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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

उत्तराखंड में 1.59 करोड़ पौधरोण से दूर होगी वन्यजीवों के भोजन की कमी

Submitted by HindiWater on Tue, 07/02/2019 - 17:53
उत्तराखंड में होगा 1.59 करोड़ पौधों का रोपण।उत्तराखंड में होगा 1.59 करोड़ पौधों का रोपण। उत्तराखंड़ का 71 प्रतिशत यानी 38 हजार वर्ग किलोमीटर का भूभाग वनों से आच्छादित है, जहां वन्यजीवों और वन संपदा के संरक्षण के लिए केदारनाथ वन्यजीव प्रभा, राजाजी टाइगर रिजर्व, जिम काॅर्बेट नेशनल पार्क, नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान आदि रिजर्व वन क्षेत्र हैं, जिनकी वन एवं पर्यावरण मंत्रालय व वन विभाग द्वारा नियमित रूप से निगरानी की जाती है। नियमित रूप से निगरानी का ही नतीजा है कि प्रदेश में हाथियों की संख्या में 2015 के 779 हाथियों की अपेक्षा बढ़कर वर्तमान में 18 सौ से अधिक हो गई है। तो वहीं बारहसिंगा, सांभर, नील गाय आदि वन्यजीवों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है, लेकिन इंसानों की बढ़ती आबादी के कारण जंगल लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं। घटते जंगलों के कारण वन्यजीवों के लिए जंगल पर्याप्त नहीं पड़ रहे हैं और न ही जंगल में जानवरों की बढ़ती संख्या में अनुरूप भोजन की पर्याप्त उपलब्धता है। नतीजन, वन्यजीव आबादी वाले इलाकों का रुख कर रहे हैं।

क्या भारत और पाकिस्तान जल युद्ध की कगार पर हैं?

Submitted by UrbanWater on Sun, 06/30/2019 - 17:07
Author
मौलिक सिसोदिया
सिंधु जल समझौता बन रहा रोड़ा।सिंधु जल समझौता बन रहा रोड़ा। ग्लोबल एनवायरमेंटल चेंज में जारी एक शोध पत्र के अनुसार, गंगा-ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी घाटी क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील भूभाग है। यहां जल राजनैतिक समस्याएं, भू-राजनैतिक तनाव को जन्म दे रही हैं और संभवतः जल युद्ध की संभावनाओं को भी पोषित कर रही हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु चीन, पाकिस्तान और भारत से बहने वाली विशाल नदियां हैं। मनुष्य के लिए पानी का टकराव कोई नई बात नहीं है। जल संघर्ष डेटाबेस बताता है कि हमारे इतिहास में कितने प्रचलित जल संघर्ष रहे हैं।

वाटर माफिया हमारे भविष्य को ‘प्यासा’ कर रहे हैं

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/26/2019 - 14:27
Source
आईनेक्सट, 22 जून 2019
साल 2025 तक भारत भीषण जल संकट वाला देश बन जाएगा।साल 2025 तक भारत भीषण जल संकट वाला देश बन जाएगा। शहर में ज्यादातर वाटर प्लांट प्रशासन की निगरानी में नहीं हैं। ऐसे में इनकी गुणवत्ता की कोई चेकिंग नहीं हो पाती। कई प्लांट तो सिर्फ पानी ठंडा कर केन में भरके बेच देते हैं। वाटर प्यूरीफायर का प्रोसेस ही नहीं फाॅलो होता है। ऐसे में लोग जिस पानी को प्यूरीफाइड मानकर पीते हैं वो ठंडा होता है लेकिन शुद्ध नहीं। ऐसे वाटर माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए सीधे कोई कानून नहीं है। रजिस्टर्ड न हो पाने के कारण ये प्रशासन और जिम्मेदार लोगों की नजर में भी नहीं आ पाते। जो नजर में आते भी हैं, वो बाहरी रास्तों से हल निकालकर अपना काम चला लेते हैं।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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उत्तराखंड में 1.59 करोड़ पौधरोण से दूर होगी वन्यजीवों के भोजन की कमी

Submitted by HindiWater on Tue, 07/02/2019 - 17:53
उत्तराखंड में होगा 1.59 करोड़ पौधों का रोपण।उत्तराखंड में होगा 1.59 करोड़ पौधों का रोपण। उत्तराखंड़ का 71 प्रतिशत यानी 38 हजार वर्ग किलोमीटर का भूभाग वनों से आच्छादित है, जहां वन्यजीवों और वन संपदा के संरक्षण के लिए केदारनाथ वन्यजीव प्रभा, राजाजी टाइगर रिजर्व, जिम काॅर्बेट नेशनल पार्क, नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान आदि रिजर्व वन क्षेत्र हैं, जिनकी वन एवं पर्यावरण मंत्रालय व वन विभाग द्वारा नियमित रूप से निगरानी की जाती है। नियमित रूप से निगरानी का ही नतीजा है कि प्रदेश में हाथियों की संख्या में 2015 के 779 हाथियों की अपेक्षा बढ़कर वर्तमान में 18 सौ से अधिक हो गई है। तो वहीं बारहसिंगा, सांभर, नील गाय आदि वन्यजीवों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है, लेकिन इंसानों की बढ़ती आबादी के कारण जंगल लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं। घटते जंगलों के कारण वन्यजीवों के लिए जंगल पर्याप्त नहीं पड़ रहे हैं और न ही जंगल में जानवरों की बढ़ती संख्या में अनुरूप भोजन की पर्याप्त उपलब्धता है। नतीजन, वन्यजीव आबादी वाले इलाकों का रुख कर रहे हैं।

क्या भारत और पाकिस्तान जल युद्ध की कगार पर हैं?

Submitted by UrbanWater on Sun, 06/30/2019 - 17:07
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मौलिक सिसोदिया
सिंधु जल समझौता बन रहा रोड़ा।सिंधु जल समझौता बन रहा रोड़ा। ग्लोबल एनवायरमेंटल चेंज में जारी एक शोध पत्र के अनुसार, गंगा-ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी घाटी क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील भूभाग है। यहां जल राजनैतिक समस्याएं, भू-राजनैतिक तनाव को जन्म दे रही हैं और संभवतः जल युद्ध की संभावनाओं को भी पोषित कर रही हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु चीन, पाकिस्तान और भारत से बहने वाली विशाल नदियां हैं। मनुष्य के लिए पानी का टकराव कोई नई बात नहीं है। जल संघर्ष डेटाबेस बताता है कि हमारे इतिहास में कितने प्रचलित जल संघर्ष रहे हैं।

वाटर माफिया हमारे भविष्य को ‘प्यासा’ कर रहे हैं

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/26/2019 - 14:27
Source
आईनेक्सट, 22 जून 2019
साल 2025 तक भारत भीषण जल संकट वाला देश बन जाएगा।साल 2025 तक भारत भीषण जल संकट वाला देश बन जाएगा। शहर में ज्यादातर वाटर प्लांट प्रशासन की निगरानी में नहीं हैं। ऐसे में इनकी गुणवत्ता की कोई चेकिंग नहीं हो पाती। कई प्लांट तो सिर्फ पानी ठंडा कर केन में भरके बेच देते हैं। वाटर प्यूरीफायर का प्रोसेस ही नहीं फाॅलो होता है। ऐसे में लोग जिस पानी को प्यूरीफाइड मानकर पीते हैं वो ठंडा होता है लेकिन शुद्ध नहीं। ऐसे वाटर माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए सीधे कोई कानून नहीं है। रजिस्टर्ड न हो पाने के कारण ये प्रशासन और जिम्मेदार लोगों की नजर में भी नहीं आ पाते। जो नजर में आते भी हैं, वो बाहरी रास्तों से हल निकालकर अपना काम चला लेते हैं।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
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दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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