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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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16 साल की ग्रेटा थनबर्ग पर्यावरण को लेकर हमसे ज्यादा समझदार है

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 14:09
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वेब
ग्रेटा थनबर्ग।ग्रेटा थनबर्ग। 16 साल की ग्रेटा थनबर्ग पूरे दुनिया के नेताओं से अपील कर रही है कि हमें अपनी धरती को बचाना होगा और ये तभी होगा जब अपनी जरूरतें कम करेंगे। ऐसा कोई भी काम नहीं करेंगे जो हमारी पृथ्वी को, हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता हो। हाल ही में ब्रिटेन क्लाइमेट इमरजेंसी लगाने वाला पहला देश बना। ब्रिटेन की संसद को ये फैसला इसलिए लेना पड़ा क्योंकि लाखों लोग ब्रिटेन की सड़कों पर इसकी मांग कर रहे थे। उन्हीं अच्छे लोगों के बीच खड़ी थी 16 साल की ये लड़की।

देरी से मानसून आने के नुकसान

Submitted by UrbanWater on Sat, 06/08/2019 - 15:15
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राष्ट्रीय सहारा, 08 जून 2019
मानसून में देरी के कारण कृषि पर संकट आ रहा है।मानसून में देरी के कारण कृषि पर संकट आ रहा है। मानसून का इंतजार कर रहे किसानों के साथ-साथ मानसून की राह देख रहे उत्तर भारत के लोगों के लिए अच्छी खबर नहीं है क्योंकि मानसून अपने समय से लेट हो चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून एक सप्ताह की देरी से आ सकता है। स्काईमेट का दावा है कि उत्तर भारत में मानसून आने में देर हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार इस बार वह कमजोर रहने वाला है, जबकि प्री-मानसून में भी बारिश बहुत कम हुई है। इसके साथ ही आधिकारिक तौर पर चार माह के लिए बारिश के मौसम की शुरुआत होती है। लेकिन इस बार आठ जून को मानसून के केरल तट पहुंचते की संभावना जताई गई थी।

पर्यावरण को बचाने का प्रयास कर मिसाल पेश कर रहे हैं कुछ प्रकृति प्रेमी

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/06/2019 - 15:26
Source
हिंदुस्तान, 05 जून 2019
ग्रीन मैन विजयपाल बघेल।ग्रीन मैन विजयपाल बघेल। विकास की अंधी दौड़ में हम जाने अनजाने में अपने परिवेश को काफी नुकसान पहुंचा रहा है। पर देश में कई ऐसे लोग भी हैं जो अपने प्रयासों से इस वसुंधरा को हरा-भरा बनाए रखने की कोशिश में जुटे हैं। आइए रूबरू होते हैं कुछ ऐसे लोगों से जो पर्यावरण बचाने का प्रयास कर मिसाल कायम कर रहे हैं

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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16 साल की ग्रेटा थनबर्ग पर्यावरण को लेकर हमसे ज्यादा समझदार है

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 14:09
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वेब
ग्रेटा थनबर्ग।ग्रेटा थनबर्ग। 16 साल की ग्रेटा थनबर्ग पूरे दुनिया के नेताओं से अपील कर रही है कि हमें अपनी धरती को बचाना होगा और ये तभी होगा जब अपनी जरूरतें कम करेंगे। ऐसा कोई भी काम नहीं करेंगे जो हमारी पृथ्वी को, हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता हो। हाल ही में ब्रिटेन क्लाइमेट इमरजेंसी लगाने वाला पहला देश बना। ब्रिटेन की संसद को ये फैसला इसलिए लेना पड़ा क्योंकि लाखों लोग ब्रिटेन की सड़कों पर इसकी मांग कर रहे थे। उन्हीं अच्छे लोगों के बीच खड़ी थी 16 साल की ये लड़की।

देरी से मानसून आने के नुकसान

Submitted by UrbanWater on Sat, 06/08/2019 - 15:15
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राष्ट्रीय सहारा, 08 जून 2019
मानसून में देरी के कारण कृषि पर संकट आ रहा है।मानसून में देरी के कारण कृषि पर संकट आ रहा है। मानसून का इंतजार कर रहे किसानों के साथ-साथ मानसून की राह देख रहे उत्तर भारत के लोगों के लिए अच्छी खबर नहीं है क्योंकि मानसून अपने समय से लेट हो चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून एक सप्ताह की देरी से आ सकता है। स्काईमेट का दावा है कि उत्तर भारत में मानसून आने में देर हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार इस बार वह कमजोर रहने वाला है, जबकि प्री-मानसून में भी बारिश बहुत कम हुई है। इसके साथ ही आधिकारिक तौर पर चार माह के लिए बारिश के मौसम की शुरुआत होती है। लेकिन इस बार आठ जून को मानसून के केरल तट पहुंचते की संभावना जताई गई थी।

पर्यावरण को बचाने का प्रयास कर मिसाल पेश कर रहे हैं कुछ प्रकृति प्रेमी

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/06/2019 - 15:26
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हिंदुस्तान, 05 जून 2019
ग्रीन मैन विजयपाल बघेल।ग्रीन मैन विजयपाल बघेल। विकास की अंधी दौड़ में हम जाने अनजाने में अपने परिवेश को काफी नुकसान पहुंचा रहा है। पर देश में कई ऐसे लोग भी हैं जो अपने प्रयासों से इस वसुंधरा को हरा-भरा बनाए रखने की कोशिश में जुटे हैं। आइए रूबरू होते हैं कुछ ऐसे लोगों से जो पर्यावरण बचाने का प्रयास कर मिसाल कायम कर रहे हैं

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
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दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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