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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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Submitted by admin on Fri, 08/21/2009 - 21:43
Source:
20 अगस्त 09 / ummid.com
अच्छी वर्षा के लिए पढ़ी जाने वाली 'नमाज -ए -इस्तिश्ता'

अच्छी बारिश की दुआओं के लिये की जाने वाली विशेष नमाज़ को अरबी में कहते हैं 'नमाज -ए -इस्तिश्ता', जो कि पैगम्बर मोहम्मद साहब की परम्परा के अनुरूप है। इस्लामी सूत्रों के मुताबिक पैगम्बर मोहम्मद ने अपने जीवन में भी अल्लाह से अच्छी बारिश की दुआ करते हुए यह विशेष प्रार्थना की थी। इसी परम्परा का निर्वहन करते हुए जब किसी इलाके में बारिश नहीं होती है, तब विश्व भर में फ़ैले इस्लाम के अनुयायी यह विशेष नमाज़ पढ़ते हैं, उनकी मान्यता है कि अल्लाह उनकी बात सुनता है और इस प्रार्थना के पश्चात अच्छी बारिश होती है।
Submitted by admin on Thu, 08/20/2009 - 09:03
Source:

आठ साल बाद भारत सरकार द्वारा जारी स्टेट आफ द इन्वायरमेन्ट रिपोर्ट-2009 में कहा गया है कि देश का पर्यावरण बुरी तरह से बिगड़ रहा है. हवा, पानी और जमीन तीनों ही खतरनाक रूप से प्रदूषित हो रहे हैं.
Submitted by admin on Wed, 08/19/2009 - 22:18
Source:

बाड़मेर जिले की बायतु तहसील-मुख्यालय से कनोड़, पनावड़ा और शहर क्रमशः 15, 23 और 37 किलोमीटर की दूरी पर बसे हैं। सफर के लंबे-लंबे फासले तय करते वक्त सुकून देने वाले हरे पत्ते कहीं नहीं दिखते। आखिर कनोड़ गांव की रूकमा देवी के आंगन में लहलहाती सब्जियों को देख तबीयत हरी हुई। यूं तो यह सामान्य बात लगती है कि रूकमा देवी इस मौसम में 100 से 135 किलोग्राम तक सब्जियां उगा लेती हैं लेकिन जो यहां की धरती, भूगोल और मौसम के हिसाब-किताब से परिचित है वह जानता है कि यह बात कितनी बड़ी है। पूरा इलाका उबड़-खाबड़ और रेतीले टीलों वाला है। गर्मी के दिनों में आग की तरह बरसने वाली धूप और धूल भरी आंधियां यहां के ज

प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 12/25/2020 - 10:11
सूखे बुंदेलखंड़ में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  
जखनी गांववासियों की मेहनत का ही नतीजा है कि 2012 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने जिले के 470 गांवों में जखनी माॅडल को अपनाने का आदेश दे दिया। साथ ही नीति आयोग ने जखनी को देश का पहला ‘जल-ग्राम’ घोषित किया है। इसके अलावा जखनी गांव को माॅडल बना देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 
Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
Source:
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

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खासम-खास

बावडी: कुछ अनछुए पहलू

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
bavdi:-kuch-anachue-pahloo
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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विशेष प्रार्थनाओं के बाद मालेगाँव में भारी बारिश

Submitted by admin on Fri, 08/21/2009 - 21:43
Author
संपादक
Source
20 अगस्त 09 / ummid.com
अच्छी वर्षा के लिए पढ़ी जाने वाली 'नमाज -ए -इस्तिश्ता'

अच्छी बारिश की दुआओं के लिये की जाने वाली विशेष नमाज़ को अरबी में कहते हैं 'नमाज -ए -इस्तिश्ता', जो कि पैगम्बर मोहम्मद साहब की परम्परा के अनुरूप है। इस्लामी सूत्रों के मुताबिक पैगम्बर मोहम्मद ने अपने जीवन में भी अल्लाह से अच्छी बारिश की दुआ करते हुए यह विशेष प्रार्थना की थी। इसी परम्परा का निर्वहन करते हुए जब किसी इलाके में बारिश नहीं होती है, तब विश्व भर में फ़ैले इस्लाम के अनुयायी यह विशेष नमाज़ पढ़ते हैं, उनकी मान्यता है कि अल्लाह उनकी बात सुनता है और इस प्रार्थना के पश्चात अच्छी बारिश होती है।

देश का पर्यावरण बिगड़ रहा है

Submitted by admin on Thu, 08/20/2009 - 09:03

आठ साल बाद भारत सरकार द्वारा जारी स्टेट आफ द इन्वायरमेन्ट रिपोर्ट-2009 में कहा गया है कि देश का पर्यावरण बुरी तरह से बिगड़ रहा है. हवा, पानी और जमीन तीनों ही खतरनाक रूप से प्रदूषित हो रहे हैं.

सूखी जड़ों से फूटती हरीं कोंपले

Submitted by admin on Wed, 08/19/2009 - 22:18

बाड़मेर जिले की बायतु तहसील-मुख्यालय से कनोड़, पनावड़ा और शहर क्रमशः 15, 23 और 37 किलोमीटर की दूरी पर बसे हैं। सफर के लंबे-लंबे फासले तय करते वक्त सुकून देने वाले हरे पत्ते कहीं नहीं दिखते। आखिर कनोड़ गांव की रूकमा देवी के आंगन में लहलहाती सब्जियों को देख तबीयत हरी हुई। यूं तो यह सामान्य बात लगती है कि रूकमा देवी इस मौसम में 100 से 135 किलोग्राम तक सब्जियां उगा लेती हैं लेकिन जो यहां की धरती, भूगोल और मौसम के हिसाब-किताब से परिचित है वह जानता है कि यह बात कितनी बड़ी है। पूरा इलाका उबड़-खाबड़ और रेतीले टीलों वाला है। गर्मी के दिनों में आग की तरह बरसने वाली धूप और धूल भरी आंधियां यहां के ज

प्रयास

सूखे बुंदेलखंड में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  

Submitted by HindiWater on Fri, 12/25/2020 - 10:11
bundelkhand-ka-jalgram-jakhni-village
सूखे बुंदेलखंड़ में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  
जखनी गांववासियों की मेहनत का ही नतीजा है कि 2012 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने जिले के 470 गांवों में जखनी माॅडल को अपनाने का आदेश दे दिया। साथ ही नीति आयोग ने जखनी को देश का पहला ‘जल-ग्राम’ घोषित किया है। इसके अलावा जखनी गांव को माॅडल बना देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है।

नोटिस बोर्ड

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
hindi-patrakaron-ke-liye-cse-aaeti-online-training-course
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
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Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

भविष्य में किस तरह पानी को किया जा सकता है सुरक्षित 

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
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वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

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