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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

अब हमें अपनी ‘तालाब संस्कृति’ की ओर लौटना होगा

Submitted by UrbanWater on Thu, 07/04/2019 - 16:21

हमने अपनी तालाब संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।हमने अपनी तालाब संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।

आज देश में तालाब न के बराबर है 1947 में देश में तालाबों की संख्या चौबीस लाख थी, तब देश की जनसंख्या 36 करोड़ थी। आज तालाबों की संख्या घटकर पांच लाख रह गई है, जिसमें से 20 फीसदी तालाब तो बेकार पड़े है। उनमें या तो पानी नहीं या फिर उनको लोगों ने अपने कूड़े का ढेर बना लिया है। जो राज्य इस समय सूखे की मार झेल रहे हैं, वो कभी तालाबों से सराबोर रहा करते थे। बाद में विकास के नाम पर आधुनिकता का बीज बो दिया गया और लोग अपनी तालाब संस्कृति को भूलने लगे। आजादी के बाद तालाबों के संरक्षण और सुरक्षा की परंपरा धीरे-धीरे परंपरा खत्म होती गई। आज उसी का ये आलम है कि हर जगह पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।

जल संकट और मन की बात का सन्देश

Submitted by UrbanWater on Thu, 07/04/2019 - 13:05
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’

यह अभियान तीन चरणों में संचालित किया जायेगा।यह अभियान तीन चरणों में संचालित किया जायेगा।

भारत के प्रधानमंत्री ने 30 जून 2019 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों से जल संकट से मुक्ति के लिए जागरूकता अभियान चलाने का अनुरोध किया है। इस अभियान के पहले हिस्से का फोकस जल संचय, जल संरक्षण और जल संवर्धन पर होगा। दूसरा हिस्सा पानी के कुशल उपयोग पर केन्द्रित होगा। यह अभियान तीन चरणों में संचालित किया जायेगा, प्रत्येक चरण तीन-तीन दिन का होगा। अर्थात अभियान की कुल अवधि नौ दिन की होगी। पहला चरण एक जुलाई 2019 से 15 सितम्बर 2019 के बीच चलेगा और दूसरा चरण एक अक्टूबर 2019 से 30 नवम्बर 2019 के बीच संचालित किया जायेगा। एक जुलाई 2019 से प्रारंभ होने वाले अभियान का फोकस नार्थ-ईस्ट के राज्यों को छोड़कर बाकी देश पर होगा।  एक अक्टूबर से प्रारंभ होने वाले अभियान का फोकस नार्थ-ईस्ट पर होगा। 

भारत में दस साल में सूख गईं 4500 नदियां

Submitted by HindiWater on Wed, 07/03/2019 - 18:31

इस तरह सूख गई हैं भारती की हजारों नदियां।

हमारे देश में ‘‘डग-डग रोटी, पग-पग नीर’’ की कहावत प्रचलित थी। यानी देश में पानी इतनी प्रचुर मात्रा में था कि देश के हर बाशिंदे की पानी से संबंधित सभी आवश्यकता पूरी जो जाती थी। जल संपदा से संपन्न होने के साथ ही भारत की नदियों का जल निर्मल और पवित्र भी था, जो विभिन्न प्रकार के रोगों का नाश करता था। गंगा के जल को तो अमृत का दर्जा दिया गया है, तो वहीं कृष्ण की यमुना, नर्मदा, सरस्वती का जल भी अर्मत समान था, लेकिन आबादी बढ़ने के साथ-साथ वनों की अंधाधुंध कटाई की गई। इंसानों के रहने के लिए कंक्रीट के जंगल खड़े किए गए। विज्ञान के विस्तार के साथ नए-नए संसाधनों का आविष्कार हुआ। इंसानों के शौक व जरूरतों को पूरा करने तथा बढ़ती आबादी को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर उद्योग लगाए गए। इन उद्योगों का कचरा व केमिकल वेस्ट को सीधे नदियों में बहाया जाने लगा। प्लास्टिक के आविष्कार ने इसानों को प्लास्टिक का इस हद तक आदि बना दिया कि धरती के गर्भ से लेकर समुद्र की गहराई व ऊपरी सतह पर तक प्लास्टिक कचरे का अंबार लग गया है। जिससे भूजल जल प्रदूषित होकर नदियों और नदियों से समुद्र में मिल रहा है और अब यही प्लास्टिक इंसानों के शरीर के अंदर भी पहंच गया है। खेती में रसायनों के उपयोग से भोजन के साथ ही भूमि की सतह भी विषाक्त होती जा रही है। आधुनिकीकरण की इस दौड़ में लोगों के साथ ही सरकारों ने भी पर्यावरण को उपेक्षित रखा और इसका निरंतर दोहन करते चले गए। नतीजन देश की 4500 से ज्यादा नदियां सूख गई और जल से संबंधित देश में सभी कहावते केवल इतिहास बनकर रह गई हैं।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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अब हमें अपनी ‘तालाब संस्कृति’ की ओर लौटना होगा

Submitted by UrbanWater on Thu, 07/04/2019 - 16:21

हमने अपनी तालाब संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।हमने अपनी तालाब संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।

आज देश में तालाब न के बराबर है 1947 में देश में तालाबों की संख्या चौबीस लाख थी, तब देश की जनसंख्या 36 करोड़ थी। आज तालाबों की संख्या घटकर पांच लाख रह गई है, जिसमें से 20 फीसदी तालाब तो बेकार पड़े है। उनमें या तो पानी नहीं या फिर उनको लोगों ने अपने कूड़े का ढेर बना लिया है। जो राज्य इस समय सूखे की मार झेल रहे हैं, वो कभी तालाबों से सराबोर रहा करते थे। बाद में विकास के नाम पर आधुनिकता का बीज बो दिया गया और लोग अपनी तालाब संस्कृति को भूलने लगे। आजादी के बाद तालाबों के संरक्षण और सुरक्षा की परंपरा धीरे-धीरे परंपरा खत्म होती गई। आज उसी का ये आलम है कि हर जगह पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।

जल संकट और मन की बात का सन्देश

Submitted by UrbanWater on Thu, 07/04/2019 - 13:05
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’

यह अभियान तीन चरणों में संचालित किया जायेगा।यह अभियान तीन चरणों में संचालित किया जायेगा।

भारत के प्रधानमंत्री ने 30 जून 2019 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों से जल संकट से मुक्ति के लिए जागरूकता अभियान चलाने का अनुरोध किया है। इस अभियान के पहले हिस्से का फोकस जल संचय, जल संरक्षण और जल संवर्धन पर होगा। दूसरा हिस्सा पानी के कुशल उपयोग पर केन्द्रित होगा। यह अभियान तीन चरणों में संचालित किया जायेगा, प्रत्येक चरण तीन-तीन दिन का होगा। अर्थात अभियान की कुल अवधि नौ दिन की होगी। पहला चरण एक जुलाई 2019 से 15 सितम्बर 2019 के बीच चलेगा और दूसरा चरण एक अक्टूबर 2019 से 30 नवम्बर 2019 के बीच संचालित किया जायेगा। एक जुलाई 2019 से प्रारंभ होने वाले अभियान का फोकस नार्थ-ईस्ट के राज्यों को छोड़कर बाकी देश पर होगा।  एक अक्टूबर से प्रारंभ होने वाले अभियान का फोकस नार्थ-ईस्ट पर होगा। 

भारत में दस साल में सूख गईं 4500 नदियां

Submitted by HindiWater on Wed, 07/03/2019 - 18:31

इस तरह सूख गई हैं भारती की हजारों नदियां।

हमारे देश में ‘‘डग-डग रोटी, पग-पग नीर’’ की कहावत प्रचलित थी। यानी देश में पानी इतनी प्रचुर मात्रा में था कि देश के हर बाशिंदे की पानी से संबंधित सभी आवश्यकता पूरी जो जाती थी। जल संपदा से संपन्न होने के साथ ही भारत की नदियों का जल निर्मल और पवित्र भी था, जो विभिन्न प्रकार के रोगों का नाश करता था। गंगा के जल को तो अमृत का दर्जा दिया गया है, तो वहीं कृष्ण की यमुना, नर्मदा, सरस्वती का जल भी अर्मत समान था, लेकिन आबादी बढ़ने के साथ-साथ वनों की अंधाधुंध कटाई की गई। इंसानों के रहने के लिए कंक्रीट के जंगल खड़े किए गए। विज्ञान के विस्तार के साथ नए-नए संसाधनों का आविष्कार हुआ। इंसानों के शौक व जरूरतों को पूरा करने तथा बढ़ती आबादी को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर उद्योग लगाए गए। इन उद्योगों का कचरा व केमिकल वेस्ट को सीधे नदियों में बहाया जाने लगा। प्लास्टिक के आविष्कार ने इसानों को प्लास्टिक का इस हद तक आदि बना दिया कि धरती के गर्भ से लेकर समुद्र की गहराई व ऊपरी सतह पर तक प्लास्टिक कचरे का अंबार लग गया है। जिससे भूजल जल प्रदूषित होकर नदियों और नदियों से समुद्र में मिल रहा है और अब यही प्लास्टिक इंसानों के शरीर के अंदर भी पहंच गया है। खेती में रसायनों के उपयोग से भोजन के साथ ही भूमि की सतह भी विषाक्त होती जा रही है। आधुनिकीकरण की इस दौड़ में लोगों के साथ ही सरकारों ने भी पर्यावरण को उपेक्षित रखा और इसका निरंतर दोहन करते चले गए। नतीजन देश की 4500 से ज्यादा नदियां सूख गई और जल से संबंधित देश में सभी कहावते केवल इतिहास बनकर रह गई हैं।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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