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खासम-खास

नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

Content

बंगाल में उपजने वाले चावल में भी आर्सेनिक

Submitted by editorial on Tue, 08/14/2018 - 13:10
Author
उमेश कुमार राय
चावल में आर्सेनिकचावल में आर्सेनिक (फोटो साभार - ऑल इण्डिया तृणमूल कांग्रेस)क्या आप पश्चिम बंगाल से आने वाला चावल खाते हैं? सवाल अटपटा जरूर है, लेकिन इसका जवाब जानना बहुत जरूरी है। और अगर आपका जवाब हाँ है, तो आपके लिये बुरी खबर है!

कार्बन के अॉक्साइड विविध अनुप्रयोग

Submitted by editorial on Sat, 08/11/2018 - 17:19
Source
विज्ञान प्रगति, जून, 2018

कार्बन डाइऑक्साइडकार्बन डाइऑक्साइड (फोटो साभार - किस पीएनजी)कार्बन के दो अकार्बनिक, अॉक्साइड कार्बन डाइअॉक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड हैं, जो गैसीय अवस्था में पाये जाते हैं। इनमें से कार्बन डाइअॉक्साइड के बारे में ही ज्यादा चर्चा होने के कारण इसी गैस से जनसाधारण का अधिक परिचय है। कार्बन मोनोऑक्साइड को एक विषैली गैस के रूप में ही जाना जाता है।

पलायन आयोग-अठारह वर्ष में चले अढ़ाई कोस

Submitted by editorial on Fri, 08/10/2018 - 13:22
Source
युगवाणी, जून, 2018

उत्तराखण्ड में पलायन निरन्तर जारी हैउत्तराखण्ड में पलायन निरन्तर जारी है (फोटो साभार - डाउन टू अर्थ)5 मई 2018 को राज्य पलायन आयोग एवं ग्राम विकास विभाग द्वारा राज्य में हो रहे पलायन पर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। रिपोर्ट प्रस्तुत कर बेशक सरकार अपनी पीठ थपथपा रही हो, परन्तु वास्तविक चुनौती राज्य से हो रहे पलायन को रोकना है।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
Source
फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

जखोल साकरी बाँध: बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 14:43
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
सुपिन नदीसुपिन नदी27 फरवरी, 2019। जखोल साकरी बाँध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड की 01 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई है ताकि वह जनविरोध से बच जाए।

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नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

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बंगाल में उपजने वाले चावल में भी आर्सेनिक

Submitted by editorial on Tue, 08/14/2018 - 13:10
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उमेश कुमार राय
चावल में आर्सेनिकचावल में आर्सेनिक (फोटो साभार - ऑल इण्डिया तृणमूल कांग्रेस)क्या आप पश्चिम बंगाल से आने वाला चावल खाते हैं? सवाल अटपटा जरूर है, लेकिन इसका जवाब जानना बहुत जरूरी है। और अगर आपका जवाब हाँ है, तो आपके लिये बुरी खबर है!

कार्बन के अॉक्साइड विविध अनुप्रयोग

Submitted by editorial on Sat, 08/11/2018 - 17:19
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विज्ञान प्रगति, जून, 2018

कार्बन डाइऑक्साइडकार्बन डाइऑक्साइड (फोटो साभार - किस पीएनजी)कार्बन के दो अकार्बनिक, अॉक्साइड कार्बन डाइअॉक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड हैं, जो गैसीय अवस्था में पाये जाते हैं। इनमें से कार्बन डाइअॉक्साइड के बारे में ही ज्यादा चर्चा होने के कारण इसी गैस से जनसाधारण का अधिक परिचय है। कार्बन मोनोऑक्साइड को एक विषैली गैस के रूप में ही जाना जाता है।

पलायन आयोग-अठारह वर्ष में चले अढ़ाई कोस

Submitted by editorial on Fri, 08/10/2018 - 13:22
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युगवाणी, जून, 2018

उत्तराखण्ड में पलायन निरन्तर जारी हैउत्तराखण्ड में पलायन निरन्तर जारी है (फोटो साभार - डाउन टू अर्थ)5 मई 2018 को राज्य पलायन आयोग एवं ग्राम विकास विभाग द्वारा राज्य में हो रहे पलायन पर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। रिपोर्ट प्रस्तुत कर बेशक सरकार अपनी पीठ थपथपा रही हो, परन्तु वास्तविक चुनौती राज्य से हो रहे पलायन को रोकना है।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
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माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
Source
फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

जखोल साकरी बाँध: बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 14:43
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माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
सुपिन नदीसुपिन नदी27 फरवरी, 2019। जखोल साकरी बाँध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड की 01 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई है ताकि वह जनविरोध से बच जाए।

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