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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Wed, 11/17/2021 - 11:12
Source:
6 साल में लगा डाले 40 हजार पेड
इस हृदयविदारक घटना नें चंदन को अंदर ही अंदर से तोडकर रख दिया था। कुछ महीनों तक उन्हें कुछ समझ में नहीं आया की क्या करना है। लेकिन माँ की प्रेरणा से चंदन नें अपनी माटी थाती की सेवा करने की ठानी। चंदन बताते हैं कि उनकी माँ बचपन से ही उनकी प्रेरणा रही है। जब भी मैं एक नया पौधा लगाता हूँ तो जरूर पहले अपनी माँ का स्मरण करता हूँ। आज जो भी हूँ अपनी माँ की प्रेरणा और आशीर्वाद से हूँ। आजकल वे गांव की महिलाओं को अपने मवेशियों के चारे और घास के लिए दूर न जाना पडे इसलिए वो गांव के निकट बांज का जंगल तैयार करने में जुटे हुए हैं जिसके लिए बांज के पौधे रोपे गयें हैं और चाल खाल बनाकर पानी का संग्रहण किया गया ताकि पेड़ो के लिए नमी बनी रही। निकट भविष्य में जब ये जंगल तैयार होगा तो महिलाओं को चारे के लिए दूर नहीं जाना पडेगा।
Submitted by Shivendra on Mon, 11/15/2021 - 08:33
Source:
जल संरक्षण क्या है
जल एक अमूल्य वस्तु है जिसके बिना जीवन  की कल्पना नही की जा सकती है क्योंकि जल ही जीवन है। जल हमारी  कई गतिविधियों के जरूरी होता है । हमारे धरती  पर केवल 71% पानी है लेकिन हम  सिर्फ 1 प्रतिशत   पानी का ही उपयोग करते है । क्योंकि बाकि जल पीने योग नही है। इसलिये जल संरक्षण की आवश्यकता पड़ती है।
Submitted by Shivendra on Sat, 11/13/2021 - 11:20
Source:
यूसर्क
भूजल रिचार्ज, जल प्रबंधन एवम् जल गुणवत्ता पर प्रशिक्षण
राजकीय इंटर कॉलेज गजा, नरेंद्र नगर ब्लॉक, जिला टिहरी गढ़वाल   में  12 नवंबर  को आयोजित 'जल कार्यशाला' भू जल रिचार्ज, प्रबंधन  और जल गुणवत्ता अध्ययन विषय पर वैज्ञानिक डॉ भवतोष शर्मा द्वारा  हैंड्स ऑन ट्रेनिग  के बारे में बताया गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन यूसर्क, लक्ष्य संस्था और नमामि गंगे के संयुक्त तत्वाधान किया गया।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
Source:
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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पहाड़ का 'बेशकीमती चंदन' 6 साल में लगा डाले 40 हजार पेड..

Submitted by Shivendra on Wed, 11/17/2021 - 11:12
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6 साल में लगा डाले 40 हजार पेड
इस हृदयविदारक घटना नें चंदन को अंदर ही अंदर से तोडकर रख दिया था। कुछ महीनों तक उन्हें कुछ समझ में नहीं आया की क्या करना है। लेकिन माँ की प्रेरणा से चंदन नें अपनी माटी थाती की सेवा करने की ठानी। चंदन बताते हैं कि उनकी माँ बचपन से ही उनकी प्रेरणा रही है। जब भी मैं एक नया पौधा लगाता हूँ तो जरूर पहले अपनी माँ का स्मरण करता हूँ। आज जो भी हूँ अपनी माँ की प्रेरणा और आशीर्वाद से हूँ। आजकल वे गांव की महिलाओं को अपने मवेशियों के चारे और घास के लिए दूर न जाना पडे इसलिए वो गांव के निकट बांज का जंगल तैयार करने में जुटे हुए हैं जिसके लिए बांज के पौधे रोपे गयें हैं और चाल खाल बनाकर पानी का संग्रहण किया गया ताकि पेड़ो के लिए नमी बनी रही। निकट भविष्य में जब ये जंगल तैयार होगा तो महिलाओं को चारे के लिए दूर नहीं जाना पडेगा।

जल संरक्षण क्या है

Submitted by Shivendra on Mon, 11/15/2021 - 08:33
jal sanrakshan kya ha
जल संरक्षण क्या है
जल एक अमूल्य वस्तु है जिसके बिना जीवन  की कल्पना नही की जा सकती है क्योंकि जल ही जीवन है। जल हमारी  कई गतिविधियों के जरूरी होता है । हमारे धरती  पर केवल 71% पानी है लेकिन हम  सिर्फ 1 प्रतिशत   पानी का ही उपयोग करते है । क्योंकि बाकि जल पीने योग नही है। इसलिये जल संरक्षण की आवश्यकता पड़ती है।

भूजल रिचार्ज, जल प्रबंधन एवम् जल गुणवत्ता पर प्रशिक्षण

Submitted by Shivendra on Sat, 11/13/2021 - 11:20
bhujal-recharge,-jal-prabandhan-evam-jal-gunavatta-per-prashikshan
Source
यूसर्क
भूजल रिचार्ज, जल प्रबंधन एवम् जल गुणवत्ता पर प्रशिक्षण
राजकीय इंटर कॉलेज गजा, नरेंद्र नगर ब्लॉक, जिला टिहरी गढ़वाल   में  12 नवंबर  को आयोजित 'जल कार्यशाला' भू जल रिचार्ज, प्रबंधन  और जल गुणवत्ता अध्ययन विषय पर वैज्ञानिक डॉ भवतोष शर्मा द्वारा  हैंड्स ऑन ट्रेनिग  के बारे में बताया गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन यूसर्क, लक्ष्य संस्था और नमामि गंगे के संयुक्त तत्वाधान किया गया।

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
pratirodh-ka-cinema-char-divasiya-cinema-karyashala
चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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