-खास

Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by HindiWater on Tue, 07/06/2021 - 17:43
Source:
इंडिया साइंस वायर
अत्याधिक बरसात के पीछे अत्याधिक सिंचाई

सिंचाई में वृद्धि से वाष्पीकरण में वृद्धि होती है और इसके परिणामस्वरूप अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि होती है,फ़

Submitted by HindiWater on Tue, 07/06/2021 - 17:43
Source:
इंडिया साइंस वायर
भारत में बढ़ रहा है प्रतिकूल मौसमी घटनाओं का प्रकोप
भारत पिछले कुछ समय से विभिन्न किस्म की मौसमी प्रतिकूलताओं से जूझता आया है। उनमें गर्म हवाएं यानी हीटवेव्स को भी एक खतरनाक मौसमी परिघटना माना जाता है। यूं तो दुनिया के तमाम हिस्सों में इसके अलग-अलग नाम हैं। जैसे अमेरिका में चिनूक, भूमध्यसागरीय देशों में मैस्ट्रो और इराक तथा फारस की खाड़ी में शामल इत्यादि। भारत में गर्म हवाओं को ‘लू’ के नाम से जाना जाता है, जो गर्मियों के मौसम में मुख्य रूप से उत्तर भारतीय इलाकों को अपनी चपेट में लेती है।
Submitted by HindiWater on Mon, 07/05/2021 - 15:26
Source:
PSI
ऐल्कलिनिटी 600 मिग्रा / ली तक का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है
यदि ऐल्कलिनिटी गणना 200 मिग्रा /ली के अंदर है तो पानी पीने लायक है, यह स्वीकार्य मानक है। जहाँ से सैंम्पल लिया गया है, वहाँ अन्य पानी का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं है तो, ऐल्कलिनिटी  600 मिग्रा / ली तक का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है।  

प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 07/09/2021 - 11:44
पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों ने नई तरकीब निकाली
जिला देहरादून के जनजातीय क्षेत्र जौनसार में गर्मी का मौसम आते ही  यहां के लोगो को पानी कि किल्लत से जूझना पड़ता है आज हम आपको जनजातीय क्षेत्र जौनसार के कालसी ब्लॉक अंतर्गत एक गांव गांगरो की तस्वीरें दिख रहे है जहां पानी की समस्या से लोगो को रोज़ जूझना पड़ता है जिसे देखते हुए सड़क पर एक हैंड पंप की व्यवस्था की गई क्योंकि गांव में  जो परंपरागत जल स्रोत है वो यहां रह रहे करीब एक हजार लोगों को पानी की पूर्ति नही कर पा रहा है 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
Source:
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।
Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
Source:
विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

hindukush-himalaya-parvatamala-third-pole

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अत्याधिक बरसात के पीछे अत्याधिक सिंचाई

Submitted by HindiWater on Tue, 07/06/2021 - 17:43
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इंडिया साइंस वायर
अत्याधिक बरसात के पीछे अत्याधिक सिंचाई

सिंचाई में वृद्धि से वाष्पीकरण में वृद्धि होती है और इसके परिणामस्वरूप अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि होती है,फ़

भारत में बढ़ रहा है प्रतिकूल मौसमी घटनाओं का प्रकोप

Submitted by HindiWater on Tue, 07/06/2021 - 17:43
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इंडिया साइंस वायर
भारत में बढ़ रहा है प्रतिकूल मौसमी घटनाओं का प्रकोप
भारत पिछले कुछ समय से विभिन्न किस्म की मौसमी प्रतिकूलताओं से जूझता आया है। उनमें गर्म हवाएं यानी हीटवेव्स को भी एक खतरनाक मौसमी परिघटना माना जाता है। यूं तो दुनिया के तमाम हिस्सों में इसके अलग-अलग नाम हैं। जैसे अमेरिका में चिनूक, भूमध्यसागरीय देशों में मैस्ट्रो और इराक तथा फारस की खाड़ी में शामल इत्यादि। भारत में गर्म हवाओं को ‘लू’ के नाम से जाना जाता है, जो गर्मियों के मौसम में मुख्य रूप से उत्तर भारतीय इलाकों को अपनी चपेट में लेती है।

ऐल्कलिनिटी टेस्ट कैसे करें

Submitted by HindiWater on Mon, 07/05/2021 - 15:26
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PSI
ऐल्कलिनिटी 600 मिग्रा / ली तक का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है
यदि ऐल्कलिनिटी गणना 200 मिग्रा /ली के अंदर है तो पानी पीने लायक है, यह स्वीकार्य मानक है। जहाँ से सैंम्पल लिया गया है, वहाँ अन्य पानी का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं है तो, ऐल्कलिनिटी  600 मिग्रा / ली तक का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है।  

प्रयास

पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों ने नई तरकीब निकाली

Submitted by HindiWater on Fri, 07/09/2021 - 11:44
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पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों ने नई तरकीब निकाली
जिला देहरादून के जनजातीय क्षेत्र जौनसार में गर्मी का मौसम आते ही  यहां के लोगो को पानी कि किल्लत से जूझना पड़ता है आज हम आपको जनजातीय क्षेत्र जौनसार के कालसी ब्लॉक अंतर्गत एक गांव गांगरो की तस्वीरें दिख रहे है जहां पानी की समस्या से लोगो को रोज़ जूझना पड़ता है जिसे देखते हुए सड़क पर एक हैंड पंप की व्यवस्था की गई क्योंकि गांव में  जो परंपरागत जल स्रोत है वो यहां रह रहे करीब एक हजार लोगों को पानी की पूर्ति नही कर पा रहा है 

नोटिस बोर्ड

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by HindiWater on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
vishva-prithvi-divas-2021:corona-sankat-k-beach-paryavaraniya-chinta
 विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

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