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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Sat, 09/19/2020 - 17:44
अनुपम मिश्र

आज भी खरे है तालाब अनुपम मिश्र की बहुचर्चित पुस्तक - 02 अध्याय नींव से शिखर तक रमाकान्त राय के संगीतमय अंदाज में

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Submitted by HindiWater on Sat, 10/10/2020 - 16:20
Source:
लीसा विदोहन की नई तकनीक
उत्तराखंड में करीब 26% चीड़ के जंगल हैं यानी कि ऐसे जंगल जहां चीड़ के पेड़ो की मात्रा सबसे अधिक है। इन चीड़ के पेड़ो को यहां अभिशाप माना जाता है क्यूंकि चीड़ के पेड़ से निकलने वाले पत्तों में आग बहुत तेजी से लगती है और उत्तराखंड के जंगलों में हर साल लगने वाली आग के लिए इन्ही चीड़ की पत्तियों को जिम्मेदार माना जाता रहा है।
Submitted by UrbanWater on Sat, 10/10/2020 - 10:40
Source:
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान
धोलावीरा में परिष्कृत जलाशय, प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता में हाइड्रोलिक सीवेज सिस्टम्स का प्रमाण। (स्रोत:विकीपीडिया)
विज्ञान प्रकृति और जीवधारियों से संबंधित हमारे ज्ञान का संवर्धन करता है। यह ब्रह्माण्ड की कई अज्ञात चीजों का पता लगाने में मनुष्यों की सहायता करता है तथा व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है। वस्तुतः मानव जीवन की गुणवत्ता को सुधारने के साथ-साथ विज्ञान के कई अन्य कार्य भी हैं। यद्यपि प्राचीन काल में मनुष्य ने आधुनिक युग की तरह उन्नति नहीं की थी, विज्ञान अज्ञात था, फिर भी मनुष्य को यह आभास था कि जीवित रहने के लिए जल अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसलिए प्राचीनतम सभ्यताएं मुख्य रूप से हाइड्रोलिक प्रकृति की रही हैं क्योंकि उनकी भिन्न-भिन्न ज़रूरतों की पूर्ति के लिए जल एक विश्वसनीय स्रोत रहा है।
Submitted by HindiWater on Fri, 10/09/2020 - 17:40
Source:
झरना
हमारा परंपरा में नदी को एक संपूर्ण इकाई के रूप में देखा जाता है, जो सामाजिक,सांस्कृतिक और भोगौलिक परिवेश को अपने में समेटे हुए प्रवाहित होती है। नदियां मनुष्य के उस आचार-व्यवहार की साक्षी हैं, जिसके मूल में प्रकृति के साथ साहचर्य का भाव, एक मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित रहा। नदियां और उनके किनारे बसने वाले जीव-जंतु, पहाड़, वन, वनवासी, सब मिलकर एक जीवन तंत्र बनाते हैं। यह तंत्र इसलिए है, क्योंकि इसमें एक अनुशासन है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Tue, 09/22/2020 - 17:33
आजीविका की बदौलत ग्रामीण महिलाओं में सामाजिक बदलाव
मध्यप्रदेश के इंदौर में आजीविका की बदौलत ग्रामीण महिलाओं में सामाजिक बदलाव की सुहानी सूरत देखने को मिल रही है। महिलाओं को संगठित कर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन उनके हाथों में हुनर सौंप रहा है। उन्हें संसाधन मुहैया करा रहा है। निर्धन परिवारों की महिलाओं के लिए आजीविका नारी सशक्तिकरण की नयी मिसाल बन गई है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Tue, 10/13/2020 - 13:56
Source:
इंडिया रिवर्स वीक
इंडिया रिवर्स वीक ने वर्ष 2020 के लिए भागीरथ प्रयास सम्मान और अनुपम मिश्र मेडल के लिये नामांकन आमंत्रित किये है। भागीरथ प्रयास सम्मान की शुरुआत 2014 में की गई। जिसके जूरी स्वर्गीय श्री रामास्वामी थे
Submitted by HindiWater on Thu, 10/08/2020 - 12:58
Source:
वेबनार
रिवाइटलाइजिंग रेनफेड एग्रीकल्चर नेटवर्क (RRAN) और पीपल साइंस इंस्टिट्यूट (PSI)  हिमांचल प्रदेश के जमीनी अनुभव पर आधारित हिमालयन एरिया में स्प्रिंग शेड मैनेजमेंट पर एक वेबिनार आयोजित कर रहा है। 
Submitted by HindiWater on Wed, 09/30/2020 - 10:41
Source:
पानी रे पानी
कला प्रतियोगिता के नियम 1) इसके दो आयु वर्ग होंगे : . 5 से 8 वर्ष . 9 से 14 वर्ष

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खासम-खास

आज भी खरे है तालाब-अध्याय 2 नींव से शिखर तक संगीतमय वाचन

Submitted by HindiWater on Sat, 09/19/2020 - 17:44
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
aaj-bhi-khare-hai-talab-adhyay-2-neev-se-shikhar-tak-sangitamay-vachan
Source
रमाकांत राय
अनुपम मिश्र

आज भी खरे है तालाब अनुपम मिश्र की बहुचर्चित पुस्तक - 02 अध्याय नींव से शिखर तक रमाकान्त राय के संगीतमय अंदाज में

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लीसा विदोहन के लिए उत्तराखंड वन विभाग की नई तकनीक

Submitted by HindiWater on Sat, 10/10/2020 - 16:20
lisa-vidohn-kay-liye-uttarakhand-van-vibhag-key-nai-takanik
लीसा विदोहन की नई तकनीक
उत्तराखंड में करीब 26% चीड़ के जंगल हैं यानी कि ऐसे जंगल जहां चीड़ के पेड़ो की मात्रा सबसे अधिक है। इन चीड़ के पेड़ो को यहां अभिशाप माना जाता है क्यूंकि चीड़ के पेड़ से निकलने वाले पत्तों में आग बहुत तेजी से लगती है और उत्तराखंड के जंगलों में हर साल लगने वाली आग के लिए इन्ही चीड़ की पत्तियों को जिम्मेदार माना जाता रहा है।

प्राचीन भारत में जलविज्ञानीय ज्ञान: एक परिचय 

Submitted by UrbanWater on Sat, 10/10/2020 - 10:40
prachin-bharath-mei-jalavigyan
Source
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान
धोलावीरा में परिष्कृत जलाशय, प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता में हाइड्रोलिक सीवेज सिस्टम्स का प्रमाण। (स्रोत:विकीपीडिया)
विज्ञान प्रकृति और जीवधारियों से संबंधित हमारे ज्ञान का संवर्धन करता है। यह ब्रह्माण्ड की कई अज्ञात चीजों का पता लगाने में मनुष्यों की सहायता करता है तथा व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है। वस्तुतः मानव जीवन की गुणवत्ता को सुधारने के साथ-साथ विज्ञान के कई अन्य कार्य भी हैं। यद्यपि प्राचीन काल में मनुष्य ने आधुनिक युग की तरह उन्नति नहीं की थी, विज्ञान अज्ञात था, फिर भी मनुष्य को यह आभास था कि जीवित रहने के लिए जल अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसलिए प्राचीनतम सभ्यताएं मुख्य रूप से हाइड्रोलिक प्रकृति की रही हैं क्योंकि उनकी भिन्न-भिन्न ज़रूरतों की पूर्ति के लिए जल एक विश्वसनीय स्रोत रहा है।

कितनी स्वस्थ हैं हमारी नदियां

Submitted by HindiWater on Fri, 10/09/2020 - 17:40
kitani-svasth-hain-hamari-nadiyan
झरना
हमारा परंपरा में नदी को एक संपूर्ण इकाई के रूप में देखा जाता है, जो सामाजिक,सांस्कृतिक और भोगौलिक परिवेश को अपने में समेटे हुए प्रवाहित होती है। नदियां मनुष्य के उस आचार-व्यवहार की साक्षी हैं, जिसके मूल में प्रकृति के साथ साहचर्य का भाव, एक मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित रहा। नदियां और उनके किनारे बसने वाले जीव-जंतु, पहाड़, वन, वनवासी, सब मिलकर एक जीवन तंत्र बनाते हैं। यह तंत्र इसलिए है, क्योंकि इसमें एक अनुशासन है।

प्रयास

आजीविका की बदौलत सामाजिक बदलाव

Submitted by HindiWater on Tue, 09/22/2020 - 17:33
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आजीविका की बदौलत ग्रामीण महिलाओं में सामाजिक बदलाव
मध्यप्रदेश के इंदौर में आजीविका की बदौलत ग्रामीण महिलाओं में सामाजिक बदलाव की सुहानी सूरत देखने को मिल रही है। महिलाओं को संगठित कर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन उनके हाथों में हुनर सौंप रहा है। उन्हें संसाधन मुहैया करा रहा है। निर्धन परिवारों की महिलाओं के लिए आजीविका नारी सशक्तिकरण की नयी मिसाल बन गई है।

नोटिस बोर्ड

भागीरथ प्रयास सम्मान  2020 के लिए नामांकन आमंत्रित 

Submitted by HindiWater on Tue, 10/13/2020 - 13:56
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इंडिया रिवर्स वीक
इंडिया रिवर्स वीक ने वर्ष 2020 के लिए भागीरथ प्रयास सम्मान और अनुपम मिश्र मेडल के लिये नामांकन आमंत्रित किये है। भागीरथ प्रयास सम्मान की शुरुआत 2014 में की गई। जिसके जूरी स्वर्गीय श्री रामास्वामी थे

हिमालयन एरिया में स्प्रिंग शेड मैनेजमेंट पर वेबिनार

Submitted by HindiWater on Thu, 10/08/2020 - 12:58
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वेबनार
रिवाइटलाइजिंग रेनफेड एग्रीकल्चर नेटवर्क (RRAN) और पीपल साइंस इंस्टिट्यूट (PSI)  हिमांचल प्रदेश के जमीनी अनुभव पर आधारित हिमालयन एरिया में स्प्रिंग शेड मैनेजमेंट पर एक वेबिनार आयोजित कर रहा है। 

पानी रे पानीअभियान के तहत गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कला प्रतियोगिता

Submitted by HindiWater on Wed, 09/30/2020 - 10:41
pani-ray-paniabhiyan-kay-tahat-gandhi-jayanti-kay-avsar-par-ayojit-kala-pratiyogita
पानी रे पानी
कला प्रतियोगिता के नियम 1) इसके दो आयु वर्ग होंगे : . 5 से 8 वर्ष . 9 से 14 वर्ष

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