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खासम-खास

Submitted by UrbanWater on Fri, 08/07/2020 - 13:55
नदियाँ, फोटो: needpix.com
कन्टूरों के वितरण से कछार के ढ़ाल की जानकारी का अनुमान लग जाता है। टोपोशीट पर जहाँ दो कन्टूर पास-पास होते हैं वहाँ ढ़ाल बहुत अधिक होता है। खडी चढ़ाई होती है। पानी तेजी से बहकर निकल जाता है। उसके धरती में रिसने या धरती पर संचय के अवसर बहुत कम होते हैं। पानी के नीचे उतरने की गति के अधिक होने के कारण भूमि कटाव बहुत अधिक होता है। ऐसी जगह में भूमिगत जल संचय के लिए स्टेगर्ड कन्टूर ट्रेंच (Staggered contour trench) ही एकमात्र कारगर विकल्प होता है।

Content

Submitted by HindiWater on Wed, 08/05/2020 - 22:00
Source:
रवासन नदी में खनन से हजारों बीघा जमीन बंजर होने की कगार पर 
हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र से बरसाती नदी ‘रवासन’ बहती है। ये गंगा की सहायक नदी है। अभी तो इसे बरसाती नदी ही कहा जाता है, लेकिन कई दशक पहले इसमें पानी रहता था। रसूलपुर मीठीबेरी, मंगोलपुरा, पीली पढ़ाव, नलोवाला, गेंड़ीखाता, तपड़ोवाली आदि में गुल नहर द्वारा ही सिंचाई की जाती थी।
Submitted by UrbanWater on Wed, 08/05/2020 - 12:26
Source:
पहाड़ी शहरों में आसन्न है जल-संकट
अर्बन वाटर सिस्टम को ध्यान में रखते हुए Center For Ecology Development And Research के 4 देशों के 13 शहरों में शोध किए गए शोध में पता चला है कि हिमालयन शहरों में पानी की डिमांड और सप्लाई में गैप बढ़ता जा रहा है, साल 2050 तक हिंदुकुश हिमालय इलाकों में रहने वाले 50% लोग यहाँ के हिमालयी शहरों में रहने लगेंगे हिमालयी शहरों की आबादी बढ़ने से कंस्ट्रक्शन तेजी से होगा जिस वजह से हिमालयी रीजन के पानी के प्रमुख स्रोत स्प्रिंग्स सूखने लगेंगे ।
Submitted by UrbanWater on Tue, 08/04/2020 - 13:17
Source:
दरभंगा में टूटे तटबंध की मरम्मत में जुटे स्थानीय लोग
मोहम्मदीन किशनगंज के बहादुरगंज ब्लॉक के सतमेढ़ी गांव में रहते हैं। इस गांव के 40 घर नदी में समा चुके हैं और जो घर बच गए, उनमें घुटना भर पानी भरा हुआ है। लोग माल-असबाब लेकर सूखे स्थानों और रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।  स्थानीय जन प्रतिनिधि शाहबीर आलम ने कहा कि घर ध्वस्त होने के बाद वह प्रशासन के पास गए थे, तो प्रशासन ने सर्वे किया और मदद के नाम पर एक पॉलीथिन, चूड़ा, चना और चीनी दे दिया। इसके बाद से प्रशासन की तरफ से कोई भी इनकी हालत देखने नहीं आया।

प्रयास

Submitted by UrbanWater on Thu, 08/06/2020 - 10:14
Pani_Anna_with_Pond_Photo: Book of Achievers
85 वर्षीय कामे गौड़ा मूल रूप से कर्नाटक के मंडया जिले के देशनाडोडी गांव के रहने वाले हैं। वह चरवाहा समुदाय से आते हैं और छोटे से कमरे में रहते हैं। वह आर्थिक तौर पर गरीब हैं, लेकिन उनके दिल में मानव जाति का कल्याण करने का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। दरअसल, कामे गौड़ा जिस गांव में रहते हैं, वहां पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं रहता है। वहां के लोग किसी तरह अपने लिए पानी का इंतजाम तो कर लेते, लेकिन जंगली जानवरों और मवेशियों को पानी मिलना मुश्किल हो जाता था। इस संकट से निजात पाने के लिए अपने गांवों में अकेले 14 तालाब खोद डाले और जलसंकट से जूझते गांव को पानीदार बना दिया। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Tue, 07/07/2020 - 17:15
Source:
हेल्पलाइन नंबर
संजय झा ने कहा,ट्विटर पर @WRD_Bihar (जल संसाधान विभाग) को टैग करते हुए #HelloWRD के साथ लोग तटबंधों की जानकारी दे सकते हैं। सूचना मिलने पर विभाग तुरंत संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को सूचित करेगा और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।” “ट्विटर के अलावा टोल फ्री नं. 18003456145 पर कॉल कर भी जानकारी साझा की जा सकती है। ये नंबर 24X7 चालू है। इसके साथ ही एक ऐप भी लाया जा रहा है। इस ऐप के जरिए भी जानकारियां दी जा सकती हैं।”
Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 15:04
Source:
वेबिनारः कोरोनार संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 
कोरोना संकट और लॉकडाउन को हिमालय क्षेत्र के परिप्रेक्ष में समझने के लिए 21 मई, गुरुवार 4 बजे हमारे पेज Endangered Himalaya में इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक के साथ लाइव बातचीत में जुड़ें।  आप Zoom में https://bit.ly/2zmjhHs लिंक में पंजीकरण करके भी जुड़ सकते हैं। इसका आयोजन हिम धारा और रिवाइटललाइज़िग रेनफेड एग्रीकल्चर द्वारा किया जा रहा है।
Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 14:52
Source:
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ विषय पर सहगल फाउंडेशन और सीएडब्ल्यूएसटी ऑनलाइन वर्कशाप का आयोजन करने जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य वाॅश के प्रति लोगों को जागरुक करना और प्रेरित करना है। ये वेबिनार निन्मलिखित विषयों से संबंधित रहेगा - 

Latest

खासम-खास

नदी चेतना यात्रा : कन्टूर और जल संरक्षण के सम्बन्ध को समझने का प्रयास 

Submitted by UrbanWater on Fri, 08/07/2020 - 13:55
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
nadi-chetna-yatra-kantur-aur-jal-sanrakshan-kay-sambandh-ko-samajhane-kaa-prayas
नदियाँ, फोटो: needpix.com
कन्टूरों के वितरण से कछार के ढ़ाल की जानकारी का अनुमान लग जाता है। टोपोशीट पर जहाँ दो कन्टूर पास-पास होते हैं वहाँ ढ़ाल बहुत अधिक होता है। खडी चढ़ाई होती है। पानी तेजी से बहकर निकल जाता है। उसके धरती में रिसने या धरती पर संचय के अवसर बहुत कम होते हैं। पानी के नीचे उतरने की गति के अधिक होने के कारण भूमि कटाव बहुत अधिक होता है। ऐसी जगह में भूमिगत जल संचय के लिए स्टेगर्ड कन्टूर ट्रेंच (Staggered contour trench) ही एकमात्र कारगर विकल्प होता है।

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रवासन नदी में खनन से हजारों बीघा जमीन बंजर होने की कगार पर 

Submitted by HindiWater on Wed, 08/05/2020 - 22:00
haridwar-mein-khanan-se-banjar-hone-ki-kagaar-par-zameen
रवासन नदी में खनन से हजारों बीघा जमीन बंजर होने की कगार पर 
हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र से बरसाती नदी ‘रवासन’ बहती है। ये गंगा की सहायक नदी है। अभी तो इसे बरसाती नदी ही कहा जाता है, लेकिन कई दशक पहले इसमें पानी रहता था। रसूलपुर मीठीबेरी, मंगोलपुरा, पीली पढ़ाव, नलोवाला, गेंड़ीखाता, तपड़ोवाली आदि में गुल नहर द्वारा ही सिंचाई की जाती थी।

क्या पानी को तरस जाएंगे, मसूरी, नैनीताल, शिमला जैसे शहर

Submitted by UrbanWater on Wed, 08/05/2020 - 12:26
kya-pani-ko-taras-jayenge,-masuri-nainitaal-shimla-jaise-shahar
पहाड़ी शहरों में आसन्न है जल-संकट
अर्बन वाटर सिस्टम को ध्यान में रखते हुए Center For Ecology Development And Research के 4 देशों के 13 शहरों में शोध किए गए शोध में पता चला है कि हिमालयन शहरों में पानी की डिमांड और सप्लाई में गैप बढ़ता जा रहा है, साल 2050 तक हिंदुकुश हिमालय इलाकों में रहने वाले 50% लोग यहाँ के हिमालयी शहरों में रहने लगेंगे हिमालयी शहरों की आबादी बढ़ने से कंस्ट्रक्शन तेजी से होगा जिस वजह से हिमालयी रीजन के पानी के प्रमुख स्रोत स्प्रिंग्स सूखने लगेंगे ।

बिहार बाढ़: ’15 दिन पहले ढाई किलो चूड़ा दिया, उसी पर जिंदा हैं’

Submitted by UrbanWater on Tue, 08/04/2020 - 13:17
Author
उमेश कुमार राय
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दरभंगा में टूटे तटबंध की मरम्मत में जुटे स्थानीय लोग
मोहम्मदीन किशनगंज के बहादुरगंज ब्लॉक के सतमेढ़ी गांव में रहते हैं। इस गांव के 40 घर नदी में समा चुके हैं और जो घर बच गए, उनमें घुटना भर पानी भरा हुआ है। लोग माल-असबाब लेकर सूखे स्थानों और रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।  स्थानीय जन प्रतिनिधि शाहबीर आलम ने कहा कि घर ध्वस्त होने के बाद वह प्रशासन के पास गए थे, तो प्रशासन ने सर्वे किया और मदद के नाम पर एक पॉलीथिन, चूड़ा, चना और चीनी दे दिया। इसके बाद से प्रशासन की तरफ से कोई भी इनकी हालत देखने नहीं आया।

प्रयास

पानी अन्ना अकेले 14 तालाब खोदकर अपने गांव को बनाया पानीदार

Submitted by UrbanWater on Thu, 08/06/2020 - 10:14
Author
उमेश कुमार राय
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Pani_Anna_with_Pond_Photo: Book of Achievers
85 वर्षीय कामे गौड़ा मूल रूप से कर्नाटक के मंडया जिले के देशनाडोडी गांव के रहने वाले हैं। वह चरवाहा समुदाय से आते हैं और छोटे से कमरे में रहते हैं। वह आर्थिक तौर पर गरीब हैं, लेकिन उनके दिल में मानव जाति का कल्याण करने का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। दरअसल, कामे गौड़ा जिस गांव में रहते हैं, वहां पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं रहता है। वहां के लोग किसी तरह अपने लिए पानी का इंतजाम तो कर लेते, लेकिन जंगली जानवरों और मवेशियों को पानी मिलना मुश्किल हो जाता था। इस संकट से निजात पाने के लिए अपने गांवों में अकेले 14 तालाब खोद डाले और जलसंकट से जूझते गांव को पानीदार बना दिया। 

नोटिस बोर्ड

बिहार में बाढ़: आपके इलाके में तटबंध में दरार है तो ऐसे दीजिए जानकारी 

Submitted by UrbanWater on Tue, 07/07/2020 - 17:15
Author
उमेश कुमार राय
bihar-badh:-aapke-ilake-mein-tatabandh-mein-darar-hai-dijie-janakari
हेल्पलाइन नंबर
संजय झा ने कहा,ट्विटर पर @WRD_Bihar (जल संसाधान विभाग) को टैग करते हुए #HelloWRD के साथ लोग तटबंधों की जानकारी दे सकते हैं। सूचना मिलने पर विभाग तुरंत संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को सूचित करेगा और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।” “ट्विटर के अलावा टोल फ्री नं. 18003456145 पर कॉल कर भी जानकारी साझा की जा सकती है। ये नंबर 24X7 चालू है। इसके साथ ही एक ऐप भी लाया जा रहा है। इस ऐप के जरिए भी जानकारियां दी जा सकती हैं।”

वेबिनारः कोरोना संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 

Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 15:04
corona-and-lockdown-in-context-of-himalayas
वेबिनारः कोरोनार संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 
कोरोना संकट और लॉकडाउन को हिमालय क्षेत्र के परिप्रेक्ष में समझने के लिए 21 मई, गुरुवार 4 बजे हमारे पेज Endangered Himalaya में इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक के साथ लाइव बातचीत में जुड़ें।  आप Zoom में https://bit.ly/2zmjhHs लिंक में पंजीकरण करके भी जुड़ सकते हैं। इसका आयोजन हिम धारा और रिवाइटललाइज़िग रेनफेड एग्रीकल्चर द्वारा किया जा रहा है।

‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार

Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 14:52
WASH-for-healthy-homes-india
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ विषय पर सहगल फाउंडेशन और सीएडब्ल्यूएसटी ऑनलाइन वर्कशाप का आयोजन करने जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य वाॅश के प्रति लोगों को जागरुक करना और प्रेरित करना है। ये वेबिनार निन्मलिखित विषयों से संबंधित रहेगा - 

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