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काॅप 14: मोदी ने कहा सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देगा भारत 

Submitted by HindiWater on Mon, 09/16/2019 - 17:06
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी नौ सिंतंबर को ग्रेटर नोएडामें मरूस्‍थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र समझौते (यूएनसीसीडी) में शामिल देशों के 14वें सम्‍मेलन (कॉप 14) के उच्‍च स्‍तरीय खंड को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत प्रभावी योगदान देने के लिए तत्‍पर है क्‍योंकि हम दो वर्ष के कार्यकाल के लिए सह-अध्‍यक्ष का पदभार संभाल रहे हैं। सदियों से हमने भूमि को महत्‍व दिया है। भारतीय संस्‍कृति में पृथ्‍वी को पवित्र माना गया है और मां का दर्जा दिया गया है।

Content

समस्या जाने बिना ही कर रहे बड़खल झील को पुनर्जीवित करने का प्रयास

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 12:45
सूखने के बाद कुछ इस प्रकार दिखती है बड़खल झील। सूखने के बाद कुछ इस प्रकार दिखती है बड़खल झील। स्मार्ट का शाब्दिक हिंदी अर्थ है चालाक। इसलिए बड़ी चालाकी से बड़खल को (क्योंकि चालाक व्यक्ति मरे हुए से भी लाभ उठाने से नहीं चूकता) को भी स्मार्ट सिटी में शामिल कराया और फिर ऐसे लोग अब बड़खल के उपचार में लगे हैं, जिन्हें यह भी नहीं मालूम कि इसको बीमारी क्या है ? इन तथाकथित डॉक्टरों से कोई इनकी योग्यता पूछे तो पता चलेगा कि मैकेनिकल इंजीनियर हैं और बड़खल की जल समस्या का उपचार करने निकले हैं। फरीदाबाद के लिए अगर यमुना मां है तो बड़खल झील मौसी। मां जहां मैदान में लहलहाती हुई आगे बढ़ जाती है तो वहीं बड़खल अरावली के अप्रतिम सौंदर्य के किनारे अपने जल से फरीदाबाद के एक बड़े क्षेत्र के भूजल स्तर को बनाये रखने में बड़ी भूमिका में रही है।

बुंदेलखंड की जीवित हुई इस नदी ने दम तोड़ दिया

Submitted by UrbanWater on Fri, 07/12/2019 - 15:49
Source
बुंदेलखंड कनेक्ट, जून 2019 

लापरवाही की वजह से सिंघश्रोता नदी सूख गई है। लापरवाही की वजह से सिंघश्रोता नदी सूख गई है।

एक महिला ने कहा कि भइया जी! जबसे मिड डे मील आया, तब से जलधाराएं सूख गईं। नदी किनारे लगे पेड़ गांव प्रधान ने काट दिए और उन लकड़ियों से खाना बनवाया। जिन जड़ों से जलधाराएं आती थीं, पेड़ न होने की वजह से जलधाराएं खत्म हो गईं। इन्हीं में एक महिला बोली, हमार नदी को चेकडैम ने मार दिया। हमारे साथ चेकडैम से नदी सुरक्षित करने वाली विचारधारा के जो साथ थे सब ये बात सुनकर अवाक रह गये। उस महिला ने बताया एक किलोमीटर के अंदर दो बड़े-बड़े चेकडैम बना दिए और नदी बहुत छोटी है। बरसात में जो मिट्टी आती है वो नदी में जमा हो गई है और सब जलस्रोत बंद हो गए हैं। जब से नदी सूखी है तब से सबसे बड़ा दुख पानी का है। जानवर प्यार से मर रहे हैं, केवल एक हैंडपंप है। वो हैंडपंप कितने घरों को पानी दे पायेगा। इस वजह से सब परेशान हैं, लेकिन सुनने वाला कौन है? कोई नहीं सुनता हमार दर्द न सरकार और न ही प्रधान।

हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या

Submitted by HindiWater on Fri, 07/12/2019 - 12:21
Source
आई नेक्स्ट, 12 जुलाई 2019
हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या।हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या। विडंबना है कि मानसून के बादल घिरे होने के बावजूद देश में पानी सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। इस संकट के शहरों और गाँवों में अलग-अलग रूप हैं। गाँवों में यह खेती और सिंचाई के सामने खड़े संकट के रूप में है, तो शहरों में पीने के पानी की किल्लत के रूप में। पेयजल की समस्या गांवों में भी है, पर चूंकि मीडिया शहरों पर केन्द्रित है, इसलिए शहरी समस्या ज्यादा भयावह रूप में सामने आ रही है। हम पेयजल के बारे में ही सुन रहे हैं, इसलिए खेती से जुड़े मसले सामने नहीं आ रहे हैं, जबकि इस समस्या का वास्तविक रूप इन दोनों को साथ रखकर ही समझा जा सकता है।

प्रयास

धान की सूखती खेती को सुरक्षा कवच उपलब्ध कराता देशज प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 09/13/2019 - 11:05
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास'

सेमरहा तालाब, उसका आगौर, इनलेट प्रणाली तथा वेस्टवियर का गूगल अर्थ चित्र।सेमरहा तालाब, उसका आगौर, इनलेट प्रणाली तथा वेस्टवियर का गूगल अर्थ चित्र।

मध्यप्रदेश के पूर्वी भाग के लगभग अन्तिम छोर पर स्थित गंगा के कछार का हिस्सा। इस हिस्से की कछारी मिट्टी में धान की खेती होती है। इसी हिस्से में बसा है एक अनजान गांव - नाम है सेमरहा। यह रीवा जिले की हनुमना तहसील का लगभग अनजान गांव है। इस गांव मे एक तालाब है जिसे गांव के नाम पर ही सेमरहा तालाब कहा जाता है। यह तालाब बहुत पुराना है। गांव की भौगोलिक पहचान है उसके अक्षांस औैर देशांश।

नोटिस बोर्ड

नई दिल्ली में होगा दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा सीएसआर शिखर सम्मेलन

Submitted by HindiWater on Tue, 09/10/2019 - 13:01
एनजीओ बाॅक्स 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली स्थित होटल पुलमैन एंड नोवोटेल में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा ‘‘भारत सीएसआर शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी’’ का आयोजन करने जा रहा है। यह 6वा शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी) नाॅलेज पार्टनर की भूमि निभा रहा है।

बजट 2019 में ग्रामीण भारत के विकास की योजनाएं

Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source
योजना, अगस्त 2019
बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं।बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं। वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

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काॅप 14: मोदी ने कहा सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देगा भारत 

Submitted by HindiWater on Mon, 09/16/2019 - 17:06
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी नौ सिंतंबर को ग्रेटर नोएडामें मरूस्‍थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र समझौते (यूएनसीसीडी) में शामिल देशों के 14वें सम्‍मेलन (कॉप 14) के उच्‍च स्‍तरीय खंड को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत प्रभावी योगदान देने के लिए तत्‍पर है क्‍योंकि हम दो वर्ष के कार्यकाल के लिए सह-अध्‍यक्ष का पदभार संभाल रहे हैं। सदियों से हमने भूमि को महत्‍व दिया है। भारतीय संस्‍कृति में पृथ्‍वी को पवित्र माना गया है और मां का दर्जा दिया गया है।

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समस्या जाने बिना ही कर रहे बड़खल झील को पुनर्जीवित करने का प्रयास

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 12:45
सूखने के बाद कुछ इस प्रकार दिखती है बड़खल झील। सूखने के बाद कुछ इस प्रकार दिखती है बड़खल झील। स्मार्ट का शाब्दिक हिंदी अर्थ है चालाक। इसलिए बड़ी चालाकी से बड़खल को (क्योंकि चालाक व्यक्ति मरे हुए से भी लाभ उठाने से नहीं चूकता) को भी स्मार्ट सिटी में शामिल कराया और फिर ऐसे लोग अब बड़खल के उपचार में लगे हैं, जिन्हें यह भी नहीं मालूम कि इसको बीमारी क्या है ? इन तथाकथित डॉक्टरों से कोई इनकी योग्यता पूछे तो पता चलेगा कि मैकेनिकल इंजीनियर हैं और बड़खल की जल समस्या का उपचार करने निकले हैं। फरीदाबाद के लिए अगर यमुना मां है तो बड़खल झील मौसी। मां जहां मैदान में लहलहाती हुई आगे बढ़ जाती है तो वहीं बड़खल अरावली के अप्रतिम सौंदर्य के किनारे अपने जल से फरीदाबाद के एक बड़े क्षेत्र के भूजल स्तर को बनाये रखने में बड़ी भूमिका में रही है।

बुंदेलखंड की जीवित हुई इस नदी ने दम तोड़ दिया

Submitted by UrbanWater on Fri, 07/12/2019 - 15:49
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बुंदेलखंड कनेक्ट, जून 2019 

लापरवाही की वजह से सिंघश्रोता नदी सूख गई है। लापरवाही की वजह से सिंघश्रोता नदी सूख गई है।

एक महिला ने कहा कि भइया जी! जबसे मिड डे मील आया, तब से जलधाराएं सूख गईं। नदी किनारे लगे पेड़ गांव प्रधान ने काट दिए और उन लकड़ियों से खाना बनवाया। जिन जड़ों से जलधाराएं आती थीं, पेड़ न होने की वजह से जलधाराएं खत्म हो गईं। इन्हीं में एक महिला बोली, हमार नदी को चेकडैम ने मार दिया। हमारे साथ चेकडैम से नदी सुरक्षित करने वाली विचारधारा के जो साथ थे सब ये बात सुनकर अवाक रह गये। उस महिला ने बताया एक किलोमीटर के अंदर दो बड़े-बड़े चेकडैम बना दिए और नदी बहुत छोटी है। बरसात में जो मिट्टी आती है वो नदी में जमा हो गई है और सब जलस्रोत बंद हो गए हैं। जब से नदी सूखी है तब से सबसे बड़ा दुख पानी का है। जानवर प्यार से मर रहे हैं, केवल एक हैंडपंप है। वो हैंडपंप कितने घरों को पानी दे पायेगा। इस वजह से सब परेशान हैं, लेकिन सुनने वाला कौन है? कोई नहीं सुनता हमार दर्द न सरकार और न ही प्रधान।

हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या

Submitted by HindiWater on Fri, 07/12/2019 - 12:21
Source
आई नेक्स्ट, 12 जुलाई 2019
हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या।हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या। विडंबना है कि मानसून के बादल घिरे होने के बावजूद देश में पानी सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। इस संकट के शहरों और गाँवों में अलग-अलग रूप हैं। गाँवों में यह खेती और सिंचाई के सामने खड़े संकट के रूप में है, तो शहरों में पीने के पानी की किल्लत के रूप में। पेयजल की समस्या गांवों में भी है, पर चूंकि मीडिया शहरों पर केन्द्रित है, इसलिए शहरी समस्या ज्यादा भयावह रूप में सामने आ रही है। हम पेयजल के बारे में ही सुन रहे हैं, इसलिए खेती से जुड़े मसले सामने नहीं आ रहे हैं, जबकि इस समस्या का वास्तविक रूप इन दोनों को साथ रखकर ही समझा जा सकता है।

प्रयास

धान की सूखती खेती को सुरक्षा कवच उपलब्ध कराता देशज प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 09/13/2019 - 11:05
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास'

सेमरहा तालाब, उसका आगौर, इनलेट प्रणाली तथा वेस्टवियर का गूगल अर्थ चित्र।सेमरहा तालाब, उसका आगौर, इनलेट प्रणाली तथा वेस्टवियर का गूगल अर्थ चित्र।

मध्यप्रदेश के पूर्वी भाग के लगभग अन्तिम छोर पर स्थित गंगा के कछार का हिस्सा। इस हिस्से की कछारी मिट्टी में धान की खेती होती है। इसी हिस्से में बसा है एक अनजान गांव - नाम है सेमरहा। यह रीवा जिले की हनुमना तहसील का लगभग अनजान गांव है। इस गांव मे एक तालाब है जिसे गांव के नाम पर ही सेमरहा तालाब कहा जाता है। यह तालाब बहुत पुराना है। गांव की भौगोलिक पहचान है उसके अक्षांस औैर देशांश।

नोटिस बोर्ड

नई दिल्ली में होगा दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा सीएसआर शिखर सम्मेलन

Submitted by HindiWater on Tue, 09/10/2019 - 13:01
एनजीओ बाॅक्स 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली स्थित होटल पुलमैन एंड नोवोटेल में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा ‘‘भारत सीएसआर शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी’’ का आयोजन करने जा रहा है। यह 6वा शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी) नाॅलेज पार्टनर की भूमि निभा रहा है।

बजट 2019 में ग्रामीण भारत के विकास की योजनाएं

Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
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योजना, अगस्त 2019
बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं।बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं। वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

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दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

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