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खासम-खास

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/25/2020 - 09:08
नदी चेतना यात्रा : बिहार में राज-समाज की कोशिश से नदियों को जिंदा करने की कवायद, फोटो: Needpix.com
पिछले तीन दिनों (22 जून से 24 जून) से बिहार में बीस-पच्चीस संवेदनशील लोग नदी चेतना यात्रा के लिए होमवर्क कर रहे हैं। यह समूह रोज सबेरे 8.30 बजे मोबाईल पर एक दूसरे से कनेक्ट होता है और डिजिटल सम्वाद के तरीके से प्रातः लगभग नौ बजे तक होमवर्क करता है। होमवर्क का लक्ष्य है, चेतना यात्रा को प्रभावी बनाना। चयनित नदियों की समस्याओं के कारणों को पहचाना और कछार में निवास करने वाले समाज की मदद से समाज सम्मत हल तलाशना और जन अपेक्षाओं को मूर्त स्वरुप प्रदान करने के लिए राज से सम्वाद करना।

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Submitted by admin on Sat, 07/20/2013 - 09:14
Source:
denwa river
कुल मिलाकर, देनवा जैसी छोटी नदियों का बहुत महत्व है। सतपुड़ा से निकलने वाली ज्यादातर नदियां धीरे-धीरे दम तोड़ रही हैं। दुधी, पलकमती, मछवासा, शक्कर आदि कई नदियां अब बरसाती नाला बन कर रह गई हैं, जो पहले सदानीरा थीं। देनवा में अभी पानी है, अपूर्व सौंदर्य भी है, जंगल भी है। लेकिन यह कब तक बचा रहेगा, यह
Submitted by admin on Thu, 07/18/2013 - 09:55
Source:
organic farming

मड़िया सरसों की तरह छोटा अनाज होता है। इसे रागी, नाचनी और मड़ुआ नाम से भी जाना जाता है। इसे हाथ की चक्की में दर कर खिचड़ी या भात बनाया जा सकता है। इसके आटे की रोटी भी बनाई जा सकती हैं। खुरमी या लड्डू भी बना सकते हैं। इसमें चूना (कैल्शियम) भरपूर मात्रा में होता है और कुछ मात्रा में लौह तत्व भी

Submitted by admin on Mon, 07/15/2013 - 12:40
Source:
चरखा फिचर्स, जुलाई 2013
हनुमानगढ़ में पीने के लिए कुआं, हैंडपंप, तालाब के अलावा अन्य कोई साधन नहीं है। दिन प्रतिदिन यहां की स्थिति और भयंकर होती जा रही है। ग्रामीणों की मानें तो अविभाजित मध्य प्रदेश क्षेत्रफल में बड़ा होने के कारण शायद उस समय की सरकार का ध्यान इस ओेर नहीं गया होगा, लेकिन 13 साल पहले छत्तीसगढ़ के अस्तित्व में आने के बावजूद शासन द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाना चिंता का विषय है। सरकार की ऐसी उदासीनता गांव वालों के लिए किसी मौत की सजा से कम नहीं है। एक पल के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि जो पानी हमें जीवन प्रदान करता है वह कभी किसी को इस तरह असहाय बना दे कि अपनी सारी जिंदगी विकलांग के रूप में काटने को मजबूर हो जाए। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला स्थित रामानुजनगर विकासखंड के हनुमानगढ़ में यही देखने को मिल रहा है। लगभग 1000 की आबादी वाला यह एक ऐसा गांव है जहां के हरिजन मुहल्ले की आधी आबादी विकलांग है। यह विकलांगता न तो पोलियो के कारण हुआ है और न ही कुपोषण इसका जिम्मेदार है। दरअसल हनुमानगढ़ के पानी में फ्लोराइड, सल्फर, फास्फोरस और अन्य रासायनिक तत्वों की मात्रा अधिक है। जो यहां के लोगों के लिए जहर का काम कर रहा है। वैसे तो पानी में मौजूद खनिज तत्व (फ्लोराइड) हमारे शरीर के लिए नुकसानदेय नहीं होता है। लेकिन निर्धारित मात्रा से अधिक होने पर यही फ्लोराइड हमारे शरीर के लिए हानिकारक हो जाता है। विकलांगता के कारण का पता नहीं चलने पर समस्या और गंभीर हो जाती है।

प्रयास

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/18/2020 - 05:54
सिंचाई-तालाब ही कृषिजल का समाधान, प्रतीकात्मक फोटो: Needpix.com
तालाब हेतु खोदी हुई मिट्टी का उपयोग श्री चौधरी के खेतों में बने निचले, असमतल क्षेत्रों में भरकर उन्हें एक समतल-आकार देने का प्रयास किया गया। साथ ही अन्य मिट्टी का उपयोग खेतों की पहुंच सड़कों ठीक करने में लिया गया। कड़ी मेहनत के बाद मई माह में तालाब निर्मित हुआ और उसका आकार 1 हेक्टेयर में होकर उसमें लगभग 80000 घन मीटर पानी का संग्रहण किया जा सकता था। चूँकि इस तालाब में प्राकृतिक निकास मार्ग (जो कि मुख्य राजमार्ग से लगा हुआ था) से जल का प्रवेश तालाब में कराया गया था, इस कारण अतिरिक्त निकास द्वार न बनाकर ऐसा प्रयास किया गया कि तालाब भरने के उपरान्त पुनः जल अपवाह अपने प्राकृतिक निकास मार्ग से आगे चला जाए।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 15:04
Source:
वेबिनारः कोरोनार संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 
कोरोना संकट और लॉकडाउन को हिमालय क्षेत्र के परिप्रेक्ष में समझने के लिए 21 मई, गुरुवार 4 बजे हमारे पेज Endangered Himalaya में इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक के साथ लाइव बातचीत में जुड़ें।  आप Zoom में https://bit.ly/2zmjhHs लिंक में पंजीकरण करके भी जुड़ सकते हैं। इसका आयोजन हिम धारा और रिवाइटललाइज़िग रेनफेड एग्रीकल्चर द्वारा किया जा रहा है।
Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 14:52
Source:
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ विषय पर सहगल फाउंडेशन और सीएडब्ल्यूएसटी ऑनलाइन वर्कशाप का आयोजन करने जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य वाॅश के प्रति लोगों को जागरुक करना और प्रेरित करना है। ये वेबिनार निन्मलिखित विषयों से संबंधित रहेगा - 
Submitted by UrbanWater on Wed, 05/13/2020 - 11:11
Source:
पंकज मालवीय अक्षधा फाउंडेशन
पानी रे पानी
विश्व पर्यावरण दिवस – 5 जून 2020

ई-चित्रकला व गृह सज्जा प्रतियोगिता में भाग लें और जीते ₹ 1,51,000 पुरस्कार राशि |
प्रविष्टि रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि – 30 मई 2020
ई-प्रतियोगिता की तिथि – 5 जून 2020,
समय 10 बजे प्रात: से 4 बजे तक

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खासम-खास

नदी चेतना यात्रा : राज से सम्वाद के लिए होमवर्क करता समाज 

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/25/2020 - 09:08
Author
कृष्ण गोपाल व्यास
nadi-chetna-yatra-bihar-nadiyan
नदी चेतना यात्रा : बिहार में राज-समाज की कोशिश से नदियों को जिंदा करने की कवायद, फोटो: Needpix.com
पिछले तीन दिनों (22 जून से 24 जून) से बिहार में बीस-पच्चीस संवेदनशील लोग नदी चेतना यात्रा के लिए होमवर्क कर रहे हैं। यह समूह रोज सबेरे 8.30 बजे मोबाईल पर एक दूसरे से कनेक्ट होता है और डिजिटल सम्वाद के तरीके से प्रातः लगभग नौ बजे तक होमवर्क करता है। होमवर्क का लक्ष्य है, चेतना यात्रा को प्रभावी बनाना। चयनित नदियों की समस्याओं के कारणों को पहचाना और कछार में निवास करने वाले समाज की मदद से समाज सम्मत हल तलाशना और जन अपेक्षाओं को मूर्त स्वरुप प्रदान करने के लिए राज से सम्वाद करना।

Content

देनवा का अनुपम सौंदर्य

Submitted by admin on Sat, 07/20/2013 - 09:14
Author
बाबा मायाराम
denwa river
कुल मिलाकर, देनवा जैसी छोटी नदियों का बहुत महत्व है। सतपुड़ा से निकलने वाली ज्यादातर नदियां धीरे-धीरे दम तोड़ रही हैं। दुधी, पलकमती, मछवासा, शक्कर आदि कई नदियां अब बरसाती नाला बन कर रह गई हैं, जो पहले सदानीरा थीं। देनवा में अभी पानी है, अपूर्व सौंदर्य भी है, जंगल भी है। लेकिन यह कब तक बचा रहेगा, यह

जैविक खेती से मड़िया की पैदावार दोगुनी

Submitted by admin on Thu, 07/18/2013 - 09:55
Author
बाबा मायाराम
organic farming

मड़िया सरसों की तरह छोटा अनाज होता है। इसे रागी, नाचनी और मड़ुआ नाम से भी जाना जाता है। इसे हाथ की चक्की में दर कर खिचड़ी या भात बनाया जा सकता है। इसके आटे की रोटी भी बनाई जा सकती हैं। खुरमी या लड्डू भी बना सकते हैं। इसमें चूना (कैल्शियम) भरपूर मात्रा में होता है और कुछ मात्रा में लौह तत्व भी

जहरीला पानी गांव को बना रहा है विकलांग

Submitted by admin on Mon, 07/15/2013 - 12:40
Author
सूर्याकांत देवांगन
Source
चरखा फिचर्स, जुलाई 2013
हनुमानगढ़ में पीने के लिए कुआं, हैंडपंप, तालाब के अलावा अन्य कोई साधन नहीं है। दिन प्रतिदिन यहां की स्थिति और भयंकर होती जा रही है। ग्रामीणों की मानें तो अविभाजित मध्य प्रदेश क्षेत्रफल में बड़ा होने के कारण शायद उस समय की सरकार का ध्यान इस ओेर नहीं गया होगा, लेकिन 13 साल पहले छत्तीसगढ़ के अस्तित्व में आने के बावजूद शासन द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाना चिंता का विषय है। सरकार की ऐसी उदासीनता गांव वालों के लिए किसी मौत की सजा से कम नहीं है। एक पल के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि जो पानी हमें जीवन प्रदान करता है वह कभी किसी को इस तरह असहाय बना दे कि अपनी सारी जिंदगी विकलांग के रूप में काटने को मजबूर हो जाए। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला स्थित रामानुजनगर विकासखंड के हनुमानगढ़ में यही देखने को मिल रहा है। लगभग 1000 की आबादी वाला यह एक ऐसा गांव है जहां के हरिजन मुहल्ले की आधी आबादी विकलांग है। यह विकलांगता न तो पोलियो के कारण हुआ है और न ही कुपोषण इसका जिम्मेदार है। दरअसल हनुमानगढ़ के पानी में फ्लोराइड, सल्फर, फास्फोरस और अन्य रासायनिक तत्वों की मात्रा अधिक है। जो यहां के लोगों के लिए जहर का काम कर रहा है। वैसे तो पानी में मौजूद खनिज तत्व (फ्लोराइड) हमारे शरीर के लिए नुकसानदेय नहीं होता है। लेकिन निर्धारित मात्रा से अधिक होने पर यही फ्लोराइड हमारे शरीर के लिए हानिकारक हो जाता है। विकलांगता के कारण का पता नहीं चलने पर समस्या और गंभीर हो जाती है।

प्रयास

जल संग्रहण तालाब के निर्माण से भरपूर उत्पादन - एक सफल गाथा 

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/18/2020 - 05:54
jal-sangrahan-talab-tal
Source
जल चेतना, खण्ड 7, अंक 2, जुलाई 2018, राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की-247667
सिंचाई-तालाब ही कृषिजल का समाधान, प्रतीकात्मक फोटो: Needpix.com
तालाब हेतु खोदी हुई मिट्टी का उपयोग श्री चौधरी के खेतों में बने निचले, असमतल क्षेत्रों में भरकर उन्हें एक समतल-आकार देने का प्रयास किया गया। साथ ही अन्य मिट्टी का उपयोग खेतों की पहुंच सड़कों ठीक करने में लिया गया। कड़ी मेहनत के बाद मई माह में तालाब निर्मित हुआ और उसका आकार 1 हेक्टेयर में होकर उसमें लगभग 80000 घन मीटर पानी का संग्रहण किया जा सकता था। चूँकि इस तालाब में प्राकृतिक निकास मार्ग (जो कि मुख्य राजमार्ग से लगा हुआ था) से जल का प्रवेश तालाब में कराया गया था, इस कारण अतिरिक्त निकास द्वार न बनाकर ऐसा प्रयास किया गया कि तालाब भरने के उपरान्त पुनः जल अपवाह अपने प्राकृतिक निकास मार्ग से आगे चला जाए।

नोटिस बोर्ड

वेबिनारः कोरोना संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 

Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 15:04
corona-and-lockdown-in-context-of-himalayas
वेबिनारः कोरोनार संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 
कोरोना संकट और लॉकडाउन को हिमालय क्षेत्र के परिप्रेक्ष में समझने के लिए 21 मई, गुरुवार 4 बजे हमारे पेज Endangered Himalaya में इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक के साथ लाइव बातचीत में जुड़ें।  आप Zoom में https://bit.ly/2zmjhHs लिंक में पंजीकरण करके भी जुड़ सकते हैं। इसका आयोजन हिम धारा और रिवाइटललाइज़िग रेनफेड एग्रीकल्चर द्वारा किया जा रहा है।

‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार

Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 14:52
WASH-for-healthy-homes-india
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ विषय पर सहगल फाउंडेशन और सीएडब्ल्यूएसटी ऑनलाइन वर्कशाप का आयोजन करने जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य वाॅश के प्रति लोगों को जागरुक करना और प्रेरित करना है। ये वेबिनार निन्मलिखित विषयों से संबंधित रहेगा - 

ई-चित्रकला व गृह सज्जा प्रतियोगिता में भाग लें और जीते ₹ 1,51,000 पुरस्कार राशि

Submitted by UrbanWater on Wed, 05/13/2020 - 11:11
participateepaintingwinaward
Source
पंकज मालवीय अक्षधा फाउंडेशन
पानी रे पानी
विश्व पर्यावरण दिवस – 5 जून 2020

ई-चित्रकला व गृह सज्जा प्रतियोगिता में भाग लें और जीते ₹ 1,51,000 पुरस्कार राशि |
प्रविष्टि रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि – 30 मई 2020
ई-प्रतियोगिता की तिथि – 5 जून 2020,
समय 10 बजे प्रात: से 4 बजे तक

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