नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

Content

Submitted by Shivendra on Thu, 09/02/2021 - 14:18
Source:
जल संरक्षण के लिये किसानों की स्वराज यात्रा
वही यात्रा को लेकर डॉक्टर राजेंद्र सिंह ने कहा जल के निजीकरण और व्यापारिकरण से जल की विस्थापित होने की संभावना बढ़ रही है ऐसे में लोग पानी और खेती के लिए पानी को हर समय  खरीद नहीं सकते हैं। उन्होंने कहा कि  देश में बढ़ते निजीकरण के कारण कंपनियां  की तादाद  बढ़ रही है और यह कंपनियां  अपने हित को पूरा करने के लिए  पानी को लगातार  दूषित कर रही है।
Submitted by Shivendra on Thu, 09/02/2021 - 12:55
Source:
साप्ताहिक रविवार, 1985 
गंगा नदी में फैला कचरा
देश में जल-प्रदूषण इसलिए भी है क्योंकि यहां की 90 फीसद नदियां तथा सहायक नदियों से ही पेयजल की प्राप्ति होती है। जो प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। अन्य विकासशील देशों की भांति अपने देश में भी जल प्रदूषण के खतरे से मुक्ति के लिए कोई कारगर तथा ठोस विकल्प नहीं खोजा जा सका है। यद्यपि देश में औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया को पूर्णतः नहीं अपनाया गया है। तथापि जल प्रदूषण का संकट यहां ऐसे खतरनाक धरातल पर पहुंच गया है कि कभी भी देश में ‘मिनीमाता’ जैसा प्रकोप फैल सकता है
Submitted by Shivendra on Wed, 09/01/2021 - 12:36
Source:
साप्ताहिक रविवार, 1985 
प्रदूषित यमुना नदी
हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को यह चेतावनी इसलिए देनी पड़ी है कि बनारस में शहर भर की गंदगी के गंगा में मिलने के कारण वहां गंगा का पानी बिहार प्रदूषित हो चुका है और इसके इस्तेमाल का मतलब है बीमारी को आमंत्रण देना। पर इन से भी ज्यादा चौंकाने वाली रिपोर्ट तो मुंबई की है। उत्तर पूर्व मुंबई से गुजरकर अरब सागर में मिलने वाली कालू-नदी का पानी इतना ज्यादा प्रदूषित हो चुका है कि इस नदी में मछलियां तो खैर बची नहीं हैं

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
Source:
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
Source:
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

Latest

खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

hindukush-himalaya-parvatamala-third-pole

Content

जल संरक्षण के लिये किसानों की स्वराज यात्रा

Submitted by Shivendra on Thu, 09/02/2021 - 14:18
jal-sanrakshan-ke-liye-kisaanon-key-swaraj-yatra
जल संरक्षण के लिये किसानों की स्वराज यात्रा
वही यात्रा को लेकर डॉक्टर राजेंद्र सिंह ने कहा जल के निजीकरण और व्यापारिकरण से जल की विस्थापित होने की संभावना बढ़ रही है ऐसे में लोग पानी और खेती के लिए पानी को हर समय  खरीद नहीं सकते हैं। उन्होंने कहा कि  देश में बढ़ते निजीकरण के कारण कंपनियां  की तादाद  बढ़ रही है और यह कंपनियां  अपने हित को पूरा करने के लिए  पानी को लगातार  दूषित कर रही है।

पार्ट-2: सावधान! जो पानी आप पी रहे हैं, वह प्रदूषित है 

Submitted by Shivendra on Thu, 09/02/2021 - 12:55
part-2:-savdhan!-jo-paani-op-pi-rahe-hain,-vah-pradushit-hai
Source
साप्ताहिक रविवार, 1985 
 गंगा नदी में फैला कचरा
देश में जल-प्रदूषण इसलिए भी है क्योंकि यहां की 90 फीसद नदियां तथा सहायक नदियों से ही पेयजल की प्राप्ति होती है। जो प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। अन्य विकासशील देशों की भांति अपने देश में भी जल प्रदूषण के खतरे से मुक्ति के लिए कोई कारगर तथा ठोस विकल्प नहीं खोजा जा सका है। यद्यपि देश में औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया को पूर्णतः नहीं अपनाया गया है। तथापि जल प्रदूषण का संकट यहां ऐसे खतरनाक धरातल पर पहुंच गया है कि कभी भी देश में ‘मिनीमाता’ जैसा प्रकोप फैल सकता है

सावधान! जो पानी आप पी रहे हैं, वह प्रदूषित है 

Submitted by Shivendra on Wed, 09/01/2021 - 12:36
savdhan!-jo-paani-op-pi-rahe-hain,-vah-pradushit-hai
Source
साप्ताहिक रविवार, 1985 
प्रदूषित यमुना नदी
हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को यह चेतावनी इसलिए देनी पड़ी है कि बनारस में शहर भर की गंदगी के गंगा में मिलने के कारण वहां गंगा का पानी बिहार प्रदूषित हो चुका है और इसके इस्तेमाल का मतलब है बीमारी को आमंत्रण देना। पर इन से भी ज्यादा चौंकाने वाली रिपोर्ट तो मुंबई की है। उत्तर पूर्व मुंबई से गुजरकर अरब सागर में मिलने वाली कालू-नदी का पानी इतना ज्यादा प्रदूषित हो चुका है कि इस नदी में मछलियां तो खैर बची नहीं हैं

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
ganvon-ko-jagata-ek-shikshak
Source
6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
equa-congress-ke-15van-antarrashtriya-sammelan-key-mahatvapoorn-jankariyan
Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
ganga-key-aviralata-or-nirmalata-ko-sthapit-karne-ke-liye-virtual-meeting-ka-aayojan
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

Upcoming Event

Popular Articles