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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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Submitted by UrbanWater on Fri, 08/21/2020 - 11:33
Source:
बिहार की नदियां
कहने को तो गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सरकारी स्तर पर ढेरों प्रयास हो रहे हैं, लेकिन सच तो ये है कि ये प्रयास जमीन पर उतरते नजर नहीं आ रहे हैं। इसकी ताजा मिसाल बिहार सरकार की तरफ से नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को दी गई रिपोर्ट में देखने को मिली है। ये रिपोर्ट नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा की तरफ से नेशनल ग्रीन ट्राइबुनल में जमा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार सरकार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स स्थापित करने में देर कर रही है और कई प्रोजेक्ट तो सालों से लंबित पड़े हुए हैं। 
Submitted by UrbanWater on Thu, 08/20/2020 - 13:21
Source:
द टेलीप्रिंटर प्रोडक्शन
रासायनिक खेती के खिलाफ़ लामबंदी  
मध्यप्रदेश के धार जिले में अब रासायनिक खेती के खिलाफ़ गाँव-गाँव में लोग लामबंद हो रहे हैं। यहाँ केंचुओं के ज़रिए जैविक खेती के लिए बड़े पैमाने पर पहल की गई है। हैं। जिले में रबी और खरीफ फसलों में क़रीब 297 करोड़ के रासायनिक खाद की खपत होती है। मकसद है कि 10 फीसदी तक इस बिक्री को घटाया जा सके। किसानों ने ठान लिया है कि वे पंजाब की तरह ज़हरीले रसायनों की खेती से गंभीर बीमारियों के प्रकोप से अपने इलाके को बचाएँगे। वर्मी कम्पोस्ट पर यह फिल्म मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस ‘द टेलीप्रिंटर’ ने तैयार की है। ‘द टेलीप्रिंटर’ सरकारी एंव ग़ैर सरकारी संगठनों के लिए किफ़ायती दाम पर बेहतर गुणवत्ता वाली शॉर्ट फ़िल्म और डॉक्यूमेंट्री तैयार करता है। आप इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं- 9425049501   
Submitted by HindiWater on Thu, 08/20/2020 - 08:29
Source:
India Water Portal
रेनवाटर हार्वेस्टिंग के लिए कैच द रेन अभियान
राष्ट्रीय जल मिशन ने मानसून से पहले वर्षा जल संग्रहण के ढांचों को तैयार करने हेतु राज्यों और हितधारकों को प्रोत्साहित करने के लिए पैन इंडिया के आधार पर ‘‘कैच द रेन’’ अभियान शुरू किया था। फरवरी 2020 को ‘कैच द रेन, जहां वह गिरती है, जब वह गिरती है’’ टैगलाइन के साथ शुरू किए गए इस अभियान के अंतर्गत चेकडैम, वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स, रूफटाॅप बनाने के साथ-साथ चैकडैम, तालाब, बांध में पानी का अधिक से अधिक भंडारण हो, इसके लिए वहां अतिक्रमण हटाने का भी अभियान चलाया जाएगा।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 12/25/2020 - 10:11
सूखे बुंदेलखंड़ में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  
जखनी गांववासियों की मेहनत का ही नतीजा है कि 2012 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने जिले के 470 गांवों में जखनी माॅडल को अपनाने का आदेश दे दिया। साथ ही नीति आयोग ने जखनी को देश का पहला ‘जल-ग्राम’ घोषित किया है। इसके अलावा जखनी गांव को माॅडल बना देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 
Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
Source:
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

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खासम-खास

बावडी: कुछ अनछुए पहलू

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
bavdi:-kuch-anachue-pahloo
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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बिहार में क्लीन गंगा का सच

Submitted by UrbanWater on Fri, 08/21/2020 - 11:33
Author
उमेश कुमार राय
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बिहार की नदियां
कहने को तो गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सरकारी स्तर पर ढेरों प्रयास हो रहे हैं, लेकिन सच तो ये है कि ये प्रयास जमीन पर उतरते नजर नहीं आ रहे हैं। इसकी ताजा मिसाल बिहार सरकार की तरफ से नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को दी गई रिपोर्ट में देखने को मिली है। ये रिपोर्ट नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा की तरफ से नेशनल ग्रीन ट्राइबुनल में जमा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार सरकार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स स्थापित करने में देर कर रही है और कई प्रोजेक्ट तो सालों से लंबित पड़े हुए हैं। 

धार में बन रहा खेती का अमृत

Submitted by UrbanWater on Thu, 08/20/2020 - 13:21
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Source
द टेलीप्रिंटर प्रोडक्शन
रासायनिक खेती के खिलाफ़ लामबंदी  
मध्यप्रदेश के धार जिले में अब रासायनिक खेती के खिलाफ़ गाँव-गाँव में लोग लामबंद हो रहे हैं। यहाँ केंचुओं के ज़रिए जैविक खेती के लिए बड़े पैमाने पर पहल की गई है। हैं। जिले में रबी और खरीफ फसलों में क़रीब 297 करोड़ के रासायनिक खाद की खपत होती है। मकसद है कि 10 फीसदी तक इस बिक्री को घटाया जा सके। किसानों ने ठान लिया है कि वे पंजाब की तरह ज़हरीले रसायनों की खेती से गंभीर बीमारियों के प्रकोप से अपने इलाके को बचाएँगे। वर्मी कम्पोस्ट पर यह फिल्म मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस ‘द टेलीप्रिंटर’ ने तैयार की है। ‘द टेलीप्रिंटर’ सरकारी एंव ग़ैर सरकारी संगठनों के लिए किफ़ायती दाम पर बेहतर गुणवत्ता वाली शॉर्ट फ़िल्म और डॉक्यूमेंट्री तैयार करता है। आप इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं- 9425049501   

रेनवाटर हार्वेस्टिंग के लिए कैच द रेन अभियान, संग्रहित होगी बारिश की हर बूंद

Submitted by HindiWater on Thu, 08/20/2020 - 08:29
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Source
India Water Portal
रेनवाटर हार्वेस्टिंग के लिए कैच द रेन अभियान
राष्ट्रीय जल मिशन ने मानसून से पहले वर्षा जल संग्रहण के ढांचों को तैयार करने हेतु राज्यों और हितधारकों को प्रोत्साहित करने के लिए पैन इंडिया के आधार पर ‘‘कैच द रेन’’ अभियान शुरू किया था। फरवरी 2020 को ‘कैच द रेन, जहां वह गिरती है, जब वह गिरती है’’ टैगलाइन के साथ शुरू किए गए इस अभियान के अंतर्गत चेकडैम, वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स, रूफटाॅप बनाने के साथ-साथ चैकडैम, तालाब, बांध में पानी का अधिक से अधिक भंडारण हो, इसके लिए वहां अतिक्रमण हटाने का भी अभियान चलाया जाएगा।

प्रयास

सूखे बुंदेलखंड में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  

Submitted by HindiWater on Fri, 12/25/2020 - 10:11
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सूखे बुंदेलखंड़ में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  
जखनी गांववासियों की मेहनत का ही नतीजा है कि 2012 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने जिले के 470 गांवों में जखनी माॅडल को अपनाने का आदेश दे दिया। साथ ही नीति आयोग ने जखनी को देश का पहला ‘जल-ग्राम’ घोषित किया है। इसके अलावा जखनी गांव को माॅडल बना देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है।

नोटिस बोर्ड

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
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Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

भविष्य में किस तरह पानी को किया जा सकता है सुरक्षित 

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
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वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

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