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खासम-खास

Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by HindiWater on Sat, 02/06/2021 - 16:02
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भारत में कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ और अवसर
भारत एक विशाल देश है. जहाँ करीब 1 अरब से अधिक लोग रहते है जो विश्व का दूसरा सबसे घनी आबादी वाला देश है.आज इसी बढती हुई आबादी से भारत में कई समस्या उत्पन्न हुई है जिसमें सबसे बड़ी समस्या में एक स्वछता है. आज भारत में मूल भूत सुविधाएँ होने के बावजूद भी जगह जगह फैला कचरा देश की सबसे बड़ी समस्या बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी द्वारा स्वछता अभियान से कुछ हद तक देश में कचरा कम हुआ है, लेकिन अभी भी देश को पूरी तरह स्वच्छ करने के लिए हमें बहुत काम करना होगा। 
Submitted by HindiWater on Wed, 02/03/2021 - 17:29
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द टेलीप्रिंटर
नर्मदा का इतिहास छुपाए पहाड़
भारत मे एक जगह ऐसी भी है जिसे देखकर आप भी चौक जायेगें। वह दुनिया के अजूबे में तो नहीं लेकिन उससे कम भी नही है । बात मध्यप्रदेश के देवास जिले की है। जहाँ आज एक रहस्स भरे पहाड़ में कुछ अलग तरह के अद्भुत पत्थर है। जिनकी संख्या लाखों में है । विभिन्न आकर के इन पत्थरों से अलग अलग सुर निकलते। जो वाकई में शानदार है। पत्थरों से जुड़ी ऐसी ही कुछ अद्भुत जानकरी के लिये देखे पूरा वीडियो
Submitted by HindiWater on Fri, 01/29/2021 - 16:21
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Hindi Water Portal
बिहार में तटबंध: बाढ़ रोकने में सफल या विफल
बिहार में बाढ़ एक सालाना प्राकृतिक घटना है। कुछ दशक से एक भी साल ऐसा नहीं गया होगा जब बिहार ने बाढ़ का सामना ना किया हो। 6 दशकों में बिहार को भारी  नुकसान झेलना पड़ा है।  सन् 1954 का भीषण बाढ़ जिसने उत्तर बिहार का 2.46 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन को बहा डाला और  करीब 7.61 मिलियन आबादी को नुकसान पहुंचाया।    फिर से, सन 1974 में नए और बड़े बाढ़ से राज्य को सामना करना पड़ा। जो की ना केवल उत्तरी भाग बल्कि दक्षिण भाग को भी चपेट में ले लिया। जिसने 16.39 मिलियन लोग प्रभावित हुए।  वर्ष 1987, बीस वे शताब्दी का सबसे भयानक बाढ़ जो पूरे राज्य को बहा ले गयी। और इसमें 1373 लोग मारे गए। वर्ष 2004 और 2007 मे भी बहुत ज़्यादा बाढ़ आपदा हुई। अगस्त 2008, कोसी नदी के भयनक बाढ़ ने राज्य को हिल्ला के रख दिए था। वो बाढ़ जिसने पूरा आधा राज्य ग्रसित हुआ और बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा बाढ़ प्रलय माना जाता है।जो नेपाल मे किये गए तटबंध के टूटने के कारण हुआ

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।
Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
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विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।
Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
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वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

hindukush-himalaya-parvatamala-third-pole

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भारत में कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ और अवसर

Submitted by HindiWater on Sat, 02/06/2021 - 16:02
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भारत में कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ और अवसर
भारत एक विशाल देश है. जहाँ करीब 1 अरब से अधिक लोग रहते है जो विश्व का दूसरा सबसे घनी आबादी वाला देश है.आज इसी बढती हुई आबादी से भारत में कई समस्या उत्पन्न हुई है जिसमें सबसे बड़ी समस्या में एक स्वछता है. आज भारत में मूल भूत सुविधाएँ होने के बावजूद भी जगह जगह फैला कचरा देश की सबसे बड़ी समस्या बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी द्वारा स्वछता अभियान से कुछ हद तक देश में कचरा कम हुआ है, लेकिन अभी भी देश को पूरी तरह स्वच्छ करने के लिए हमें बहुत काम करना होगा। 

नर्मदा का इतिहास छुपाए पहाड़

Submitted by HindiWater on Wed, 02/03/2021 - 17:29
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द टेलीप्रिंटर
नर्मदा का इतिहास छुपाए पहाड़
भारत मे एक जगह ऐसी भी है जिसे देखकर आप भी चौक जायेगें। वह दुनिया के अजूबे में तो नहीं लेकिन उससे कम भी नही है । बात मध्यप्रदेश के देवास जिले की है। जहाँ आज एक रहस्स भरे पहाड़ में कुछ अलग तरह के अद्भुत पत्थर है। जिनकी संख्या लाखों में है । विभिन्न आकर के इन पत्थरों से अलग अलग सुर निकलते। जो वाकई में शानदार है। पत्थरों से जुड़ी ऐसी ही कुछ अद्भुत जानकरी के लिये देखे पूरा वीडियो

बिहार में तटबंध: बाढ़ रोकने में सफल या विफल

Submitted by HindiWater on Fri, 01/29/2021 - 16:21
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बिहार में तटबंध: बाढ़ रोकने में सफल या विफल
बिहार में बाढ़ एक सालाना प्राकृतिक घटना है। कुछ दशक से एक भी साल ऐसा नहीं गया होगा जब बिहार ने बाढ़ का सामना ना किया हो। 6 दशकों में बिहार को भारी  नुकसान झेलना पड़ा है।  सन् 1954 का भीषण बाढ़ जिसने उत्तर बिहार का 2.46 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन को बहा डाला और  करीब 7.61 मिलियन आबादी को नुकसान पहुंचाया।    फिर से, सन 1974 में नए और बड़े बाढ़ से राज्य को सामना करना पड़ा। जो की ना केवल उत्तरी भाग बल्कि दक्षिण भाग को भी चपेट में ले लिया। जिसने 16.39 मिलियन लोग प्रभावित हुए।  वर्ष 1987, बीस वे शताब्दी का सबसे भयानक बाढ़ जो पूरे राज्य को बहा ले गयी। और इसमें 1373 लोग मारे गए। वर्ष 2004 और 2007 मे भी बहुत ज़्यादा बाढ़ आपदा हुई। अगस्त 2008, कोसी नदी के भयनक बाढ़ ने राज्य को हिल्ला के रख दिए था। वो बाढ़ जिसने पूरा आधा राज्य ग्रसित हुआ और बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा बाढ़ प्रलय माना जाता है।जो नेपाल मे किये गए तटबंध के टूटने के कारण हुआ

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
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 विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

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