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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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Submitted by HindiWater on Mon, 04/12/2021 - 15:33
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देहरादून से शुरू हुआ रेन वाटर हार्वेस्टिंग का अभियान 
र्मियों का मौसम आते ही पानी की किल्लत देश भर के कई हिस्सों में शुरू ही जाती है और इससे निपटने के लिए सरकार भी लगातार प्रयास करती रहती है ऐसा ही एक प्रयास उत्तराखंड सरकार ने भी किया है  भूजल के गिरते स्तर और पानी के संकट से निपटने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सबसे बेहतर विकल्प है। सरकार भी इसको लेकर गंभीर नजर आ रही है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग को सरकारी और निजी भवनों में प्रभावी ढंग से लागू करने की योजना है। इसके लिए उत्तराखंड जल संस्थान ने कसरत भी शुरू कर दी है। पहले फेज में दून के 110 सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जा चुका है। कई अन्य सरकारी भवनों में यह सिस्टम लगाने की प्रक्रिया चल रही है ।
Submitted by HindiWater on Mon, 04/12/2021 - 15:10
Source:
कट्टा: कासरगोड के पारंपरिक चेकडैम
शिरिया नदी और उसकी सहायक नदियों   में येल्का गाँव के ग्रामीण हर साल नवंबर में चैक डैम  का निर्माण करते है । केरल में पिछले 70 सालों से पानी के सरंक्षण के लिए चेक डैम बनाये जा रहे है जिसे केरल में कटास कहते है गांवों में बनाये जाने वाले ये चेक डैम  जिसे केरल में कटास  कहते है पहले इसमें पानी सरंक्षित किया जाता है उसके बाद बिजली के माध्यम से इसे अपलिफ्ट कर सिंचाई के उपयोग में लाया जाता है कट्टा को मानसून के आने से पहले ही करीब जून में तोड़ दिए जाते है । एथड़का करीब 24 किलोमीटर दूर है जिला मुख्यालय से जो उत्तर पूर्व में पड़ता है  यहां के किसान पूरी तरह से कट्टा पर निर्भर करते है  यहां पर इनकी मुख्य फसले कोकोनट ,पैड़ी कोको आदि है  कटास1 मड स्टोन से बनाएं जाते है
Submitted by HindiWater on Fri, 04/09/2021 - 16:52
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चरखा फीचर
मासिक धर्म की चुनौतियों से जूझती पहाड़ी किशोरियां
बालिकाओं में किशोरावस्था में होने वाले बदलावों में खासतौर पर मासिक धर्म को कई मान्यताओं और धारणाओं में लपेटा गया है। लड़कियों में आमतौर पर 14 से 15 वर्ष की आयु में मासिक धर्म आरम्भ हो जाता है। सामाजिक रूढ़ियों के कारण महिलाओं विशेषकर किशोरियों को महिने के इन चार-पांच दिनों में बहुत बुरे दौर से गुजरना पड़ता है। पूरी दुनिया में 28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2014 में जर्मनी के एक स्वैच्छिक संगठन वाश यूनाइटेड के द्वारा इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गई थी। इसका मुख्य  उद्देश्य ही यह था कि महिलाओं और किशोरियों को महीने के उन पांच दिनों यानी की अपने मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाये रखने के लिये जागरूक किया जाये।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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खासम-खास

सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
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सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

Content

देहरादून से शुरू हुआ रेन वाटर हार्वेस्टिंग का अभियान 

Submitted by HindiWater on Mon, 04/12/2021 - 15:33
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 देहरादून से शुरू हुआ रेन वाटर हार्वेस्टिंग का अभियान 
र्मियों का मौसम आते ही पानी की किल्लत देश भर के कई हिस्सों में शुरू ही जाती है और इससे निपटने के लिए सरकार भी लगातार प्रयास करती रहती है ऐसा ही एक प्रयास उत्तराखंड सरकार ने भी किया है  भूजल के गिरते स्तर और पानी के संकट से निपटने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सबसे बेहतर विकल्प है। सरकार भी इसको लेकर गंभीर नजर आ रही है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग को सरकारी और निजी भवनों में प्रभावी ढंग से लागू करने की योजना है। इसके लिए उत्तराखंड जल संस्थान ने कसरत भी शुरू कर दी है। पहले फेज में दून के 110 सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जा चुका है। कई अन्य सरकारी भवनों में यह सिस्टम लगाने की प्रक्रिया चल रही है ।

कट्टा: कासरगोड का पारंपरिक चेकडैम

Submitted by HindiWater on Mon, 04/12/2021 - 15:10
kata-:-kasargod-ka-paramparik-checkdam
कट्टा: कासरगोड के पारंपरिक चेकडैम
शिरिया नदी और उसकी सहायक नदियों   में येल्का गाँव के ग्रामीण हर साल नवंबर में चैक डैम  का निर्माण करते है । केरल में पिछले 70 सालों से पानी के सरंक्षण के लिए चेक डैम बनाये जा रहे है जिसे केरल में कटास कहते है गांवों में बनाये जाने वाले ये चेक डैम  जिसे केरल में कटास  कहते है पहले इसमें पानी सरंक्षित किया जाता है उसके बाद बिजली के माध्यम से इसे अपलिफ्ट कर सिंचाई के उपयोग में लाया जाता है कट्टा को मानसून के आने से पहले ही करीब जून में तोड़ दिए जाते है । एथड़का करीब 24 किलोमीटर दूर है जिला मुख्यालय से जो उत्तर पूर्व में पड़ता है  यहां के किसान पूरी तरह से कट्टा पर निर्भर करते है  यहां पर इनकी मुख्य फसले कोकोनट ,पैड़ी कोको आदि है  कटास1 मड स्टोन से बनाएं जाते है

मासिक धर्म की चुनौतियों से जूझती पहाड़ी किशोरियां

Submitted by HindiWater on Fri, 04/09/2021 - 16:52
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चरखा फीचर
मासिक धर्म की चुनौतियों से जूझती पहाड़ी किशोरियां
बालिकाओं में किशोरावस्था में होने वाले बदलावों में खासतौर पर मासिक धर्म को कई मान्यताओं और धारणाओं में लपेटा गया है। लड़कियों में आमतौर पर 14 से 15 वर्ष की आयु में मासिक धर्म आरम्भ हो जाता है। सामाजिक रूढ़ियों के कारण महिलाओं विशेषकर किशोरियों को महिने के इन चार-पांच दिनों में बहुत बुरे दौर से गुजरना पड़ता है। पूरी दुनिया में 28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2014 में जर्मनी के एक स्वैच्छिक संगठन वाश यूनाइटेड के द्वारा इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गई थी। इसका मुख्य  उद्देश्य ही यह था कि महिलाओं और किशोरियों को महीने के उन पांच दिनों यानी की अपने मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाये रखने के लिये जागरूक किया जाये।

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
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वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
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Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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