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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Fri, 10/30/2020 - 13:09
आज भी खरे है तालाब-अध्याय 03
अपनी पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब के तीसरे अध्याय संसार सागर के नायक में अनुपम मिश्र ने देश भर में विभिन्न समुदायों के उन पुरोधाओं को याद किया है, जिन्होंने पानी के संरक्षण और तालाबों को बनाने के लिए अपना जीवन उत्सर्ग कर दिया। इस दूसरे हिस्से में बहुत कलात्मक तरीके से उनके जीवन दर्शन को भी प्रस्तुत किया गया है।

Content

Submitted by HindiWater on Wed, 10/21/2020 - 12:09
Source:
Eco friendly house
पूरे विश्व में धरती का लगभग तीन चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है, लेकिन इसमें से 97प्रतिशत पानी खारा है और पीने योग्य नहीं है। पेयजल यानी पीने योग्य पानी की मात्रा केवल 3 प्रतिशत है। इसमें भी 2 प्रतिशत पानी ग्लेशियर और बर्फ के रूप में है। आज मानव जाति के लिये जल संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। यदि अब भी हम लोग जल सरंंक्षण के प्रति गंभीर नहीं हुए, तो यह बात बिल्कुल सही सिद्ध होगी कि तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा।
Submitted by UrbanWater on Mon, 10/19/2020 - 12:06
Source:
नदी के समग्र सर्वेक्षण की कोशिश

Submitted by HindiWater on Sat, 10/17/2020 - 17:23
Source:
पर्यावरण पर्स्पेक्टिव 
प्रदूषण
मानव सभ्यता के विकास में जीवन को सहज और सुचारू रूप से चलाने हेतु आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर आविष्कार तथा विकल्पों की तलाश होती रही है। बीते लगभग दो सौ वर्षों में जिस तरह विज्ञान ने प्रगति की है, वह अभूतपूर्व है। परंतु विज्ञान की इस प्रगति ने सबसे ज़्यादा पर्यावरण को प्रभावित किया है। वर्तमान में पर्यावरण को प्रभावित करे में विज्ञान के महत्त्वपूर्ण आविष्कारों में से एक है 'प्लास्टिक!। प्राकृतिक संसाधनों से रासायनिक प्रक्रिया द्वारा कृत्रिम रूप से तैयार प्लास्टिक का प्रयोग आज हमारे रोज़मर्रा के जीवन में धड़ल्ले से हो रहा है। इसके उपयोग से लाभ तथा हानि दोनों हैं। अतः सम्यक दृष्टि से इसका विश्लेषण करना आवश्यक है।ऐतिहासिक दृष्टि से ऐसा माना जाता है कि सर्वप्रथम मानव निर्मित प्लास्टिक सन्‌ 855 में अलेक्जेंडर पार्क्स (ब्रिटेन) द्वारा बनाया गया था।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 11/09/2020 - 12:31
आत्मनिर्भरता की इबारत लिख रहा है भारत का एक गाँव
मध्यप्रदेश का एक छोटा सा गाँव नवादपुरा इन दिनोंआत्मनिर्भर भारत की एक ऐसी इबारत लिख रहा है जो शायद पूरे भारत के लिए एक नज़ीर बन सकती है। गाँव के ही एक गाय प्रेमी दम्पत्ति के नवाचारों से गाय पालने वाले कई आदिवासी परिवारों में दीवाली से पहले ही खुशियाँ जगमगा रही हैं। गाय के गोबर को फेंकने के बजाए उससे दीये बनवाने की एक नई पहल शुरु की गई।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 
Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
Source:
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

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खासम-खास

आज भी खरे है तालाब-अध्याय 03 संसार सागर के नायक

Submitted by HindiWater on Fri, 10/30/2020 - 13:09
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
aaj-bhi-khare-hai-talab-adhyay-03-sansar-sagar-kay-nayaka
Source
रमाकांत राय
आज भी खरे है तालाब-अध्याय 03
अपनी पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब के तीसरे अध्याय संसार सागर के नायक में अनुपम मिश्र ने देश भर में विभिन्न समुदायों के उन पुरोधाओं को याद किया है, जिन्होंने पानी के संरक्षण और तालाबों को बनाने के लिए अपना जीवन उत्सर्ग कर दिया। इस दूसरे हिस्से में बहुत कलात्मक तरीके से उनके जीवन दर्शन को भी प्रस्तुत किया गया है।

Content

अब हर घर होगा “हरित घर"

Submitted by HindiWater on Wed, 10/21/2020 - 12:09
ab-hara-ghar-hoga-“harit-ghar"
Eco friendly house
पूरे विश्व में धरती का लगभग तीन चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है, लेकिन इसमें से 97प्रतिशत पानी खारा है और पीने योग्य नहीं है। पेयजल यानी पीने योग्य पानी की मात्रा केवल 3 प्रतिशत है। इसमें भी 2 प्रतिशत पानी ग्लेशियर और बर्फ के रूप में है। आज मानव जाति के लिये जल संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। यदि अब भी हम लोग जल सरंंक्षण के प्रति गंभीर नहीं हुए, तो यह बात बिल्कुल सही सिद्ध होगी कि तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा।

उपयोगिता बनाम प्रदूषण

Submitted by HindiWater on Sat, 10/17/2020 - 17:23
upayogita-banam-pradushan
Source
पर्यावरण पर्स्पेक्टिव 
 प्रदूषण
मानव सभ्यता के विकास में जीवन को सहज और सुचारू रूप से चलाने हेतु आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर आविष्कार तथा विकल्पों की तलाश होती रही है। बीते लगभग दो सौ वर्षों में जिस तरह विज्ञान ने प्रगति की है, वह अभूतपूर्व है। परंतु विज्ञान की इस प्रगति ने सबसे ज़्यादा पर्यावरण को प्रभावित किया है। वर्तमान में पर्यावरण को प्रभावित करे में विज्ञान के महत्त्वपूर्ण आविष्कारों में से एक है 'प्लास्टिक!। प्राकृतिक संसाधनों से रासायनिक प्रक्रिया द्वारा कृत्रिम रूप से तैयार प्लास्टिक का प्रयोग आज हमारे रोज़मर्रा के जीवन में धड़ल्ले से हो रहा है। इसके उपयोग से लाभ तथा हानि दोनों हैं। अतः सम्यक दृष्टि से इसका विश्लेषण करना आवश्यक है।ऐतिहासिक दृष्टि से ऐसा माना जाता है कि सर्वप्रथम मानव निर्मित प्लास्टिक सन्‌ 855 में अलेक्जेंडर पार्क्स (ब्रिटेन) द्वारा बनाया गया था।

प्रयास

आत्मनिर्भरता की इबारत लिख रहा है भारत का एक गाँव

Submitted by HindiWater on Mon, 11/09/2020 - 12:31
atmanirbharata-key-ibarat-likh-raha-hai-bharath-kaa-ek-ganv
आत्मनिर्भरता की इबारत लिख रहा है भारत का एक गाँव
मध्यप्रदेश का एक छोटा सा गाँव नवादपुरा इन दिनोंआत्मनिर्भर भारत की एक ऐसी इबारत लिख रहा है जो शायद पूरे भारत के लिए एक नज़ीर बन सकती है। गाँव के ही एक गाय प्रेमी दम्पत्ति के नवाचारों से गाय पालने वाले कई आदिवासी परिवारों में दीवाली से पहले ही खुशियाँ जगमगा रही हैं। गाय के गोबर को फेंकने के बजाए उससे दीये बनवाने की एक नई पहल शुरु की गई।   

नोटिस बोर्ड

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
hindi-patrakaron-ke-liye-cse-aaeti-online-training-course
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
ekva-foundation-key-XIV-world-ekva-kangres
Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

भविष्य में किस तरह पानी को किया जा सकता है सुरक्षित 

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
bhavishya-mein-kiss-tarah-pani-ko-kia-jaa-sakata-hai-surakshit
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

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