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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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Submitted by HindiWater on Sat, 04/03/2021 - 17:02
Source:
जल स्रोतों का सम्मान कोई पहाड़ो पर बसे बुजुर्गों से सीखे
जिला देहरादून के अंतर्गत जौनसार बावर एक जनजातीय क्षेत्र है जहां पीने के पानी को यहां के बुजुर्गों ने बेहद खूबसूरत तरह से संरक्षित करने का प्रयास किया है जिसकी वजह से कोई भी राहगीर यहां गाओं आते वक्त ऐसी जगजो पर अपनी प्यास भुजा सकते है  जीवनदायी जलस्रोतों की सुंदरता बनाये रखना व उनका संरक्षण करना पुरानी पीढ़ी से सीखना चाहिए, जहां कहीं भी गांव बसे है उसके अड़ोस-पड़ोस में कोई जलधारा, बावड़ी,  नावा (नौला), गदेरा, कुवां जरूर है, ये भी संभव है कि उनमें से कुछ में जल की मात्रा घटी होगी या कुछ बिल्कुल सूख गये होगें ।
Submitted by HindiWater on Sat, 04/03/2021 - 13:11
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चरखा फीचर
वाटर फार पीस के आईने में केन-बेतवा नदी जोड योजना
इस परियोजना के अन्तर्गत केन नदी से बेतवा नदी में 1074 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी ट्रांसफर किया जावेगा। उस पानी का संचय करने के लिए मध्यप्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले की सीमा पर स्थित गंगऊ बांध के अपस्ट्रीम में डोढ़न गांव के पास 73़2 मीटर ऊँचा बांध बनाया जाएगा। परियोजना में लगने वाले धन का 90 प्रतिशत भारत सरकार द्वारा तथा बाकी 10 प्रतिशत राज्य देंगे। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के मीडिया को दिए वक्तव्य के अनुसार योजना की मौजूदा लागत 45 हजार करोड़ है। इस योजना से सिंचाई के अलावा 72 मेगावाट बिजली का भी उत्पादन होगा।
Submitted by HindiWater on Thu, 04/01/2021 - 16:22
Source:
आवर्तनशील खेती से लौटेगा किसानों का आत्मविश्वास
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा से लगभग छह किमी दूर बड़ोखर गांव निवासी प्रेम सिंह की बगिया यानि कि उनके अनुभवों द्वारा तैयार की गई जमीन पर जब  मैं गया तो मेरा परिचय झोपड़ी में नीचे बैठे एक साधारण से दिखने वाले किसान से करवाया गया। पता चला कि यही प्रेम सिंह हैं।खैर,बड़ी गर्मजोशी से उन्होंने मेरा स्वागत किया। कुछ देर बाद जब वह अकेले हुए मैंने उनसे उनके अनुभव और सरकारों के कुत्सित रवैये पर बात करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए बुंदेलखंड की जलवायु हमेशा से विपरीत रही है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
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विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।
Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

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खासम-खास

सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
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सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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जल स्रोतों का सम्मान कोई पहाड़ो पर बसे बुजुर्गों से सीखे

Submitted by HindiWater on Sat, 04/03/2021 - 17:02
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जल स्रोतों का सम्मान कोई पहाड़ो पर बसे बुजुर्गों से सीखे
जिला देहरादून के अंतर्गत जौनसार बावर एक जनजातीय क्षेत्र है जहां पीने के पानी को यहां के बुजुर्गों ने बेहद खूबसूरत तरह से संरक्षित करने का प्रयास किया है जिसकी वजह से कोई भी राहगीर यहां गाओं आते वक्त ऐसी जगजो पर अपनी प्यास भुजा सकते है  जीवनदायी जलस्रोतों की सुंदरता बनाये रखना व उनका संरक्षण करना पुरानी पीढ़ी से सीखना चाहिए, जहां कहीं भी गांव बसे है उसके अड़ोस-पड़ोस में कोई जलधारा, बावड़ी,  नावा (नौला), गदेरा, कुवां जरूर है, ये भी संभव है कि उनमें से कुछ में जल की मात्रा घटी होगी या कुछ बिल्कुल सूख गये होगें ।

वाटर फार पीस के आईने में केन-बेतवा नदी जोड योजना

Submitted by HindiWater on Sat, 04/03/2021 - 13:11
Author
कृष्णगोपाल व्यास
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Source
चरखा फीचर
वाटर फार पीस के आईने में केन-बेतवा नदी जोड योजना
इस परियोजना के अन्तर्गत केन नदी से बेतवा नदी में 1074 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी ट्रांसफर किया जावेगा। उस पानी का संचय करने के लिए मध्यप्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले की सीमा पर स्थित गंगऊ बांध के अपस्ट्रीम में डोढ़न गांव के पास 73़2 मीटर ऊँचा बांध बनाया जाएगा। परियोजना में लगने वाले धन का 90 प्रतिशत भारत सरकार द्वारा तथा बाकी 10 प्रतिशत राज्य देंगे। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के मीडिया को दिए वक्तव्य के अनुसार योजना की मौजूदा लागत 45 हजार करोड़ है। इस योजना से सिंचाई के अलावा 72 मेगावाट बिजली का भी उत्पादन होगा।

आवर्तनशील खेती से लौटेगा किसानों का आत्मविश्वास

Submitted by HindiWater on Thu, 04/01/2021 - 16:22
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आवर्तनशील खेती से लौटेगा किसानों का आत्मविश्वास
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा से लगभग छह किमी दूर बड़ोखर गांव निवासी प्रेम सिंह की बगिया यानि कि उनके अनुभवों द्वारा तैयार की गई जमीन पर जब  मैं गया तो मेरा परिचय झोपड़ी में नीचे बैठे एक साधारण से दिखने वाले किसान से करवाया गया। पता चला कि यही प्रेम सिंह हैं।खैर,बड़ी गर्मजोशी से उन्होंने मेरा स्वागत किया। कुछ देर बाद जब वह अकेले हुए मैंने उनसे उनके अनुभव और सरकारों के कुत्सित रवैये पर बात करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए बुंदेलखंड की जलवायु हमेशा से विपरीत रही है।

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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Source
चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
vishva-prithvi-divas-2021:corona-sankat-k-beach-paryavaraniya-chinta
 विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

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