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Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by HindiWater on Sat, 07/17/2021 - 12:10
Source:
चरखा फीचर
चरखा ने "संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2020" सम्मान समारोह का किया आयोजन
याद रहे कि 1997 में असम में उल्फा ने संजॉय का अपहरण करके उनकी हत्या कर दी थी। संजॉय घोष को याद करते हुए रजनी बख्शी ने कहा कि, "उनका जीवन प्रेरणादायी है। उन्होंने हमें सिखाया कि कैसे प्रभावी पत्रकारिता के लिए निडरता, रचनात्मकता और असंभव को संभव बनाने का जज़्बा अनिवार्य है। चरखा ग्रामीण भारत की विकास चुनौतियों को उजागर करने के लिए इन तीन मूल्यों के साथ काम कर रहा है। यह पुरस्कार समकालीन दुनिया की चुनौतियों का समाधान करने की कोशिश कर रहे लोगों के बीच पुल बनाने का एक महत्वपूर्ण मंच है।
Submitted by HindiWater on Fri, 07/16/2021 - 15:27
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इंडिया हिंदी वाटर पोर्टल
पर्यावरण संरक्षण, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है हरेला
रेला पर्व सौरमास श्रावण के प्रथम दिन यानि कर्क संक्रान्ति को मनाया जाता है।परम्परानुसार पर्व से नौ अथवा दस दिन पूर्व पत्तों से बने दोने या रिंगाल की टोकरियों में हरेला बोया जाता है। जिसमें उपलब्धतानुसार पाँच, सात अथवा नौ प्रकार के धान्य यथा- धान, मक्का, तिल, उड़द, गहत, भट्ट, जौं व सरसों के बीजों को बोया जाता है। देवस्थान में इन टोकरियों को रखने के उपरान्त रोजाना इन्हें जल के छींटों से सींचा जाता है। दो-तीन दिनों में ये बीज अंकुरित होकर हरेले तक सात-आठ इंच लम्बे तृण का आकार पा लेते हैं।
Submitted by HindiWater on Thu, 07/15/2021 - 14:44
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विज्ञप्ति जल शक्ति मंत्रालय
कोविड महामारी के बावजूद 1,00,275 गांवों को मिल चुके है नल कनेक्शन
साल 2024 तक  हर ग्रामीण परिवार को नल का पानी उपलब्ध कराने के इस विशाल लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए  केंद्र  सरकार ने करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए है। वहीं  2020-21 में राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 11,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 2021-22 वर्ष के  लिए फंड आवंटन में चार गुना बढ़ोतरी को मंजूरी दी है, ताकि लक्ष्य को हासिल करने के लिए फंड की कमी ना हो. केवल तीन महीनों में ही  राज्यों और  केंद्रशासित प्रदेशों ने वार्षिक कार्य योजनाओं (AAP) के तहत प्रस्तावित फंड में से  8,891 करोड़ रुपये निकाल लीये है 

प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 07/09/2021 - 11:44
पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों ने नई तरकीब निकाली
जिला देहरादून के जनजातीय क्षेत्र जौनसार में गर्मी का मौसम आते ही  यहां के लोगो को पानी कि किल्लत से जूझना पड़ता है आज हम आपको जनजातीय क्षेत्र जौनसार के कालसी ब्लॉक अंतर्गत एक गांव गांगरो की तस्वीरें दिख रहे है जहां पानी की समस्या से लोगो को रोज़ जूझना पड़ता है जिसे देखते हुए सड़क पर एक हैंड पंप की व्यवस्था की गई क्योंकि गांव में  जो परंपरागत जल स्रोत है वो यहां रह रहे करीब एक हजार लोगों को पानी की पूर्ति नही कर पा रहा है 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
Source:
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।
Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
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विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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चरखा ने "संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2020" सम्मान समारोह का किया आयोजन

Submitted by HindiWater on Sat, 07/17/2021 - 12:10
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चरखा फीचर
चरखा ने "संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2020" सम्मान समारोह का किया आयोजन
याद रहे कि 1997 में असम में उल्फा ने संजॉय का अपहरण करके उनकी हत्या कर दी थी। संजॉय घोष को याद करते हुए रजनी बख्शी ने कहा कि, "उनका जीवन प्रेरणादायी है। उन्होंने हमें सिखाया कि कैसे प्रभावी पत्रकारिता के लिए निडरता, रचनात्मकता और असंभव को संभव बनाने का जज़्बा अनिवार्य है। चरखा ग्रामीण भारत की विकास चुनौतियों को उजागर करने के लिए इन तीन मूल्यों के साथ काम कर रहा है। यह पुरस्कार समकालीन दुनिया की चुनौतियों का समाधान करने की कोशिश कर रहे लोगों के बीच पुल बनाने का एक महत्वपूर्ण मंच है।

पर्यावरण संरक्षण, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है हरेला

Submitted by HindiWater on Fri, 07/16/2021 - 15:27
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इंडिया हिंदी वाटर पोर्टल
पर्यावरण संरक्षण, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है हरेला
रेला पर्व सौरमास श्रावण के प्रथम दिन यानि कर्क संक्रान्ति को मनाया जाता है।परम्परानुसार पर्व से नौ अथवा दस दिन पूर्व पत्तों से बने दोने या रिंगाल की टोकरियों में हरेला बोया जाता है। जिसमें उपलब्धतानुसार पाँच, सात अथवा नौ प्रकार के धान्य यथा- धान, मक्का, तिल, उड़द, गहत, भट्ट, जौं व सरसों के बीजों को बोया जाता है। देवस्थान में इन टोकरियों को रखने के उपरान्त रोजाना इन्हें जल के छींटों से सींचा जाता है। दो-तीन दिनों में ये बीज अंकुरित होकर हरेले तक सात-आठ इंच लम्बे तृण का आकार पा लेते हैं।

कोविड महामारी के बावजूद 1,00,275 गांवों को मिल चुके है नल कनेक्शन

Submitted by HindiWater on Thu, 07/15/2021 - 14:44
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विज्ञप्ति जल शक्ति मंत्रालय
कोविड महामारी के बावजूद 1,00,275 गांवों को मिल चुके है नल कनेक्शन
साल 2024 तक  हर ग्रामीण परिवार को नल का पानी उपलब्ध कराने के इस विशाल लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए  केंद्र  सरकार ने करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए है। वहीं  2020-21 में राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 11,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 2021-22 वर्ष के  लिए फंड आवंटन में चार गुना बढ़ोतरी को मंजूरी दी है, ताकि लक्ष्य को हासिल करने के लिए फंड की कमी ना हो. केवल तीन महीनों में ही  राज्यों और  केंद्रशासित प्रदेशों ने वार्षिक कार्य योजनाओं (AAP) के तहत प्रस्तावित फंड में से  8,891 करोड़ रुपये निकाल लीये है 

प्रयास

पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों ने नई तरकीब निकाली

Submitted by HindiWater on Fri, 07/09/2021 - 11:44
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पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों ने नई तरकीब निकाली
जिला देहरादून के जनजातीय क्षेत्र जौनसार में गर्मी का मौसम आते ही  यहां के लोगो को पानी कि किल्लत से जूझना पड़ता है आज हम आपको जनजातीय क्षेत्र जौनसार के कालसी ब्लॉक अंतर्गत एक गांव गांगरो की तस्वीरें दिख रहे है जहां पानी की समस्या से लोगो को रोज़ जूझना पड़ता है जिसे देखते हुए सड़क पर एक हैंड पंप की व्यवस्था की गई क्योंकि गांव में  जो परंपरागत जल स्रोत है वो यहां रह रहे करीब एक हजार लोगों को पानी की पूर्ति नही कर पा रहा है 

नोटिस बोर्ड

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by HindiWater on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
vishva-prithvi-divas-2021:corona-sankat-k-beach-paryavaraniya-chinta
 विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

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