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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Tue, 10/04/2022 - 16:13
कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal
परम्परागत तालाबों पर अनुपम मिश्र की किताब ‘आज भी खरे हैं तालाब’, पहली बार, वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब में अनुपम ने समाज से प्राप्त जानकारी के आधार पर भारत के विभिन्न भागों में बने तालाबों के बारे में व्यापक विवरण प्रस्तुत किया है। अर्थात आज भी खरे हैं तालाब में दर्ज विवरण परम्परागत तालाबों पर समाज की राय है। उनका दृष्टिबोध है। उन विवरणों में समाज की भावनायें, आस्था, मान्यतायें, रीति-रिवाज तथा परम्परागत तालाबों के निर्माण से जुड़े कर्मकाण्ड दर्ज हैं। प्रस्तुति और शैली अनुपम की है।

Content

Submitted by admin on Tue, 07/14/2009 - 13:41
Source:
द हंगर प्रोजेक्ट पंचायतीराज में महिलाओं की भूमिका पर सर्व श्रेष्ठ लेखन के लिए 2009 सरोजिनी नायडू पुरस्कार की घोषणा करता है। आपसे निवेदन है कि आपके क्षेत्र के पत्रकार बन्धुओं एवं अन्य मीडिया साथियों को उपरोक्त दी हुई जानकारी के बारे में अवगत करायें।

आज पंचायत की महिला जनप्रतिनिधियों द्वारा शासन के कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ ही पानी, शराब के व्यसन, शिक्षा, स्वास्थ्य, घेरलू हिंसा, जेण्डर असमानता व अन्याय जैसे उन मुद्दों के प्रति राज्य को संवेदनशील बना रही है। `खामोश क्रांति` को एक आवाज़ की जरूरत है( इन महिलाओं के संघर्षों तथा सफलताओं को घरों, नागरिक समाज समूहों, शहरी अभिजात्य वर्ग, पेशेवरों, शिक्षाविदों तथा नीति निर्माताओं के दिलो-दिमाग तक पहुंचाने के लिए एक व्यवस्थित प्रयास जरूरी है।

Submitted by admin on Wed, 07/08/2009 - 10:39
Source:
विमल श्रीवास्तव

आकाश में छाए काले बादलों को देखकर किसका दिल झूमने नहीं लगता, चाहे वह जंगलों में रहने वाले मयूर हों, कवि हों, किसान हों या गर्मी से तपते हुए नगरवासी ।

फिर ये बादल भी कैसे-कैसे हैं; कोई तो काजल जैसे काले, कोई धुएं जैसे भूरे, कोई रूई के ढेर जैसे सफेद, तो कोई झीने दुपट्टे जैसे सफेद । इन्हीं बादलों पर अनगिनत कविताएं लिखी जा चुकी हैं, सैकड़ों फिल्मी गीत बनाए गए हैं, महाकवि कालीदास ने तो मेघदूतम् जैसा अमर महाकाव्य भी लिख डाला है । लेकिन बादलों की सुन्दरता अपनी चरम सीमा पर तब पहुंचती है जब शाम को ढलते सूरज या भोर के उगते सूरज की किरणें आकाश के साथ-साथ बादलों को भी नारंगी, लाल, पीला जामा पहना देती हैं ।

Submitted by admin on Tue, 07/07/2009 - 09:29
Source:
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली, 6 जुलाई 09। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को लोकसभा में वर्ष 2009-10 का बजट पेश करते हुए राष्ट्रीय नदी और झील संरक्षण योजना के लिए 562 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया है।

सरकार पहले ही राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण का गठन कर चुकी है। वर्ष 2008-09 में राष्ट्रीय नदी और झील संरक्षण के लिए 335 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

मुखर्जी ने बताया कि पिछले वर्ष जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्ययोजना प्रारंभ हुई थी। उसके तहत आठ राष्ट्रीय मिशनों की शुरुआत की जा रही है, जिनमें बहुआयामी, दीर्घावधिक तथा एकीकृत दृष्टिकोण होगा।

प्रयास

Submitted by Editorial Team on Mon, 11/14/2022 - 13:55
सीतापुर का नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र, फोटो साभार - उप्र सरकार
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में आदि गंगा गोमती के तट पर स्थित वह पुरातन तीर्थ है जो हमें भारतीय संस्कृति की विरासत से जोड़ता है। यहीं पर आदि काल में मनु-शतरूपा ने तपस्या की थी जिसके वरदान स्वरूप कालान्तर में अयोध्या के राजा दशरथ के घर में भगवान राम का अवतरण हुआ। यहीं पर महर्षि वेदव्यास ने पुराणों की रचना की। यहीं पर सनकादि 88 हजार ऋषियों ने एकत्रित होकर भारतीय समाज की आचर संहिता का चिन्तन-मन्थन किया। यहीं पर देवासुर संग्राम के समय देवत्व की रक्षा के लिये महर्षि दधीचि ने अस्थिदान का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। यहाँ पर जब महर्षि दधीचि ने अस्थिदान का संकल्प लिया तो सम्पूर्ण भारत के तीर्थ नैमिषारण्य आए जो आज भी यहाँ की चौरासी कोसी परिक्रमा पथ पर स्थित हैं। इस क्षेत्र में चक्र तीर्थ सहित अनेक भूगर्भ जल स्रोत हैं जो गोमती को निरन्तर अमृत जल प्रदान करते रहते हैं। सघन अरण्य यहाँ की विशेषता रही है, जहाँ ऋषि गण निरन्तर साधना के साथ सामाजिक ज्ञान के प्रकाश के लिए गुरुकुल का संचालन करने थे।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Tue, 09/06/2022 - 14:16
Source:
चरखा फीचर
'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022
कार्य अनुभव के विवरण के साथ संक्षिप्त पाठ्यक्रम जीवन लगभग 800-1000 शब्दों का एक प्रस्ताव, जिसमें उस विशेष विषयगत क्षेत्र को रेखांकित किया गया हो, जिसमें आवेदक काम करना चाहता है. प्रस्ताव में अध्ययन की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, कार्यप्रणाली, चयनित विषय की प्रासंगिकता के साथ-साथ इन लेखों से अपेक्षित प्रभाव के बारे में विवरण शामिल होनी चाहिए. साथ ही, इस बात का उल्लेख होनी चाहिए कि देश के विकास से जुड़ी बहस में इसके योगदान किस प्रकार हो सकता है? कृपया आलेख प्रस्तुत करने वाली भाषा भी निर्दिष्ट करें। लेख अंग्रेजी, हिंदी या उर्दू में ही स्वीकार किए जाएंगे
Submitted by Shivendra on Tue, 08/23/2022 - 17:19
Source:
यूसर्क
जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आज दिनांक 23.08.22 को तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूसर्क की निदेशक प्रो.(डॉ.) अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा जल के महत्व को देखते हुए विगत वर्ष 2021 को संयुक्त राष्ट्र की विश्व पर्यावरण दिवस की थीम "ईको सिस्टम रेस्टोरेशन" के अंर्तगत आयोजित कार्यक्रम के निष्कर्षों के क्रम में जल विज्ञान विषयक लेक्चर सीरीज एवं जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रारंभ किया गया
Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
Source:
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

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खासम-खास

तालाब ज्ञान-संस्कृति : नींव से शिखर तक

Submitted by Editorial Team on Tue, 10/04/2022 - 16:13
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
talab-gyan-sanskriti-:-ninv-se-shikhar-tak
कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal
परम्परागत तालाबों पर अनुपम मिश्र की किताब ‘आज भी खरे हैं तालाब’, पहली बार, वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब में अनुपम ने समाज से प्राप्त जानकारी के आधार पर भारत के विभिन्न भागों में बने तालाबों के बारे में व्यापक विवरण प्रस्तुत किया है। अर्थात आज भी खरे हैं तालाब में दर्ज विवरण परम्परागत तालाबों पर समाज की राय है। उनका दृष्टिबोध है। उन विवरणों में समाज की भावनायें, आस्था, मान्यतायें, रीति-रिवाज तथा परम्परागत तालाबों के निर्माण से जुड़े कर्मकाण्ड दर्ज हैं। प्रस्तुति और शैली अनुपम की है।

Content

सरोजिनी नायडू पुरस्कार के लिए आवेदन आमंत्रित

Submitted by admin on Tue, 07/14/2009 - 13:41
द हंगर प्रोजेक्ट पंचायतीराज में महिलाओं की भूमिका पर सर्व श्रेष्ठ लेखन के लिए 2009 सरोजिनी नायडू पुरस्कार की घोषणा करता है। आपसे निवेदन है कि आपके क्षेत्र के पत्रकार बन्धुओं एवं अन्य मीडिया साथियों को उपरोक्त दी हुई जानकारी के बारे में अवगत करायें।

आज पंचायत की महिला जनप्रतिनिधियों द्वारा शासन के कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ ही पानी, शराब के व्यसन, शिक्षा, स्वास्थ्य, घेरलू हिंसा, जेण्डर असमानता व अन्याय जैसे उन मुद्दों के प्रति राज्य को संवेदनशील बना रही है। `खामोश क्रांति` को एक आवाज़ की जरूरत है( इन महिलाओं के संघर्षों तथा सफलताओं को घरों, नागरिक समाज समूहों, शहरी अभिजात्य वर्ग, पेशेवरों, शिक्षाविदों तथा नीति निर्माताओं के दिलो-दिमाग तक पहुंचाने के लिए एक व्यवस्थित प्रयास जरूरी है।

'घनन-घनन घन घिर आए बदरा'

Submitted by admin on Wed, 07/08/2009 - 10:39
Source
विमल श्रीवास्तव

आकाश में छाए काले बादलों को देखकर किसका दिल झूमने नहीं लगता, चाहे वह जंगलों में रहने वाले मयूर हों, कवि हों, किसान हों या गर्मी से तपते हुए नगरवासी ।

फिर ये बादल भी कैसे-कैसे हैं; कोई तो काजल जैसे काले, कोई धुएं जैसे भूरे, कोई रूई के ढेर जैसे सफेद, तो कोई झीने दुपट्टे जैसे सफेद । इन्हीं बादलों पर अनगिनत कविताएं लिखी जा चुकी हैं, सैकड़ों फिल्मी गीत बनाए गए हैं, महाकवि कालीदास ने तो मेघदूतम् जैसा अमर महाकाव्य भी लिख डाला है । लेकिन बादलों की सुन्दरता अपनी चरम सीमा पर तब पहुंचती है जब शाम को ढलते सूरज या भोर के उगते सूरज की किरणें आकाश के साथ-साथ बादलों को भी नारंगी, लाल, पीला जामा पहना देती हैं ।

बजट में झील, नदियां

Submitted by admin on Tue, 07/07/2009 - 09:29
Source
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली, 6 जुलाई 09। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को लोकसभा में वर्ष 2009-10 का बजट पेश करते हुए राष्ट्रीय नदी और झील संरक्षण योजना के लिए 562 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया है।

सरकार पहले ही राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण का गठन कर चुकी है। वर्ष 2008-09 में राष्ट्रीय नदी और झील संरक्षण के लिए 335 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

मुखर्जी ने बताया कि पिछले वर्ष जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्ययोजना प्रारंभ हुई थी। उसके तहत आठ राष्ट्रीय मिशनों की शुरुआत की जा रही है, जिनमें बहुआयामी, दीर्घावधिक तथा एकीकृत दृष्टिकोण होगा।

प्रयास

सीतापुर का नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र: आस्था, आध्यात्मिकता एवं जल संपदा का संगम

Submitted by Editorial Team on Mon, 11/14/2022 - 13:55
sitapur-ka-naimisharany-tirth-kshetra:-aastha,-aadhyatmikata-evam-jal-sampada-ka-sangam
Source
नवम्बर-2022, लोकसम्मान पत्रिका
सीतापुर का नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र, फोटो साभार - उप्र सरकार
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में आदि गंगा गोमती के तट पर स्थित वह पुरातन तीर्थ है जो हमें भारतीय संस्कृति की विरासत से जोड़ता है। यहीं पर आदि काल में मनु-शतरूपा ने तपस्या की थी जिसके वरदान स्वरूप कालान्तर में अयोध्या के राजा दशरथ के घर में भगवान राम का अवतरण हुआ। यहीं पर महर्षि वेदव्यास ने पुराणों की रचना की। यहीं पर सनकादि 88 हजार ऋषियों ने एकत्रित होकर भारतीय समाज की आचर संहिता का चिन्तन-मन्थन किया। यहीं पर देवासुर संग्राम के समय देवत्व की रक्षा के लिये महर्षि दधीचि ने अस्थिदान का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। यहाँ पर जब महर्षि दधीचि ने अस्थिदान का संकल्प लिया तो सम्पूर्ण भारत के तीर्थ नैमिषारण्य आए जो आज भी यहाँ की चौरासी कोसी परिक्रमा पथ पर स्थित हैं। इस क्षेत्र में चक्र तीर्थ सहित अनेक भूगर्भ जल स्रोत हैं जो गोमती को निरन्तर अमृत जल प्रदान करते रहते हैं। सघन अरण्य यहाँ की विशेषता रही है, जहाँ ऋषि गण निरन्तर साधना के साथ सामाजिक ज्ञान के प्रकाश के लिए गुरुकुल का संचालन करने थे।

नोटिस बोर्ड

'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022

Submitted by Shivendra on Tue, 09/06/2022 - 14:16
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Source
चरखा फीचर
'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022
कार्य अनुभव के विवरण के साथ संक्षिप्त पाठ्यक्रम जीवन लगभग 800-1000 शब्दों का एक प्रस्ताव, जिसमें उस विशेष विषयगत क्षेत्र को रेखांकित किया गया हो, जिसमें आवेदक काम करना चाहता है. प्रस्ताव में अध्ययन की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, कार्यप्रणाली, चयनित विषय की प्रासंगिकता के साथ-साथ इन लेखों से अपेक्षित प्रभाव के बारे में विवरण शामिल होनी चाहिए. साथ ही, इस बात का उल्लेख होनी चाहिए कि देश के विकास से जुड़ी बहस में इसके योगदान किस प्रकार हो सकता है? कृपया आलेख प्रस्तुत करने वाली भाषा भी निर्दिष्ट करें। लेख अंग्रेजी, हिंदी या उर्दू में ही स्वीकार किए जाएंगे

​यूसर्क द्वारा तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ

Submitted by Shivendra on Tue, 08/23/2022 - 17:19
USERC-dvara-tin-divasiy-jal-vigyan-prashikshan-prarambh
Source
यूसर्क
जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आज दिनांक 23.08.22 को तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूसर्क की निदेशक प्रो.(डॉ.) अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा जल के महत्व को देखते हुए विगत वर्ष 2021 को संयुक्त राष्ट्र की विश्व पर्यावरण दिवस की थीम "ईको सिस्टम रेस्टोरेशन" के अंर्तगत आयोजित कार्यक्रम के निष्कर्षों के क्रम में जल विज्ञान विषयक लेक्चर सीरीज एवं जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रारंभ किया गया

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
28-july-ko-ayojit-hone-vale-jal-shiksha-vyakhyan-shrinkhala-par-bhag-lene-ke-liye-panjikaran-karayen
Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

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