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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

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Submitted by admin on Thu, 04/16/2009 - 19:51
Source:

दो प्रमुख जल स्रोतों तथा आसपास निर्माण कार्यों परदिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा रोक…


उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को अगले निर्देश तक राजधानी क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण जलस्रोतों के आसपास निर्माण कार्य करने पर रोक लगा दी है। जस्टिस मुकुल मुदगल और जस्टिस वीएस सांघी की डिवीजन बेंच ने सरकार को उत्तरी दिल्ली की जहाँगीरपुरी और मायापुरी झील और उसके दलदली क्षेत्रों में जारी निर्माण कार्यों पर रोक लगाते हुए “यथास्थिति” बनाये रखने को कहा है जबकि सरकार ने इस निर्णय का जवाब देने के लिये दो सप्ताह का समय माँगा है।

Submitted by admin on Tue, 04/07/2009 - 08:59
Source:
वर्ष 1993 में यमुना एक्शन प्लान शुरू हुआ पर हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ते चले गए। गंगा और यमुना दिनोंदिन मैली होती चली गयीं। गंगा किनारे बसे 36 जिलों एवं 48 कस्बों से 5044 मिलियन लीटर सीवेज तथा 6440 मिलियन लीटर गंदा पानी रोज सदानीरा में जाता है
Submitted by admin on Sat, 04/04/2009 - 06:48
Source:
पंज़ाब राज्य का लगभग 80% भूजल मनुष्यों के पीने लायक नहीं बचा है और इस जल में आर्सेनिक की मात्रा अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच चुकी है… यह चौंकाने वाला खुलासा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किये गये एक अध्ययन में सामने आई है। पानी में आर्सेनिक की मात्रा का सुरक्षित मानक स्तर 10 ppb होना चाहिये, जबकि अध्ययन के मुताबिक पंजाब के विभिन्न जिलों से लिये पानी के नमूने में आर्सेनिक की मात्रा 3.5 से 688 ppb तक पाई गई है। यह खतरा दक्षिण-पश्चिम पंजाब पर अधिक है, जहाँ कैंसर के मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी गई है। जज्जल, मखना, गियाना आदि गाँव आर्सेनिक युक्त पानी से सर्वाधिक प्रभावित हैं और यहाँ इ

प्रयास

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
Source:
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।
Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
Source:
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे
Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
Source:
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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खासम-खास

केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण  : कुछ तथ्य, कुछ जानकारियां

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
kendriya-bhoomi-jal-pradhikaran-:-kuchh-tathy,-kuchh-jankariyan
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

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दिल्ली उच्चन्यायालय ने जलस्रोतों पर कब्जे को रोका

Submitted by admin on Thu, 04/16/2009 - 19:51
Author
संपादक

दो प्रमुख जल स्रोतों तथा आसपास निर्माण कार्यों परदिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा रोक…


उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को अगले निर्देश तक राजधानी क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण जलस्रोतों के आसपास निर्माण कार्य करने पर रोक लगा दी है। जस्टिस मुकुल मुदगल और जस्टिस वीएस सांघी की डिवीजन बेंच ने सरकार को उत्तरी दिल्ली की जहाँगीरपुरी और मायापुरी झील और उसके दलदली क्षेत्रों में जारी निर्माण कार्यों पर रोक लगाते हुए “यथास्थिति” बनाये रखने को कहा है जबकि सरकार ने इस निर्णय का जवाब देने के लिये दो सप्ताह का समय माँगा है।

गंगा-यमुना नहीं बन सकीं चुनावी मुद्दा

Submitted by admin on Tue, 04/07/2009 - 08:59
Author
राजेन्द्र जोशी
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वर्ष 1993 में यमुना एक्शन प्लान शुरू हुआ पर हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ते चले गए। गंगा और यमुना दिनोंदिन मैली होती चली गयीं। गंगा किनारे बसे 36 जिलों एवं 48 कस्बों से 5044 मिलियन लीटर सीवेज तथा 6440 मिलियन लीटर गंदा पानी रोज सदानीरा में जाता है

पंजाब के जल में आर्सेनिक का ज़हर

Submitted by admin on Sat, 04/04/2009 - 06:48
Author
संपादक
पंज़ाब राज्य का लगभग 80% भूजल मनुष्यों के पीने लायक नहीं बचा है और इस जल में आर्सेनिक की मात्रा अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच चुकी है… यह चौंकाने वाला खुलासा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किये गये एक अध्ययन में सामने आई है। पानी में आर्सेनिक की मात्रा का सुरक्षित मानक स्तर 10 ppb होना चाहिये, जबकि अध्ययन के मुताबिक पंजाब के विभिन्न जिलों से लिये पानी के नमूने में आर्सेनिक की मात्रा 3.5 से 688 ppb तक पाई गई है। यह खतरा दक्षिण-पश्चिम पंजाब पर अधिक है, जहाँ कैंसर के मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी गई है। जज्जल, मखना, गियाना आदि गाँव आर्सेनिक युक्त पानी से सर्वाधिक प्रभावित हैं और यहाँ इ

प्रयास

उदयपुर के इस गांव को वेटलैंड घोषित किया जाना तय

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
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राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
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Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित

Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
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भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे

स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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