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Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by HindiWater on Wed, 03/24/2021 - 15:51
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द टेलीप्रिंटर
हर्बल गुलाल
होली के पर्व पर रंगों का अपना ही महत्व है। बाजारों में रासयनिक के मुकाबले प्राकृतिक रंगों की मांग अधिक बढ़ गई है । ऐसे में इंदौर वन मंडल  भी प्राकृतिक रंग तैयार करने में जुट गया है ।  वन विभाग  टेसू यानी पलाश के फूलों से 'हर्बल कलर्स" बना रहा है  और इसे बनाने में स्थानीय महिलाओं की मदद भी ले रहा है
Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:30
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एक नदी को जीवित करने का प्रयास
हिण्डन नदी, उत्तरी भारत में यमुना नदी की एक सहायक नदी के रूप जानी जाती  है  इस नदी का उद्गम  स्थल सहारनपुर जिले के निचले हिमालय क्षेत्र के ऊपरी शिवालिक पर्वतमाला में स्थित है। यह बरसाती नदी है इसका बेसीन क्षेत्र लगभग 7083 वर्ग किमी है। यह नदी मुज़फ्फरनगर जिला, मेरठ जिला, बागपत जिला, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा से होकर दिल्ली से कुछ दूरी पर यमुना पर मिल जाती है।
Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 15:58
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हर घर नल से क्या रुक पाएगा पानी का अतिक्रमण
विषम भूगोल वाले उत्तराखंड में हर साल औसतन 1529 मिमी बारिश होती है, जिसमें अकेले चौमासे यानी मानसून की भागीदारी 1221.9 मिमी है। बारिश का यह पानी हर साल यूं ही जाया हो जाता है। हालांकि, खाल-चाल, खंत्तियां, चेकडैम जैसे उपायों के जरिये इसे रोकने के प्रयास विभिन्न विभागों के स्तर पर हुए हैं, लेकिन इनमें तेजी की दरकार है। राज्य में निरंतर सूखते जलस्रोतों को बचाने के लिए यह जरूरी भी है। नीति आयोग की रिपोर्ट ही बताती है कि उत्तराखंड में 300 के करीब जलस्रोत सूख चुके हैं या सूखने के कगार पर हैं। इस सबको देखते हुए राज्य सरकार ने भी जल संरक्षण को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा है। 

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।
Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
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विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।
Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
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वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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कैसे मनाएं हर्बल होली

Submitted by HindiWater on Wed, 03/24/2021 - 15:51
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हर्बल गुलाल
होली के पर्व पर रंगों का अपना ही महत्व है। बाजारों में रासयनिक के मुकाबले प्राकृतिक रंगों की मांग अधिक बढ़ गई है । ऐसे में इंदौर वन मंडल  भी प्राकृतिक रंग तैयार करने में जुट गया है ।  वन विभाग  टेसू यानी पलाश के फूलों से 'हर्बल कलर्स" बना रहा है  और इसे बनाने में स्थानीय महिलाओं की मदद भी ले रहा है

एक नदी को जीवित करने का प्रयास

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:30
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एक नदी को जीवित करने का प्रयास
हिण्डन नदी, उत्तरी भारत में यमुना नदी की एक सहायक नदी के रूप जानी जाती  है  इस नदी का उद्गम  स्थल सहारनपुर जिले के निचले हिमालय क्षेत्र के ऊपरी शिवालिक पर्वतमाला में स्थित है। यह बरसाती नदी है इसका बेसीन क्षेत्र लगभग 7083 वर्ग किमी है। यह नदी मुज़फ्फरनगर जिला, मेरठ जिला, बागपत जिला, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा से होकर दिल्ली से कुछ दूरी पर यमुना पर मिल जाती है।

हर घर नल से क्या रुक पाएगा पानी का अतिक्रमण

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 15:58
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 हर घर नल से क्या रुक पाएगा पानी का अतिक्रमण
विषम भूगोल वाले उत्तराखंड में हर साल औसतन 1529 मिमी बारिश होती है, जिसमें अकेले चौमासे यानी मानसून की भागीदारी 1221.9 मिमी है। बारिश का यह पानी हर साल यूं ही जाया हो जाता है। हालांकि, खाल-चाल, खंत्तियां, चेकडैम जैसे उपायों के जरिये इसे रोकने के प्रयास विभिन्न विभागों के स्तर पर हुए हैं, लेकिन इनमें तेजी की दरकार है। राज्य में निरंतर सूखते जलस्रोतों को बचाने के लिए यह जरूरी भी है। नीति आयोग की रिपोर्ट ही बताती है कि उत्तराखंड में 300 के करीब जलस्रोत सूख चुके हैं या सूखने के कगार पर हैं। इस सबको देखते हुए राज्य सरकार ने भी जल संरक्षण को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा है। 

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
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 विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

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