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खासम-खास

नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018 और कुछ सुझाव

Submitted by editorial on Mon, 10/22/2018 - 12:35
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018 (फोटो साभार - विकिपीडिया)द्वितीय एडमिनिस्ट्रेटिव रीफार्म कमीशन (second administrative reform commission) की फरवरी 2008 की सातवीं रिपोर्ट जिसका शीर्षक विवाद निपटारे के लिये क्षमता विकास (Capacity Building for Conflict Resolution-Fiction to Fusion) है, ने नदी बोर्ड अधिनियम 1956 को प्रतिस्थापित कर उसके स्थान पर प्रत्येक अन्तरराज्यीय नदी घाटी के लिये अलग-अलग नदी घाटी संगठन (River Basin Organisations - RBOs) बनाने की सिफारिश की थी।

Content

बर्बाद होता खजाना

Submitted by editorial on Fri, 08/17/2018 - 18:55
Author
डाउन टू अर्थ
Source
डाउन टू अर्थ, अगस्त, 2018
वर्षाजल से मछलीपालन किया जाता हैवर्षाजल से मछलीपालन किया जाता है (फोटो साभार - डाउन टू अर्थ)क्या गोवा के पर्यावरण में गिरावट आई है? जवाब है ‘हाँ’ और इसका सबसे अच्छा उदाहरण है यहाँ की खजाना भूमि की बदहाली, जो इस तटीय इलाके की एक खास व्यवस्था है। राज्य की जलवायु और आर्थिक-पारिस्थितिक जीवन के हिसाब से भी यह व्यवस्था बहुत महत्त्वपूर्ण रही है।

तराजू में एक तरफ नमक तो दूसरी तरफ मेवा

Submitted by editorial on Fri, 08/17/2018 - 18:39
Author
अनिल अश्विनी शर्मा
Source
डाउन टू अर्थ, अगस्त 2018
प्रवीर कृष्णप्रवीर कृष्ण (फोटो साभार - डाउन टू अर्थ)लघु वनोपज (minor forest produce - MFP) पर आदिवासियों का एकाधिकार होने के बावजूद वे उसके उचित दामों से वंचित हैं। बस्तर क्षेत्र में आदिवासी चिरौंजी जैसे महंगे मेवे को नमक के भाव बेचते हैं। तराजू में एक तरफ नमक होता है तो दूसरी और मेवा (ड्राइफूड) लघु वनोपज पर निर्भर आदिवासियों के शोषण की ये एक मिसाल है।

महत्व खोती महत्वाकांक्षी योजना

Submitted by editorial on Fri, 08/17/2018 - 18:10
Source
डाउन टू अर्थ, अगस्त 2018
पीएमएफबीवाईपीएमएफबीवाईदेश भर के किसान केन्द्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) को लेकर बहुत कम उत्साहित नजर आ रहे हैं। योजना के चार क्रॉप सीजन बीत चुके हैं। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के एक किसान लीलाधर सिंह 2016 में इस योजना के लिये नामांकन कराने वाले किसानों के पहले बैच में से एक हैं। हालांकि, उनका नामांकन अपने आप ही हुआ था।

प्रयास

अनूठा पर्यावरण प्रेमी

Submitted by editorial on Mon, 10/29/2018 - 20:11
Author
मनीष वैद्य
जंगल का रूप लेते हाथीपावा के पौधेजंगल का रूप लेते हाथीपावा के पौधेदावा है कि कभी आपने ऐसा पुलिस अफसर नहीं देखा होगा, आज तक आपने जितने भी पुलिस अफसर देखे होंगे, अपराधों पर सख्ती से अंकुश लगाने या नरम-गरम छवि की वजह से पहचाने जाते रहे हैं। आमतौर पर खाकी वर्दी और रौब झाड़ना ही पुलिस की पहचान होती है लेकिन एक आईपीएस अफसर ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया।

नोटिस बोर्ड

गंगा भक्तों के अनशन के 16 दिन हुए पूरे

Submitted by editorial on Thu, 11/08/2018 - 11:05
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथस्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता और निर्मलता की माँग को लेकर मातृसदन के दो संतों ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद और स्वामी पुण्यानंद का अनशन वृहस्पतिवार को भी जारी रहा। ये दोनों 24 अक्टूबर से अनशन पर हैं।

जानिये आँकड़ों के विश्लेषण की बारीकियाँ

Submitted by editorial on Sun, 10/28/2018 - 16:33
Author
सीएसई
Source
सीएसई
जलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन के दौर में विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषण अति आवश्यक हो गया है। कहा जाता है जिसे मापा जाता है उसका प्रबन्धन किया जाता है। परन्तु यह तभी सम्भव है जब मापी गई वस्तु से सम्बन्धित आँकड़े का सही विश्लेषण हो। आज हर क्षेत्र में आँकड़ों की बाढ़ है लेकिन आप इनका विश्लेषण तभी कर सकते हैं जब इसके लिये आपने समुचित प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।

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नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018 और कुछ सुझाव

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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018नदी घाटी प्रबन्ध अधिनियम (ड्राफ्ट) 2018 (फोटो साभार - विकिपीडिया)द्वितीय एडमिनिस्ट्रेटिव रीफार्म कमीशन (second administrative reform commission) की फरवरी 2008 की सातवीं रिपोर्ट जिसका शीर्षक विवाद निपटारे के लिये क्षमता विकास (Capacity Building for Conflict Resolution-Fiction to Fusion) है, ने नदी बोर्ड अधिनियम 1956 को प्रतिस्थापित कर उसके स्थान पर प्रत्येक अन्तरराज्यीय नदी घाटी के लिये अलग-अलग नदी घाटी संगठन (River Basin Organisations - RBOs) बनाने की सिफारिश की थी।

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बर्बाद होता खजाना

Submitted by editorial on Fri, 08/17/2018 - 18:55
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डाउन टू अर्थ, अगस्त, 2018
वर्षाजल से मछलीपालन किया जाता हैवर्षाजल से मछलीपालन किया जाता है (फोटो साभार - डाउन टू अर्थ)क्या गोवा के पर्यावरण में गिरावट आई है? जवाब है ‘हाँ’ और इसका सबसे अच्छा उदाहरण है यहाँ की खजाना भूमि की बदहाली, जो इस तटीय इलाके की एक खास व्यवस्था है। राज्य की जलवायु और आर्थिक-पारिस्थितिक जीवन के हिसाब से भी यह व्यवस्था बहुत महत्त्वपूर्ण रही है।

तराजू में एक तरफ नमक तो दूसरी तरफ मेवा

Submitted by editorial on Fri, 08/17/2018 - 18:39
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अनिल अश्विनी शर्मा
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डाउन टू अर्थ, अगस्त 2018
प्रवीर कृष्णप्रवीर कृष्ण (फोटो साभार - डाउन टू अर्थ)लघु वनोपज (minor forest produce - MFP) पर आदिवासियों का एकाधिकार होने के बावजूद वे उसके उचित दामों से वंचित हैं। बस्तर क्षेत्र में आदिवासी चिरौंजी जैसे महंगे मेवे को नमक के भाव बेचते हैं। तराजू में एक तरफ नमक होता है तो दूसरी और मेवा (ड्राइफूड) लघु वनोपज पर निर्भर आदिवासियों के शोषण की ये एक मिसाल है।

महत्व खोती महत्वाकांक्षी योजना

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डाउन टू अर्थ, अगस्त 2018
पीएमएफबीवाईपीएमएफबीवाईदेश भर के किसान केन्द्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) को लेकर बहुत कम उत्साहित नजर आ रहे हैं। योजना के चार क्रॉप सीजन बीत चुके हैं। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के एक किसान लीलाधर सिंह 2016 में इस योजना के लिये नामांकन कराने वाले किसानों के पहले बैच में से एक हैं। हालांकि, उनका नामांकन अपने आप ही हुआ था।

प्रयास

अनूठा पर्यावरण प्रेमी

Submitted by editorial on Mon, 10/29/2018 - 20:11
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मनीष वैद्य
जंगल का रूप लेते हाथीपावा के पौधेजंगल का रूप लेते हाथीपावा के पौधेदावा है कि कभी आपने ऐसा पुलिस अफसर नहीं देखा होगा, आज तक आपने जितने भी पुलिस अफसर देखे होंगे, अपराधों पर सख्ती से अंकुश लगाने या नरम-गरम छवि की वजह से पहचाने जाते रहे हैं। आमतौर पर खाकी वर्दी और रौब झाड़ना ही पुलिस की पहचान होती है लेकिन एक आईपीएस अफसर ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया।

नोटिस बोर्ड

गंगा भक्तों के अनशन के 16 दिन हुए पूरे

Submitted by editorial on Thu, 11/08/2018 - 11:05
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथस्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता और निर्मलता की माँग को लेकर मातृसदन के दो संतों ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद और स्वामी पुण्यानंद का अनशन वृहस्पतिवार को भी जारी रहा। ये दोनों 24 अक्टूबर से अनशन पर हैं।

जानिये आँकड़ों के विश्लेषण की बारीकियाँ

Submitted by editorial on Sun, 10/28/2018 - 16:33
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सीएसई
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सीएसई
जलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन के दौर में विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषण अति आवश्यक हो गया है। कहा जाता है जिसे मापा जाता है उसका प्रबन्धन किया जाता है। परन्तु यह तभी सम्भव है जब मापी गई वस्तु से सम्बन्धित आँकड़े का सही विश्लेषण हो। आज हर क्षेत्र में आँकड़ों की बाढ़ है लेकिन आप इनका विश्लेषण तभी कर सकते हैं जब इसके लिये आपने समुचित प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।

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