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खासम-खास

नदी मैनुअल - ताकि नदियाँ बहती रहें

Submitted by editorial on Sat, 12/15/2018 - 21:31
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नर्मदा नदीनर्मदा नदीपिछले पचास-साठ सालों से भारत की सभी नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी नजर आ रही है। हिमालयी नदियों में यह कमी अपेक्षाकृत थोड़ी कम है किन्तु भारतीय प्रायद्वीप के पहाड़ों, तालाबों, कुण्डों, जंगलों या झरनों से निकलने वाली अनेक छोटी नदियाँ मौसमी बनकर रह गईं हैं। भारतीय प्रायद्वीप की बड़ी नदियों यथा कावेरी, कृष्णा, ताप्ती, महानदी, नर्मदा और गोदावरी में भी मानसून के बाद का प्रवाह तेजी से कम हो रहा है।

Content

नमामि गंगे के शोर के बीच नाले में तब्दील हो रही गंगा

Submitted by editorial on Sun, 02/03/2019 - 09:58
Author
उमेश कुमार राय
कानपुर में गंगा नदी में गिरता नाले का पानीकानपुर में गंगा नदी में गिरता नाले का पानी (फोटो साभार - द वायर)गंगा केवल नदी नहीं है। यह भारत की संस्कृति का अभिन्न अंग है। इसके बिना इस देश की कल्पना नहीं की जा सकती है। नदियों को धरती की धमनियाँ कहा जाता है। जैसे शरीर की धमनियों से बहता रक्त जीवन के लिये जरूरी है, उसी तरह नदियों का बहना भी दुनिया के वजूद के लिये अहम है। धमनी अगर सूख जाये, तो वो अंग काम नहीं करता है। उसी तरह अगर नदी सूख जाये, तो उसके आसपास के इलाकों की सुख-समृद्धि थम जाती है।

ताप विद्युत संयंत्र से भारत में सबसे ज्यादा CO2 उत्सर्जन

Submitted by editorial on Wed, 12/19/2018 - 15:33
Author
राकेश रंजन
कॉप 24कॉप 24शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण भारत में ऊर्जा की माँग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। और इसे पूरा करने का सबसे अधिक दबाव कोयला चलित ताप विद्युत संयंत्रों पर है। यही वजह है कि ये ताप विद्युत संयंत्र देश में सबसे बड़े कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जक बन गए हैं। इस बात की चर्चा संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) की ईस्ट एंग्लिया (East Anglia) यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार तैयार किये गए ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट (Global Carbon Project) नामक दस्तावेज में की गई है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन का हासिल

Submitted by editorial on Wed, 12/19/2018 - 15:05
Author
उमेश कुमार राय
कॉप 24कॉप 24संयुक्त राष्ट्र का जलवायु सम्मेलन 14 दिसम्बर को पोलैंड के केटोवाइस में सम्पन्न होना था। यह सम्मेलन दो दिसम्बर से शुरू हुआ था। लेकिन, कुछ मुद्दों पर आम सहमति नहीं होने के कारण 14 दिसम्बर की देर रात तक सम्मेलन को जारी रखना पड़ा। बताया जाता है कि सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों को देर रात तक सम्मलेन में शामिल होना पड़ा। कहा जा रहा है कि मौके पर उपस्थित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच पेरिस समझौते पर कुछ हद तक सहमति बनी, लेकिन बड़े मुद्दों को लेकर असहमति थी।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

आर्द्रभूमियों का विनाश है खतरनाक

Submitted by editorial on Fri, 02/01/2019 - 11:30
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया
वेटलैंड्स इंटरनेशनल लोगोवेटलैंड्स इंटरनेशनल लोगो भारत में आर्द्रभूमियों की उपलब्धता को नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता। ये पारिस्थितिकीय दृष्टि से अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण और यहाँ की भौगोलिक संरचना के अभिन्न अंग हैं। वर्ष 2011 के नेशनल वेटलैंड एटलस के अनुसार भारत का 4.63 प्रतिशत हिस्सा आर्द्रभूमि के अन्तर्गत आता है, वहीं देश में उपलब्ध कुल शुद्ध जल का 5 प्रतिशत इन्हीं क्षेत्रों में संरक्षित है।

अविरल-गंगा के लिये दिल्ली में क्रमिक अनशन शुरू

Submitted by editorial on Tue, 01/29/2019 - 17:10
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद (फोटो साभार: अमर उजाला)स्वामी आत्मबोधानंद (फोटो साभार: अमर उजाला) 28 जनवरी 2019, नई दिल्ली। अविरल गंगा के लिये आत्मबोधानंद जी के उपवास के 97 दिन होने पर पर जन्तर-मन्तर पर भी क्रमिक उपवास शुरू किया गया। अविरल-गंगा के लिये सानंद के 111 दिन के अखंड उपवास के बाद हुई मृत्यु के बाद 24 अक्टूबर, 2018 से 26 वर्षीय युवा सन्त ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी उपवास पर हैं।

अविरल गंगा के लिये जन्तर-मन्तर, दिल्ली में क्रमिक अनशन 28 जनवरी से

Submitted by editorial on Fri, 01/25/2019 - 13:04
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
Source
इंडिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार: दैनिक जागरण)स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार: दैनिक जागरण) वर्ष 1998 में हरिद्वार के जगजीतपुर गाँव में गंगा किनारे स्थापित ‘मातृसदन आश्रम’ गंगा-अविरलता के लिये बलिदानी-भूमि बन गई है। मातृसदन के परमाध्यक्ष शिवानंद सरस्वती और उनके संतों का गंगा प्रेम अदभुत है, गंगा के लिये अब तक तीन सन्तों का बलिदान हो चुका है।

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नदी मैनुअल - ताकि नदियाँ बहती रहें

Submitted by editorial on Sat, 12/15/2018 - 21:31
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नर्मदा नदीनर्मदा नदीपिछले पचास-साठ सालों से भारत की सभी नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी नजर आ रही है। हिमालयी नदियों में यह कमी अपेक्षाकृत थोड़ी कम है किन्तु भारतीय प्रायद्वीप के पहाड़ों, तालाबों, कुण्डों, जंगलों या झरनों से निकलने वाली अनेक छोटी नदियाँ मौसमी बनकर रह गईं हैं। भारतीय प्रायद्वीप की बड़ी नदियों यथा कावेरी, कृष्णा, ताप्ती, महानदी, नर्मदा और गोदावरी में भी मानसून के बाद का प्रवाह तेजी से कम हो रहा है।

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नमामि गंगे के शोर के बीच नाले में तब्दील हो रही गंगा

Submitted by editorial on Sun, 02/03/2019 - 09:58
Author
उमेश कुमार राय
कानपुर में गंगा नदी में गिरता नाले का पानीकानपुर में गंगा नदी में गिरता नाले का पानी (फोटो साभार - द वायर)गंगा केवल नदी नहीं है। यह भारत की संस्कृति का अभिन्न अंग है। इसके बिना इस देश की कल्पना नहीं की जा सकती है। नदियों को धरती की धमनियाँ कहा जाता है। जैसे शरीर की धमनियों से बहता रक्त जीवन के लिये जरूरी है, उसी तरह नदियों का बहना भी दुनिया के वजूद के लिये अहम है। धमनी अगर सूख जाये, तो वो अंग काम नहीं करता है। उसी तरह अगर नदी सूख जाये, तो उसके आसपास के इलाकों की सुख-समृद्धि थम जाती है।

ताप विद्युत संयंत्र से भारत में सबसे ज्यादा CO2 उत्सर्जन

Submitted by editorial on Wed, 12/19/2018 - 15:33
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राकेश रंजन
कॉप 24कॉप 24शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण भारत में ऊर्जा की माँग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। और इसे पूरा करने का सबसे अधिक दबाव कोयला चलित ताप विद्युत संयंत्रों पर है। यही वजह है कि ये ताप विद्युत संयंत्र देश में सबसे बड़े कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जक बन गए हैं। इस बात की चर्चा संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) की ईस्ट एंग्लिया (East Anglia) यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार तैयार किये गए ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट (Global Carbon Project) नामक दस्तावेज में की गई है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन का हासिल

Submitted by editorial on Wed, 12/19/2018 - 15:05
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उमेश कुमार राय
कॉप 24कॉप 24संयुक्त राष्ट्र का जलवायु सम्मेलन 14 दिसम्बर को पोलैंड के केटोवाइस में सम्पन्न होना था। यह सम्मेलन दो दिसम्बर से शुरू हुआ था। लेकिन, कुछ मुद्दों पर आम सहमति नहीं होने के कारण 14 दिसम्बर की देर रात तक सम्मेलन को जारी रखना पड़ा। बताया जाता है कि सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों को देर रात तक सम्मलेन में शामिल होना पड़ा। कहा जा रहा है कि मौके पर उपस्थित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच पेरिस समझौते पर कुछ हद तक सहमति बनी, लेकिन बड़े मुद्दों को लेकर असहमति थी।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

आर्द्रभूमियों का विनाश है खतरनाक

Submitted by editorial on Fri, 02/01/2019 - 11:30
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया
वेटलैंड्स इंटरनेशनल लोगोवेटलैंड्स इंटरनेशनल लोगो भारत में आर्द्रभूमियों की उपलब्धता को नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता। ये पारिस्थितिकीय दृष्टि से अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण और यहाँ की भौगोलिक संरचना के अभिन्न अंग हैं। वर्ष 2011 के नेशनल वेटलैंड एटलस के अनुसार भारत का 4.63 प्रतिशत हिस्सा आर्द्रभूमि के अन्तर्गत आता है, वहीं देश में उपलब्ध कुल शुद्ध जल का 5 प्रतिशत इन्हीं क्षेत्रों में संरक्षित है।

अविरल-गंगा के लिये दिल्ली में क्रमिक अनशन शुरू

Submitted by editorial on Tue, 01/29/2019 - 17:10
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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स्वामी आत्मबोधानंद (फोटो साभार: अमर उजाला)स्वामी आत्मबोधानंद (फोटो साभार: अमर उजाला) 28 जनवरी 2019, नई दिल्ली। अविरल गंगा के लिये आत्मबोधानंद जी के उपवास के 97 दिन होने पर पर जन्तर-मन्तर पर भी क्रमिक उपवास शुरू किया गया। अविरल-गंगा के लिये सानंद के 111 दिन के अखंड उपवास के बाद हुई मृत्यु के बाद 24 अक्टूबर, 2018 से 26 वर्षीय युवा सन्त ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी उपवास पर हैं।

अविरल गंगा के लिये जन्तर-मन्तर, दिल्ली में क्रमिक अनशन 28 जनवरी से

Submitted by editorial on Fri, 01/25/2019 - 13:04
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इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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इंडिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार: दैनिक जागरण)स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार: दैनिक जागरण) वर्ष 1998 में हरिद्वार के जगजीतपुर गाँव में गंगा किनारे स्थापित ‘मातृसदन आश्रम’ गंगा-अविरलता के लिये बलिदानी-भूमि बन गई है। मातृसदन के परमाध्यक्ष शिवानंद सरस्वती और उनके संतों का गंगा प्रेम अदभुत है, गंगा के लिये अब तक तीन सन्तों का बलिदान हो चुका है।

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