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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Sun, 01/02/2022 - 13:06
आजाद बहती लोहित नदी, फोटो साभार : पेमा खांडू
नोडल विभाग की भूजल शाखा, साल में चार बार भूजल स्तर के परिवर्तन को दर्ज करती है। परिवर्तन के आधार पर भूजल दोहन के प्रतिशत को ज्ञात करती है। प्रतिशत के आधार पर विकासखंड़ों को सुरक्षित, सेमी-क्रिटिकल, क्रिटिकल और अतिदोहित श्रेणियों में विभाजित करती है लेकिन भूजल दोहन के कारण उत्पन्न होने वाले कुदरती जलचक्र के असन्तुलन, असन्तुलन के कुप्रभाव और उन कुप्रभावों को ठीक करने की रणनीति पर कोई काम नहीं करती। इसी कारण, पूरे देश में कुओं, नलकूपों, परकोलेशन तालाबों तथा नदियों के सूखने की समस्या का इलाज नहीं हो पा रहा है। इस बेरुखी के चलते अनेक लोग, अवैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर नदियों पर काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए कुछ संगठन नदी के किनारे की गंदगी साफ कर रहे है। कुछ उसके पानी से प्लास्टिक या अन्य किस्म की बायलाजिकल गंदगी हटा रहे हैं।

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Submitted by admin on Sun, 03/08/2009 - 16:33
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डॉ आर डी सिंह
Submitted by admin on Fri, 03/06/2009 - 21:33
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नई दिल्ली की प्रसिद्ध संस्था 'सीएसई' ने अर्बन रेनवाटर हार्वेस्टिंग; विषय पर एक विस्तृत और अग्रगामी कोर्स (अभ्यास सत्र) तैयार किया है जो कि इस क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिये उपयोगी साबित होगा। इस चार दिनी कोर्स का आयोजन 23 से 27 मार्च 2009 को नई दिल्ली में किया जायेगा।
Submitted by admin on Fri, 03/06/2009 - 08:04
Source:

मनोज तिवारी
वाराणसी में भारतीय रेलवे के डीजल लोकोमोटिव वर्क्स से प्रबंधकीय कार्य की शुरुआत करने वाले भारत के एक सपूत आरके पचौरी ने नोबल शांति पुरस्कार में भारत को हिस्सेदारी दिलाई है। नैनीताल में जन्मे इस देसी सपूत ने दुनिया के बड़े से बड़े मंच पर हिंदुस्तान का परचम लहराया है। नोबल पुरस्कार में हिस्सेदारी बांटने का यह गौरव पचौरी की अध्यक्षता वाली इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) संस्था को मिला है। पारिस्थितिकी परिवर्तन और उसमें बनने वाली नीतियों में भी पचौरी का अंतर्राष्ट्रीय दखल हमेशा रहा है। इस दखल ने ही देश के इस पर्यावरणविद को पारिस्थितिकी के क्षेत्र में विश्वव्यापी आयाम दिलवाया।

नैनीताल की सुरम्य वादियां श्री पचौरी को हमेशा पर्यावरण सुरक्षा के प्रति उनके दायित्व की याद दिलाती रहीं।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Mon, 01/10/2022 - 12:07
सोलर पैनल और सोलर लिफ्टिंग कार्य
उत्तराखण्ड राज्य के पौडी जनपद के अर्न्तगत द्वाराीखाल ब्लाक का सुदूरवर्ती छोटा सा गांव पाली, सडक से लगभग 1 किमी0 दूरी पर बसा हुआ है।  इस गांव में पानी की किल्लत काफी थी जिसके चलते ज्यादातर परिवार शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए और शेष परिवार सड़क के नजदीक मष्टखाल या चैलूसैंण आ बसे।इस समय लगभग 13 परिवार ही गांव में निवास करते हैं।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Mon, 12/06/2021 - 14:01
Source:
एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन
इंडिया वाटर पार्टनरशिप द्वारा जलवायु परिवर्तन के दौर में उत्तराखंड में जल संसाधानों की क्षमता को बढ़ाने को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम जल संसाधनो पर काम कर रहे राज्य के तमाम सरकारी विभागों संस्था और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने का काम करेगा। इंडिया वाटर पार्टनरशिप मैनजमेंट (IWRM)  की इस उत्साहपूर्वक पहल से राज्य सरकार को पानी को लेकर हालही की चुनौतियों और हर क्षेत्र में उसका सही इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। 
Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
Source:
चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
Source:
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

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खासम-खास

भारत की सूखती नदियाँ और बेखबरी का आलम

Submitted by Editorial Team on Sun, 01/02/2022 - 13:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
bharat-ki-sukhti-nadiyaan-or-bekhabari-ka-alam
आजाद बहती लोहित नदी, फोटो साभार : पेमा खांडू
नोडल विभाग की भूजल शाखा, साल में चार बार भूजल स्तर के परिवर्तन को दर्ज करती है। परिवर्तन के आधार पर भूजल दोहन के प्रतिशत को ज्ञात करती है। प्रतिशत के आधार पर विकासखंड़ों को सुरक्षित, सेमी-क्रिटिकल, क्रिटिकल और अतिदोहित श्रेणियों में विभाजित करती है लेकिन भूजल दोहन के कारण उत्पन्न होने वाले कुदरती जलचक्र के असन्तुलन, असन्तुलन के कुप्रभाव और उन कुप्रभावों को ठीक करने की रणनीति पर कोई काम नहीं करती। इसी कारण, पूरे देश में कुओं, नलकूपों, परकोलेशन तालाबों तथा नदियों के सूखने की समस्या का इलाज नहीं हो पा रहा है। इस बेरुखी के चलते अनेक लोग, अवैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर नदियों पर काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए कुछ संगठन नदी के किनारे की गंदगी साफ कर रहे है। कुछ उसके पानी से प्लास्टिक या अन्य किस्म की बायलाजिकल गंदगी हटा रहे हैं।

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रेनवाटर हार्वेस्टिंग पर सीएसई का विशेष वर्कशॉप

Submitted by admin on Fri, 03/06/2009 - 21:33
Author
सीएसई

नई दिल्ली की प्रसिद्ध संस्था 'सीएसई' ने अर्बन रेनवाटर हार्वेस्टिंग; विषय पर एक विस्तृत और अग्रगामी कोर्स (अभ्यास सत्र) तैयार किया है जो कि इस क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिये उपयोगी साबित होगा। इस चार दिनी कोर्स का आयोजन 23 से 27 मार्च 2009 को नई दिल्ली में किया जायेगा।

नोबेल पचौरी

Submitted by admin on Fri, 03/06/2009 - 08:04
Author
अमर उजाला

मनोज तिवारी
वाराणसी में भारतीय रेलवे के डीजल लोकोमोटिव वर्क्स से प्रबंधकीय कार्य की शुरुआत करने वाले भारत के एक सपूत आरके पचौरी ने नोबल शांति पुरस्कार में भारत को हिस्सेदारी दिलाई है। नैनीताल में जन्मे इस देसी सपूत ने दुनिया के बड़े से बड़े मंच पर हिंदुस्तान का परचम लहराया है। नोबल पुरस्कार में हिस्सेदारी बांटने का यह गौरव पचौरी की अध्यक्षता वाली इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) संस्था को मिला है। पारिस्थितिकी परिवर्तन और उसमें बनने वाली नीतियों में भी पचौरी का अंतर्राष्ट्रीय दखल हमेशा रहा है। इस दखल ने ही देश के इस पर्यावरणविद को पारिस्थितिकी के क्षेत्र में विश्वव्यापी आयाम दिलवाया।

नैनीताल की सुरम्य वादियां श्री पचौरी को हमेशा पर्यावरण सुरक्षा के प्रति उनके दायित्व की याद दिलाती रहीं।

प्रयास

पाली सोलर लिफ्टिंग योजना: एक साझा अनुभव

Submitted by Shivendra on Mon, 01/10/2022 - 12:07
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Source
लोक विज्ञान संस्थान,देहरादून
सोलर पैनल और सोलर लिफ्टिंग कार्य
उत्तराखण्ड राज्य के पौडी जनपद के अर्न्तगत द्वाराीखाल ब्लाक का सुदूरवर्ती छोटा सा गांव पाली, सडक से लगभग 1 किमी0 दूरी पर बसा हुआ है।  इस गांव में पानी की किल्लत काफी थी जिसके चलते ज्यादातर परिवार शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए और शेष परिवार सड़क के नजदीक मष्टखाल या चैलूसैंण आ बसे।इस समय लगभग 13 परिवार ही गांव में निवास करते हैं।

नोटिस बोर्ड

जल संसाधन प्रबंधन पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन

Submitted by Shivendra on Mon, 12/06/2021 - 14:01
jal-sansadhan-prabandhan-per-ekdivsia-karyashala-ka-ayojan
 एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन
इंडिया वाटर पार्टनरशिप द्वारा जलवायु परिवर्तन के दौर में उत्तराखंड में जल संसाधानों की क्षमता को बढ़ाने को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम जल संसाधनो पर काम कर रहे राज्य के तमाम सरकारी विभागों संस्था और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने का काम करेगा। इंडिया वाटर पार्टनरशिप मैनजमेंट (IWRM)  की इस उत्साहपूर्वक पहल से राज्य सरकार को पानी को लेकर हालही की चुनौतियों और हर क्षेत्र में उसका सही इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। 

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

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