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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

Content

Submitted by HindiWater on Thu, 04/15/2021 - 14:56
Source:
जल संकट से जूझती देवभूमि
प्रदेश में  53,483 वर्ग किलोमीटरका भूगौलिक क्षेत्र है जिसमें  से करीब  24,295 वर्ग किलोमीटर  यानी 45.43 ℅ वन एवं 3,550 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 917 हिमनद हैं। जहां उत्तर भारत की प्रमुख बारहमासी नदियों का उद्गम स्थल है देश के इस पहाड़ी राज्य  में औसतम  1,495 मिलीमीटर (मिमी) पानी बरसता है।लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश पानी साल के 3 महीने ही बरसता है। जो ढलानों के कारण तेजी से बह जाता है।
Submitted by HindiWater on Tue, 04/13/2021 - 16:16
Source:
चरखा फीचर
थार की जैव विविधता को बचाने की जरूरत
उन्नति विकास शिक्षा संगठन द्वारा यूरोपीय संघ के सहयोग से एक वर्ष की समयावधि में पश्चिमी राजस्थान के चार जिलों क्रमशः नागौर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर के गांवों में शामलात शोध यात्रा के माध्यम से किए गये सहभागी शोध कार्य में सार्वजनिक संसाधनों का महत्व, उपयोगिता, वर्तमान स्थिति, क्षेत्रीय जैव विविधता का संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के लक्षण एवं प्रभाव पर भी प्रकाश डाला गया तथा समुदाय द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गयी। जानकारी से जो महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए वह भावी जीवन के लिए बेहद डरावने हैं। प्रकृति के मिजाज के साथ समन्वय और पोषण की भावना से संचालित जीवन तेजी से आधुनिकता के गिरफ्त में आ चुका है। बजुर्ग प्रकृति को पोषित करने वाली परंपराओं को औपचारिक तौर पर मानते हैं, लेकिन युवाओं को यह मात्र ढकोसला लगता है।
Submitted by HindiWater on Tue, 04/13/2021 - 15:50
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प्रदूषित गंगा का पानी सिंचाई लायक भी नही रहा
इस बाँध का निर्माण कोलकाता बंदरगाह को गाद यानी सिल्ट से मुक्त कराने के लिए किया गया था ग्रीष्म ऋतु में हुगली नदी के बहाव को निरन्तर बनाए रखने के लिए गंगा नदी के जल के एक बड़े हिस्से को फ़रक्का बाँध के द्वारा हुगली नदी में मोड़ दिया जाता है। गंगा पर निर्मित दूसरा प्रमुख टिहरी बाँध है टिहरी विकास परियोजना का एक प्राथमिक बाँध है जो उत्तराखण्ड प्रान्त के टिहरी जिले में स्थित है। यह बाँध गंगा नदी की प्रमुख सहयोगी नदी भागीरथी पर बनाया गया है। टिहरी बाँध की ऊँचाई 261 मीटर है जो इसे विश्व का पाँचवाँ सबसे ऊँचा बाँध बनाती है। इस बाँध से 2400  मेगावाट विद्युत उत्पादन, 270000 हेक्टर क्षेत्र की सिंचाई और प्रतिदिन 102.20 करोड़ लीटर पेयजल दिल्ली, उत्तर-प्रदेश एवम् उत्तराखण्ड को उपलब्ध कराना प्रस्तावित है। तीसरा प्रमुख भीमगोडा बाँध हरिद्वार में स्थित है जिसको सन् 1740 में अंग्रेज़ों ने गंगा नदी के पानी को विभाजित कर ऊपरी गंगा नहर में मोड़ने के लिए बनवाया था।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

Latest

खासम-खास

सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
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सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

Content

जल संकट से जूझती देवभूमि

Submitted by HindiWater on Thu, 04/15/2021 - 14:56
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जल संकट से जूझती देवभूमि
प्रदेश में  53,483 वर्ग किलोमीटरका भूगौलिक क्षेत्र है जिसमें  से करीब  24,295 वर्ग किलोमीटर  यानी 45.43 ℅ वन एवं 3,550 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 917 हिमनद हैं। जहां उत्तर भारत की प्रमुख बारहमासी नदियों का उद्गम स्थल है देश के इस पहाड़ी राज्य  में औसतम  1,495 मिलीमीटर (मिमी) पानी बरसता है।लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश पानी साल के 3 महीने ही बरसता है। जो ढलानों के कारण तेजी से बह जाता है।

थार की जैव विविधता को बचाने की जरूरत

Submitted by HindiWater on Tue, 04/13/2021 - 16:16
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चरखा फीचर
थार की जैव विविधता को बचाने की जरूरत
उन्नति विकास शिक्षा संगठन द्वारा यूरोपीय संघ के सहयोग से एक वर्ष की समयावधि में पश्चिमी राजस्थान के चार जिलों क्रमशः नागौर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर के गांवों में शामलात शोध यात्रा के माध्यम से किए गये सहभागी शोध कार्य में सार्वजनिक संसाधनों का महत्व, उपयोगिता, वर्तमान स्थिति, क्षेत्रीय जैव विविधता का संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के लक्षण एवं प्रभाव पर भी प्रकाश डाला गया तथा समुदाय द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गयी। जानकारी से जो महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए वह भावी जीवन के लिए बेहद डरावने हैं। प्रकृति के मिजाज के साथ समन्वय और पोषण की भावना से संचालित जीवन तेजी से आधुनिकता के गिरफ्त में आ चुका है। बजुर्ग प्रकृति को पोषित करने वाली परंपराओं को औपचारिक तौर पर मानते हैं, लेकिन युवाओं को यह मात्र ढकोसला लगता है।

प्रदूषित गंगा का पानी सिंचाई लायक भी नही रहा

Submitted by HindiWater on Tue, 04/13/2021 - 15:50
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प्रदूषित गंगा का पानी सिंचाई लायक भी नही रहा
इस बाँध का निर्माण कोलकाता बंदरगाह को गाद यानी सिल्ट से मुक्त कराने के लिए किया गया था ग्रीष्म ऋतु में हुगली नदी के बहाव को निरन्तर बनाए रखने के लिए गंगा नदी के जल के एक बड़े हिस्से को फ़रक्का बाँध के द्वारा हुगली नदी में मोड़ दिया जाता है। गंगा पर निर्मित दूसरा प्रमुख टिहरी बाँध है टिहरी विकास परियोजना का एक प्राथमिक बाँध है जो उत्तराखण्ड प्रान्त के टिहरी जिले में स्थित है। यह बाँध गंगा नदी की प्रमुख सहयोगी नदी भागीरथी पर बनाया गया है। टिहरी बाँध की ऊँचाई 261 मीटर है जो इसे विश्व का पाँचवाँ सबसे ऊँचा बाँध बनाती है। इस बाँध से 2400  मेगावाट विद्युत उत्पादन, 270000 हेक्टर क्षेत्र की सिंचाई और प्रतिदिन 102.20 करोड़ लीटर पेयजल दिल्ली, उत्तर-प्रदेश एवम् उत्तराखण्ड को उपलब्ध कराना प्रस्तावित है। तीसरा प्रमुख भीमगोडा बाँध हरिद्वार में स्थित है जिसको सन् 1740 में अंग्रेज़ों ने गंगा नदी के पानी को विभाजित कर ऊपरी गंगा नहर में मोड़ने के लिए बनवाया था।

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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Source
चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
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Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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