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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Sat, 02/08/2020 - 13:15
खेती किसानी के लिए बजट 2020
कृषि में बजट की जरुरत इस तरह है जैसे मानव को वायु की क्योंकि वर्तमान समय में जब उद्योगीकरण और शहरीकरण अपनी चरम सीमा पर है जिसकी वजह से किसानी जमीन सिकुड़ती जा रही है और किसानों को अपनी फसल की आधी रकम भी नहीं मिल पाती, वहां सरकार द्वारा आवंटित बजट और योजनाओं से किसानों को बहुत मदद मिलती है।

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Submitted by UrbanWater on Fri, 07/12/2019 - 15:49
Source:
बुंदेलखंड कनेक्ट, जून 2019 
river

लापरवाही की वजह से सिंघश्रोता नदी सूख गई है।

एक महिला ने कहा कि भइया जी! जबसे मिड डे मील आया, तब से जलधाराएं सूख गईं। नदी किनारे लगे पेड़ गांव प्रधान ने काट दिए और उन लकड़ियों से खाना बनवाया। जिन जड़ों से जलधाराएं आती थीं, पेड़ न होने की वजह से जलधाराएं खत्म हो गईं। इन्हीं में एक महिला बोली, हमार नदी को चेकडैम ने मार दिया। हमारे साथ चेकडैम से नदी सुरक्षित करने वाली विचारधारा के जो साथ थे सब ये बात सुनकर अवाक रह गये। उस महिला ने बताया एक किलोमीटर के अंदर दो बड़े-बड़े चेकडैम बना दिए और नदी बहुत छोटी है। बरसात में जो मिट्टी आती है वो नदी में जमा हो गई है और सब जलस्रोत बंद हो गए हैं। जब से नदी सूखी है तब से सबसे बड़ा दुख पानी का है। जानवर प्यार से मर रहे हैं, केवल एक हैंडपंप है। वो हैंडपंप कितने घरों को पानी दे पायेगा। इस वजह से सब परेशान हैं, लेकिन सुनने वाला कौन है? कोई नहीं सुनता हमार दर्द न सरकार और न ही प्रधान।
Submitted by HindiWater on Fri, 07/12/2019 - 12:21
Source:
आई नेक्स्ट, 12 जुलाई 2019
our apathy creates water scarcity
हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या। विडंबना है कि मानसून के बादल घिरे होने के बावजूद देश में पानी सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। इस संकट के शहरों और गाँवों में अलग-अलग रूप हैं। गाँवों में यह खेती और सिंचाई के सामने खड़े संकट के रूप में है, तो शहरों में पीने के पानी की किल्लत के रूप में। पेयजल की समस्या गांवों में भी है, पर चूंकि मीडिया शहरों पर केन्द्रित है, इसलिए शहरी समस्या ज्यादा भयावह रूप में सामने आ रही है। हम पेयजल के बारे में ही सुन रहे हैं, इसलिए खेती से जुड़े मसले सामने नहीं आ रहे हैं, जबकि इस समस्या का वास्तविक रूप इन दोनों को साथ रखकर ही समझा जा सकता है।
Submitted by HindiWater on Fri, 07/12/2019 - 11:05
Source:
दैनिक जागरण, 12 जुलाई 2019 
delhi

दूर होगी दिल्ली की पानी की समस्या।

यमुना के फ्लड प्लेन (डूब) क्षेत्र में बाढ़ के पानी के संग्रहण के लिए किराये पर जमीन लेने की योजना को दिल्ली सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद किसानों से बातचीत शुरू कर दी गई है, ताकि किसानों से जमीन लेकर जल्दी उसमें छोटे-छोटे तालाब बनाए जा सकें। इस साल शुरुआत निःसंदेह छोटे स्तर पर होगी और 50 एकड़ में करीब 1575 मिलियन गेलन पानी का संग्रहण होगा, लेकिन जल बोर्ड द्वारा कराये गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि यमुना रिवर बेड में जल संग्रहण की अपार क्षमता है। मानसून में एक दिन में यमुना में बाढ़ का जितना पानी आता है, यदि उसे संग्रहण कर लिया जाए तो दिल्ली में पूरे साल की पेयजल की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। यही वजह है कि इस योजना पर दिल्ली सरकार व अन्य सरकारी एजेंसियां तेजी से अमल में जुटी हुई हैं।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/10/2020 - 16:22
पीठ पर प्लास्टिक कचरे से भरे बोरो को लादे हुए प्रदीप सांगवान।
प्रदीप सांगवान हिमाचल प्रदेश में न केवल एक पेशेवर ट्रैकर हैं, बल्कि ट्रैकिंग के दौरान रास्ते पर दिखने वाले प्लास्टिक कूड़े को भी एकत्रित करते हैं। अपने संघर्षपूर्ण जीवन में प्रदीप अभी तक पहाड़ों से चार लाख किलोग्राम से ज्यादा प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर चुके हैं। इस कचरे से बनी बिजली से कई गांव रोशन भी हो रहे हैं। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by RuralWater on Mon, 02/17/2020 - 15:35
Source:
अब खतरा मात्र नदी नही, नदी घाटियों पर सामने दिखता है। नदी घाटियों का व्यवसायिकरण हो रहा है। बांधों की बात तो पीछे छोड़े, पूरी नदी घाटी, नदी जोड़ परियोजना से प्रभावित होने की बात है; जिसका न केवल मानव बल्कि पूरी प्रकृति पर स्थानीय देशी और वैश्विक प्रभाव भी हो रहा है।
Submitted by HindiWater on Mon, 02/10/2020 - 10:51
Source:
जल संसाधन प्रबंधन पर पुणे में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
राष्ट्रीय जल अकादमी, केन्द्रीय जल आयोग, पुणे में “जल संसाधन प्रबंधन पर प्रशिक्षण.सह.कार्यशाला” विषय पर 26-27 मार्च को गैर सरकारी संगठनों और मीडिया कर्मियों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में पंजीकरण कराने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
Source:
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

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खासम-खास

खेती किसानी के लिए बजट 2020

Submitted by HindiWater on Sat, 02/08/2020 - 13:15
खेती किसानी के लिए बजट 2020
कृषि में बजट की जरुरत इस तरह है जैसे मानव को वायु की क्योंकि वर्तमान समय में जब उद्योगीकरण और शहरीकरण अपनी चरम सीमा पर है जिसकी वजह से किसानी जमीन सिकुड़ती जा रही है और किसानों को अपनी फसल की आधी रकम भी नहीं मिल पाती, वहां सरकार द्वारा आवंटित बजट और योजनाओं से किसानों को बहुत मदद मिलती है।

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बुंदेलखंड की जीवित हुई इस नदी ने दम तोड़ दिया

Submitted by UrbanWater on Fri, 07/12/2019 - 15:49
Source
बुंदेलखंड कनेक्ट, जून 2019 
river

लापरवाही की वजह से सिंघश्रोता नदी सूख गई है। लापरवाही की वजह से सिंघश्रोता नदी सूख गई है।

एक महिला ने कहा कि भइया जी! जबसे मिड डे मील आया, तब से जलधाराएं सूख गईं। नदी किनारे लगे पेड़ गांव प्रधान ने काट दिए और उन लकड़ियों से खाना बनवाया। जिन जड़ों से जलधाराएं आती थीं, पेड़ न होने की वजह से जलधाराएं खत्म हो गईं। इन्हीं में एक महिला बोली, हमार नदी को चेकडैम ने मार दिया। हमारे साथ चेकडैम से नदी सुरक्षित करने वाली विचारधारा के जो साथ थे सब ये बात सुनकर अवाक रह गये। उस महिला ने बताया एक किलोमीटर के अंदर दो बड़े-बड़े चेकडैम बना दिए और नदी बहुत छोटी है। बरसात में जो मिट्टी आती है वो नदी में जमा हो गई है और सब जलस्रोत बंद हो गए हैं। जब से नदी सूखी है तब से सबसे बड़ा दुख पानी का है। जानवर प्यार से मर रहे हैं, केवल एक हैंडपंप है। वो हैंडपंप कितने घरों को पानी दे पायेगा। इस वजह से सब परेशान हैं, लेकिन सुनने वाला कौन है? कोई नहीं सुनता हमार दर्द न सरकार और न ही प्रधान।

हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या

Submitted by HindiWater on Fri, 07/12/2019 - 12:21
Source
आई नेक्स्ट, 12 जुलाई 2019
our apathy creates water scarcity
हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या।हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या। विडंबना है कि मानसून के बादल घिरे होने के बावजूद देश में पानी सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। इस संकट के शहरों और गाँवों में अलग-अलग रूप हैं। गाँवों में यह खेती और सिंचाई के सामने खड़े संकट के रूप में है, तो शहरों में पीने के पानी की किल्लत के रूप में। पेयजल की समस्या गांवों में भी है, पर चूंकि मीडिया शहरों पर केन्द्रित है, इसलिए शहरी समस्या ज्यादा भयावह रूप में सामने आ रही है। हम पेयजल के बारे में ही सुन रहे हैं, इसलिए खेती से जुड़े मसले सामने नहीं आ रहे हैं, जबकि इस समस्या का वास्तविक रूप इन दोनों को साथ रखकर ही समझा जा सकता है।

दूर होगी दिल्ली में पानी की समस्या

Submitted by HindiWater on Fri, 07/12/2019 - 11:05
Source
दैनिक जागरण, 12 जुलाई 2019 
delhi

दूर होगी दिल्ली की पानी की समस्या।दूर होगी दिल्ली की पानी की समस्या।

यमुना के फ्लड प्लेन (डूब) क्षेत्र में बाढ़ के पानी के संग्रहण के लिए किराये पर जमीन लेने की योजना को दिल्ली सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद किसानों से बातचीत शुरू कर दी गई है, ताकि किसानों से जमीन लेकर जल्दी उसमें छोटे-छोटे तालाब बनाए जा सकें। इस साल शुरुआत निःसंदेह छोटे स्तर पर होगी और 50 एकड़ में करीब 1575 मिलियन गेलन पानी का संग्रहण होगा, लेकिन जल बोर्ड द्वारा कराये गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि यमुना रिवर बेड में जल संग्रहण की अपार क्षमता है। मानसून में एक दिन में यमुना में बाढ़ का जितना पानी आता है, यदि उसे संग्रहण कर लिया जाए तो दिल्ली में पूरे साल की पेयजल की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। यही वजह है कि इस योजना पर दिल्ली सरकार व अन्य सरकारी एजेंसियां तेजी से अमल में जुटी हुई हैं।

प्रयास

प्रदीप के प्रयास से पहाड़ के कचरे से गांवों को मिल रही बिजली

Submitted by HindiWater on Mon, 02/10/2020 - 16:22
पीठ पर प्लास्टिक कचरे से भरे बोरो को लादे हुए प्रदीप सांगवान।
प्रदीप सांगवान हिमाचल प्रदेश में न केवल एक पेशेवर ट्रैकर हैं, बल्कि ट्रैकिंग के दौरान रास्ते पर दिखने वाले प्लास्टिक कूड़े को भी एकत्रित करते हैं। अपने संघर्षपूर्ण जीवन में प्रदीप अभी तक पहाड़ों से चार लाख किलोग्राम से ज्यादा प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर चुके हैं। इस कचरे से बनी बिजली से कई गांव रोशन भी हो रहे हैं। 

नोटिस बोर्ड

नदी घाटी विचार मंच

Submitted by RuralWater on Mon, 02/17/2020 - 15:35
अब खतरा मात्र नदी नही, नदी घाटियों पर सामने दिखता है। नदी घाटियों का व्यवसायिकरण हो रहा है। बांधों की बात तो पीछे छोड़े, पूरी नदी घाटी, नदी जोड़ परियोजना से प्रभावित होने की बात है; जिसका न केवल मानव बल्कि पूरी प्रकृति पर स्थानीय देशी और वैश्विक प्रभाव भी हो रहा है।

जल संसाधन प्रबंधन पर पुणे में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by HindiWater on Mon, 02/10/2020 - 10:51
जल संसाधन प्रबंधन पर पुणे में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
राष्ट्रीय जल अकादमी, केन्द्रीय जल आयोग, पुणे में “जल संसाधन प्रबंधन पर प्रशिक्षण.सह.कार्यशाला” विषय पर 26-27 मार्च को गैर सरकारी संगठनों और मीडिया कर्मियों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में पंजीकरण कराने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

मीडिया महोत्सव-2020

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

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