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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

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Submitted by Editorial Team on Wed, 03/30/2022 - 19:36
Source:
इंडिया साइंस वायर
समुद्री कचरे की एक प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: फ्लिकर)
समुद्र तटीय निगरानी से जुड़ी एक देशव्यापी पहल के अंतर्गत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से सम्बद्ध राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (एनसीसीआर), चेन्नई द्वारा नियमित अंतराल पर देश के विभिन्न समुद्र तटों पर तटीय क्षेत्र की सफाई से जुड़ी गतिविधियां की जा रही हैं। वर्ष 2018 से 2021 के दौरान समुद्री कचरे के आकलन के लिए यह पहल की गई है। 
Submitted by Editorial Team on Wed, 03/30/2022 - 11:49
Source:
मीडिया मीमांसा, अक्टूबर-दिसम्बर 2017, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
पर्यावरणीय नैतिकता:  स्वच्छ भारत अभियान और गांधीवादी दृष्टिकोण (नागपुर के विशेष संदर्भ मेंः मीडिया की भूमिका)
नागपुर शहर हमेशा ही चर्चा के केंद्र में रहा है। वर्तमान में इसे महाराष्ट्र की उप-राजधानी और संतरा शहर के नाम से भी लोग जानते हैं। विदर्भ प्रांत में शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका नाम अग्रणी है। चूंकि सेवाग्राम गांधीजी की कर्मभूमि (1933 में गांधी जी शेगांव आए और फिर उन्होंने इसका नाम सेवाग्राम रखा) से बहुत अधिक दूरी न होने के कारण इस क्षेत्र में भी महात्मा गांधी का स्वच्छता अभियान पहुँचा। फिर भी जैसे हर काम का 100 प्रतिशत काम नहीं होता, ठीक यहाँ भी वही हुआ प्रतीत होता है। महात्मा गांधीजी का दो बातों पर बहुत ज्यादा जोर रहा- एक समय का प्रबंधन और दूसरा सफाई। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक कॉलेज के विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी को पत्र लिखकर पूछा था कि
Submitted by Editorial Team on Tue, 03/29/2022 - 08:58
Source:
मीडिया मीमांसा, अक्टूबर-दिसम्बर 2017, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
पानी-पर्यावरण शिक्षण में मास मीडिया की भूमिका (Role of mass media in water-environment education)
भारत में टिहरी बांध यह उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में भागीरथी और भिलगना नदी पर बना है। एशिया का सबसे बड़ा बाँध एवं विश्व का पांचवा सर्वाधिक ऊँचा बाँध है। इस टिहरी बाँध की ऊँचाई 260.5 मीटर की है। इस बांध का मुख्य उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और विकास की प्रक्रिया को गतिमान करना है। इस परियोजना से 5200 हेक्टर भूमि जिसमें 1600 हेक्टर कृषि भूमि होगी, जो जलाशय से निमित्त होगी। भूकम्प रहित क्षेत्र में टिहरी बाँध आता है यदि भूकम्प आया तो टिहरी बांध टूट सकता है, इसलिए इस बाँध का विरोध किया गया। विद्युत निर्मिती के लिए इस परियोजना का निर्माण किया गया। टिहरी जलविद्युत परियोजना से प्रतिवर्ष 1000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
Source:
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।
Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
Source:
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे
Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
Source:
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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खासम-खास

केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण  : कुछ तथ्य, कुछ जानकारियां

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
kendriya-bhoomi-jal-pradhikaran-:-kuchh-tathy,-kuchh-jankariyan
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

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​समुद्री कचरे में 50 प्रतिशत एकल उपयोग प्लास्टिक

Submitted by Editorial Team on Wed, 03/30/2022 - 19:36
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इंडिया साइंस वायर
समुद्री कचरे की एक प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: फ्लिकर)
समुद्र तटीय निगरानी से जुड़ी एक देशव्यापी पहल के अंतर्गत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से सम्बद्ध राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (एनसीसीआर), चेन्नई द्वारा नियमित अंतराल पर देश के विभिन्न समुद्र तटों पर तटीय क्षेत्र की सफाई से जुड़ी गतिविधियां की जा रही हैं। वर्ष 2018 से 2021 के दौरान समुद्री कचरे के आकलन के लिए यह पहल की गई है। 

पर्यावरणीय नैतिकता:  स्वच्छ भारत अभियान और गांधीवादी दृष्टिकोण (नागपुर के विशेष संदर्भ मेंः मीडिया की भूमिका)

Submitted by Editorial Team on Wed, 03/30/2022 - 11:49
Source
मीडिया मीमांसा, अक्टूबर-दिसम्बर 2017, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
पर्यावरणीय नैतिकता:  स्वच्छ भारत अभियान और गांधीवादी दृष्टिकोण (नागपुर के विशेष संदर्भ मेंः मीडिया की भूमिका)
नागपुर शहर हमेशा ही चर्चा के केंद्र में रहा है। वर्तमान में इसे महाराष्ट्र की उप-राजधानी और संतरा शहर के नाम से भी लोग जानते हैं। विदर्भ प्रांत में शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका नाम अग्रणी है। चूंकि सेवाग्राम गांधीजी की कर्मभूमि (1933 में गांधी जी शेगांव आए और फिर उन्होंने इसका नाम सेवाग्राम रखा) से बहुत अधिक दूरी न होने के कारण इस क्षेत्र में भी महात्मा गांधी का स्वच्छता अभियान पहुँचा। फिर भी जैसे हर काम का 100 प्रतिशत काम नहीं होता, ठीक यहाँ भी वही हुआ प्रतीत होता है। महात्मा गांधीजी का दो बातों पर बहुत ज्यादा जोर रहा- एक समय का प्रबंधन और दूसरा सफाई। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक कॉलेज के विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी को पत्र लिखकर पूछा था कि

पानी-पर्यावरण शिक्षण में मास मीडिया की भूमिका (Role of mass media in water-environment education)

Submitted by Editorial Team on Tue, 03/29/2022 - 08:58
Source
मीडिया मीमांसा, अक्टूबर-दिसम्बर 2017, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
पानी-पर्यावरण शिक्षण में मास मीडिया की भूमिका (Role of mass media in water-environment education)
भारत में टिहरी बांध यह उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में भागीरथी और भिलगना नदी पर बना है। एशिया का सबसे बड़ा बाँध एवं विश्व का पांचवा सर्वाधिक ऊँचा बाँध है। इस टिहरी बाँध की ऊँचाई 260.5 मीटर की है। इस बांध का मुख्य उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और विकास की प्रक्रिया को गतिमान करना है। इस परियोजना से 5200 हेक्टर भूमि जिसमें 1600 हेक्टर कृषि भूमि होगी, जो जलाशय से निमित्त होगी। भूकम्प रहित क्षेत्र में टिहरी बाँध आता है यदि भूकम्प आया तो टिहरी बांध टूट सकता है, इसलिए इस बाँध का विरोध किया गया। विद्युत निर्मिती के लिए इस परियोजना का निर्माण किया गया। टिहरी जलविद्युत परियोजना से प्रतिवर्ष 1000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

प्रयास

उदयपुर के इस गांव को वेटलैंड घोषित किया जाना तय

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
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राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
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Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित

Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
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भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे

स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
swasth-jeevan-ke-liye-gharelu-jal-upchar-or-swachhta-vyavahar-mein-parivartan-par-tin-divasiy-prashikshan-karyashala
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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