गंगा दशहरा केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि पानी के साथ भारतीय समाज के सांस्कृतिक रिश्ते को याद करने का अवसर भी है। लोकगीतों, घाटों और परंपराओं के जरिए यह पर्व बताता है कि पानी कभी सिर्फ संसाधन नहीं था, ...
कूड़े-कचरे में कमी लाने, पत्तलों के इस्तेमाल से लेकर पौधे बांटने तक के प्रयास देखने को मिले। आयोजनों में लोगों को दी गई पानी और प्रकृति को बचाने की सीख
प्रयागराज की हंडिया तहसील के किचकिला गांव के इस तालाब किनारे रहते थे कभी करीब एक हज़ार कथक नर्तकों के परिवार, जिसके चलते ही इसका नाम पड़ा ‘कथकों का तालाब'