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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

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Submitted by Shivendra on Fri, 08/16/2019 - 10:23
Source:
ganga river between faith and filth
विश्वास और गंदगी के बीच गंगा नदी। हमारी राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण का मुद्दा पिछले कई दशकों से भारत सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसकी मूल वजह है गंगा के प्रति हम देशवासियों की अटूट आस्था। गंगा हमारे लिए महज एक नदी नहीं अपितु माँ है। भारतीय सभ्यता-संस्कृति, दर्शन-धर्म और अध्यात्म का पवित्र प्रवाह है। वैदिक काल से मध्ययुग तक हमारे गौरवशाली अतीत की साक्षी रही राष्ट्र की इस जीवनधारा के तटों पर ऐसी उन्नत सभ्यता विकसित हुई जिसने भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिलाया।
Submitted by Shivendra on Fri, 08/16/2019 - 09:35
Source:
bharat niti conference on water secure and water surplus india

भारत नीति द्वारा जल शक्ति मंत्रालय, जनाजल और भास्कर फाउंडेशन के सहयोग से मंगलवार को नई दिल्ली स्थित  नेहरु मेमोरियल पुस्तकालय सभागार में ‘‘वाटर सिक्योर और वाटर सरप्लस इंडिया’’ विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। जिसमें पानी के विशेषज्ञों ने जल संरक्षण के लिए विभिन्न उपाय सुझाए। साथ ही जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गांव इकाई से जल प्रबंधन का कार्य शुरू करने और जन सहभागिता पर जोर दिया। इसके अलावा जल संरक्षण को पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव भी आया।
Submitted by Shivendra on Wed, 08/14/2019 - 13:54
Source:
हरिभूमि, 21 जुलाई 2019
global warming taking you towards the darkness
अंधकार की ओर ले जाता जलवायु परिवर्तन। एक महान संत ने एक बार मुझसे कहा था कि वे गौ हत्या का विरोध मात्र धर्म के आधार पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक आधार पर भी करते हैं। उन्होंने कहा था कि भारत विश्व का सबसे बड़ा गौमांस निर्यात देश है। उन्होंने यह भी बताया कि हमें नहीं भूलना चाहिए कि हमारी भूमि की उर्वरता बनाए रखने के केवल दो स्रोत हैं, वृक्ष तथा पशुधन। वृक्षों से झड़ी पत्तियाँ सड़कर और पशुधन का मल-मूत्र मिलकर भारत भूमि की स्वाभाविक उर्वरता की क्षमता को बनाए रखते हैं।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
Source:
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।
Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
Source:
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे
Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
Source:
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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खासम-खास

केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण  : कुछ तथ्य, कुछ जानकारियां

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
kendriya-bhoomi-jal-pradhikaran-:-kuchh-tathy,-kuchh-jankariyan
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

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विश्वास और गंदगी के बीच गंगा नदी

Submitted by Shivendra on Fri, 08/16/2019 - 10:23
ganga river between faith and filth
विश्वास और गंदगी के बीच गंगा नदी।विश्वास और गंदगी के बीच गंगा नदी। हमारी राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण का मुद्दा पिछले कई दशकों से भारत सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसकी मूल वजह है गंगा के प्रति हम देशवासियों की अटूट आस्था। गंगा हमारे लिए महज एक नदी नहीं अपितु माँ है। भारतीय सभ्यता-संस्कृति, दर्शन-धर्म और अध्यात्म का पवित्र प्रवाह है। वैदिक काल से मध्ययुग तक हमारे गौरवशाली अतीत की साक्षी रही राष्ट्र की इस जीवनधारा के तटों पर ऐसी उन्नत सभ्यता विकसित हुई जिसने भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिलाया।

भारत नीति जल मंथन: गांव इकाई से हो जल प्रबंधन का कार्य

Submitted by Shivendra on Fri, 08/16/2019 - 09:35
bharat niti conference on water secure and water surplus india

भारत नीति द्वारा जल शक्ति मंत्रालय, जनाजल और भास्कर फाउंडेशन के सहयोग से मंगलवार को नई दिल्ली स्थित  नेहरु मेमोरियल पुस्तकालय सभागार में ‘‘वाटर सिक्योर और वाटर सरप्लस इंडिया’’ विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। जिसमें पानी के विशेषज्ञों ने जल संरक्षण के लिए विभिन्न उपाय सुझाए। साथ ही जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गांव इकाई से जल प्रबंधन का कार्य शुरू करने और जन सहभागिता पर जोर दिया। इसके अलावा जल संरक्षण को पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव भी आया।

अंधकार की ओर ले जाता जलवायु परिवर्तन

Submitted by Shivendra on Wed, 08/14/2019 - 13:54
Source
हरिभूमि, 21 जुलाई 2019
global warming taking you towards the darkness
अंधकार की ओर ले जाता जलवायु परिवर्तन।अंधकार की ओर ले जाता जलवायु परिवर्तन। एक महान संत ने एक बार मुझसे कहा था कि वे गौ हत्या का विरोध मात्र धर्म के आधार पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक आधार पर भी करते हैं। उन्होंने कहा था कि भारत विश्व का सबसे बड़ा गौमांस निर्यात देश है। उन्होंने यह भी बताया कि हमें नहीं भूलना चाहिए कि हमारी भूमि की उर्वरता बनाए रखने के केवल दो स्रोत हैं, वृक्ष तथा पशुधन। वृक्षों से झड़ी पत्तियाँ सड़कर और पशुधन का मल-मूत्र मिलकर भारत भूमि की स्वाभाविक उर्वरता की क्षमता को बनाए रखते हैं।

प्रयास

उदयपुर के इस गांव को वेटलैंड घोषित किया जाना तय

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
udayapur-ke-is-gaon-ko-weightland-ghoshit-kiya-jana-tay
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
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Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित

Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
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भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे

स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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