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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

Content

Submitted by Shivendra on Mon, 08/12/2019 - 13:17
Source:
पाञ्चजन्य, 21 जुलाई 2019
stepwells in rajasthan, jal aandolan
जल आंदोलन : समय बड़ी बचत का। आज भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। स्थिति यह है कि 10 साल पहले जहाँ 30 फीट पर पानी मिलता था, आज 100 फीट पर भी नहीं मिल रहा है। इसका समाधान है वर्षा जल को संचित करने में। यह काम भारत में होता था। बाद में इसमें शिथिलता आई, जिसका दुष्परिणाम सामने है। आज एक बार फिर जल संरक्षण के पुराने और पारम्परिक तरीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
Submitted by Shivendra on Mon, 08/12/2019 - 11:44
Source:
पाञ्चजन्य, 09 जून 2019
Strict law is necessary with water policy
जल नीति के साथ सख्त कानून जरूरी। धरती चारों ओर से पानी से घिरी है, फिर भी दुनियाभर में जल संकट है। कारण, प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला मात्र 2.5 प्रतिशत जल ही पीने योग्य है, जबकि भूमिगत जल आधा प्रतिशत है। 97 प्रतिशत जल खारा है। भारत जैसे विकासशील देश में 80 आबादी को जलापूर्ति भूमिगत जल से होती है, पर यह जल भी प्रदूषित होता है। भारत में प्रभावी जल प्रबन्धन नहीं है, इसलिए यहाँ पानी की बचत कम और बर्बादी अधिक होती है।
Submitted by Shivendra on Sat, 08/10/2019 - 17:26
Source:
पाञ्चजन्य, 21 जुलाई 2019
acute water crisis in india
घटता पानी बढ़ता संकट। अथाह और अपार जलनिधि के स्वामी सागर के तट पर बसा चेन्नई शहर आज बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है। 90,00,000 की आबादी वाले, देश के पाँच विशालतम महानगरों में से एक चेन्नई में भूजल तथा झीलों के सभी स्रोत सूख चुके हैं। विगत 30 वर्ष में सर्वाधिक भयानक जल संकट से जूझ रहे इस शहर के बच्चों के स्कूल बैग में किताबों से ज्यादा पानी की बोतलों का बोझ बढ़ गया है।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
Source:
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।
Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
Source:
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे
Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
Source:
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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खासम-खास

केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण  : कुछ तथ्य, कुछ जानकारियां

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
kendriya-bhoomi-jal-pradhikaran-:-kuchh-tathy,-kuchh-jankariyan
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

Content

जल आंदोलन : समय बड़ी बचत का

Submitted by Shivendra on Mon, 08/12/2019 - 13:17
Source
पाञ्चजन्य, 21 जुलाई 2019
stepwells in rajasthan, jal aandolan
जल आंदोलन : समय बड़ी बचत का।जल आंदोलन : समय बड़ी बचत का। आज भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। स्थिति यह है कि 10 साल पहले जहाँ 30 फीट पर पानी मिलता था, आज 100 फीट पर भी नहीं मिल रहा है। इसका समाधान है वर्षा जल को संचित करने में। यह काम भारत में होता था। बाद में इसमें शिथिलता आई, जिसका दुष्परिणाम सामने है। आज एक बार फिर जल संरक्षण के पुराने और पारम्परिक तरीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है।

जल नीति के साथ सख्त कानून जरूरी

Submitted by Shivendra on Mon, 08/12/2019 - 11:44
Source
पाञ्चजन्य, 09 जून 2019
Strict law is necessary with water policy
जल नीति के साथ सख्त कानून जरूरी। जल नीति के साथ सख्त कानून जरूरी। धरती चारों ओर से पानी से घिरी है, फिर भी दुनियाभर में जल संकट है। कारण, प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला मात्र 2.5 प्रतिशत जल ही पीने योग्य है, जबकि भूमिगत जल आधा प्रतिशत है। 97 प्रतिशत जल खारा है। भारत जैसे विकासशील देश में 80 आबादी को जलापूर्ति भूमिगत जल से होती है, पर यह जल भी प्रदूषित होता है। भारत में प्रभावी जल प्रबन्धन नहीं है, इसलिए यहाँ पानी की बचत कम और बर्बादी अधिक होती है।

घटता पानी बढ़ता संकट

Submitted by Shivendra on Sat, 08/10/2019 - 17:26
Source
पाञ्चजन्य, 21 जुलाई 2019
acute water crisis in india
घटता पानी बढ़ता संकट।घटता पानी बढ़ता संकट। अथाह और अपार जलनिधि के स्वामी सागर के तट पर बसा चेन्नई शहर आज बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है। 90,00,000 की आबादी वाले, देश के पाँच विशालतम महानगरों में से एक चेन्नई में भूजल तथा झीलों के सभी स्रोत सूख चुके हैं। विगत 30 वर्ष में सर्वाधिक भयानक जल संकट से जूझ रहे इस शहर के बच्चों के स्कूल बैग में किताबों से ज्यादा पानी की बोतलों का बोझ बढ़ गया है।

प्रयास

उदयपुर के इस गांव को वेटलैंड घोषित किया जाना तय

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
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राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
28-july-ko-ayojit-hone-vale-jal-shiksha-vyakhyan-shrinkhala-par-bhag-lene-ke-liye-panjikaran-karayen
Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित

Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
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भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे

स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
swasth-jeevan-ke-liye-gharelu-jal-upchar-or-swachhta-vyavahar-mein-parivartan-par-tin-divasiy-prashikshan-karyashala
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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