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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

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Submitted by HindiWater on Fri, 12/06/2019 - 11:05
Source:
गंगा की रक्षा के लिए 15 दिसंबर से पद्मावती मातृसदन में करेंगी अनशन
मातृसदन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांगों के संदर्भ में एक पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक मांग पूरी नहीं हुई। जिस कारण मातृसदन की साध्वी पद्मावती ने 15 दिसंबर 2019 से 6 सूत्रीय मांगों को लेकर अनशन की घोषणा कर दी है। अनशन के बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भी अवगत करा दिया गया है। 
Submitted by HindiWater on Fri, 12/06/2019 - 09:57
Source:
डाउन टू अर्थ, दिसम्बर 2019
पृथ्वी पर अग्नि युग का आगाज
पतझड़ का एक और मौसम, और अधिक आग, और ज्यादा शरणार्थी और उनके खाक हुए घर। कैलिफोर्निया के लिए आग की लपटें पतझड़ का पर्याय बन चुकी हैं। जंगलों में भड़क रही यह अनियंत्रित आग तबाही को निमंत्रण दे रही है। इसकी लपटें पूरे इलाके को निगल रही हैं। लेकिन, अगर इंसानों की बात करें तो उनकी लगाई आग भी ऐसी घटनाओं  एक बड़ी वजह है।
Submitted by HindiWater on Thu, 12/05/2019 - 16:29
Source:
डाउन टू अर्थ, दिसम्बर 2019
विनाश को विकास मान हम खुशफहमियों के भ्रमजाल में हैं
गाँधीवादी रास्ते पर चलकर उत्तराखण्ड में चिपको आन्दोलन की अलख जगाने वाले 86 वर्षीय चंडीप्रसाद भट्ट देश के उन गिने चुने पर्यावरणविदों में शामिल हैं जिन्होंने दशकों पहले पर्यावरण पर मंडराते खतरों को भांप लिया था। भट्ट ने विनोबा भावे व जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले भूदान आन्दोलन व सामाजिक परिवर्तन के कई जन अभियानों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 11:33
लेविस पुग
लेविस पुग का जन्म पांस दिसंबर 1969 को इंग्लैंड के प्लाईमाउथ में हुआ था। बचपन से ही पर्यावरण के प्रति काफी लगाव होने के साथ ही तैराकी में काफी रूचि थी। अपनी इस रूचि को जीवन का अहम हिस्सा बनाया और वर्ष 1986 में पहली बार 17 वर्ष की आयु में तैराकी की। इसी के एक महीने बाद पुग ने राॅबेल आइलैंड से केपटाउन तक तैराकी की थी।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
Source:
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l
Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
Source:
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।
Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
Source:
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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खासम-खास

नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

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गंगा की रक्षा के लिए 15 दिसंबर से पद्मावती मातृसदन में करेंगी अनशन

Submitted by HindiWater on Fri, 12/06/2019 - 11:05
गंगा की रक्षा के लिए 15 दिसंबर से पद्मावती मातृसदन में करेंगी अनशन
मातृसदन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांगों के संदर्भ में एक पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक मांग पूरी नहीं हुई। जिस कारण मातृसदन की साध्वी पद्मावती ने 15 दिसंबर 2019 से 6 सूत्रीय मांगों को लेकर अनशन की घोषणा कर दी है। अनशन के बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भी अवगत करा दिया गया है। 

पृथ्वी पर अग्नि युग का आगाज

Submitted by HindiWater on Fri, 12/06/2019 - 09:57
Source
डाउन टू अर्थ, दिसम्बर 2019
पृथ्वी पर अग्नि युग का आगाज
पतझड़ का एक और मौसम, और अधिक आग, और ज्यादा शरणार्थी और उनके खाक हुए घर। कैलिफोर्निया के लिए आग की लपटें पतझड़ का पर्याय बन चुकी हैं। जंगलों में भड़क रही यह अनियंत्रित आग तबाही को निमंत्रण दे रही है। इसकी लपटें पूरे इलाके को निगल रही हैं। लेकिन, अगर इंसानों की बात करें तो उनकी लगाई आग भी ऐसी घटनाओं  एक बड़ी वजह है।

विनाश को विकास मान हम खुशफहमियों के भ्रमजाल में हैं - चंडीप्रसाद भट्ट

Submitted by HindiWater on Thu, 12/05/2019 - 16:29
Source
डाउन टू अर्थ, दिसम्बर 2019
विनाश को विकास मान हम खुशफहमियों के भ्रमजाल में हैं
गाँधीवादी रास्ते पर चलकर उत्तराखण्ड में चिपको आन्दोलन की अलख जगाने वाले 86 वर्षीय चंडीप्रसाद भट्ट देश के उन गिने चुने पर्यावरणविदों में शामिल हैं जिन्होंने दशकों पहले पर्यावरण पर मंडराते खतरों को भांप लिया था। भट्ट ने विनोबा भावे व जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले भूदान आन्दोलन व सामाजिक परिवर्तन के कई जन अभियानों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

प्रयास

लेविस पुग ने अंटार्कटिका की पिघलती बर्फ के बीच तैरकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 11:33
लेविस पुग
लेविस पुग का जन्म पांस दिसंबर 1969 को इंग्लैंड के प्लाईमाउथ में हुआ था। बचपन से ही पर्यावरण के प्रति काफी लगाव होने के साथ ही तैराकी में काफी रूचि थी। अपनी इस रूचि को जीवन का अहम हिस्सा बनाया और वर्ष 1986 में पहली बार 17 वर्ष की आयु में तैराकी की। इसी के एक महीने बाद पुग ने राॅबेल आइलैंड से केपटाउन तक तैराकी की थी।

नोटिस बोर्ड

मीडिया महोत्सव-2020

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन

Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।

पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला

Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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