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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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Submitted by HindiWater on Fri, 03/19/2021 - 15:19
Source:
द टेलीप्रिंटर
पलाश के फूलों से निर्मित हर्बल गुलाल
धार वन मंडल द्वारा होली के लिये विशेष तैयारियां शुरू  की गई है। प्राचीन काल मे जिस पलाश के फूलो से निर्मित हर्बल गुलाल रंग से होली खेली जाती थी उसी रंग को धार वन मंडल बना रहा है । ग्रीन इंडिया मिशन के अंतर्गत ग्राम वन समिति की महिलाएं अपनी आजीविका के साथ होली के रंग बनाने में जुटी हुई है
Submitted by HindiWater on Thu, 03/18/2021 - 16:00
Source:
दो दिवसीय जल संरक्षण,जल गुणवत्ता एवम् स्वास्थ्य स्वच्छता प्रशिक्षण
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवम् अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) और  गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवम् सतत् विकास संस्थान कोसी कटार मल अल्मोड़ा के सहयोग से 16 मार्च से दो दिवसीय  जल" संरक्षण, जल गुणवत्ता एवम् स्वास्थ्य स्वच्छता" विषय पर स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविदयालय में जंतु विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया । जिसमें 95 प्रतिभागियों विद्यार्थियों एवं ग्रामीण जनों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया । 
Submitted by HindiWater on Wed, 03/17/2021 - 12:44
Source:
बेतवा नदी घाटी के प्रारंभिक कछार के भूजल संसाधन
बेतवा नदी-तंत्र के प्रारंभिक हिस्सों का कुल रकबा 20600 वर्ग किलोमीटर है। यह रकबा मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित है। गंगा कछार का हिस्सा है। यह सम्पूर्ण इलाका चट्टानी है। उसके लगभग 13650 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बेसाल्ट, लगभग 3900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विन्ध्यन युग का बलुआपत्थर और लगभग 3050 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बुन्देलखंड ग्रेनाइट पाया जाता है। मौसम विभाग के सन 1926 से लेकर सन 1975 तक के आंकड़ों के अनुसार इलाके की औसत बरसात 1138 मिलीमीटर है। इस इलाके में हर छठवें साल सूखा पड़ता है। इन जानकारियों का विस्त्रत विवरण रिर्पोर्ट में दर्ज है।  

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

Latest

खासम-खास

सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
samajik-svikaryata-ki-kasauti-par-bandh
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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पलाश के फूलों से निर्मित हर्बल गुलाल

Submitted by HindiWater on Fri, 03/19/2021 - 15:19
palash-ke-fulon-se-nirmit-herbal-gulal
Source
द टेलीप्रिंटर
पलाश के फूलों से निर्मित हर्बल गुलाल
धार वन मंडल द्वारा होली के लिये विशेष तैयारियां शुरू  की गई है। प्राचीन काल मे जिस पलाश के फूलो से निर्मित हर्बल गुलाल रंग से होली खेली जाती थी उसी रंग को धार वन मंडल बना रहा है । ग्रीन इंडिया मिशन के अंतर्गत ग्राम वन समिति की महिलाएं अपनी आजीविका के साथ होली के रंग बनाने में जुटी हुई है

दो दिवसीय जल संरक्षण,जल गुणवत्ता एवम् स्वास्थ्य स्वच्छता प्रशिक्षण

Submitted by HindiWater on Thu, 03/18/2021 - 16:00
do-divasiya-jal-sanrakshan,jal-gunavatta-evam-swasthy-swachhata-prashikshan
दो दिवसीय जल संरक्षण,जल गुणवत्ता एवम् स्वास्थ्य स्वच्छता प्रशिक्षण
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवम् अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) और  गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवम् सतत् विकास संस्थान कोसी कटार मल अल्मोड़ा के सहयोग से 16 मार्च से दो दिवसीय  जल" संरक्षण, जल गुणवत्ता एवम् स्वास्थ्य स्वच्छता" विषय पर स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविदयालय में जंतु विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया । जिसमें 95 प्रतिभागियों विद्यार्थियों एवं ग्रामीण जनों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया । 

बेतवा नदी घाटी के प्रारंभिक कछार के भूजल संसाधन - कुछ विचारणीय बिन्दु

Submitted by HindiWater on Wed, 03/17/2021 - 12:44
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
betva-nadi-ghati-ke-prarambhik-kachhar-ke-bhoojal-sansadhan---kuchh-vicharaniya-bindu
बेतवा नदी घाटी के प्रारंभिक कछार के भूजल संसाधन
बेतवा नदी-तंत्र के प्रारंभिक हिस्सों का कुल रकबा 20600 वर्ग किलोमीटर है। यह रकबा मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित है। गंगा कछार का हिस्सा है। यह सम्पूर्ण इलाका चट्टानी है। उसके लगभग 13650 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बेसाल्ट, लगभग 3900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विन्ध्यन युग का बलुआपत्थर और लगभग 3050 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बुन्देलखंड ग्रेनाइट पाया जाता है। मौसम विभाग के सन 1926 से लेकर सन 1975 तक के आंकड़ों के अनुसार इलाके की औसत बरसात 1138 मिलीमीटर है। इस इलाके में हर छठवें साल सूखा पड़ता है। इन जानकारियों का विस्त्रत विवरण रिर्पोर्ट में दर्ज है।  

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
uttarakhand-jal-sankat-:-chhote-prayas-sey-bada-samadhan-nikalega
Source
चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
ekva-foundation-key-XIV-world-ekva-kangres
Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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