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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Thu, 09/23/2021 - 14:24
Source:
डी डी
गुजरात विश्वविद्यालय में वर्षा जल संरक्षण
बिल्डिंग की भूगर्भ में बड़े बड़े टैंक बनाए गए जहाँ छतों से गिरने वाला पानी संगृहीत होता है विश्वविद्यालय की हर बिल्डिंग में 7 लाख लीटर के टैंक लगाय गए है साथ ही कैंपस में बड़े बड़े कनाल भी बनाएं गए है जहाँ पानी को सरंक्षित किया जाता है यूनिवर्सिटी के महानिदेशक सुशिल गोस्वामी बताते है की ग्राउंड वाटर बहुत नीचे है इसलिए हमारी कोशिश है की जो रेन हार्वेस्टिंग और  नेचुरल पानी है जो जमीन के माध्यम से आता है
Submitted by Editorial Team on Wed, 09/22/2021 - 09:54
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इंडिया साइंस वायर
बायोफ्यूल रिसर्च का चित्रण
जैविक अपशिष्ट पदार्थों में बहुत अधिक ऊर्जा अंतर्निहित होती है। कचरे के उपचार के साथ उससे ऊर्जा उत्पन्न करने में पूरी दुनिया में रुचि बढ़ रही है, क्योंकि इससे 'एक पंथ, दो काज' सिद्ध हो सकते हैं। माइक्रोबियल फ्यूल सेल (एमएफसी) एक ऐसी ही बायोइलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया है, जिसमें बैक्टीरिया द्वारा उत्प्रेरित जैव-रासायनिक प्रतिक्रिया से प्राप्त इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करके ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।
Submitted by Editorial Team on Tue, 09/21/2021 - 15:12
Source:
राष्ट्रीय जल जीवन मिशन, जल-जीवन संवाद, अगस्त २०२१
जल-जीवन मिशन
15वें वित्त आयोग ने 5 वर्षों 2021-22 से 2025-26 तक के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों(RLB)/ पंचायती राज संस्थाओं को जल और स्वच्छता के लिए सशर्त अनुदान के रूप में ₹1,42,084 करोड़ की राशि की अनुशंसा की है। इस सशर्त अनुदान का गांव में जलापूर्ति एवं स्वच्छता सेवाएं सुनिश्चित करने पर भी प्रभाव पड़ेगा। और इस प्रकार इसका ग्रामीण क्षेत्र में जन स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर भी प्रभाव पड़ेगा।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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गुजरात के विश्वविद्यालय ने वर्षा जल को सरंक्षित करने का नायाब तरीका ढूंढा 

Submitted by Shivendra on Thu, 09/23/2021 - 14:24
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डी डी
गुजरात विश्वविद्यालय में वर्षा जल संरक्षण
बिल्डिंग की भूगर्भ में बड़े बड़े टैंक बनाए गए जहाँ छतों से गिरने वाला पानी संगृहीत होता है विश्वविद्यालय की हर बिल्डिंग में 7 लाख लीटर के टैंक लगाय गए है साथ ही कैंपस में बड़े बड़े कनाल भी बनाएं गए है जहाँ पानी को सरंक्षित किया जाता है यूनिवर्सिटी के महानिदेशक सुशिल गोस्वामी बताते है की ग्राउंड वाटर बहुत नीचे है इसलिए हमारी कोशिश है की जो रेन हार्वेस्टिंग और  नेचुरल पानी है जो जमीन के माध्यम से आता है

‘अपशिष्ट जल से ऊर्जा बनाने में अधिक सक्षम है पौधा-आधारित माइक्रोबियल फ्यूल सेल’: अध्ययन

Submitted by Editorial Team on Wed, 09/22/2021 - 09:54
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इंडिया साइंस वायर
बायोफ्यूल रिसर्च का चित्रण
जैविक अपशिष्ट पदार्थों में बहुत अधिक ऊर्जा अंतर्निहित होती है। कचरे के उपचार के साथ उससे ऊर्जा उत्पन्न करने में पूरी दुनिया में रुचि बढ़ रही है, क्योंकि इससे 'एक पंथ, दो काज' सिद्ध हो सकते हैं। माइक्रोबियल फ्यूल सेल (एमएफसी) एक ऐसी ही बायोइलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया है, जिसमें बैक्टीरिया द्वारा उत्प्रेरित जैव-रासायनिक प्रतिक्रिया से प्राप्त इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करके ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।

15वें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों को जल और स्वच्छता के लिए सशर्त अनुदान

Submitted by Editorial Team on Tue, 09/21/2021 - 15:12
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राष्ट्रीय जल जीवन मिशन, जल-जीवन संवाद, अगस्त २०२१
जल-जीवन मिशन
15वें वित्त आयोग ने 5 वर्षों 2021-22 से 2025-26 तक के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों(RLB)/ पंचायती राज संस्थाओं को जल और स्वच्छता के लिए सशर्त अनुदान के रूप में ₹1,42,084 करोड़ की राशि की अनुशंसा की है। इस सशर्त अनुदान का गांव में जलापूर्ति एवं स्वच्छता सेवाएं सुनिश्चित करने पर भी प्रभाव पड़ेगा। और इस प्रकार इसका ग्रामीण क्षेत्र में जन स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर भी प्रभाव पड़ेगा।

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

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