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Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Editorial Team on Mon, 10/18/2021 - 10:54
Source:
जल प्रदूषण, फोटो : लेखक

स्वच्छ जलस्रोतों में विलयित या निलंबित वाह्य पदार्थ, अशुद्धियां मिल जाती हैं, जिससे जल के गुणों में परिवर्तन हो जाता है। यह जल उपयोग करने लायक न रह कर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाता है। इसे 'जल प्रदूषण' कहते हैं। ये वाह्य पदार्थ मल-मूत्र, रसायन, उर्वरक, कीटनाशक एवं औद्योगिक अपशिष्ट हो सकते हैं। निरंतर बहने वाली नदियों में शहरी कूड़ा करकट या अनुपचारित मलजल का लगातार मिलते रहना; झीलों जलाशयों के आसपास गंदगी का मिलना; वर्षा ऋतु में कृषि भूमि से जल बह कर नदियों में गिरना; औद्योगिक अपशिष्ट का एकत्रित जल रिसकर भूजल में मिलना; समुद्रों में तेल वाहक जहाजों से तेल रिसकर अथवा समुद्र तट प

Submitted by Editorial Team on Fri, 10/15/2021 - 10:55
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पानी पत्रक ( 14/14 अक्टूबर  2021), जलधारा अभियान
सांभर झील, फोटो - लेखक
'सांभर झील' (Sambhar Jheel) राष्ट्रीय महत्व का महत्वपूर्ण रामसर क्षेत्र है। सांभर झील क्षेत्र में बार-बार होने वाले गैरकानूनी अतिक्रमणों, अवैध बिजली कनेक्शन, अवैध कब्जे, अवैध बोरवैलों और प्रदूषण के कारण आज झील अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। ऐसे में जरूरी हो गया था कि सांभर झील के कुशल और समन्वित प्रबंधन के लिए एक प्रबंधन एजेंसी का गठन हो। सांभर झील के कुशल प्रबंधन के लिए राज्य सरकार की ओर से सांभर झील प्रबंधन एजेंसी के गठन को मंजूरी दी गई है। चिल्का, ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स और लोकटक के बाद यह देश में चौथी झील प्रबंधन एजेंसी होगी।
Submitted by Shivendra on Mon, 10/11/2021 - 11:41
Source:
रिपोर्ट अंकित तिवारी
गंगा को बचाने के लिए पूर्व सैनिकों की सबसे लंबी पदयात्रा
इस पदयात्रा के दौरान ही एक टीम गंगा में हर स्रोत से होने वाले प्रदूषण की माप, उसकी जियोटैगिंग और  पानी की शुद्धता मापने का काम करती रहीऔर पदयात्रा के दौरान वृक्षमाल कार्यक्रम भी साथ साथ चलता रहा. दरअसल गंगा की मिट्टी को संरक्षित रखने और मैदान में आने वाली बाढ़ के बचाव के लिए जितना जरूरी भूमिगत जल का बचाव है उतना ही जरूरी है इसके फ्लोरा फॉना को सुरक्षित करना है. इसी के चलते ग्रीन इंडिया फाउंडेशन की एक टीम ने गंगा के पास बरगद, नीम और पीपल जैसे करीब 30,000 पेड़ लगाए. लेकिन ये वृक्षारोपण अन्य वृक्षारोपण से अलग इस तरह से रहा कि इन वृक्षों का वहीं के एक निवासी या संगठन को अभिभावक बनाया गया

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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जल प्रदूषण : परिभाषा, कारण एवं कारक पर एक निबंध

Submitted by Editorial Team on Mon, 10/18/2021 - 10:54
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जल प्रदूषण, फोटो : लेखक

स्वच्छ जलस्रोतों में विलयित या निलंबित वाह्य पदार्थ, अशुद्धियां मिल जाती हैं, जिससे जल के गुणों में परिवर्तन हो जाता है। यह जल उपयोग करने लायक न रह कर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाता है। इसे 'जल प्रदूषण' कहते हैं। ये वाह्य पदार्थ मल-मूत्र, रसायन, उर्वरक, कीटनाशक एवं औद्योगिक अपशिष्ट हो सकते हैं। निरंतर बहने वाली नदियों में शहरी कूड़ा करकट या अनुपचारित मलजल का लगातार मिलते रहना; झीलों जलाशयों के आसपास गंदगी का मिलना; वर्षा ऋतु में कृषि भूमि से जल बह कर नदियों में गिरना; औद्योगिक अपशिष्ट का एकत्रित जल रिसकर भूजल में मिलना; समुद्रों में तेल वाहक जहाजों से तेल रिसकर अथवा समुद्र तट प

सांभर झील प्रबंधन एजेंसी के गठन को मिली मंजूरी

Submitted by Editorial Team on Fri, 10/15/2021 - 10:55
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पानी पत्रक ( 14/14 अक्टूबर  2021), जलधारा अभियान
सांभर झील, फोटो - लेखक
'सांभर झील' (Sambhar Jheel) राष्ट्रीय महत्व का महत्वपूर्ण रामसर क्षेत्र है। सांभर झील क्षेत्र में बार-बार होने वाले गैरकानूनी अतिक्रमणों, अवैध बिजली कनेक्शन, अवैध कब्जे, अवैध बोरवैलों और प्रदूषण के कारण आज झील अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। ऐसे में जरूरी हो गया था कि सांभर झील के कुशल और समन्वित प्रबंधन के लिए एक प्रबंधन एजेंसी का गठन हो। सांभर झील के कुशल प्रबंधन के लिए राज्य सरकार की ओर से सांभर झील प्रबंधन एजेंसी के गठन को मंजूरी दी गई है। चिल्का, ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स और लोकटक के बाद यह देश में चौथी झील प्रबंधन एजेंसी होगी।

गंगा को बचाने के लिए पूर्व सैनिकों की सबसे लंबी पदयात्रा

Submitted by Shivendra on Mon, 10/11/2021 - 11:41
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रिपोर्ट अंकित तिवारी
गंगा को बचाने के लिए पूर्व सैनिकों की सबसे लंबी पदयात्रा
इस पदयात्रा के दौरान ही एक टीम गंगा में हर स्रोत से होने वाले प्रदूषण की माप, उसकी जियोटैगिंग और  पानी की शुद्धता मापने का काम करती रहीऔर पदयात्रा के दौरान वृक्षमाल कार्यक्रम भी साथ साथ चलता रहा. दरअसल गंगा की मिट्टी को संरक्षित रखने और मैदान में आने वाली बाढ़ के बचाव के लिए जितना जरूरी भूमिगत जल का बचाव है उतना ही जरूरी है इसके फ्लोरा फॉना को सुरक्षित करना है. इसी के चलते ग्रीन इंडिया फाउंडेशन की एक टीम ने गंगा के पास बरगद, नीम और पीपल जैसे करीब 30,000 पेड़ लगाए. लेकिन ये वृक्षारोपण अन्य वृक्षारोपण से अलग इस तरह से रहा कि इन वृक्षों का वहीं के एक निवासी या संगठन को अभिभावक बनाया गया

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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