नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

Submitted by HindiWater on Fri, 10/30/2020 - 13:09
आज भी खरे है तालाब-अध्याय 03
अपनी पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब के तीसरे अध्याय संसार सागर के नायक में अनुपम मिश्र ने देश भर में विभिन्न समुदायों के उन पुरोधाओं को याद किया है, जिन्होंने पानी के संरक्षण और तालाबों को बनाने के लिए अपना जीवन उत्सर्ग कर दिया। इस दूसरे हिस्से में बहुत कलात्मक तरीके से उनके जीवन दर्शन को भी प्रस्तुत किया गया है।

Content

Submitted by HindiWater on Thu, 10/22/2020 - 15:30
Source:
कोसी नदी का कहर
संभवत: तीन-चार सौ वर्ष पहले इस अंचल में कोसी मैया की महाविनाश लीला शुरू हुई होगी। लाखों एकड़ जमीन को अचानक लकवा मार गया होगा। महान कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु के उपन्यास 'परती परिकथा' का है यह संपूर्ण उद्धहरण। आज रेणु जिंदा तो नहीं हैं लेकिन तीन सौ वर्ष पूर्व की कोसी मैया एक बार फिर से इस भाग में महातांडव कर रही है। तब की विनाशलीला पूरी तरह प्राकृतिक थी और इस बार मानव निर्मित है। चाहे लोग इसे जितना जोर देकर प्राकृतिक आपदा कहें- यह है कोसी क्षेत्र के लोगों का सामूहिक नरसंहार। रेणु का गांव औराही हिंगना इस प्रकोप से विलुप्त तो नहीं हुआ है लेकिन ऐसे दर्जनों गांव है इस कोसी क्षेत्र में, जो अब सिर्फ इतिहास व कथाओं में ही बचे रहेंगे। इतना बड़ा नरसंहार और बुद्धिजीवियों की चुप्पी इस समाज को दहशत में भर रही है।
Submitted by HindiWater on Thu, 10/22/2020 - 12:57
Source:
विष्णु लांबा अब तक करीब ग्यारह लाख पौधे निःशुल्क वितरित कर चुके हैं
राजस्थान के एक युवा ने पर्यावरण की रक्षा के लिए ना सिर्फ पिता घर बार छोड़ दिया, बल्कि वह पिछले 27 सालों से प्रकृति को परमात्मा मानकर उसकी हिफाजत में जुटा है। हम बात कर रहे हैं “ट्री मैन ऑफ इंडिया”  विष्णु लांबा की, जिन्होंने आजीवन पर्यावरण की सेवा का संकल्प ही नहीं लिया, बल्कि उसे बखूबी निभा भी रहे हैं। मात्र सात साल की उम्र से ही विष्णु ने अपने बाड़े [घर के पास स्थित जानवर रखने की जगह] में तरह-तरह के पौधे लगाना शुरू कर दिया। विष्णु पर पौधे लगाने का इतना जुनून सवार था, कि वे किसी के भी घर और खेत से पौधा चुराने में जरा सी भी देर नहीं करते थे।उनकी इस आदत से तंग आकर घरवालों ने उन्हें उनकी बुआजी के यहां पढ़ने भेज दिया, लेकिन विष्णु का प्रकृति के प्रति प्रेम बढ़ता ही गया। इसके बाद विष्णु अपने ताऊजी के साथ जयपुर आ गए यहां भी इनका प्रकृति प्रेम कम नहीं हुआ और उन्होंने तत्कालीन जयपुर कलेक्टर श्रीमत पाण्डे के जवाहर सर्किल स्थित घर में बनी नर्सरी से पौधे चुरा लिए।
Submitted by HindiWater on Wed, 10/21/2020 - 16:38
Source:
दैनिक लोकमत
तिब्बत में प्रमुख नदियाँ
तिब्बत से निकलनेवाली और भारत मे बहने वाली प्रमुख नदी-ब्रह्मपुत्र, सिंधु, सतलज हैं। गंगा में मिलने वाली नेपाल की कुछ नदियां भी तिब्बत में ही उत्पन्न होती हैं उनमें सबसे प्रमुख नदी है-कर्राली। तिब्बत काली गण्डकी नदी, बूढी गंडक और त्रिभुली नदी के बडे हिस्से का भी उदगम स्थल है। जो कि नेपाल की गण्डकी नदी प्रणाली की प्रमुख सहायक नदियां हैं। इसी प्रकार कोसी नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ जैसे सूर्य कोसी/भोट कोसी , तम कोसी और अरुण की उत्पत्ति भी तिब्बत में हुई है। एक तरफ सिंधु पूरे पाकिस्तान को पार के अरब सागर में मिलती है तो दूसरी तरफ मेकाँग, लोअस, थाईलैंड कंबोडिया और वियतनाम से होकर दक्षिणी चीन सागर में गिरती है। तो हम देख रहे है कि पानी एक है । 

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 11/09/2020 - 12:31
आत्मनिर्भरता की इबारत लिख रहा है भारत का एक गाँव
मध्यप्रदेश का एक छोटा सा गाँव नवादपुरा इन दिनोंआत्मनिर्भर भारत की एक ऐसी इबारत लिख रहा है जो शायद पूरे भारत के लिए एक नज़ीर बन सकती है। गाँव के ही एक गाय प्रेमी दम्पत्ति के नवाचारों से गाय पालने वाले कई आदिवासी परिवारों में दीवाली से पहले ही खुशियाँ जगमगा रही हैं। गाय के गोबर को फेंकने के बजाए उससे दीये बनवाने की एक नई पहल शुरु की गई।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 
Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
Source:
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

Latest

खासम-खास

आज भी खरे है तालाब-अध्याय 03 संसार सागर के नायक

Submitted by HindiWater on Fri, 10/30/2020 - 13:09
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
aaj-bhi-khare-hai-talab-adhyay-03-sansar-sagar-kay-nayaka
Source
रमाकांत राय
आज भी खरे है तालाब-अध्याय 03
अपनी पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब के तीसरे अध्याय संसार सागर के नायक में अनुपम मिश्र ने देश भर में विभिन्न समुदायों के उन पुरोधाओं को याद किया है, जिन्होंने पानी के संरक्षण और तालाबों को बनाने के लिए अपना जीवन उत्सर्ग कर दिया। इस दूसरे हिस्से में बहुत कलात्मक तरीके से उनके जीवन दर्शन को भी प्रस्तुत किया गया है।

Content

बुद्धिजीवियों की चुप्पी

Submitted by HindiWater on Thu, 10/22/2020 - 15:30
buddhijiviyon-key-chuppi
कोसी नदी का कहर
संभवत: तीन-चार सौ वर्ष पहले इस अंचल में कोसी मैया की महाविनाश लीला शुरू हुई होगी। लाखों एकड़ जमीन को अचानक लकवा मार गया होगा। महान कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु के उपन्यास 'परती परिकथा' का है यह संपूर्ण उद्धहरण। आज रेणु जिंदा तो नहीं हैं लेकिन तीन सौ वर्ष पूर्व की कोसी मैया एक बार फिर से इस भाग में महातांडव कर रही है। तब की विनाशलीला पूरी तरह प्राकृतिक थी और इस बार मानव निर्मित है। चाहे लोग इसे जितना जोर देकर प्राकृतिक आपदा कहें- यह है कोसी क्षेत्र के लोगों का सामूहिक नरसंहार। रेणु का गांव औराही हिंगना इस प्रकोप से विलुप्त तो नहीं हुआ है लेकिन ऐसे दर्जनों गांव है इस कोसी क्षेत्र में, जो अब सिर्फ इतिहास व कथाओं में ही बचे रहेंगे। इतना बड़ा नरसंहार और बुद्धिजीवियों की चुप्पी इस समाज को दहशत में भर रही है।

पिछले 27 सालों से प्रकृति को परमात्मा मानकर उसकी हिफाजत में जुटा विष्णु लांबा

Submitted by HindiWater on Thu, 10/22/2020 - 12:57
pichale-27-salon-sey-prakriti-ko-paramatma-mankar-usaki-hifajat-mein-juta-vishnu-lamba
विष्णु लांबा अब तक करीब ग्यारह लाख पौधे निःशुल्क वितरित कर चुके हैं
राजस्थान के एक युवा ने पर्यावरण की रक्षा के लिए ना सिर्फ पिता घर बार छोड़ दिया, बल्कि वह पिछले 27 सालों से प्रकृति को परमात्मा मानकर उसकी हिफाजत में जुटा है। हम बात कर रहे हैं “ट्री मैन ऑफ इंडिया”  विष्णु लांबा की, जिन्होंने आजीवन पर्यावरण की सेवा का संकल्प ही नहीं लिया, बल्कि उसे बखूबी निभा भी रहे हैं। मात्र सात साल की उम्र से ही विष्णु ने अपने बाड़े [घर के पास स्थित जानवर रखने की जगह] में तरह-तरह के पौधे लगाना शुरू कर दिया। विष्णु पर पौधे लगाने का इतना जुनून सवार था, कि वे किसी के भी घर और खेत से पौधा चुराने में जरा सी भी देर नहीं करते थे।उनकी इस आदत से तंग आकर घरवालों ने उन्हें उनकी बुआजी के यहां पढ़ने भेज दिया, लेकिन विष्णु का प्रकृति के प्रति प्रेम बढ़ता ही गया। इसके बाद विष्णु अपने ताऊजी के साथ जयपुर आ गए यहां भी इनका प्रकृति प्रेम कम नहीं हुआ और उन्होंने तत्कालीन जयपुर कलेक्टर श्रीमत पाण्डे के जवाहर सर्किल स्थित घर में बनी नर्सरी से पौधे चुरा लिए।

तिब्बत की नदियां और दक्षिण एशिया की जल सुरक्षा

Submitted by HindiWater on Wed, 10/21/2020 - 16:38
tibbat-key-nadiyan-aur-dakshin-asia-key-jal-suraksha
Source
दैनिक लोकमत
तिब्बत में प्रमुख नदियाँ
तिब्बत से निकलनेवाली और भारत मे बहने वाली प्रमुख नदी-ब्रह्मपुत्र, सिंधु, सतलज हैं। गंगा में मिलने वाली नेपाल की कुछ नदियां भी तिब्बत में ही उत्पन्न होती हैं उनमें सबसे प्रमुख नदी है-कर्राली। तिब्बत काली गण्डकी नदी, बूढी गंडक और त्रिभुली नदी के बडे हिस्से का भी उदगम स्थल है। जो कि नेपाल की गण्डकी नदी प्रणाली की प्रमुख सहायक नदियां हैं। इसी प्रकार कोसी नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ जैसे सूर्य कोसी/भोट कोसी , तम कोसी और अरुण की उत्पत्ति भी तिब्बत में हुई है। एक तरफ सिंधु पूरे पाकिस्तान को पार के अरब सागर में मिलती है तो दूसरी तरफ मेकाँग, लोअस, थाईलैंड कंबोडिया और वियतनाम से होकर दक्षिणी चीन सागर में गिरती है। तो हम देख रहे है कि पानी एक है । 

प्रयास

आत्मनिर्भरता की इबारत लिख रहा है भारत का एक गाँव

Submitted by HindiWater on Mon, 11/09/2020 - 12:31
atmanirbharata-key-ibarat-likh-raha-hai-bharath-kaa-ek-ganv
आत्मनिर्भरता की इबारत लिख रहा है भारत का एक गाँव
मध्यप्रदेश का एक छोटा सा गाँव नवादपुरा इन दिनोंआत्मनिर्भर भारत की एक ऐसी इबारत लिख रहा है जो शायद पूरे भारत के लिए एक नज़ीर बन सकती है। गाँव के ही एक गाय प्रेमी दम्पत्ति के नवाचारों से गाय पालने वाले कई आदिवासी परिवारों में दीवाली से पहले ही खुशियाँ जगमगा रही हैं। गाय के गोबर को फेंकने के बजाए उससे दीये बनवाने की एक नई पहल शुरु की गई।   

नोटिस बोर्ड

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
hindi-patrakaron-ke-liye-cse-aaeti-online-training-course
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
ekva-foundation-key-XIV-world-ekva-kangres
Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

भविष्य में किस तरह पानी को किया जा सकता है सुरक्षित 

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
bhavishya-mein-kiss-tarah-pani-ko-kia-jaa-sakata-hai-surakshit
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

Upcoming Event

Popular Articles