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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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Submitted by HindiWater on Fri, 04/09/2021 - 15:16
Source:
दूषित पानी से देश के बच्चों का जीवन खतरे में
दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में बाल अधिकारों पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ( यूनिसेफ) की 18 मार्च 2021 को आई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के हर पांचवें बच्चे को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लगभग 80 से ज्यादा देशों में बच्चे उन जगहों पर रहते हैं जहां पानी की भारी कमी है। पूर्वी और दक्षिण अफ्रीका में स्थिति सबसे ज्यादा ख़राब है। यहां 58 फीसदी से ज्यादा बच्चे पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं। पश्चिम और मध्य अफ्रीका में 31%, दक्षिण एशिया में 25 % और मध्य पूर्व में 23 फीसदी बच्चे जल संकट का सामना कर रहे हैं। संख्या से हिसाब से देखें तो दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा 15.5 करोड़ बच्चे पानी के संकट से जूझ रहे हैं।
Submitted by HindiWater on Thu, 04/08/2021 - 15:41
Source:
प्राकृतिक खेती और बागवानी
इन सभी संकटों का हल न तो सरकार के पास है और न ही बुद्धिमान वैज्ञानिकों के पास। इससंकट का हल केवल किसान के पास है। यदि किसान खेती को फिर से उत्तम बना दे, अपने खेतों में जहर डालने से परहेज करें, केवल देसी गाय के गोबर-गोमूत्र से प्राकृतिक खेती करे तो फिर से स्वस्थ, सम्पन्न और वैभवशाली भारत बनाया जा सकता है। उसके लिये न यंत्रों की आवश्यकता है और न डीजल-पेट्रोल की। केवल संकल्प की आवश्यकता है। ऐसा बहुत से किसान कर के दिखा भी रहे हैं। प्राकृतिक खेती यानि प्रकृति के संसाधन के द्वारा खेती। प्रकृति में जीवन है,
Submitted by HindiWater on Wed, 04/07/2021 - 13:51
Source:
भारत सरकार के विशेषज्ञों ने तालाबों पर किया सर्वे
:- पूरे देश मे हुए एक विशेष सर्वे में जलस्तर पर रिपोर्ट तैयार की गई जिसमें उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के दो विकास खंड संवेदनशील मने गए हैं। काशीपुर खास तौर पर विषेसज्ञों के लिए केंद्र बना है, यदि हालात नही सुधरे तो तराई का एक बड़ा भूखंड सूखे की जद में आजायेगा, ओर जलस्तर बहुत ही नीचे पहुच जायेगा, विशेषज्ञों ने बताया कि घटते जल स्तर के लिए नदियों से बड़ी मात्रा में खनन ओर लिपटस ,पोपलर के पेड़ों का होना विशेष है, पिछले कई सालों से घटता जल स्तर और स्वच्छ पेयजल लोगों को उपलब्ध नही हो रहा है, विशेषज्ञ भी मानते है कि पानी का संकट बढ़ सकता है जिसके लिए सरकार इनके कारणों पर रिसर्च कर रिपोर्ट जल्द सौंपेगी।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
Source:
विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।
Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

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खासम-खास

सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
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सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

Content

दूषित पानी से देश के बच्चों का जीवन खतरे में

Submitted by HindiWater on Fri, 04/09/2021 - 15:16
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दूषित पानी से देश के बच्चों का जीवन खतरे में
दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में बाल अधिकारों पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ( यूनिसेफ) की 18 मार्च 2021 को आई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के हर पांचवें बच्चे को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लगभग 80 से ज्यादा देशों में बच्चे उन जगहों पर रहते हैं जहां पानी की भारी कमी है। पूर्वी और दक्षिण अफ्रीका में स्थिति सबसे ज्यादा ख़राब है। यहां 58 फीसदी से ज्यादा बच्चे पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं। पश्चिम और मध्य अफ्रीका में 31%, दक्षिण एशिया में 25 % और मध्य पूर्व में 23 फीसदी बच्चे जल संकट का सामना कर रहे हैं। संख्या से हिसाब से देखें तो दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा 15.5 करोड़ बच्चे पानी के संकट से जूझ रहे हैं।

प्राकृतिक खेती और बागवानी

Submitted by HindiWater on Thu, 04/08/2021 - 15:41
prakritik-kheti-or-bagvani
प्राकृतिक खेती और बागवानी
इन सभी संकटों का हल न तो सरकार के पास है और न ही बुद्धिमान वैज्ञानिकों के पास। इससंकट का हल केवल किसान के पास है। यदि किसान खेती को फिर से उत्तम बना दे, अपने खेतों में जहर डालने से परहेज करें, केवल देसी गाय के गोबर-गोमूत्र से प्राकृतिक खेती करे तो फिर से स्वस्थ, सम्पन्न और वैभवशाली भारत बनाया जा सकता है। उसके लिये न यंत्रों की आवश्यकता है और न डीजल-पेट्रोल की। केवल संकल्प की आवश्यकता है। ऐसा बहुत से किसान कर के दिखा भी रहे हैं। प्राकृतिक खेती यानि प्रकृति के संसाधन के द्वारा खेती। प्रकृति में जीवन है,

भारत सरकार के विशेषज्ञों ने तालाबों पर किया सर्वे

Submitted by HindiWater on Wed, 04/07/2021 - 13:51
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भारत सरकार के विशेषज्ञों ने तालाबों पर किया सर्वे
:- पूरे देश मे हुए एक विशेष सर्वे में जलस्तर पर रिपोर्ट तैयार की गई जिसमें उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के दो विकास खंड संवेदनशील मने गए हैं। काशीपुर खास तौर पर विषेसज्ञों के लिए केंद्र बना है, यदि हालात नही सुधरे तो तराई का एक बड़ा भूखंड सूखे की जद में आजायेगा, ओर जलस्तर बहुत ही नीचे पहुच जायेगा, विशेषज्ञों ने बताया कि घटते जल स्तर के लिए नदियों से बड़ी मात्रा में खनन ओर लिपटस ,पोपलर के पेड़ों का होना विशेष है, पिछले कई सालों से घटता जल स्तर और स्वच्छ पेयजल लोगों को उपलब्ध नही हो रहा है, विशेषज्ञ भी मानते है कि पानी का संकट बढ़ सकता है जिसके लिए सरकार इनके कारणों पर रिसर्च कर रिपोर्ट जल्द सौंपेगी।

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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Source
चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
vishva-prithvi-divas-2021:corona-sankat-k-beach-paryavaraniya-chinta
 विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

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