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खासम-खास

नदी मैनुअल - ताकि नदियाँ बहती रहें

Submitted by editorial on Sat, 12/15/2018 - 21:31
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नर्मदा नदीनर्मदा नदीपिछले पचास-साठ सालों से भारत की सभी नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी नजर आ रही है। हिमालयी नदियों में यह कमी अपेक्षाकृत थोड़ी कम है किन्तु भारतीय प्रायद्वीप के पहाड़ों, तालाबों, कुण्डों, जंगलों या झरनों से निकलने वाली अनेक छोटी नदियाँ मौसमी बनकर रह गईं हैं। भारतीय प्रायद्वीप की बड़ी नदियों यथा कावेरी, कृष्णा, ताप्ती, महानदी, नर्मदा और गोदावरी में भी मानसून के बाद का प्रवाह तेजी से कम हो रहा है।

Content

रोटी के लिये मलमूत्र की सफाई

Submitted by editorial on Mon, 10/01/2018 - 13:45
Source
द हिन्दू, 30 सितम्बर 2018
राजस्थान के बेहनारा गाँव में सूखा शौचालय साफ करती मुन्नीराजस्थान के बेहनारा गाँव में सूखा शौचालय साफ करती मुन्नी (फोटो साभार - द हिन्दू)राजस्थान का एक गाँव जो पेपर पर खुले में शौच से मुक्त घोषित हो चुका है, लेकिन स्वच्छ भारत मिशन के चार साल बाद भी रोटी के लिये मलमूत्र की सफाई करने को मजबूर हैं। गाँव की संकरी गली, जहाँ नालियों का जाल बिछा है। उन नालियों से मलमूत्र के अंश बाहर झाँक रहे हैं जो ऊँची जाति वाले लोगों के घरों में बने शौचालयों से निकले हैं।

एक किसान 52 बोरिंग

Submitted by editorial on Sun, 09/30/2018 - 18:23
Author
मनीष वैद्य
लोगों को पीने का पानी ढोकर लाना पड़ता हैलोगों को पीने का पानी ढोकर लाना पड़ता हैयह कहानी एक ऐसे गाँव की है, जहाँ पाँच हजार की आबादी में एक हजार से ज्यादा बोरवेल हैं। अब समय के साथ ये सब सूख चुके हैं। यह उस गाँव के एक किसान की कहानी भी है, जिसने अपने खेतों को पानी देने के लिये सब कुछ दाँव पर लगा दिया लेकिन जितनी ही कोशिश की गई, जमीन का पानी उतना ही गहरा धँस गया।

गंगा की प्राणरक्षा के लिये प्राणोत्सर्ग कर रहे स्वामी सानंद

Submitted by editorial on Fri, 09/28/2018 - 17:35
Source
सर्वोदय प्रेस सर्विस, सितम्बर 2018
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (फोटो साभार - डॉ. अनिल गौतम)देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों में से एक ‘आईआईटी’ कानपुर में प्राध्यापक रहे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल को सन्यास लेकर स्वामी सानंद का आध्यात्मिक दर्जा दिलाने वाली गंगामाई को बचाने के लिये अब वे पिछले करीब 100 दिन से अनशन पर हैं।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

आर्द्रभूमियों का विनाश है खतरनाक

Submitted by editorial on Fri, 02/01/2019 - 11:30
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया
वेटलैंड्स इंटरनेशनल लोगोवेटलैंड्स इंटरनेशनल लोगो भारत में आर्द्रभूमियों की उपलब्धता को नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता। ये पारिस्थितिकीय दृष्टि से अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण और यहाँ की भौगोलिक संरचना के अभिन्न अंग हैं। वर्ष 2011 के नेशनल वेटलैंड एटलस के अनुसार भारत का 4.63 प्रतिशत हिस्सा आर्द्रभूमि के अन्तर्गत आता है, वहीं देश में उपलब्ध कुल शुद्ध जल का 5 प्रतिशत इन्हीं क्षेत्रों में संरक्षित है।

अविरल-गंगा के लिये दिल्ली में क्रमिक अनशन शुरू

Submitted by editorial on Tue, 01/29/2019 - 17:10
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद (फोटो साभार: अमर उजाला)स्वामी आत्मबोधानंद (फोटो साभार: अमर उजाला) 28 जनवरी 2019, नई दिल्ली। अविरल गंगा के लिये आत्मबोधानंद जी के उपवास के 97 दिन होने पर पर जन्तर-मन्तर पर भी क्रमिक उपवास शुरू किया गया। अविरल-गंगा के लिये सानंद के 111 दिन के अखंड उपवास के बाद हुई मृत्यु के बाद 24 अक्टूबर, 2018 से 26 वर्षीय युवा सन्त ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी उपवास पर हैं।

अविरल गंगा के लिये जन्तर-मन्तर, दिल्ली में क्रमिक अनशन 28 जनवरी से

Submitted by editorial on Fri, 01/25/2019 - 13:04
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
Source
इंडिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार: दैनिक जागरण)स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार: दैनिक जागरण) वर्ष 1998 में हरिद्वार के जगजीतपुर गाँव में गंगा किनारे स्थापित ‘मातृसदन आश्रम’ गंगा-अविरलता के लिये बलिदानी-भूमि बन गई है। मातृसदन के परमाध्यक्ष शिवानंद सरस्वती और उनके संतों का गंगा प्रेम अदभुत है, गंगा के लिये अब तक तीन सन्तों का बलिदान हो चुका है।

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नदी मैनुअल - ताकि नदियाँ बहती रहें

Submitted by editorial on Sat, 12/15/2018 - 21:31
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नर्मदा नदीनर्मदा नदीपिछले पचास-साठ सालों से भारत की सभी नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी नजर आ रही है। हिमालयी नदियों में यह कमी अपेक्षाकृत थोड़ी कम है किन्तु भारतीय प्रायद्वीप के पहाड़ों, तालाबों, कुण्डों, जंगलों या झरनों से निकलने वाली अनेक छोटी नदियाँ मौसमी बनकर रह गईं हैं। भारतीय प्रायद्वीप की बड़ी नदियों यथा कावेरी, कृष्णा, ताप्ती, महानदी, नर्मदा और गोदावरी में भी मानसून के बाद का प्रवाह तेजी से कम हो रहा है।

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रोटी के लिये मलमूत्र की सफाई

Submitted by editorial on Mon, 10/01/2018 - 13:45
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द हिन्दू, 30 सितम्बर 2018
राजस्थान के बेहनारा गाँव में सूखा शौचालय साफ करती मुन्नीराजस्थान के बेहनारा गाँव में सूखा शौचालय साफ करती मुन्नी (फोटो साभार - द हिन्दू)राजस्थान का एक गाँव जो पेपर पर खुले में शौच से मुक्त घोषित हो चुका है, लेकिन स्वच्छ भारत मिशन के चार साल बाद भी रोटी के लिये मलमूत्र की सफाई करने को मजबूर हैं। गाँव की संकरी गली, जहाँ नालियों का जाल बिछा है। उन नालियों से मलमूत्र के अंश बाहर झाँक रहे हैं जो ऊँची जाति वाले लोगों के घरों में बने शौचालयों से निकले हैं।

एक किसान 52 बोरिंग

Submitted by editorial on Sun, 09/30/2018 - 18:23
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मनीष वैद्य
लोगों को पीने का पानी ढोकर लाना पड़ता हैलोगों को पीने का पानी ढोकर लाना पड़ता हैयह कहानी एक ऐसे गाँव की है, जहाँ पाँच हजार की आबादी में एक हजार से ज्यादा बोरवेल हैं। अब समय के साथ ये सब सूख चुके हैं। यह उस गाँव के एक किसान की कहानी भी है, जिसने अपने खेतों को पानी देने के लिये सब कुछ दाँव पर लगा दिया लेकिन जितनी ही कोशिश की गई, जमीन का पानी उतना ही गहरा धँस गया।

गंगा की प्राणरक्षा के लिये प्राणोत्सर्ग कर रहे स्वामी सानंद

Submitted by editorial on Fri, 09/28/2018 - 17:35
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सर्वोदय प्रेस सर्विस, सितम्बर 2018
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (फोटो साभार - डॉ. अनिल गौतम)देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों में से एक ‘आईआईटी’ कानपुर में प्राध्यापक रहे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल को सन्यास लेकर स्वामी सानंद का आध्यात्मिक दर्जा दिलाने वाली गंगामाई को बचाने के लिये अब वे पिछले करीब 100 दिन से अनशन पर हैं।

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गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
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मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

आर्द्रभूमियों का विनाश है खतरनाक

Submitted by editorial on Fri, 02/01/2019 - 11:30
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया
वेटलैंड्स इंटरनेशनल लोगोवेटलैंड्स इंटरनेशनल लोगो भारत में आर्द्रभूमियों की उपलब्धता को नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता। ये पारिस्थितिकीय दृष्टि से अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण और यहाँ की भौगोलिक संरचना के अभिन्न अंग हैं। वर्ष 2011 के नेशनल वेटलैंड एटलस के अनुसार भारत का 4.63 प्रतिशत हिस्सा आर्द्रभूमि के अन्तर्गत आता है, वहीं देश में उपलब्ध कुल शुद्ध जल का 5 प्रतिशत इन्हीं क्षेत्रों में संरक्षित है।

अविरल-गंगा के लिये दिल्ली में क्रमिक अनशन शुरू

Submitted by editorial on Tue, 01/29/2019 - 17:10
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद (फोटो साभार: अमर उजाला)स्वामी आत्मबोधानंद (फोटो साभार: अमर उजाला) 28 जनवरी 2019, नई दिल्ली। अविरल गंगा के लिये आत्मबोधानंद जी के उपवास के 97 दिन होने पर पर जन्तर-मन्तर पर भी क्रमिक उपवास शुरू किया गया। अविरल-गंगा के लिये सानंद के 111 दिन के अखंड उपवास के बाद हुई मृत्यु के बाद 24 अक्टूबर, 2018 से 26 वर्षीय युवा सन्त ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी उपवास पर हैं।

अविरल गंगा के लिये जन्तर-मन्तर, दिल्ली में क्रमिक अनशन 28 जनवरी से

Submitted by editorial on Fri, 01/25/2019 - 13:04
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इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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इंडिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार: दैनिक जागरण)स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार: दैनिक जागरण) वर्ष 1998 में हरिद्वार के जगजीतपुर गाँव में गंगा किनारे स्थापित ‘मातृसदन आश्रम’ गंगा-अविरलता के लिये बलिदानी-भूमि बन गई है। मातृसदन के परमाध्यक्ष शिवानंद सरस्वती और उनके संतों का गंगा प्रेम अदभुत है, गंगा के लिये अब तक तीन सन्तों का बलिदान हो चुका है।

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