नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

Content

Submitted by Shivendra on Tue, 08/03/2021 - 11:25
Source:
100 से अधिक गाँव की पानी की समस्या हुई दूर
जिला देहरादून के जनजातीय क्षेत्र नागथात और उसके आस पास के 100 से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीणों को लगभग 70 साल बाद पेयजल किल्लत से जल्द निजात मिलेगी यहां 24 करोड़ की लागत से बन रही पम्पिंग  पेयजल योजना अंतिम चरण में पहुंच गई है सितंबर माह से योजना से पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी.इसके लिए इन दिनों नई पेयजल लाइन बिछाने का काम चल रहा है नागथात  क्षेत्र के खत बहलाड लखवाड़ फटाड कोरु के गांव के साथ ही नागथात डूंडीलानी  विरातखाई चुरानी और खत शैली के गांव में पिछले 70 साल से पेयजल की समस्या बनी हुई है.
Submitted by Shivendra on Mon, 08/02/2021 - 16:10
Source:
प्रिंट 
देश के प्रमुख राज्यों में जल स्तर कम होने से बढ़ सकती है महंगाई
अगर आगे भी  यही स्तिथि रही तो मध्य प्रदेश में प्रमुख आगामी फसलों की बुवाई और उत्पादन में बाधा आएगी, जो पहले से ही कम जलाशय भंडारण का सामना कर रहा है।राज्य सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो खाना पकाने के तेल और पोल्ट्री फीड के प्रमुख स्रोतों में से एक है। हालांकि, बीज कीमतों में उछाल और कम वर्षा के कारण  सोयाबीन की पैदावार कम हुई है और इससे मध्यप्रदेश उत्पादक राज्य की शीर्ष श्रेणी में अब  नही रहा है।अगर आगे यही स्थिति बरकरार रहती है  तो  इस साल खाना पकाने के तेल, पोल्ट्री फीड और पोल्ट्री उत्पादों की कीमतें और अधिक बढ़ सकती है, जो पहले से ही रिकॉर्ड-उच्च कीमतों को छू रहे है।
Submitted by Shivendra on Tue, 07/27/2021 - 11:35
Source:
रिपोर्ट-अंकित तिवारी
मिलिए 12 हज़ार गायों को बचाने वाले गौरक्षक से
अब तक हजारों गायों का  इलाज कर चुके प्रशांत बताते है कि वह अपने जिले में एक एनिमल इमरजेंसी सेवा भी संचालित करते है जिसमें वह हाइवे में बीमार और सड़क दुर्घटना में चोटिल  गायों को रेस्क्यू कर उनका निशुल्क  इलाज करते है और तब तक उसे छोड़ते नही जब तक वह पूरी तरह स्वास्थ्य ना हो जाए। प्रशांत आगे कहते है कि उनकी संस्था हर साल गायों के इलाज पर  8 से 10 लाख रुपए खर्च करती है । और उन्हें ये पूरा ख़र्चा आमजन के सहयोग से प्राप्त होता है। 

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
Source:
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
Source:
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

Latest

खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

hindukush-himalaya-parvatamala-third-pole

Content

100 से अधिक गाँव की पानी की समस्या हुई दूर

Submitted by Shivendra on Tue, 08/03/2021 - 11:25
100-se-adhik-gaanv-ke-paani-ke-samasya-hui-door
100 से अधिक गाँव की पानी की समस्या हुई दूर
जिला देहरादून के जनजातीय क्षेत्र नागथात और उसके आस पास के 100 से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीणों को लगभग 70 साल बाद पेयजल किल्लत से जल्द निजात मिलेगी यहां 24 करोड़ की लागत से बन रही पम्पिंग  पेयजल योजना अंतिम चरण में पहुंच गई है सितंबर माह से योजना से पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी.इसके लिए इन दिनों नई पेयजल लाइन बिछाने का काम चल रहा है नागथात  क्षेत्र के खत बहलाड लखवाड़ फटाड कोरु के गांव के साथ ही नागथात डूंडीलानी  विरातखाई चुरानी और खत शैली के गांव में पिछले 70 साल से पेयजल की समस्या बनी हुई है.

देश के प्रमुख राज्यों में जल स्तर कम होने से बढ़ सकती है महंगाई

Submitted by Shivendra on Mon, 08/02/2021 - 16:10
desh-ke-pramukh-rajyon-mein-jal-star-come-hone-se-badh-sakti-hai-mahangai
Source
प्रिंट 
देश के प्रमुख राज्यों में जल स्तर कम होने से बढ़ सकती है महंगाई
अगर आगे भी  यही स्तिथि रही तो मध्य प्रदेश में प्रमुख आगामी फसलों की बुवाई और उत्पादन में बाधा आएगी, जो पहले से ही कम जलाशय भंडारण का सामना कर रहा है।राज्य सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो खाना पकाने के तेल और पोल्ट्री फीड के प्रमुख स्रोतों में से एक है। हालांकि, बीज कीमतों में उछाल और कम वर्षा के कारण  सोयाबीन की पैदावार कम हुई है और इससे मध्यप्रदेश उत्पादक राज्य की शीर्ष श्रेणी में अब  नही रहा है।अगर आगे यही स्थिति बरकरार रहती है  तो  इस साल खाना पकाने के तेल, पोल्ट्री फीड और पोल्ट्री उत्पादों की कीमतें और अधिक बढ़ सकती है, जो पहले से ही रिकॉर्ड-उच्च कीमतों को छू रहे है।

मिलिए 12 हज़ार गायों को बचाने वाले गौरक्षक से

Submitted by Shivendra on Tue, 07/27/2021 - 11:35
milie-12-hazaar-gayon-ko-bachaane-vale-gorakshak-se
Source
रिपोर्ट-अंकित तिवारी
मिलिए 12 हज़ार गायों को बचाने वाले गौरक्षक से
अब तक हजारों गायों का  इलाज कर चुके प्रशांत बताते है कि वह अपने जिले में एक एनिमल इमरजेंसी सेवा भी संचालित करते है जिसमें वह हाइवे में बीमार और सड़क दुर्घटना में चोटिल  गायों को रेस्क्यू कर उनका निशुल्क  इलाज करते है और तब तक उसे छोड़ते नही जब तक वह पूरी तरह स्वास्थ्य ना हो जाए। प्रशांत आगे कहते है कि उनकी संस्था हर साल गायों के इलाज पर  8 से 10 लाख रुपए खर्च करती है । और उन्हें ये पूरा ख़र्चा आमजन के सहयोग से प्राप्त होता है। 

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
ganvon-ko-jagata-ek-shikshak
Source
6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
equa-congress-ke-15van-antarrashtriya-sammelan-key-mahatvapoorn-jankariyan
Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
ganga-key-aviralata-or-nirmalata-ko-sthapit-karne-ke-liye-virtual-meeting-ka-aayojan
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

Upcoming Event

Popular Articles