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Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Tue, 11/02/2021 - 10:56
Source:
सूखाग्रस्त गाँव बन गया देश का देश का आदर्श मॉडल
बुंदेलखंड  के बांदा जिले के रहने वाले उमा शंकर पांडे ने सूखे और बदहाल अपने गांव जखनी में पानी स्थिति सुधारने का काम 15 साल पहले शुरू किया था। ग्रामीणों को जलसंरक्षण के बारे में समझाकर उन्होंने बिना किसी सरकारी मदद के किसानों और श्रमिकों के साथ मिलकर " मेड़बंदी" का काम शुरू कियाअपने पुरखों की जलसंरक्षण की तकनीक को अपनाकर उन्होंने अपने गांव को एक आदर्श गांव बना दिया है जखनी गांव को आदर्श माॅडल बनाकर  देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है
Submitted by Shivendra on Fri, 10/29/2021 - 15:53
Source:
चेतना मंच
जनसँख्या बढ़ रही है लेकिन पानी नही 
नासा के वैज्ञानिक तमाम आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान लगा चुके हैं, यदि समय रहते पानी का संरक्षण नही किया गया तो वो दिन दूर नही जब पृथ्वी बंजर हो जाएगी। क्या वाकई  में ऐसा हो सकता है और इसका उत्तर है ऐसा जरूर हो सकता है। भविष्यवक्ता  तो यहां तक कह चुके है अगर  तीसरा विश्व युद्ध  होता है तो उसका सबसे बड़ा कारण पानी ही होगा। यह भी एक तरह का  मजाक जैसा लगता है लेकिन ऐसा हो भी सकता है।सवाल ये उठता है कि पानी की कमी आखिर किस वजह से हो रही है,इसके लिए जिम्मेदार कौन है, तो अनेक कारणों में से सबसे प्रमुख कारण  बढ़ती जनसंख्या म है। जैसे-जैसे आबादी बढ़  रही है  वैसे-वैसे पानी की मांग में भी बढ़ोतरी होती जा रही है।जनसंख्या तो जरूर बढ़ रही है लेकिन जल कि स्थिति में कोई इजाफा नही हो रहा है । झील और तालाब सूखने के कगार पर पहुँच गए हैं, ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं, प्रदूषित हो रही नदियों का पानी पीने तो छोड़िए नहाने योग्य भी नहीं  बची है और  जलस्रोतों  का रखरखाव करना कोई चाहता नहीं है,इसलिये  भूगर्भ जल का स्तर घटता ही चला जा रहा है।
Submitted by Shivendra on Wed, 10/27/2021 - 12:35
Source:
यूसर्क
यूसर्क द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम में यूसर्क की निदेशक प्रोफेसर (डॉ) अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा जल संरक्षण, जल प्रबंधन, जल गुणवत्ता विषयक कार्यक्रमों को मासिक श्रंखला के आधार पर आयोजित किया जा रहा है जिसके क्रम में आज ‘‘वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट थ्रू रिमोट सेन्सिग एण्ड जी.आई.एस. टैकनिक्स’’ विषय पर आॅनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि रिमोट सेसिंग एवं जी.आई.एस. तकनीकी द्वारा उचित जल प्रबन्धन करके जल स्रोतों का संवर्धन व संरक्षण करना होगा।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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सूखाग्रस्त गाँव बन गया देश का आदर्श मॉडल

Submitted by Shivendra on Tue, 11/02/2021 - 10:56
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सूखाग्रस्त गाँव बन गया देश का देश का आदर्श मॉडल
बुंदेलखंड  के बांदा जिले के रहने वाले उमा शंकर पांडे ने सूखे और बदहाल अपने गांव जखनी में पानी स्थिति सुधारने का काम 15 साल पहले शुरू किया था। ग्रामीणों को जलसंरक्षण के बारे में समझाकर उन्होंने बिना किसी सरकारी मदद के किसानों और श्रमिकों के साथ मिलकर " मेड़बंदी" का काम शुरू कियाअपने पुरखों की जलसंरक्षण की तकनीक को अपनाकर उन्होंने अपने गांव को एक आदर्श गांव बना दिया है जखनी गांव को आदर्श माॅडल बनाकर  देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है

जनसँख्या बढ़ रही है लेकिन पानी नही 

Submitted by Shivendra on Fri, 10/29/2021 - 15:53
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चेतना मंच
जनसँख्या बढ़ रही है लेकिन पानी नही 
नासा के वैज्ञानिक तमाम आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान लगा चुके हैं, यदि समय रहते पानी का संरक्षण नही किया गया तो वो दिन दूर नही जब पृथ्वी बंजर हो जाएगी। क्या वाकई  में ऐसा हो सकता है और इसका उत्तर है ऐसा जरूर हो सकता है। भविष्यवक्ता  तो यहां तक कह चुके है अगर  तीसरा विश्व युद्ध  होता है तो उसका सबसे बड़ा कारण पानी ही होगा। यह भी एक तरह का  मजाक जैसा लगता है लेकिन ऐसा हो भी सकता है।सवाल ये उठता है कि पानी की कमी आखिर किस वजह से हो रही है,इसके लिए जिम्मेदार कौन है, तो अनेक कारणों में से सबसे प्रमुख कारण  बढ़ती जनसंख्या म है। जैसे-जैसे आबादी बढ़  रही है  वैसे-वैसे पानी की मांग में भी बढ़ोतरी होती जा रही है।जनसंख्या तो जरूर बढ़ रही है लेकिन जल कि स्थिति में कोई इजाफा नही हो रहा है । झील और तालाब सूखने के कगार पर पहुँच गए हैं, ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं, प्रदूषित हो रही नदियों का पानी पीने तो छोड़िए नहाने योग्य भी नहीं  बची है और  जलस्रोतों  का रखरखाव करना कोई चाहता नहीं है,इसलिये  भूगर्भ जल का स्तर घटता ही चला जा रहा है।

यूसर्क द्वारा ‘‘वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट थ्रू रिमोट सेन्सिग एण्ड जी.आई.एस. टैकनिक्स’’विषय पर कार्यक्रम का आयोजन

Submitted by Shivendra on Wed, 10/27/2021 - 12:35
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यूसर्क
यूसर्क द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम में यूसर्क की निदेशक प्रोफेसर (डॉ) अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा जल संरक्षण, जल प्रबंधन, जल गुणवत्ता विषयक कार्यक्रमों को मासिक श्रंखला के आधार पर आयोजित किया जा रहा है जिसके क्रम में आज ‘‘वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट थ्रू रिमोट सेन्सिग एण्ड जी.आई.एस. टैकनिक्स’’ विषय पर आॅनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि रिमोट सेसिंग एवं जी.आई.एस. तकनीकी द्वारा उचित जल प्रबन्धन करके जल स्रोतों का संवर्धन व संरक्षण करना होगा।

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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