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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Sat, 09/19/2020 - 17:44
अनुपम मिश्र

आज भी खरे है तालाब अनुपम मिश्र की बहुचर्चित पुस्तक - 02 अध्याय नींव से शिखर तक रमाकान्त राय के संगीतमय अंदाज में

Content

Submitted by HindiWater on Fri, 10/23/2020 - 15:40
Source:
कोसी त्रासदी
कोसी से जुड़े मिथ एवं गीतों का एक अद्भुत तथ्य यह है कि समाज ने विनती और शिकायत सिर्फ कोसी से ही की है। इस नदी की धाराओं की विकरालता ने आमजनों की आस्था को तोड़ा है। किसी सत्ता और सरकार ने भी इन लोगों में सुरक्षा का विश्वासभाव नहीं जगा पाया। लगता है कि आजादी से पहले तक किसी राजा या शासक ने कोसी को नियंत्रित करने या बाढ़ की समस्याओं से निजात दिलाने की पुरजोर कोशिश नहीं की। 207 ई. में लक्ष्मण सेन द्वारा और 6वीं शताब्दी में अकबर के सामंत द्वारा बाँध बनवाने और कोसी को नियंत्रित करने का ऐतिहासिक साक्ष्य प्राप्त होता है।
Submitted by HindiWater on Fri, 10/23/2020 - 13:47
Source:
क्वॉटरनरी साइंस रिव्यू
थार मरुस्थल
हालही में थार रेगिस्तान में पानी को लेकर एक रिसर्च सामने आई। जिसमें शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि बीकानेर के पास 1,72000 साल पहले कभी एक नदी बहती थी जो  यह बसे लोगों के लिये जीवनदायिनी का काम करती थी।  क्वॉटरनरी साइंस रिव्यू मे प्रकाशित इस शोध को जर्मन के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर द साइंस ऑफ हिस्ट्री तमिलनाडु के अन्ना विश्वविद्यालय और कोलकाता के आइआइएसईआर  ने तैयार किया है।इस रिपोर्ट में शोधकर्ताओं द्वारा यही बताया गया है कि पाषाण युग( पाषाण युग का तात्पर्य है कि इंसान पत्थर से बने सामानों का इस्तेमाल करता था)और आज के समय में, लोगों के रहन-सहन खान-पान पर काफी अंतर आ गया है।
Submitted by HindiWater on Thu, 10/22/2020 - 15:30
Source:
कोसी नदी का कहर
संभवत: तीन-चार सौ वर्ष पहले इस अंचल में कोसी मैया की महाविनाश लीला शुरू हुई होगी। लाखों एकड़ जमीन को अचानक लकवा मार गया होगा। महान कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु के उपन्यास 'परती परिकथा' का है यह संपूर्ण उद्धहरण। आज रेणु जिंदा तो नहीं हैं लेकिन तीन सौ वर्ष पूर्व की कोसी मैया एक बार फिर से इस भाग में महातांडव कर रही है। तब की विनाशलीला पूरी तरह प्राकृतिक थी और इस बार मानव निर्मित है। चाहे लोग इसे जितना जोर देकर प्राकृतिक आपदा कहें- यह है कोसी क्षेत्र के लोगों का सामूहिक नरसंहार। रेणु का गांव औराही हिंगना इस प्रकोप से विलुप्त तो नहीं हुआ है लेकिन ऐसे दर्जनों गांव है इस कोसी क्षेत्र में, जो अब सिर्फ इतिहास व कथाओं में ही बचे रहेंगे। इतना बड़ा नरसंहार और बुद्धिजीवियों की चुप्पी इस समाज को दहशत में भर रही है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Tue, 09/22/2020 - 17:33
आजीविका की बदौलत ग्रामीण महिलाओं में सामाजिक बदलाव
मध्यप्रदेश के इंदौर में आजीविका की बदौलत ग्रामीण महिलाओं में सामाजिक बदलाव की सुहानी सूरत देखने को मिल रही है। महिलाओं को संगठित कर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन उनके हाथों में हुनर सौंप रहा है। उन्हें संसाधन मुहैया करा रहा है। निर्धन परिवारों की महिलाओं के लिए आजीविका नारी सशक्तिकरण की नयी मिसाल बन गई है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Tue, 10/13/2020 - 13:56
Source:
इंडिया रिवर्स वीक
इंडिया रिवर्स वीक ने वर्ष 2020 के लिए भागीरथ प्रयास सम्मान और अनुपम मिश्र मेडल के लिये नामांकन आमंत्रित किये है। भागीरथ प्रयास सम्मान की शुरुआत 2014 में की गई। जिसके जूरी स्वर्गीय श्री रामास्वामी थे
Submitted by HindiWater on Thu, 10/08/2020 - 12:58
Source:
वेबनार
रिवाइटलाइजिंग रेनफेड एग्रीकल्चर नेटवर्क (RRAN) और पीपल साइंस इंस्टिट्यूट (PSI)  हिमांचल प्रदेश के जमीनी अनुभव पर आधारित हिमालयन एरिया में स्प्रिंग शेड मैनेजमेंट पर एक वेबिनार आयोजित कर रहा है। 
Submitted by HindiWater on Wed, 09/30/2020 - 10:41
Source:
पानी रे पानी
कला प्रतियोगिता के नियम 1) इसके दो आयु वर्ग होंगे : . 5 से 8 वर्ष . 9 से 14 वर्ष

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खासम-खास

आज भी खरे है तालाब-अध्याय 2 नींव से शिखर तक संगीतमय वाचन

Submitted by HindiWater on Sat, 09/19/2020 - 17:44
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
aaj-bhi-khare-hai-talab-adhyay-2-neev-se-shikhar-tak-sangitamay-vachan
Source
रमाकांत राय
अनुपम मिश्र

आज भी खरे है तालाब अनुपम मिश्र की बहुचर्चित पुस्तक - 02 अध्याय नींव से शिखर तक रमाकान्त राय के संगीतमय अंदाज में

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कोसी त्रासदी : एक और घृणित सच

Submitted by HindiWater on Fri, 10/23/2020 - 15:40
kosi-trasdi-:-ek-aur-ghrinit-sach
कोसी त्रासदी
कोसी से जुड़े मिथ एवं गीतों का एक अद्भुत तथ्य यह है कि समाज ने विनती और शिकायत सिर्फ कोसी से ही की है। इस नदी की धाराओं की विकरालता ने आमजनों की आस्था को तोड़ा है। किसी सत्ता और सरकार ने भी इन लोगों में सुरक्षा का विश्वासभाव नहीं जगा पाया। लगता है कि आजादी से पहले तक किसी राजा या शासक ने कोसी को नियंत्रित करने या बाढ़ की समस्याओं से निजात दिलाने की पुरजोर कोशिश नहीं की। 207 ई. में लक्ष्मण सेन द्वारा और 6वीं शताब्दी में अकबर के सामंत द्वारा बाँध बनवाने और कोसी को नियंत्रित करने का ऐतिहासिक साक्ष्य प्राप्त होता है।

मरुस्थल में कभी बहती थी घग्गर-हकरा नदी 

Submitted by HindiWater on Fri, 10/23/2020 - 13:47
marusthal-mein-kabhi-behti-thee-ghagger-hakra-nadi
Source
क्वॉटरनरी साइंस रिव्यू
थार मरुस्थल
हालही में थार रेगिस्तान में पानी को लेकर एक रिसर्च सामने आई। जिसमें शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि बीकानेर के पास 1,72000 साल पहले कभी एक नदी बहती थी जो  यह बसे लोगों के लिये जीवनदायिनी का काम करती थी।  क्वॉटरनरी साइंस रिव्यू मे प्रकाशित इस शोध को जर्मन के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर द साइंस ऑफ हिस्ट्री तमिलनाडु के अन्ना विश्वविद्यालय और कोलकाता के आइआइएसईआर  ने तैयार किया है।इस रिपोर्ट में शोधकर्ताओं द्वारा यही बताया गया है कि पाषाण युग( पाषाण युग का तात्पर्य है कि इंसान पत्थर से बने सामानों का इस्तेमाल करता था)और आज के समय में, लोगों के रहन-सहन खान-पान पर काफी अंतर आ गया है।

बुद्धिजीवों की चुप्पी

Submitted by HindiWater on Thu, 10/22/2020 - 15:30
buddhijivo-key-chuppi
कोसी नदी का कहर
संभवत: तीन-चार सौ वर्ष पहले इस अंचल में कोसी मैया की महाविनाश लीला शुरू हुई होगी। लाखों एकड़ जमीन को अचानक लकवा मार गया होगा। महान कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु के उपन्यास 'परती परिकथा' का है यह संपूर्ण उद्धहरण। आज रेणु जिंदा तो नहीं हैं लेकिन तीन सौ वर्ष पूर्व की कोसी मैया एक बार फिर से इस भाग में महातांडव कर रही है। तब की विनाशलीला पूरी तरह प्राकृतिक थी और इस बार मानव निर्मित है। चाहे लोग इसे जितना जोर देकर प्राकृतिक आपदा कहें- यह है कोसी क्षेत्र के लोगों का सामूहिक नरसंहार। रेणु का गांव औराही हिंगना इस प्रकोप से विलुप्त तो नहीं हुआ है लेकिन ऐसे दर्जनों गांव है इस कोसी क्षेत्र में, जो अब सिर्फ इतिहास व कथाओं में ही बचे रहेंगे। इतना बड़ा नरसंहार और बुद्धिजीवियों की चुप्पी इस समाज को दहशत में भर रही है।

प्रयास

आजीविका की बदौलत सामाजिक बदलाव

Submitted by HindiWater on Tue, 09/22/2020 - 17:33
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आजीविका की बदौलत ग्रामीण महिलाओं में सामाजिक बदलाव
मध्यप्रदेश के इंदौर में आजीविका की बदौलत ग्रामीण महिलाओं में सामाजिक बदलाव की सुहानी सूरत देखने को मिल रही है। महिलाओं को संगठित कर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन उनके हाथों में हुनर सौंप रहा है। उन्हें संसाधन मुहैया करा रहा है। निर्धन परिवारों की महिलाओं के लिए आजीविका नारी सशक्तिकरण की नयी मिसाल बन गई है।

नोटिस बोर्ड

भागीरथ प्रयास सम्मान  2020 के लिए नामांकन आमंत्रित 

Submitted by HindiWater on Tue, 10/13/2020 - 13:56
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इंडिया रिवर्स वीक
इंडिया रिवर्स वीक ने वर्ष 2020 के लिए भागीरथ प्रयास सम्मान और अनुपम मिश्र मेडल के लिये नामांकन आमंत्रित किये है। भागीरथ प्रयास सम्मान की शुरुआत 2014 में की गई। जिसके जूरी स्वर्गीय श्री रामास्वामी थे

हिमालयन एरिया में स्प्रिंग शेड मैनेजमेंट पर वेबिनार

Submitted by HindiWater on Thu, 10/08/2020 - 12:58
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वेबनार
रिवाइटलाइजिंग रेनफेड एग्रीकल्चर नेटवर्क (RRAN) और पीपल साइंस इंस्टिट्यूट (PSI)  हिमांचल प्रदेश के जमीनी अनुभव पर आधारित हिमालयन एरिया में स्प्रिंग शेड मैनेजमेंट पर एक वेबिनार आयोजित कर रहा है। 

पानी रे पानीअभियान के तहत गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कला प्रतियोगिता

Submitted by HindiWater on Wed, 09/30/2020 - 10:41
pani-ray-paniabhiyan-kay-tahat-gandhi-jayanti-kay-avsar-par-ayojit-kala-pratiyogita
पानी रे पानी
कला प्रतियोगिता के नियम 1) इसके दो आयु वर्ग होंगे : . 5 से 8 वर्ष . 9 से 14 वर्ष

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