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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Mon, 11/29/2021 - 16:10
Source:
एएएन न्यूज़ नेटवर्क
भारतीय नदियों का भाग्य संकट में
मुना नदी की एक सहायक नदी, हिंडन नदी, निचली हिमालय श्रृंखला में ऊपरी शिवालिक से सहारनपुर जिले में निकलती है। नदी और उसकी सहायक नदियाँ, काली और कृष्णा नदी, उत्तर प्रदेश के सात जिलों के माध्यम से लगभग 400 किलोमीटर (250 मील) तक फैली हुई हैं। हिंडन नदी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण नदियों में से एक है जिसका बेसिन क्षेत्र लगभग 7000 किमी है। यह बहुत चिंता का विषय है कि हिंडन नदी और उसकी सहायक नदियाँ अब अत्यधिक प्रदूषित हो चुकी हैं और नालों में बदल गई हैं। इस स्थिति के कई कारण हैं।औद्योगिक उद्यमिता ने मानव सभ्यता के प्रारंभिक चरणों का स्थान ले लिया है। हिंडन नदी का दूषित होने का सबसे बड़ा कारण काली और कृष्णा नदी का उससे मिलना है
Submitted by Shivendra on Sun, 11/28/2021 - 11:19
Source:
इंडिया साइंस वायर
गंगा बेसिन में बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि
 गंगा नदी आधे अरब से अधिक भारतीयों की जीवनरेखा है। लेकिन, विभिन्न मानव गतिविधियों के कारण गंगा के प्रवाह में परिवर्तन आया है। एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि हाल के वर्षो में गंगा बेसिन में विनाशकारी भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं की आवृत्ति बढ़ी है। यह अध्ययन भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। इस अध्ययन में, गंगा की दो प्रमुख सहायक नदियों - भागीरथी और अलकनंदा, जो उत्तराखंड के देवप्रयाग में परस्पर विलीन होकर गंगा के रूप में जानी जाती हैं, पर ध्यान केंद्रित करते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में मानव गतिविधियों के नदी पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन इस बात की अंतर्दृष्टि प्रदान करता है कि जलवायु परिवर्तन और बाँध बनाने जैसी मानव गतिविधियाँ गंगा को कैसे प्रभावित करती हैं।
Submitted by Shivendra on Thu, 11/25/2021 - 15:38
Source:
यूसर्क
रिसेंट एडवांसेज इन वॉटर क्वॉलिटी एनालिसिस" पर ऑनलाइन आयोजन
आज के कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व विशेषज्ञ राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की (जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ राजेश सिंह ने "रिसेंट एडवांसेज इनवर्टर क्वालिटी एनालिसिस" विषय पर व्याख्यान दिया उन्होंने अपने व्याख्यान में जल गुणवत्ता विश्लेषण के क्षेत्र में आधुनिक समय में प्रचलित तकनीकी आधारित विभिन्न विधियों को उपस्थित प्रतिभागियों को बहुत ही रुचि पूर्वक समझाया । उन्होंने अपने व्याख्यान में पानी की गुणवत्ता को निर्धारित करने वाले पानी के रासायनिक, भौतिक जैविक तथा रेडियोलॉजिकल पैरामीटर्स के बारे में बताया। उन्होंने अपने व्याख्यान में जल गुणवत्ता की मॉनिटरिंग, लर्निंग कैसे की जाए कहां की जाए कब की जाए कितनी बार की जाए आदि पर वैज्ञानिक ढंग से समझाया। उन्होंने अपने व्याख्यान में जल स्रोत से जल के नमूने लेने की विधियां उनका रक्षण विश्लेषण आज आदि के बारे में तथा इनको प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों के बारे में बताया।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
Source:
चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
Source:
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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भारतीय नदियों का भाग्य संकट में

Submitted by Shivendra on Mon, 11/29/2021 - 16:10
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एएएन न्यूज़ नेटवर्क
भारतीय नदियों का भाग्य संकट में
मुना नदी की एक सहायक नदी, हिंडन नदी, निचली हिमालय श्रृंखला में ऊपरी शिवालिक से सहारनपुर जिले में निकलती है। नदी और उसकी सहायक नदियाँ, काली और कृष्णा नदी, उत्तर प्रदेश के सात जिलों के माध्यम से लगभग 400 किलोमीटर (250 मील) तक फैली हुई हैं। हिंडन नदी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण नदियों में से एक है जिसका बेसिन क्षेत्र लगभग 7000 किमी है। यह बहुत चिंता का विषय है कि हिंडन नदी और उसकी सहायक नदियाँ अब अत्यधिक प्रदूषित हो चुकी हैं और नालों में बदल गई हैं। इस स्थिति के कई कारण हैं।औद्योगिक उद्यमिता ने मानव सभ्यता के प्रारंभिक चरणों का स्थान ले लिया है। हिंडन नदी का दूषित होने का सबसे बड़ा कारण काली और कृष्णा नदी का उससे मिलना है

गंगा बेसिन में बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि

Submitted by Shivendra on Sun, 11/28/2021 - 11:19
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इंडिया साइंस वायर
गंगा बेसिन में बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि
 गंगा नदी आधे अरब से अधिक भारतीयों की जीवनरेखा है। लेकिन, विभिन्न मानव गतिविधियों के कारण गंगा के प्रवाह में परिवर्तन आया है। एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि हाल के वर्षो में गंगा बेसिन में विनाशकारी भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं की आवृत्ति बढ़ी है। यह अध्ययन भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। इस अध्ययन में, गंगा की दो प्रमुख सहायक नदियों - भागीरथी और अलकनंदा, जो उत्तराखंड के देवप्रयाग में परस्पर विलीन होकर गंगा के रूप में जानी जाती हैं, पर ध्यान केंद्रित करते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में मानव गतिविधियों के नदी पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन इस बात की अंतर्दृष्टि प्रदान करता है कि जलवायु परिवर्तन और बाँध बनाने जैसी मानव गतिविधियाँ गंगा को कैसे प्रभावित करती हैं।

"रिसेंट एडवांसेज इन वॉटर क्वॉलिटी एनालिसिस"पर ऑनलाइन आयोजन

Submitted by Shivendra on Thu, 11/25/2021 - 15:38
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यूसर्क
रिसेंट एडवांसेज इन वॉटर क्वॉलिटी एनालिसिस" पर ऑनलाइन आयोजन
आज के कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व विशेषज्ञ राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की (जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ राजेश सिंह ने "रिसेंट एडवांसेज इनवर्टर क्वालिटी एनालिसिस" विषय पर व्याख्यान दिया उन्होंने अपने व्याख्यान में जल गुणवत्ता विश्लेषण के क्षेत्र में आधुनिक समय में प्रचलित तकनीकी आधारित विभिन्न विधियों को उपस्थित प्रतिभागियों को बहुत ही रुचि पूर्वक समझाया । उन्होंने अपने व्याख्यान में पानी की गुणवत्ता को निर्धारित करने वाले पानी के रासायनिक, भौतिक जैविक तथा रेडियोलॉजिकल पैरामीटर्स के बारे में बताया। उन्होंने अपने व्याख्यान में जल गुणवत्ता की मॉनिटरिंग, लर्निंग कैसे की जाए कहां की जाए कब की जाए कितनी बार की जाए आदि पर वैज्ञानिक ढंग से समझाया। उन्होंने अपने व्याख्यान में जल स्रोत से जल के नमूने लेने की विधियां उनका रक्षण विश्लेषण आज आदि के बारे में तथा इनको प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों के बारे में बताया।

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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