नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

Content

Submitted by Shivendra on Mon, 06/07/2021 - 16:21
Source:
विश्व मे पानी के लिये 265 लड़ाइयां हुई
जिसके बिना प्रत्येक जीव का जीवित रह पाना असंभव है, पृथ्वी पर  पाए जाने वाला एक महत्वपूर्ण संसाधन है. जल को अंग्रेजी भाषा में वाटर और भारतीय आम भाषा में पानी कहकर संबोधित करते हैं. जल दो तत्वों,  हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिल कर बना है.जी हां दोस्तों, आज का हमारा लेख पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीवित प्राणियों के जीवन में अहम स्थान रखने वाले संसाधन से जुड़ा है. जिसकी कीमत का अंदाजा महज इस एक कथन से लगाया जा सकता है ' जल ही जीवन है'. आज हम आपको पानी से जुड़े वे सभी रोचक तथ्य (water facts) बताने जा रहे हैं जो आपने आज से पहले शायद ही कही पढ़े या जानें होंगे. तो देर ना करते हुए चलिए जानते है
Submitted by Shivendra on Sat, 06/05/2021 - 15:22
Source:
नदी विज्ञान की कसौटी पर ललितपुर जिले की ओडी नदी के पुनर्जीवन की कहानी
ओडी नदी के पुनर्जीवन पर 87 लाख रुपये खर्च किए गए। इस राशि में पंचायत का योगदान 23 लाख रुपये था। बाकी राशि मनरेगा मद से जुटाई गई। सन 2019 की बरसात के बाद उदगम के निकट ऊँचाई पर स्थित मदनपुर और दारुटोला ग्रामों को छोडकर बाकी के नदी मार्ग में नदी लबालब भर गई और सदानीरा हो गई। लगभग 250 कुओं की क्षमता में वृद्धि हुई। ओडी नदी के पुनर्जीवन से लगभग 3500 परिवार लाभान्वित हुए। उनकी सालाना आय 40,200 से बढ़कर 68,000 हो गई। ओडी नदी का लगभग 2428 हैक्टर रकबा दो फसली हो गया। गाद हटाना, नदी की तली को गहरा करना और तटबन्धों पर वृक्षारोपण ने नई इबारत लिख दी। प्रयोग को सराहा गया और वह सम्मानित भी हुआ। लोगों में सन्देश गया कि यह प्रयास लाभदायक है और उसे दोहराया जा सकता है। इस अनुक्रम में उपरोक्त प्रयास को नदी विज्ञान, जल उपलब्धता की निरन्तरता और गाद जमाव से मुक्ति के नजरिए से परखा जाना चाहिए। सबसे पहले बात नदी विज्ञान के नजरिए से प्रयास की। 
Submitted by Shivendra on Sat, 06/05/2021 - 13:20
Source:
वृक्षो के बारे में कुछ रोचक तथ्य
पेड़ो को अपने घर के आस-पास लगाने से वातावरण शुद्ध रहता है.एक स्वस्थ पेड़ एक दिन में 100 गैलन पानी पर्यावरण में उत्सर्जित करते है इसलिए पेड़ बारिश में सबसे ज्यादा सहायक है.कुछ पेड़ हजारो साल तक जीवित रहते है.एक इंसान को पूरा जीवन ऑक्सीजन लेने के लिए करीब 18 पेड़ो की जरूरत होती है. क्या आपने अपने हिस्से के पेड़ लगाये है.एक पुरी तरह उगा हुआ वृक्ष , एक नये लगाये पौधे से 70 गुना ज्यादा पर्यावरण यानी वातावरण को साफ़ रखता है.दुनिया के 80 प्रतिशत जंगल काट दिए गये है .एक साधारण पेड़ प्रतिदिन 5 मनुष्य के साँस लेने जितनी ऑक्सीजन को पूरा करता है. पेड़ो को अपने घर के आस-पास लगाने से वातावरण शुद्ध रहता है.एक स्वस्थ पेड़ एक दिन में 100 गैलन पानी पर्यावरण में उत्सर्जित करते है इसलिए पेड़ बारिश में सबसे ज्यादा सहायक है.कुछ पेड़ हजारो साल तक जीवित रहते है.एक इंसान को पूरा जीवन ऑक्सीजन लेने के लिए करीब 18 पेड़ो की जरूरत होती है. क्या आपने अपने हिस्से के पेड़ लगाये है.एक पुरी तरह उगा हुआ वृक्ष , एक नये लगाये पौधे से 70 गुना ज्यादा पर्यावरण यानी वातावरण को साफ़ रखता है.दुनिया के 80 प्रतिशत जंगल काट दिए गये है .एक साधारण पेड़ प्रतिदिन 5 मनुष्य के साँस लेने जितनी ऑक्सीजन को पूरा करता है

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
Source:
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
Source:
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

Latest

खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

hindukush-himalaya-parvatamala-third-pole

Content

विश्व मे पानी के लिये 265 लड़ाइयां हुई

Submitted by Shivendra on Mon, 06/07/2021 - 16:21
vishva-may-paani-ke-liye-265-ladaiyan-hui
विश्व मे पानी के लिये 265 लड़ाइयां हुई
जिसके बिना प्रत्येक जीव का जीवित रह पाना असंभव है, पृथ्वी पर  पाए जाने वाला एक महत्वपूर्ण संसाधन है. जल को अंग्रेजी भाषा में वाटर और भारतीय आम भाषा में पानी कहकर संबोधित करते हैं. जल दो तत्वों,  हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिल कर बना है.जी हां दोस्तों, आज का हमारा लेख पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीवित प्राणियों के जीवन में अहम स्थान रखने वाले संसाधन से जुड़ा है. जिसकी कीमत का अंदाजा महज इस एक कथन से लगाया जा सकता है ' जल ही जीवन है'. आज हम आपको पानी से जुड़े वे सभी रोचक तथ्य (water facts) बताने जा रहे हैं जो आपने आज से पहले शायद ही कही पढ़े या जानें होंगे. तो देर ना करते हुए चलिए जानते है

नदी विज्ञान की कसौटी पर ललितपुर जिले की ओडी नदी के पुनर्जीवन की कहानी

Submitted by Shivendra on Sat, 06/05/2021 - 15:22
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
nadi-vigyan-ki-kasauti-par-lalitpur-jile-key-od-nadi-ke-punarjeevan-ki-kahani
नदी विज्ञान की कसौटी पर ललितपुर जिले की ओडी नदी के पुनर्जीवन की कहानी
ओडी नदी के पुनर्जीवन पर 87 लाख रुपये खर्च किए गए। इस राशि में पंचायत का योगदान 23 लाख रुपये था। बाकी राशि मनरेगा मद से जुटाई गई। सन 2019 की बरसात के बाद उदगम के निकट ऊँचाई पर स्थित मदनपुर और दारुटोला ग्रामों को छोडकर बाकी के नदी मार्ग में नदी लबालब भर गई और सदानीरा हो गई। लगभग 250 कुओं की क्षमता में वृद्धि हुई। ओडी नदी के पुनर्जीवन से लगभग 3500 परिवार लाभान्वित हुए। उनकी सालाना आय 40,200 से बढ़कर 68,000 हो गई। ओडी नदी का लगभग 2428 हैक्टर रकबा दो फसली हो गया। गाद हटाना, नदी की तली को गहरा करना और तटबन्धों पर वृक्षारोपण ने नई इबारत लिख दी। प्रयोग को सराहा गया और वह सम्मानित भी हुआ। लोगों में सन्देश गया कि यह प्रयास लाभदायक है और उसे दोहराया जा सकता है। इस अनुक्रम में उपरोक्त प्रयास को नदी विज्ञान, जल उपलब्धता की निरन्तरता और गाद जमाव से मुक्ति के नजरिए से परखा जाना चाहिए। सबसे पहले बात नदी विज्ञान के नजरिए से प्रयास की। 

वृक्षो के बारे में कुछ रोचक तथ्य

Submitted by Shivendra on Sat, 06/05/2021 - 13:20
vriksho-ke-baare-mein-kuchh-rochak-tathy
वृक्षो के बारे में कुछ रोचक तथ्य
पेड़ो को अपने घर के आस-पास लगाने से वातावरण शुद्ध रहता है.एक स्वस्थ पेड़ एक दिन में 100 गैलन पानी पर्यावरण में उत्सर्जित करते है इसलिए पेड़ बारिश में सबसे ज्यादा सहायक है.कुछ पेड़ हजारो साल तक जीवित रहते है.एक इंसान को पूरा जीवन ऑक्सीजन लेने के लिए करीब 18 पेड़ो की जरूरत होती है. क्या आपने अपने हिस्से के पेड़ लगाये है.एक पुरी तरह उगा हुआ वृक्ष , एक नये लगाये पौधे से 70 गुना ज्यादा पर्यावरण यानी वातावरण को साफ़ रखता है.दुनिया के 80 प्रतिशत जंगल काट दिए गये है .एक साधारण पेड़ प्रतिदिन 5 मनुष्य के साँस लेने जितनी ऑक्सीजन को पूरा करता है. पेड़ो को अपने घर के आस-पास लगाने से वातावरण शुद्ध रहता है.एक स्वस्थ पेड़ एक दिन में 100 गैलन पानी पर्यावरण में उत्सर्जित करते है इसलिए पेड़ बारिश में सबसे ज्यादा सहायक है.कुछ पेड़ हजारो साल तक जीवित रहते है.एक इंसान को पूरा जीवन ऑक्सीजन लेने के लिए करीब 18 पेड़ो की जरूरत होती है. क्या आपने अपने हिस्से के पेड़ लगाये है.एक पुरी तरह उगा हुआ वृक्ष , एक नये लगाये पौधे से 70 गुना ज्यादा पर्यावरण यानी वातावरण को साफ़ रखता है.दुनिया के 80 प्रतिशत जंगल काट दिए गये है .एक साधारण पेड़ प्रतिदिन 5 मनुष्य के साँस लेने जितनी ऑक्सीजन को पूरा करता है

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
ganvon-ko-jagata-ek-shikshak
Source
6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
equa-congress-ke-15van-antarrashtriya-sammelan-key-mahatvapoorn-jankariyan
Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
ganga-key-aviralata-or-nirmalata-ko-sthapit-karne-ke-liye-virtual-meeting-ka-aayojan
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

Upcoming Event

Popular Articles