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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Tue, 10/04/2022 - 16:13
कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal
परम्परागत तालाबों पर अनुपम मिश्र की किताब ‘आज भी खरे हैं तालाब’, पहली बार, वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब में अनुपम ने समाज से प्राप्त जानकारी के आधार पर भारत के विभिन्न भागों में बने तालाबों के बारे में व्यापक विवरण प्रस्तुत किया है। अर्थात आज भी खरे हैं तालाब में दर्ज विवरण परम्परागत तालाबों पर समाज की राय है। उनका दृष्टिबोध है। उन विवरणों में समाज की भावनायें, आस्था, मान्यतायें, रीति-रिवाज तथा परम्परागत तालाबों के निर्माण से जुड़े कर्मकाण्ड दर्ज हैं। प्रस्तुति और शैली अनुपम की है।

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Submitted by Shivendra on Thu, 09/29/2022 - 14:09
Source:
बेहद खास हैं भारत के परम्परागत तालाबों की विरासत
अब कुछ बात परम्परागत तालाबों के चरित्र और लक्षणों की। यही लक्षण उन्हें प्रथक पहचान प्रदान करते है। स्थानीय भूविज्ञान के आधार पर पुराने तालाबों को स्टोरेज तालाब और परकोलेशन तालाबों की श्रेणियों में बांटा जा सकता है। स्टोरेज तालाब वह तालाब है जिसकी तली और पानी के सम्पर्क में आने वाली परतों से पानी का रिसाव बहुत कम होता हो और उसमें संचित जल की मात्रा उसके आयतन के बराबर हो।
Submitted by Shivendra on Thu, 09/29/2022 - 13:31
Source:
भूमिगत जल स्तर की निगरानी करेगा जलदूत
फग्गन सिंह कुलस्ते  ने कहा  राज्य सरकारों और ग्राम पंचायतों को भूजल स्तर के आंकड़ों को व्यवस्थित रूप से एकत्र करने और विश्लेषण के लिए केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस में उन्हें आत्मसात करने की दिशा में खुद को शामिल करना चाहिए। हमें विश्वास है कि इस अभ्यास से उत्पन्न डेटा हमें बेहतर योजना बनाने में मदद करेगा और हमें समस्या का सही आकलन करने में मदद करेगा . 
Submitted by Shivendra on Wed, 09/28/2022 - 15:20
Source:
यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, निचले इलाके में जलमग्न झोंपड़ी
शहर के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार को जलस्तर में कमी आने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि हथिनीकुंड बैराज से सोमवार सुबह पांच बजे से छह बजे के बीच 2,95,912 क्यूसेक पानी छोड़ा गया और इस पानी के छोड़े जाने का प्रभाव

प्रयास

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Tue, 09/06/2022 - 14:16
Source:
चरखा फीचर
'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022
कार्य अनुभव के विवरण के साथ संक्षिप्त पाठ्यक्रम जीवन लगभग 800-1000 शब्दों का एक प्रस्ताव, जिसमें उस विशेष विषयगत क्षेत्र को रेखांकित किया गया हो, जिसमें आवेदक काम करना चाहता है. प्रस्ताव में अध्ययन की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, कार्यप्रणाली, चयनित विषय की प्रासंगिकता के साथ-साथ इन लेखों से अपेक्षित प्रभाव के बारे में विवरण शामिल होनी चाहिए. साथ ही, इस बात का उल्लेख होनी चाहिए कि देश के विकास से जुड़ी बहस में इसके योगदान किस प्रकार हो सकता है? कृपया आलेख प्रस्तुत करने वाली भाषा भी निर्दिष्ट करें। लेख अंग्रेजी, हिंदी या उर्दू में ही स्वीकार किए जाएंगे
Submitted by Shivendra on Tue, 08/23/2022 - 17:19
Source:
यूसर्क
जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आज दिनांक 23.08.22 को तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूसर्क की निदेशक प्रो.(डॉ.) अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा जल के महत्व को देखते हुए विगत वर्ष 2021 को संयुक्त राष्ट्र की विश्व पर्यावरण दिवस की थीम "ईको सिस्टम रेस्टोरेशन" के अंर्तगत आयोजित कार्यक्रम के निष्कर्षों के क्रम में जल विज्ञान विषयक लेक्चर सीरीज एवं जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रारंभ किया गया
Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
Source:
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

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खासम-खास

तालाब ज्ञान-संस्कृति : नींव से शिखर तक

Submitted by Editorial Team on Tue, 10/04/2022 - 16:13
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
talab-gyan-sanskriti-:-ninv-se-shikhar-tak
कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal
परम्परागत तालाबों पर अनुपम मिश्र की किताब ‘आज भी खरे हैं तालाब’, पहली बार, वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब में अनुपम ने समाज से प्राप्त जानकारी के आधार पर भारत के विभिन्न भागों में बने तालाबों के बारे में व्यापक विवरण प्रस्तुत किया है। अर्थात आज भी खरे हैं तालाब में दर्ज विवरण परम्परागत तालाबों पर समाज की राय है। उनका दृष्टिबोध है। उन विवरणों में समाज की भावनायें, आस्था, मान्यतायें, रीति-रिवाज तथा परम्परागत तालाबों के निर्माण से जुड़े कर्मकाण्ड दर्ज हैं। प्रस्तुति और शैली अनुपम की है।

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बेहद खास हैं भारत के परम्परागत तालाबों की विरासत

Submitted by Shivendra on Thu, 09/29/2022 - 14:09
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
behad-khaas-hain-bharat-ke-paramparagat-talabon-ki-virasat
बेहद खास हैं भारत के परम्परागत तालाबों की विरासत
अब कुछ बात परम्परागत तालाबों के चरित्र और लक्षणों की। यही लक्षण उन्हें प्रथक पहचान प्रदान करते है। स्थानीय भूविज्ञान के आधार पर पुराने तालाबों को स्टोरेज तालाब और परकोलेशन तालाबों की श्रेणियों में बांटा जा सकता है। स्टोरेज तालाब वह तालाब है जिसकी तली और पानी के सम्पर्क में आने वाली परतों से पानी का रिसाव बहुत कम होता हो और उसमें संचित जल की मात्रा उसके आयतन के बराबर हो।

भूमिगत जल स्तर की निगरानी करेगा जलदूत

Submitted by Shivendra on Thu, 09/29/2022 - 13:31
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भूमिगत जल स्तर की निगरानी करेगा जलदूत
फग्गन सिंह कुलस्ते  ने कहा  राज्य सरकारों और ग्राम पंचायतों को भूजल स्तर के आंकड़ों को व्यवस्थित रूप से एकत्र करने और विश्लेषण के लिए केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस में उन्हें आत्मसात करने की दिशा में खुद को शामिल करना चाहिए। हमें विश्वास है कि इस अभ्यास से उत्पन्न डेटा हमें बेहतर योजना बनाने में मदद करेगा और हमें समस्या का सही आकलन करने में मदद करेगा . 

दिल्ली: यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर

Submitted by Shivendra on Wed, 09/28/2022 - 15:20
dilli:-yamuna-ka-jalastar-khatre-ke-nishan-se-ooper
यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, निचले इलाके में जलमग्न झोंपड़ी
शहर के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार को जलस्तर में कमी आने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि हथिनीकुंड बैराज से सोमवार सुबह पांच बजे से छह बजे के बीच 2,95,912 क्यूसेक पानी छोड़ा गया और इस पानी के छोड़े जाने का प्रभाव

प्रयास

उदयपुर के इस गांव को वेटलैंड घोषित किया जाना तय

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
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राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022

Submitted by Shivendra on Tue, 09/06/2022 - 14:16
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चरखा फीचर
'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022
कार्य अनुभव के विवरण के साथ संक्षिप्त पाठ्यक्रम जीवन लगभग 800-1000 शब्दों का एक प्रस्ताव, जिसमें उस विशेष विषयगत क्षेत्र को रेखांकित किया गया हो, जिसमें आवेदक काम करना चाहता है. प्रस्ताव में अध्ययन की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, कार्यप्रणाली, चयनित विषय की प्रासंगिकता के साथ-साथ इन लेखों से अपेक्षित प्रभाव के बारे में विवरण शामिल होनी चाहिए. साथ ही, इस बात का उल्लेख होनी चाहिए कि देश के विकास से जुड़ी बहस में इसके योगदान किस प्रकार हो सकता है? कृपया आलेख प्रस्तुत करने वाली भाषा भी निर्दिष्ट करें। लेख अंग्रेजी, हिंदी या उर्दू में ही स्वीकार किए जाएंगे

​यूसर्क द्वारा तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ

Submitted by Shivendra on Tue, 08/23/2022 - 17:19
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Source
यूसर्क
जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आज दिनांक 23.08.22 को तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूसर्क की निदेशक प्रो.(डॉ.) अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा जल के महत्व को देखते हुए विगत वर्ष 2021 को संयुक्त राष्ट्र की विश्व पर्यावरण दिवस की थीम "ईको सिस्टम रेस्टोरेशन" के अंर्तगत आयोजित कार्यक्रम के निष्कर्षों के क्रम में जल विज्ञान विषयक लेक्चर सीरीज एवं जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रारंभ किया गया

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
28-july-ko-ayojit-hone-vale-jal-shiksha-vyakhyan-shrinkhala-par-bhag-lene-ke-liye-panjikaran-karayen
Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

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