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Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by HindiWater on Mon, 03/22/2021 - 15:52
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'नौल', फोटो- कौशल सक्सेना, दून पुस्तकालय देहरादून
नौल की संरचना एक वर्गाकार लघु बावड़ी की तरह ही होती है। इसका निर्माण उस जगह पर किया जाता है जहां पानी जमीन से रिस-रिस कर बाहर निकलता है। मन्दिर के प्रारुप में बने नौलकी तीन दिशाएं बंद रहती हैं और चैथी दिशा को खुला रखा जाता है। नौल में गन्दगी आदि न जा सके इसके  लिए छत को पाथरों (स्लेट) से ढका जाता है। जल कुण्ड का आकार वर्गाकार वेदी की तरह होता है जो उपर की ओर अधिक और तल की ओर धीरे-धीरे कम चैड़ाई लिए रहता है। कुछ जगहों पर नौल  का एक अन्य रुप भी पाया जाता है जिसे ’चुपटौल’ कहा जाता है। ’चुपटौल’ की बनावट नौल  की तरह न होकर अनगढ़ स्वरुप में रहती है। स्रोत के पास गड्ढा कर सपाट पत्थरों की बंध बनाकर जल को रोक दिया जाता है और इसमें छत नहीं होती है। खास तौर पर नौल के स्रोत बहुत संवेदनशील होते हैं।
Submitted by HindiWater on Mon, 03/22/2021 - 13:21
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एमपी में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं पानी परंपराओं के खजाने !
जल संरक्षण परम्पराओं की प्राचीन तकनीक में पूरी दुनिया में भारत का अपना स्थान है। भारत का हृदय - मध्य प्रदेश भी इस संदर्भ में देश में अपना अहम स्थान रखता है। प्रदेश के मालवा, निमाड़, ग्वालियर, चम्बल, बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, महाकौशल और मध्य क्षेत्र में विविध परंपराओं की झलक दिखाई देती है। यहाँ प्रमुख तकनीकी में पहाड़ियों, किलों में जल प्रबंधन, बड़े तालाब, कुएँ, कुण्ड, बावड़ियाँ, बन्धन तो है ही लेकिन कुछ अद्भुत परम्पराएँ भी यहाँ आकर्षण का कारण है। लेकिन अफसोस की बात है कि एमपी में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं पानी परंपराओं के यह खजाने ..!!!
Submitted by HindiWater on Sat, 03/20/2021 - 16:33
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हिंडन उद्गम दर्शन यात्रा-एक सुखद अनुभूति 
मुज़फ़्फ़रनगर के अधिवक्ता साथियों ने हम सभी का स्वागत-सत्कार किया। तत्पश्चात् यात्रा अपने गंतव्य सहारनपुर स्थित गाँव कालू पहाड़ी की ओर रवाना हुई।इस गाँव में स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ उमर सैफ़ एवं सुनील गुप्ता अपनी टीम के साथ हमारा इंतज़ार कर रहे थे।यहाँ से यात्रा डॉ उमर सैफ़ के मार्गदर्शन में आगे बढ़ी। गाँव की सीमा पार करने के बाद जंगल क्षेत्र शुरू हो गया।महानगर की आपा-धापी से दूर हमारा क़ाफ़िला हिंडन की उद्गम घाटी की ओर बढ़ता जा रहा था।और फिर हम पहुँच गए लगभग सूखी हुई हिंडन नदी पर। स्थानीय नागरिकों व वन विभाग के कर्मचारियों की आवा-जाही से नदी के प्रवाह क्षेत्र में एक कच्चा रास्ता दिखाई दे रहा था।हमारी गाड़ियाँ ऐसे ही पथरीले रास्ते पर चलते हुए हिंडन की सुरम्य घाटी में पहुँच गईं।।यहाँ आकर गाड़ियों का क़ाफ़िला ठहर गया। डॉ उमर सैफ़ ने बताया कि यहाँ से आगे का सफ़र पैदल तय करना पड़ेगा।उत्साह व रोमांच बढ़ता ही जा रहा था

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।
Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
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विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।
Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
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वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

hindukush-himalaya-parvatamala-third-pole

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समृद्ध जल संस्कृति के संवाहक हैं : 'नौल'

Submitted by HindiWater on Mon, 03/22/2021 - 15:52
samruddh-jal-sanskriti-k-samvahak-hain-:-'naul'
'नौल', फोटो- कौशल सक्सेना, दून पुस्तकालय देहरादून
नौल की संरचना एक वर्गाकार लघु बावड़ी की तरह ही होती है। इसका निर्माण उस जगह पर किया जाता है जहां पानी जमीन से रिस-रिस कर बाहर निकलता है। मन्दिर के प्रारुप में बने नौलकी तीन दिशाएं बंद रहती हैं और चैथी दिशा को खुला रखा जाता है। नौल में गन्दगी आदि न जा सके इसके  लिए छत को पाथरों (स्लेट) से ढका जाता है। जल कुण्ड का आकार वर्गाकार वेदी की तरह होता है जो उपर की ओर अधिक और तल की ओर धीरे-धीरे कम चैड़ाई लिए रहता है। कुछ जगहों पर नौल  का एक अन्य रुप भी पाया जाता है जिसे ’चुपटौल’ कहा जाता है। ’चुपटौल’ की बनावट नौल  की तरह न होकर अनगढ़ स्वरुप में रहती है। स्रोत के पास गड्ढा कर सपाट पत्थरों की बंध बनाकर जल को रोक दिया जाता है और इसमें छत नहीं होती है। खास तौर पर नौल के स्रोत बहुत संवेदनशील होते हैं।

एमपी में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं पानी परंपराओं के खजाने

Submitted by HindiWater on Mon, 03/22/2021 - 13:21
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क्रांति चतुर्वेदी
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एमपी में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं पानी परंपराओं के खजाने !
जल संरक्षण परम्पराओं की प्राचीन तकनीक में पूरी दुनिया में भारत का अपना स्थान है। भारत का हृदय - मध्य प्रदेश भी इस संदर्भ में देश में अपना अहम स्थान रखता है। प्रदेश के मालवा, निमाड़, ग्वालियर, चम्बल, बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, महाकौशल और मध्य क्षेत्र में विविध परंपराओं की झलक दिखाई देती है। यहाँ प्रमुख तकनीकी में पहाड़ियों, किलों में जल प्रबंधन, बड़े तालाब, कुएँ, कुण्ड, बावड़ियाँ, बन्धन तो है ही लेकिन कुछ अद्भुत परम्पराएँ भी यहाँ आकर्षण का कारण है। लेकिन अफसोस की बात है कि एमपी में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं पानी परंपराओं के यह खजाने ..!!!

हिंडन उद्गम दर्शन यात्रा-एक सुखद अनुभूति 

Submitted by HindiWater on Sat, 03/20/2021 - 16:33
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हिंडन उद्गम दर्शन यात्रा-एक सुखद अनुभूति 
मुज़फ़्फ़रनगर के अधिवक्ता साथियों ने हम सभी का स्वागत-सत्कार किया। तत्पश्चात् यात्रा अपने गंतव्य सहारनपुर स्थित गाँव कालू पहाड़ी की ओर रवाना हुई।इस गाँव में स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ उमर सैफ़ एवं सुनील गुप्ता अपनी टीम के साथ हमारा इंतज़ार कर रहे थे।यहाँ से यात्रा डॉ उमर सैफ़ के मार्गदर्शन में आगे बढ़ी। गाँव की सीमा पार करने के बाद जंगल क्षेत्र शुरू हो गया।महानगर की आपा-धापी से दूर हमारा क़ाफ़िला हिंडन की उद्गम घाटी की ओर बढ़ता जा रहा था।और फिर हम पहुँच गए लगभग सूखी हुई हिंडन नदी पर। स्थानीय नागरिकों व वन विभाग के कर्मचारियों की आवा-जाही से नदी के प्रवाह क्षेत्र में एक कच्चा रास्ता दिखाई दे रहा था।हमारी गाड़ियाँ ऐसे ही पथरीले रास्ते पर चलते हुए हिंडन की सुरम्य घाटी में पहुँच गईं।।यहाँ आकर गाड़ियों का क़ाफ़िला ठहर गया। डॉ उमर सैफ़ ने बताया कि यहाँ से आगे का सफ़र पैदल तय करना पड़ेगा।उत्साह व रोमांच बढ़ता ही जा रहा था

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
vishva-prithvi-divas-2021:corona-sankat-k-beach-paryavaraniya-chinta
 विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

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