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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Mon, 09/27/2021 - 11:37
Source:
नरेंद्र मोदी यूट्यूब
पीएम मोदी ने क्यों कहा साल में एक बार 'नदी उत्सव' मनाएं
पहले जमाने में हमारे बड़े इन श्लोकों बच्चों को याद कराते थे। इससे हमारे देश मे नदियों के प्रति आस्था पैदा होती थी और विशाल भारत का मानचित्र मन में अंकित हो जाता था नदियों के प्रति जुड़ाव बनता था जिस नदी को हम मां के रूप में जानते हैं और देखते हैं जीते हैं उस नदी के प्रति एक आस्था का भाव पैदा होता था। एकसंस्कार प्रक्रिया थी। उन्होंने कहा जब हमारे देश में  नदियों की महिमा पर बात कर रहे हैं तो सौभाविक रूप से हर कोई यह प्रश्न उठाएगा। और प्रश्नन उठाने का हक भी है।इसका जवाब देना हमारी जिम्मेवारी भी है कोई भी सवाल पूछेगा कि आप नदी के गीत गा रहे हो नदी को माँ कह रहे हो तो नदी प्रदूषित क्यों हो जाती है।
Submitted by Shivendra on Sat, 09/25/2021 - 10:42
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गंगा रक्षा आंदोलन हरिद्वार तक नहीं रहेगा सीमित
गा रक्षा संबंधी मांगों को लेकर मातृसदन में  कुछ दिन पहले कई पर्यावरण रक्षक जुड़े। इस दौरान सभी लोगों ने  यह तय किया कि वह इस आंदोलन को धार देने के लिये देशभर के पर्यावरण प्रेमियों को एक जुट करेंगे।इस मौके पर रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पांडे ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन के प्रति गंभीर नहीं है। आंदोलन में 500 से ज्यादा व्यक्तियों ने जान गंवाई। ऐसे में मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के आंदोलन से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। मातृसदन के आंदोलन को धार देने के लिए उन्होंने गंगा और पर्यावरण प्रेमियों से एकजुट होने की अपील की है।
Submitted by Shivendra on Thu, 09/23/2021 - 14:24
Source:
डी डी
गुजरात विश्वविद्यालय में वर्षा जल संरक्षण
बिल्डिंग की भूगर्भ में बड़े बड़े टैंक बनाए गए जहाँ छतों से गिरने वाला पानी संगृहीत होता है विश्वविद्यालय की हर बिल्डिंग में 7 लाख लीटर के टैंक लगाय गए है साथ ही कैंपस में बड़े बड़े कनाल भी बनाएं गए है जहाँ पानी को सरंक्षित किया जाता है यूनिवर्सिटी के महानिदेशक सुशिल गोस्वामी बताते है की ग्राउंड वाटर बहुत नीचे है इसलिए हमारी कोशिश है की जो रेन हार्वेस्टिंग और  नेचुरल पानी है जो जमीन के माध्यम से आता है

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
Source:
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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पीएम मोदी ने क्यों कहा साल में एक बार 'नदी उत्सव' मनाएं

Submitted by Shivendra on Mon, 09/27/2021 - 11:37
pm modi on river says people to observe river festival once a year
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नरेंद्र मोदी यूट्यूब
पीएम मोदी ने क्यों कहा साल में एक बार 'नदी उत्सव' मनाएं
पहले जमाने में हमारे बड़े इन श्लोकों बच्चों को याद कराते थे। इससे हमारे देश मे नदियों के प्रति आस्था पैदा होती थी और विशाल भारत का मानचित्र मन में अंकित हो जाता था नदियों के प्रति जुड़ाव बनता था जिस नदी को हम मां के रूप में जानते हैं और देखते हैं जीते हैं उस नदी के प्रति एक आस्था का भाव पैदा होता था। एकसंस्कार प्रक्रिया थी। उन्होंने कहा जब हमारे देश में  नदियों की महिमा पर बात कर रहे हैं तो सौभाविक रूप से हर कोई यह प्रश्न उठाएगा। और प्रश्नन उठाने का हक भी है।इसका जवाब देना हमारी जिम्मेवारी भी है कोई भी सवाल पूछेगा कि आप नदी के गीत गा रहे हो नदी को माँ कह रहे हो तो नदी प्रदूषित क्यों हो जाती है।

गंगा रक्षा आंदोलन हरिद्वार तक नहीं रहेगा सीमित

Submitted by Shivendra on Sat, 09/25/2021 - 10:42
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गंगा रक्षा आंदोलन हरिद्वार तक नहीं रहेगा सीमित
गा रक्षा संबंधी मांगों को लेकर मातृसदन में  कुछ दिन पहले कई पर्यावरण रक्षक जुड़े। इस दौरान सभी लोगों ने  यह तय किया कि वह इस आंदोलन को धार देने के लिये देशभर के पर्यावरण प्रेमियों को एक जुट करेंगे।इस मौके पर रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पांडे ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन के प्रति गंभीर नहीं है। आंदोलन में 500 से ज्यादा व्यक्तियों ने जान गंवाई। ऐसे में मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के आंदोलन से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। मातृसदन के आंदोलन को धार देने के लिए उन्होंने गंगा और पर्यावरण प्रेमियों से एकजुट होने की अपील की है।

गुजरात के विश्वविद्यालय ने वर्षा जल को सरंक्षित करने का नायाब तरीका ढूंढा 

Submitted by Shivendra on Thu, 09/23/2021 - 14:24
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Source
डी डी
गुजरात विश्वविद्यालय में वर्षा जल संरक्षण
बिल्डिंग की भूगर्भ में बड़े बड़े टैंक बनाए गए जहाँ छतों से गिरने वाला पानी संगृहीत होता है विश्वविद्यालय की हर बिल्डिंग में 7 लाख लीटर के टैंक लगाय गए है साथ ही कैंपस में बड़े बड़े कनाल भी बनाएं गए है जहाँ पानी को सरंक्षित किया जाता है यूनिवर्सिटी के महानिदेशक सुशिल गोस्वामी बताते है की ग्राउंड वाटर बहुत नीचे है इसलिए हमारी कोशिश है की जो रेन हार्वेस्टिंग और  नेचुरल पानी है जो जमीन के माध्यम से आता है

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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