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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

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Submitted by HindiWater on Sat, 01/18/2020 - 12:56
Source:
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की 
सोंदूर जलाशय में डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग तकनीक का उपयोग करके अवसादन का आंकलन
मानव समाज के निरंतर विकास के लिए बांध या जलाशय बहुत उपयोगी साबित हुए हैं। जलाशय की उपयोगिता जल को संग्रहित करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करती है। अवसादन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें जलग्रहण क्षेत्र की मृदा क्षय होकर बहते जल के साथ जाकर बांध के डूब क्षेत्र में जम जाती है।
Submitted by HindiWater on Sat, 01/18/2020 - 12:48
Source:
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की
हाइड्रो-डाइनैमिक मॉडल तथा जीआईएस द्वारा फ्लैश फ्लड का आंकलन एवं चित्रण
हिमालय लाखों जीवित जीवों का जीवन दाता है और नदियाँ उसकी रीढ़ हैं। हिमालय में फ्लैश फ्लड से लगातार आपदा होती है। फ्लैश फ्लड मौसम संबंधी गड़बड़ी का परिणाम है।
Submitted by HindiWater on Sat, 01/18/2020 - 11:21
Source:
योजना, जनवरी, 2020
पर्यावरण बचाने के लिए जन संकल्प जरूरी
सुखद है कि मौजूदा केन्द्र सरकार ने अपनी घोषणाओं में कार्बन संतुलन के प्रति संकल्प जताया है। जरूरी है कि हम भी अपनी सामुदायिक, संस्थागत व व्यक्तिगत भूमिका का आकलन करें और उन्हें अपनी आदत बनाएं।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 11:33
लेविस पुग
लेविस पुग का जन्म पांस दिसंबर 1969 को इंग्लैंड के प्लाईमाउथ में हुआ था। बचपन से ही पर्यावरण के प्रति काफी लगाव होने के साथ ही तैराकी में काफी रूचि थी। अपनी इस रूचि को जीवन का अहम हिस्सा बनाया और वर्ष 1986 में पहली बार 17 वर्ष की आयु में तैराकी की। इसी के एक महीने बाद पुग ने राॅबेल आइलैंड से केपटाउन तक तैराकी की थी।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
Source:
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l
Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
Source:
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।
Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
Source:
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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खासम-खास

नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

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सोंदूर जलाशय में डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग तकनीक का उपयोग करके अवसादन का आंकलन

Submitted by HindiWater on Sat, 01/18/2020 - 12:56
Source
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की 
सोंदूर जलाशय में डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग तकनीक का उपयोग करके अवसादन का आंकलन
मानव समाज के निरंतर विकास के लिए बांध या जलाशय बहुत उपयोगी साबित हुए हैं। जलाशय की उपयोगिता जल को संग्रहित करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करती है। अवसादन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें जलग्रहण क्षेत्र की मृदा क्षय होकर बहते जल के साथ जाकर बांध के डूब क्षेत्र में जम जाती है।

हाइड्रो-डाइनैमिक मॉडल तथा जीआईएस द्वारा फ्लैश फ्लड का आंकलन एवं चित्रण

Submitted by HindiWater on Sat, 01/18/2020 - 12:48
Source
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की
हाइड्रो-डाइनैमिक मॉडल तथा जीआईएस द्वारा फ्लैश फ्लड का आंकलन एवं चित्रण
हिमालय लाखों जीवित जीवों का जीवन दाता है और नदियाँ उसकी रीढ़ हैं। हिमालय में फ्लैश फ्लड से लगातार आपदा होती है। फ्लैश फ्लड मौसम संबंधी गड़बड़ी का परिणाम है।

पर्यावरण बचाने के लिए जन संकल्प जरूरी

Submitted by HindiWater on Sat, 01/18/2020 - 11:21
Source
योजना, जनवरी, 2020
पर्यावरण बचाने के लिए जन संकल्प जरूरी
सुखद है कि मौजूदा केन्द्र सरकार ने अपनी घोषणाओं में कार्बन संतुलन के प्रति संकल्प जताया है। जरूरी है कि हम भी अपनी सामुदायिक, संस्थागत व व्यक्तिगत भूमिका का आकलन करें और उन्हें अपनी आदत बनाएं।

प्रयास

लेविस पुग ने अंटार्कटिका की पिघलती बर्फ के बीच तैरकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 11:33
लेविस पुग
लेविस पुग का जन्म पांस दिसंबर 1969 को इंग्लैंड के प्लाईमाउथ में हुआ था। बचपन से ही पर्यावरण के प्रति काफी लगाव होने के साथ ही तैराकी में काफी रूचि थी। अपनी इस रूचि को जीवन का अहम हिस्सा बनाया और वर्ष 1986 में पहली बार 17 वर्ष की आयु में तैराकी की। इसी के एक महीने बाद पुग ने राॅबेल आइलैंड से केपटाउन तक तैराकी की थी।

नोटिस बोर्ड

मीडिया महोत्सव-2020

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन

Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।

पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला

Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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