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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

केरल का पलायन सुंदरवन के लोगों के लिए अवसर क्यों है ?

Submitted by HindiWater on Wed, 07/24/2019 - 10:33
Author
उमेश कुमार राय

मौसनी आइलैंड।मौसनी आइलैंड।

सुंदरवन के जिन टापुओं पर जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है, वहां दक्षिण भारत का बेहद छोटा सूबा लोगों की जुबान पर चढ़ा रहता है। संयोग से यह सूबा भी सुंदरवन के टापुओं की तरह समुद्र से सटा हुआ है और इस सूबे का आधा हिस्सा समुद्र की तरफ खुलता है। इस सूबे को खुदा का अपना मुल्क भी कहा जाता है। ये सूबा है 3886 वर्ग किलोमीटर में फैला केरल। सुंदरवन से केरल की दूरी करीब 1846 किलोमीटर है, जहां पहुंचने के लिए तीन रातें और तीन दिन सफर में गुजारना पड़ता है।

बाढ़ या सूखा : कौन है दोषी ?

Submitted by HindiWater on Tue, 07/23/2019 - 17:35
Source
दैनिक जागरण, 20 जुलाई 2019
भारत में बाढ़ और सूखे का कहर।भारत में बाढ़ और सूखे का कहर। एक महीने पहले मुम्बई के निवासी गर्मी से परेशान थे। इस साल बारिश भी देर से हुई। इस वजह से मुम्बई में ही नहीं समूचे भारत के उन इलाकों में जहाँ गर्मी पड़ती है, परेशानियाँ बढ़ गई। समुद्र के किनारे बसे चेन्नई शहर में पीने का पानी खत्म हो गया। स्पेशल ट्रेन से वहाँ पानी भेजा गया। 2015 में चेन्नई में भयानक बाढ़ आई थी, लेकिन इस साल गर्मी में वहाँ की 1.10 करोड़ आबादी को पानी की किल्लत से जूझना पड़ा। दुनिया में सबसे ज्यादा वर्षा वाले इलाकों में चेरापूँजी का नाम है।

शहरों में जल प्रलय का कारण

Submitted by HindiWater on Tue, 07/23/2019 - 11:18
Source
दैनिक जागरण, 22 जुलाई 2019
शहरों में जल प्रलय।शहरों में जल प्रलय। मानसूनी सीजन का सिर्फ डेढ़ महीना ही बीता है। अभी ढाई महीने शेष हैं, लेकिन देश के कई हिस्से डूबने लगे हैं। असम और बिहार में नदी जनित बाढ़ ने कोहराम मचा रखा है। लाखों लोग प्रभावित हैं। बच्चे, बुजुर्ग, बीमार, दीव्यांग..। इंसानों की तो बात छोड़िए जानवर भी बेहाल हैं। खेती-किसानों को पानी लील चुका है, जो कुछ घर-गृहस्थी में जमा करके रखा था, उसे भी सहजने में मशक्कत करनी पड़ रही है। जो सुरक्षित स्थान पर पहुँच गए, वे नसीब वाले ठहरे।

प्रयास

बैंक की नौकरी छोड़, आदिवासियों को औषधीय खेती से दे रहे रोजगार

Submitted by HindiWater on Fri, 08/09/2019 - 17:38
राजाराम त्रिपाठी ।राजाराम त्रिपाठी । घटती खेती का कारण किसानों के प्रति सरकार का रवैया भी है, जिस कारण किसान अब खेती करना पसंद नहीं कर रहे हैं और हजारों परिवार खेती छोड़ चुके हैं तथा कोई अन्य काम कर रहे हैं। इन कारणों से किसानी और खेती वर्ततान में देश मे बड़ा मुद्दा है। लेकिन इन सभी के बीच छत्तीसगढ़ के राजाराम त्रिपाठी भी हैं, जिन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ औषधीय खेती शुरू की और आज वें आदिवासियों को औषधीय खेती से रोजगार दे रहे हैं। 

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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केरल का पलायन सुंदरवन के लोगों के लिए अवसर क्यों है ?

Submitted by HindiWater on Wed, 07/24/2019 - 10:33
Author
उमेश कुमार राय

मौसनी आइलैंड।मौसनी आइलैंड।

सुंदरवन के जिन टापुओं पर जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है, वहां दक्षिण भारत का बेहद छोटा सूबा लोगों की जुबान पर चढ़ा रहता है। संयोग से यह सूबा भी सुंदरवन के टापुओं की तरह समुद्र से सटा हुआ है और इस सूबे का आधा हिस्सा समुद्र की तरफ खुलता है। इस सूबे को खुदा का अपना मुल्क भी कहा जाता है। ये सूबा है 3886 वर्ग किलोमीटर में फैला केरल। सुंदरवन से केरल की दूरी करीब 1846 किलोमीटर है, जहां पहुंचने के लिए तीन रातें और तीन दिन सफर में गुजारना पड़ता है।

बाढ़ या सूखा : कौन है दोषी ?

Submitted by HindiWater on Tue, 07/23/2019 - 17:35
Source
दैनिक जागरण, 20 जुलाई 2019
भारत में बाढ़ और सूखे का कहर।भारत में बाढ़ और सूखे का कहर। एक महीने पहले मुम्बई के निवासी गर्मी से परेशान थे। इस साल बारिश भी देर से हुई। इस वजह से मुम्बई में ही नहीं समूचे भारत के उन इलाकों में जहाँ गर्मी पड़ती है, परेशानियाँ बढ़ गई। समुद्र के किनारे बसे चेन्नई शहर में पीने का पानी खत्म हो गया। स्पेशल ट्रेन से वहाँ पानी भेजा गया। 2015 में चेन्नई में भयानक बाढ़ आई थी, लेकिन इस साल गर्मी में वहाँ की 1.10 करोड़ आबादी को पानी की किल्लत से जूझना पड़ा। दुनिया में सबसे ज्यादा वर्षा वाले इलाकों में चेरापूँजी का नाम है।

शहरों में जल प्रलय का कारण

Submitted by HindiWater on Tue, 07/23/2019 - 11:18
Source
दैनिक जागरण, 22 जुलाई 2019
शहरों में जल प्रलय।शहरों में जल प्रलय। मानसूनी सीजन का सिर्फ डेढ़ महीना ही बीता है। अभी ढाई महीने शेष हैं, लेकिन देश के कई हिस्से डूबने लगे हैं। असम और बिहार में नदी जनित बाढ़ ने कोहराम मचा रखा है। लाखों लोग प्रभावित हैं। बच्चे, बुजुर्ग, बीमार, दीव्यांग..। इंसानों की तो बात छोड़िए जानवर भी बेहाल हैं। खेती-किसानों को पानी लील चुका है, जो कुछ घर-गृहस्थी में जमा करके रखा था, उसे भी सहजने में मशक्कत करनी पड़ रही है। जो सुरक्षित स्थान पर पहुँच गए, वे नसीब वाले ठहरे।

प्रयास

बैंक की नौकरी छोड़, आदिवासियों को औषधीय खेती से दे रहे रोजगार

Submitted by HindiWater on Fri, 08/09/2019 - 17:38
राजाराम त्रिपाठी ।राजाराम त्रिपाठी । घटती खेती का कारण किसानों के प्रति सरकार का रवैया भी है, जिस कारण किसान अब खेती करना पसंद नहीं कर रहे हैं और हजारों परिवार खेती छोड़ चुके हैं तथा कोई अन्य काम कर रहे हैं। इन कारणों से किसानी और खेती वर्ततान में देश मे बड़ा मुद्दा है। लेकिन इन सभी के बीच छत्तीसगढ़ के राजाराम त्रिपाठी भी हैं, जिन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ औषधीय खेती शुरू की और आज वें आदिवासियों को औषधीय खेती से रोजगार दे रहे हैं। 

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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