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Submitted by HindiWater on Mon, 09/16/2019 - 17:06
modi on cop 14
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी नौ सिंतंबर को ग्रेटर नोएडामें मरूस्‍थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र समझौते (यूएनसीसीडी) में शामिल देशों के 14वें सम्‍मेलन (कॉप 14) के उच्‍च स्‍तरीय खंड को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत प्रभावी योगदान देने के लिए तत्‍पर है क्‍योंकि हम दो वर्ष के कार्यकाल के लिए सह-अध्‍यक्ष का पदभार संभाल रहे हैं। सदियों से हमने भूमि को महत्‍व दिया है। भारतीय संस्‍कृति में पृथ्‍वी को पवित्र माना गया है और मां का दर्जा दिया गया है।

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Submitted by RuralWater on Tue, 08/09/2016 - 16:19
Source:
spring water

वैसे तो हिमालय के शिवालिक क्षेत्र में गंधकयुक्त पानी के चश्मे मिलते ही है परन्तु उत्तराखण्ड की अस्थायी राजधानी देहरादून में इन चश्मों ने अपनी सुन्दरता के बरख्त लोगों को सरेआम अपनी ओर आकर्षित किया है। अब हालात इस कदर है कि ये गंधकयुक्त पानी के चश्में अपने प्राकृतिक स्वरूप खोते ही जा रहे हैं। भले देहरादून से 10 कि
Submitted by RuralWater on Fri, 08/05/2016 - 12:59
Source:
ईस्ट कोलकाता वेटलैंड


तीन सौ साल से भी पुराने शहर कोलकाता के पूर्वी क्षेत्र में विशाल आर्द्रभूमि है। इसे ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स (पूर्व कोलकाता आर्द्रभूमि) कहा जाता है। इस आर्द्रभूमि के पीछे गगनचुम्बी ईमारतों की शृंखला देखी जा सकती है।

इस वेटलैंड्स की खासियत यह है कि इसमें शहर से निकलने वाले गन्दे पानी का परिशोधन प्राकृतिक तरीके से होता है लेकिन इन दिनों यह आर्द्रभूमि संकट में है। पता चला है कि इस जलमय भूखण्ड को बचाए रखने के लिये जितनी मात्रा में गन्दा पानी डाला जाना चाहिए उतना नहीं डाला जा रहा है।

Submitted by RuralWater on Fri, 08/05/2016 - 11:13
Source:
Mahesh Chandra Mehta


मैंने उनका बैंक बैलेंस नहीं देखा। न मैंने उनकी बहस सुनी है और न अदालती मामलों में जीत-हार की सूची देखी है। मैंने सिर्फ उनकी सादगी और पर्यावरण के प्रति समर्पण देखा है। मैंने उन्हें कई सभाओं में आकर अक्सर पीछे की कुर्सियों में बैठते हुए देखा है।

पैंट से बाहर लटकती सादी कमीज, हल्की सफेद दाढ़ी, चेहरे पर शान्ति, बिन बिजली बैठकर बात करने में न कोई इनकार और न चेहरे पर खीझ। यूँ वह मितभाषी हैं, लेकिन पर्यावरण पर बात कीजिए, तो उनके पास शब्द-ही-शब्द हैं; चिन्ताएँ हैं; समाधान हैं। 69 की उम्र में भी पर्यावरण को बचाने के लिये कुछ कर गुजरने की बेचैनी है और जीत का भरोसा है। वह प्रतीक हैं कि कोई एक व्यक्ति भी चाहे, तो अपने आस-पास की दुनिया में बेहतरी पैदा कर सकता है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Thu, 09/19/2019 - 08:56
hiware bazar
हिवरे बाजार : पानी की पैठ का एक आदर्श गांव। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित हिवरे बाजार एक समृद्ध गाँव है। 1989 तक इस गाँव की पहाड़ियाँ व खेत बंजर हो चुके थे। लोगों के पास रोजगार नहीं था। गाँव में कच्ची शराब बनती थी। लिहाजा लोग पलायन करने लगे। तब गाँव के कुछ युवकों ने सुधार का बीड़ा उठाया और अपने एक साथी पोपटराव पंवार को सरपंच बना दिया।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Tue, 09/10/2019 - 13:01
Source:
India CSR Summit 2019 new delhi
एनजीओ बाॅक्स 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली स्थित होटल पुलमैन एंड नोवोटेल में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा ‘‘भारत सीएसआर शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी’’ का आयोजन करने जा रहा है। यह 6वा शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी) नाॅलेज पार्टनर की भूमि निभा रहा है।
Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source:
योजना, अगस्त 2019
rural india budget 2019 nirmala sitaraman india water portal
बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं। वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -
Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source:
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
grey water rule in madya pradesh
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

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खासम-खास

काॅप 14: मोदी ने कहा सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देगा भारत 

Submitted by HindiWater on Mon, 09/16/2019 - 17:06
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी नौ सिंतंबर को ग्रेटर नोएडामें मरूस्‍थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र समझौते (यूएनसीसीडी) में शामिल देशों के 14वें सम्‍मेलन (कॉप 14) के उच्‍च स्‍तरीय खंड को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत प्रभावी योगदान देने के लिए तत्‍पर है क्‍योंकि हम दो वर्ष के कार्यकाल के लिए सह-अध्‍यक्ष का पदभार संभाल रहे हैं। सदियों से हमने भूमि को महत्‍व दिया है। भारतीय संस्‍कृति में पृथ्‍वी को पवित्र माना गया है और मां का दर्जा दिया गया है।

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देहरादून में एक और गंधकयुक्त पानी का चश्मा

Submitted by RuralWater on Tue, 08/09/2016 - 16:19
Author
प्रेम पंचोली

.वैसे तो हिमालय के शिवालिक क्षेत्र में गंधकयुक्त पानी के चश्मे मिलते ही है परन्तु उत्तराखण्ड की अस्थायी राजधानी देहरादून में इन चश्मों ने अपनी सुन्दरता के बरख्त लोगों को सरेआम अपनी ओर आकर्षित किया है। अब हालात इस कदर है कि ये गंधकयुक्त पानी के चश्में अपने प्राकृतिक स्वरूप खोते ही जा रहे हैं। भले देहरादून से 10 कि

संकट में ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स

Submitted by RuralWater on Fri, 08/05/2016 - 12:59
Author
उमेश कुमार राय


.तीन सौ साल से भी पुराने शहर कोलकाता के पूर्वी क्षेत्र में विशाल आर्द्रभूमि है। इसे ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स (पूर्व कोलकाता आर्द्रभूमि) कहा जाता है। इस आर्द्रभूमि के पीछे गगनचुम्बी ईमारतों की शृंखला देखी जा सकती है।

इस वेटलैंड्स की खासियत यह है कि इसमें शहर से निकलने वाले गन्दे पानी का परिशोधन प्राकृतिक तरीके से होता है लेकिन इन दिनों यह आर्द्रभूमि संकट में है। पता चला है कि इस जलमय भूखण्ड को बचाए रखने के लिये जितनी मात्रा में गन्दा पानी डाला जाना चाहिए उतना नहीं डाला जा रहा है।

हरित न्याय का भारतीय नायक

Submitted by RuralWater on Fri, 08/05/2016 - 11:13
Author
अरुण तिवारी


.मैंने उनका बैंक बैलेंस नहीं देखा। न मैंने उनकी बहस सुनी है और न अदालती मामलों में जीत-हार की सूची देखी है। मैंने सिर्फ उनकी सादगी और पर्यावरण के प्रति समर्पण देखा है। मैंने उन्हें कई सभाओं में आकर अक्सर पीछे की कुर्सियों में बैठते हुए देखा है।

पैंट से बाहर लटकती सादी कमीज, हल्की सफेद दाढ़ी, चेहरे पर शान्ति, बिन बिजली बैठकर बात करने में न कोई इनकार और न चेहरे पर खीझ। यूँ वह मितभाषी हैं, लेकिन पर्यावरण पर बात कीजिए, तो उनके पास शब्द-ही-शब्द हैं; चिन्ताएँ हैं; समाधान हैं। 69 की उम्र में भी पर्यावरण को बचाने के लिये कुछ कर गुजरने की बेचैनी है और जीत का भरोसा है। वह प्रतीक हैं कि कोई एक व्यक्ति भी चाहे, तो अपने आस-पास की दुनिया में बेहतरी पैदा कर सकता है।

प्रयास

हिवरे बाजार : पानी की पैठ का एक आदर्श गांव

Submitted by HindiWater on Thu, 09/19/2019 - 08:56
Source
पाञ्चजन्य, 8 सितम्बर 2019
हिवरे बाजार : पानी की पैठ का एक आदर्श गांव। हिवरे बाजार : पानी की पैठ का एक आदर्श गांव। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित हिवरे बाजार एक समृद्ध गाँव है। 1989 तक इस गाँव की पहाड़ियाँ व खेत बंजर हो चुके थे। लोगों के पास रोजगार नहीं था। गाँव में कच्ची शराब बनती थी। लिहाजा लोग पलायन करने लगे। तब गाँव के कुछ युवकों ने सुधार का बीड़ा उठाया और अपने एक साथी पोपटराव पंवार को सरपंच बना दिया।

नोटिस बोर्ड

नई दिल्ली में होगा दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा सीएसआर शिखर सम्मेलन

Submitted by HindiWater on Tue, 09/10/2019 - 13:01
एनजीओ बाॅक्स 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली स्थित होटल पुलमैन एंड नोवोटेल में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा ‘‘भारत सीएसआर शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी’’ का आयोजन करने जा रहा है। यह 6वा शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी) नाॅलेज पार्टनर की भूमि निभा रहा है।

बजट 2019 में ग्रामीण भारत के विकास की योजनाएं

Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source
योजना, अगस्त 2019
बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं।बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं। वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

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