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Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Fri, 06/04/2021 - 13:22
Source:
इंडिया साइंस वायर
वैज्ञानिकों ने विकसित की जल शुद्धिकरण की हाइब्रिड तकनीक 
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की पुणे स्थित लैब राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (एनसीएल) के वैज्ञानिक डॉ वीएम भंडारी और उनकी टीम ने ‘स्वास्तिक’ नामक एक हाईब्रिड तकनीक विकसित की है। इस तकनीक में प्रेशर रिडक्शन (कैविटेशन) के परिणामस्वरूप तरल को उबाला जाता है तथा इसमें रोगाणु-रोधी गुणों वाले प्राकृतिक तेलों का भी उपयोग किया जाता है। यह तकनीक रोगाणु-रोधी-सहिष्णु बैक्टीरिया सहित अन्य हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म कर सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक पानी को संक्रमण रहित करने के लिए आयुर्वेद के भारतीय पारंपरिक ज्ञान को समेकित करती है, और प्राकृतिक तेलों के संभावित स्वास्थ्य लाभों को भी प्रस्तुत करती है। 
Submitted by Shivendra on Fri, 06/04/2021 - 13:09
Source:
इंडिया साइंस वायर
अस्पतालों में स्थापित की जा रही ‘वज्र कवच’ डिसइन्फेक्शन प्रणाली
02 जून (इंडिया साइंस वायर): देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच कोविड-19 उपचार एवं उसके नियंत्रण के दौरान पैदा होने वाले कचरे का निपटान भी एक बड़ी चुनौती है। मुंबई स्थित स्टार्टअप ‘इंद्रावाटर’ द्वारा हाल में विकसित की गई एक डिसइन्फेक्शन प्रणाली इस मुश्किल को हल करने में मददगार हो सकती है। ‘वज्र कवच’ नामक यह प्रणाली पीपीई किट जैसी चिकित्सकीय और गैर-चिकित्सकीय कपड़ों को संक्रमण से मुक्त कर सकती है, जिससे उनका फिर से उपयोग किया जा सकता है। इससे अत्यधिक मात्रा में उत्पन्न हो रहे कोविड-19 अपशिष्ट को कम करने में मदद मिल सकती है।
Submitted by Shivendra on Thu, 06/03/2021 - 16:02
Source:
वृक्षारोपण से होगा दूषित पर्यावरण में सुधार,Source:-neeedpix.com
पिछले दो साल पर्यावरण की दृष्टि से अभी तक के पृथ्वी इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माने जा सकते है क्योंकि इन दो सालों में जिस तरह कोरोना ने के प्रकोप से पर्यावरण को सुरक्षा मिली है ऐसी सुरक्षा मानवजाती इससे पहले कभी प्रकृति को प्रदान नही कर पाई क्योंकि कोरोना ने लॉक डाउन दिया और आर्तव्यवस्था के पहिये जाम हो गए सारे कारोबार बंद हो गए और गाड़ियों के चके जाम हो गए उद्योग की रफ्तार पर बरेअक लगा और इस तरह से पर्यावरण को साफ होने में एक खास किस्म का सहयोग मिला  आज 5 जून है और साल 2021 का ये पर्यावरण दिवस हम lलॉकडाउन के तहत मना रहे है  हम सभी को मिलकर अपने पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि स्वस्थ एवं सुरक्षित पर्यावरण के बिना समाज की कल्पना भी अधूरी है। हर साल लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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वैज्ञानिकों ने विकसित की जल शुद्धिकरण की हाइब्रिड तकनीक 

Submitted by Shivendra on Fri, 06/04/2021 - 13:22
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इंडिया साइंस वायर
वैज्ञानिकों ने विकसित की जल शुद्धिकरण की हाइब्रिड तकनीक 
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की पुणे स्थित लैब राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (एनसीएल) के वैज्ञानिक डॉ वीएम भंडारी और उनकी टीम ने ‘स्वास्तिक’ नामक एक हाईब्रिड तकनीक विकसित की है। इस तकनीक में प्रेशर रिडक्शन (कैविटेशन) के परिणामस्वरूप तरल को उबाला जाता है तथा इसमें रोगाणु-रोधी गुणों वाले प्राकृतिक तेलों का भी उपयोग किया जाता है। यह तकनीक रोगाणु-रोधी-सहिष्णु बैक्टीरिया सहित अन्य हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म कर सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक पानी को संक्रमण रहित करने के लिए आयुर्वेद के भारतीय पारंपरिक ज्ञान को समेकित करती है, और प्राकृतिक तेलों के संभावित स्वास्थ्य लाभों को भी प्रस्तुत करती है। 

पीपीई किट विसंक्रमित कर दोबारा उपयोगी बनाने के लिए नई तकनीक 

Submitted by Shivendra on Fri, 06/04/2021 - 13:09
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इंडिया साइंस वायर
अस्पतालों में स्थापित की जा रही ‘वज्र कवच’ डिसइन्फेक्शन प्रणाली
02 जून (इंडिया साइंस वायर): देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच कोविड-19 उपचार एवं उसके नियंत्रण के दौरान पैदा होने वाले कचरे का निपटान भी एक बड़ी चुनौती है। मुंबई स्थित स्टार्टअप ‘इंद्रावाटर’ द्वारा हाल में विकसित की गई एक डिसइन्फेक्शन प्रणाली इस मुश्किल को हल करने में मददगार हो सकती है। ‘वज्र कवच’ नामक यह प्रणाली पीपीई किट जैसी चिकित्सकीय और गैर-चिकित्सकीय कपड़ों को संक्रमण से मुक्त कर सकती है, जिससे उनका फिर से उपयोग किया जा सकता है। इससे अत्यधिक मात्रा में उत्पन्न हो रहे कोविड-19 अपशिष्ट को कम करने में मदद मिल सकती है।

वृक्षारोपण से होगा दूषित पर्यावरण में सुधार

Submitted by Shivendra on Thu, 06/03/2021 - 16:02
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वृक्षारोपण से होगा दूषित पर्यावरण में सुधार,Source:-neeedpix.com
पिछले दो साल पर्यावरण की दृष्टि से अभी तक के पृथ्वी इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माने जा सकते है क्योंकि इन दो सालों में जिस तरह कोरोना ने के प्रकोप से पर्यावरण को सुरक्षा मिली है ऐसी सुरक्षा मानवजाती इससे पहले कभी प्रकृति को प्रदान नही कर पाई क्योंकि कोरोना ने लॉक डाउन दिया और आर्तव्यवस्था के पहिये जाम हो गए सारे कारोबार बंद हो गए और गाड़ियों के चके जाम हो गए उद्योग की रफ्तार पर बरेअक लगा और इस तरह से पर्यावरण को साफ होने में एक खास किस्म का सहयोग मिला  आज 5 जून है और साल 2021 का ये पर्यावरण दिवस हम lलॉकडाउन के तहत मना रहे है  हम सभी को मिलकर अपने पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि स्वस्थ एवं सुरक्षित पर्यावरण के बिना समाज की कल्पना भी अधूरी है। हर साल लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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Source
6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

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