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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Wed, 09/29/2021 - 15:08
Source:
नर्मदा नदी में नही बन सकते बाँध 
वार्षिक जल आंकङे अनुसार 2004- 2005 और 2014- 2015 की तुलना में 37 प्रतिशत नर्मदा नदी के प्रवाह में कमी आयी है।1975 के गणना अनुसार नर्मदा नदी में बहने वाली पानी की उपलब्धता 28 मिलियन एकङ फीट  (एमएएफ) था।नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने 1980 - 81 से प्रतिवर्ष नर्मदा कछार में उपलब्ध जल की मात्रा का जो  रिकार्ड किया गया उससे यह  पता चलता है कि नर्मदा कछार में उपलब्ध जल की मात्रा घटती- बढती रहती है। वर्ष 2010 -2011 में नर्मदा कछार में 22.11 एमएएफ जल उपलब्ध था। हिंदुस्तान टाइम्स के अप्रेल 2018  रिपोर्ट अनुसार 2017 में नर्मदा नदी की जल उपलब्धता 14.66 एमएएफ पाई गई।
Submitted by Shivendra on Tue, 09/28/2021 - 18:12
Source:
जल स्रोत प्रबंधन के सफल प्रयास पर वैज्ञानिक मंथन
कार्यक्रम का संचालन करते हुए यूसर्क के वैज्ञानिक तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ भवतोष शर्मा ने कहा कि पर्वतीय भाग जल स्रोतों के पुनर्जीवन, संरक्षण, स्वच्छता तथा संवर्द्धन  के लिए  सामाजिक सहभागिता के साथ कार्य करना होगा तथा जल संरक्षण की स्थानीय परम्परागत विधियों को अपनाना होगा। जल संरक्षण तथा वर्षाजल संचयन का कार्य अपने-अपने घर एवं गांवों से ही शुरवात करनी होगी। तभी समाज में सभी की सहभागिता से बढ़ती हुई जल की मांग को पूरा किया जा सकेगा। वही तकनीकी सत्र में  रिलायंस  फाउंडेशन उत्तराखण्ड के परियोजना निदेशक कमलेश गुरूरानी ने  ‘‘सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पर्वतीय भाग में जल संरक्षण’’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि रिलाइंस फाउंडेशन ने उत्तराखंड  के उत्तकाशी एवं रूद्रप्रयाग जनपदों में सामूहिक भागीदारी के माध्यम से विभिन्न प्रकार के रिचार्ज सरचनाएँ  बनायी गयी है  
Submitted by Shivendra on Mon, 09/27/2021 - 13:16
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किशोर सागर तालाब जिसे अतिक्रमण मुक्त कराने सात साल पहले एनजीटी में दायर की थी याचिक
एनजीटी के माननीय न्यायाधीश श्री शेव कुमार सिंह व श्री अरुण कुमार वर्मा ने इस मामले में 20 सितम्बर को ऐतिहासिक फैसला दिया हैं। जिसमे एनजीटी के पूर्व आदेश का निष्पादन कराने के छतरपुर जिला न्यायाधीश को अधिकार सोंपे दिये गये हैं। इस आदेश के तहत छतरपुर जिला जज किसी भी मजिस्ट्रेट को यह मामला सौंप सकते हैं जिससे किशोर सागर तालाब से पूर्व आदेश के तहत कब्ज़ा हटाने की कार्यवाही संभव हों सके।गौरतलब हैं कि एनजीटी ने अपने पूर्व आदेश में किशोर सागर तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिये कठोर आदेश दिये थे। तालाब के मूल रकवे, फुल टेंक लेबल भराव क्षेत्र और उसके बाद 10 मीटर में ग्रीन जोन बनाने के आदेश दिये थे। एनजीटी में मूल याचिका में जिला कलेक्टर, प्रदूषण विभाग सहित अन्य जिम्मेदार विभागों को भी पक्षकार बनाया गया था। जिनकी दलीलो को भी सुना गया था। इसके बाद एनजीटी का आदेश पारित हुआ था।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
Source:
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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नर्मदा नदी में नही बन सकते बाँध 

Submitted by Shivendra on Wed, 09/29/2021 - 15:08
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नर्मदा नदी में नही बन सकते बाँध 
वार्षिक जल आंकङे अनुसार 2004- 2005 और 2014- 2015 की तुलना में 37 प्रतिशत नर्मदा नदी के प्रवाह में कमी आयी है।1975 के गणना अनुसार नर्मदा नदी में बहने वाली पानी की उपलब्धता 28 मिलियन एकङ फीट  (एमएएफ) था।नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने 1980 - 81 से प्रतिवर्ष नर्मदा कछार में उपलब्ध जल की मात्रा का जो  रिकार्ड किया गया उससे यह  पता चलता है कि नर्मदा कछार में उपलब्ध जल की मात्रा घटती- बढती रहती है। वर्ष 2010 -2011 में नर्मदा कछार में 22.11 एमएएफ जल उपलब्ध था। हिंदुस्तान टाइम्स के अप्रेल 2018  रिपोर्ट अनुसार 2017 में नर्मदा नदी की जल उपलब्धता 14.66 एमएएफ पाई गई।

जल स्रोत प्रबंधन के सफल प्रयास पर वैज्ञानिक मंथन

Submitted by Shivendra on Tue, 09/28/2021 - 18:12
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जल स्रोत प्रबंधन के सफल प्रयास पर वैज्ञानिक मंथन
कार्यक्रम का संचालन करते हुए यूसर्क के वैज्ञानिक तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ भवतोष शर्मा ने कहा कि पर्वतीय भाग जल स्रोतों के पुनर्जीवन, संरक्षण, स्वच्छता तथा संवर्द्धन  के लिए  सामाजिक सहभागिता के साथ कार्य करना होगा तथा जल संरक्षण की स्थानीय परम्परागत विधियों को अपनाना होगा। जल संरक्षण तथा वर्षाजल संचयन का कार्य अपने-अपने घर एवं गांवों से ही शुरवात करनी होगी। तभी समाज में सभी की सहभागिता से बढ़ती हुई जल की मांग को पूरा किया जा सकेगा। वही तकनीकी सत्र में  रिलायंस  फाउंडेशन उत्तराखण्ड के परियोजना निदेशक कमलेश गुरूरानी ने  ‘‘सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पर्वतीय भाग में जल संरक्षण’’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि रिलाइंस फाउंडेशन ने उत्तराखंड  के उत्तकाशी एवं रूद्रप्रयाग जनपदों में सामूहिक भागीदारी के माध्यम से विभिन्न प्रकार के रिचार्ज सरचनाएँ  बनायी गयी है  

किशोर सागर तालाब मामले में एनजीटी का ऐतिहासिक फैसला

Submitted by Shivendra on Mon, 09/27/2021 - 13:16
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किशोर सागर तालाब जिसे अतिक्रमण मुक्त कराने सात साल पहले एनजीटी में दायर की थी याचिक
एनजीटी के माननीय न्यायाधीश श्री शेव कुमार सिंह व श्री अरुण कुमार वर्मा ने इस मामले में 20 सितम्बर को ऐतिहासिक फैसला दिया हैं। जिसमे एनजीटी के पूर्व आदेश का निष्पादन कराने के छतरपुर जिला न्यायाधीश को अधिकार सोंपे दिये गये हैं। इस आदेश के तहत छतरपुर जिला जज किसी भी मजिस्ट्रेट को यह मामला सौंप सकते हैं जिससे किशोर सागर तालाब से पूर्व आदेश के तहत कब्ज़ा हटाने की कार्यवाही संभव हों सके।गौरतलब हैं कि एनजीटी ने अपने पूर्व आदेश में किशोर सागर तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिये कठोर आदेश दिये थे। तालाब के मूल रकवे, फुल टेंक लेबल भराव क्षेत्र और उसके बाद 10 मीटर में ग्रीन जोन बनाने के आदेश दिये थे। एनजीटी में मूल याचिका में जिला कलेक्टर, प्रदूषण विभाग सहित अन्य जिम्मेदार विभागों को भी पक्षकार बनाया गया था। जिनकी दलीलो को भी सुना गया था। इसके बाद एनजीटी का आदेश पारित हुआ था।

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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Source
6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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