नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

विकास का मोल

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 06:09
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों को जलमार्ग में बदलने की योजनानदियों को जलमार्ग में बदलने की योजनापिछले दिनों विकास से जुड़ी दो प्रमुख खबरें अखबारों की सुर्खियाँ बनीं। पहली खबर का सम्बन्ध हिमालयी राज्य परिषद के गठन से है। दूसरी खबर नोएडा को प्रयागराज तक जल मार्ग से जोड़ने की है। पहली खबर का सम्बन्ध हिमालयी राज्यों के समन्वित और सतत विकास के लिये काम करना है वहीं दूसरी खबर का सम्बन्ध कम किराए में नदी मार्ग द्वारा परिवहन तथा पर्यटन का विकास है।

Content

संत गोपाल दास भी स्वामी सानंद की राह पर, पानी भी त्यागा

Submitted by editorial on Mon, 10/15/2018 - 14:25
Author
उमेश कुमार राय
एम्स में भर्ती संत गोपालदासएम्स में भर्ती संत गोपालदास (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता को वापस लौटाने की माँग पर करीब चार महीने से अनशन पर बैठे प्रो. जीडी अग्रवाल यानी स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के निधन के बाद संत गोपालदास ने भी पानी ग्रहण करना छोड़ दिया है।

स्वामी सानंद - कलयुग का भगीरथ

Submitted by editorial on Sat, 10/13/2018 - 14:02
Author
उमेश कुमार राय
गंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंदगंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंद (फोटो साभार - डॉ. अनिल गौतम)हुक्मरां तो गंगा को बचाने के अपने वादे पूरा नहीं कर पाये, लेकिन स्वामी सानंद ने अपना वादा निभाया। दशहरा से पहले ही यानी गुरुवार को उन्होंने शरीर त्याग दिया। वह 86 साल के थे और लम्बे समय से गंगा के लिये निहत्थे संघर्ष कर रहे थे। सही मायनों में कहा जाये, तो वह कलयुग के भगीरथ थे। आज गंगा जितनी भी बची हुई है, उसका श्रेय निश्चित तौर पर स्वामी सानंद को जाता है। लेकिन वह इतने से सन्तुष्ट नहीं थे।

गंगा की जिद में गए ‘भीष्म’

Submitted by editorial on Sat, 10/13/2018 - 13:50
Author
हिमांशु ठक्कर
Source
राष्ट्रीय सहारा, 13 अक्टूबर, 2018
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (फोटो साभार - लाइव हिन्दुस्तान)आमरण अनशनरत प्रो. जीडी अग्रवाल (जो स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से विख्यात थे) के बीती ग्यारह अक्टूबर को निधन ने सभी को बेहद व्यथित कर दिया है। वह गंगा के लिये अलग से एक्ट तथा उत्तराखण्ड में तमाम जलविद्युत परियोजनाओं को रद्द करने की माँग को लेकर बीती 22 जून से आमरण अनशन पर बैठे थे।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

आत्मबोधानंद को प्रशासन ने जबरन भेजा एम्स

Submitted by editorial on Fri, 11/30/2018 - 13:47
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

स्वामी आत्मबोधानंद एवं पुण्यानंद (फोटो साभार: दैनिक जागरण)स्वामी आत्मबोधानंद एवं पुण्यानंद (फोटो साभार: दैनिक जागरण) पिछले 38 दिनों से गंगा की रक्षा के लिये अनशनरत हरिद्वार स्थित मातृ सदन के गंगा भक्त ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को जिला प्रशासन ने उनकी इच्छा के विरूद्ध जबरन ऋषिकेश एम्स में दाखिल करवा दिया है।

गंगा भक्तों के अनशन के 16 दिन हुए पूरे

Submitted by editorial on Thu, 11/08/2018 - 11:05
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथस्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता और निर्मलता की माँग को लेकर मातृसदन के दो संतों ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद और स्वामी पुण्यानंद का अनशन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। ये दोनों 24 अक्टूबर से अनशन पर हैं।

जानिये आँकड़ों के विश्लेषण की बारीकियाँ

Submitted by editorial on Sun, 10/28/2018 - 16:33
Author
सीएसई
Source
सीएसई
जलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन के दौर में विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषण अति आवश्यक हो गया है। कहा जाता है जिसे मापा जाता है उसका प्रबन्धन किया जाता है। परन्तु यह तभी सम्भव है जब मापी गई वस्तु से सम्बन्धित आँकड़े का सही विश्लेषण हो। आज हर क्षेत्र में आँकड़ों की बाढ़ है लेकिन आप इनका विश्लेषण तभी कर सकते हैं जब इसके लिये आपने समुचित प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।

Latest

खासम-खास

विकास का मोल

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 06:09
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों को जलमार्ग में बदलने की योजनानदियों को जलमार्ग में बदलने की योजनापिछले दिनों विकास से जुड़ी दो प्रमुख खबरें अखबारों की सुर्खियाँ बनीं। पहली खबर का सम्बन्ध हिमालयी राज्य परिषद के गठन से है। दूसरी खबर नोएडा को प्रयागराज तक जल मार्ग से जोड़ने की है। पहली खबर का सम्बन्ध हिमालयी राज्यों के समन्वित और सतत विकास के लिये काम करना है वहीं दूसरी खबर का सम्बन्ध कम किराए में नदी मार्ग द्वारा परिवहन तथा पर्यटन का विकास है।

Content

संत गोपाल दास भी स्वामी सानंद की राह पर, पानी भी त्यागा

Submitted by editorial on Mon, 10/15/2018 - 14:25
Author
उमेश कुमार राय
एम्स में भर्ती संत गोपालदासएम्स में भर्ती संत गोपालदास (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता को वापस लौटाने की माँग पर करीब चार महीने से अनशन पर बैठे प्रो. जीडी अग्रवाल यानी स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के निधन के बाद संत गोपालदास ने भी पानी ग्रहण करना छोड़ दिया है।

स्वामी सानंद - कलयुग का भगीरथ

Submitted by editorial on Sat, 10/13/2018 - 14:02
Author
उमेश कुमार राय
गंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंदगंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंद (फोटो साभार - डॉ. अनिल गौतम)हुक्मरां तो गंगा को बचाने के अपने वादे पूरा नहीं कर पाये, लेकिन स्वामी सानंद ने अपना वादा निभाया। दशहरा से पहले ही यानी गुरुवार को उन्होंने शरीर त्याग दिया। वह 86 साल के थे और लम्बे समय से गंगा के लिये निहत्थे संघर्ष कर रहे थे। सही मायनों में कहा जाये, तो वह कलयुग के भगीरथ थे। आज गंगा जितनी भी बची हुई है, उसका श्रेय निश्चित तौर पर स्वामी सानंद को जाता है। लेकिन वह इतने से सन्तुष्ट नहीं थे।

गंगा की जिद में गए ‘भीष्म’

Submitted by editorial on Sat, 10/13/2018 - 13:50
Author
हिमांशु ठक्कर
Source
राष्ट्रीय सहारा, 13 अक्टूबर, 2018
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (फोटो साभार - लाइव हिन्दुस्तान)आमरण अनशनरत प्रो. जीडी अग्रवाल (जो स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से विख्यात थे) के बीती ग्यारह अक्टूबर को निधन ने सभी को बेहद व्यथित कर दिया है। वह गंगा के लिये अलग से एक्ट तथा उत्तराखण्ड में तमाम जलविद्युत परियोजनाओं को रद्द करने की माँग को लेकर बीती 22 जून से आमरण अनशन पर बैठे थे।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

आत्मबोधानंद को प्रशासन ने जबरन भेजा एम्स

Submitted by editorial on Fri, 11/30/2018 - 13:47
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

स्वामी आत्मबोधानंद एवं पुण्यानंद (फोटो साभार: दैनिक जागरण)स्वामी आत्मबोधानंद एवं पुण्यानंद (फोटो साभार: दैनिक जागरण) पिछले 38 दिनों से गंगा की रक्षा के लिये अनशनरत हरिद्वार स्थित मातृ सदन के गंगा भक्त ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को जिला प्रशासन ने उनकी इच्छा के विरूद्ध जबरन ऋषिकेश एम्स में दाखिल करवा दिया है।

गंगा भक्तों के अनशन के 16 दिन हुए पूरे

Submitted by editorial on Thu, 11/08/2018 - 11:05
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथस्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता और निर्मलता की माँग को लेकर मातृसदन के दो संतों ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद और स्वामी पुण्यानंद का अनशन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। ये दोनों 24 अक्टूबर से अनशन पर हैं।

जानिये आँकड़ों के विश्लेषण की बारीकियाँ

Submitted by editorial on Sun, 10/28/2018 - 16:33
Author
सीएसई
Source
सीएसई
जलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन के दौर में विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषण अति आवश्यक हो गया है। कहा जाता है जिसे मापा जाता है उसका प्रबन्धन किया जाता है। परन्तु यह तभी सम्भव है जब मापी गई वस्तु से सम्बन्धित आँकड़े का सही विश्लेषण हो। आज हर क्षेत्र में आँकड़ों की बाढ़ है लेकिन आप इनका विश्लेषण तभी कर सकते हैं जब इसके लिये आपने समुचित प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।

Upcoming Event

Popular Articles