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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

Content

Submitted by Editorial Team on Mon, 04/04/2022 - 12:02
Source:
हस्तक्षेप, 28 Aug 2021, सहारा समय
बिहार बाढ़
बिहार के दर्जनभर जिले कमोबेश हर साल बाढ़ के पानी से तबाह रहते हैं। दूसरे राज्य भी बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं‚ या जूझते रहे हैं। तमाम सरकारें बाढ़ प्रबंधन की कोशिशें करती हैं। लाखों–करोड़ों रुपये खर्च करती हैं। मगर हालात में खास परिवर्तन नहीं दिखता। एक अनुमान के मुताबिक भारत का बाढ़ संभावित क्षेत्र 1952 में 250 लाख हेक्टेयर था‚ जो अब दोगुना होकर 500 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। बाढ़ जान–माल की क्षति के साथ–साथ प्रकृति को भी हानि पहुंचाती है। 
Submitted by Editorial Team on Sun, 04/03/2022 - 21:55
Source:
हस्तक्षेप, 28 Aug 2021, सहारा समय
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र,
नदियों की ऐसी हालत कर देने से जलचर समाप्त हो रहे हैं। मछुआरे भी गाद के बीच नदी को ढूंढने लगे हैं। वह भी ऐसी स्थिति कि जब नदियों की जल राशि भी कम हो रही है‚ और ऊपर से प्रदूषण की मार भी झेल रही है। दूसरी ओर भारी खनन से भी दफन हो सकती है नदी। इसलिए 2008 में नदी बचाओ अभियान के समय अतुल शर्मा द्वारा रचित पंक्ति को ध्यान में रखना चाहिए कि ‘अब नदियों पर संकट है‚ सारे गांव इकट्ठा हों।’
Submitted by Editorial Team on Sat, 04/02/2022 - 01:20
Source:
इंडिया साइंस वायर
रतीय तटरेखा परिवर्तन मानचित्र
पश्चिम बंगाल की 534 किलोमीटर तटरेखा के सबसे अधिक 60 प्रतिशत हिस्से में कटाव हो रहा है। वहीं, 139.64 किलोमीटर लंबी गोवा की तटरेखा का सबसे कम 19 प्रतिशत हिस्सा कटाव का सामना कर रहा है। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, जिसकी तटरेखा मात्र 41.66 किलोमीटर लंबी है, के 56 प्रतिशत हिस्से में कटाव हो रहा है। गुजरात की करीब 1946 किलोमीटर लंबी तटरेखा का 27 प्रतिशत हिस्सा, महाराष्ट्र की 739 किलोमीटर तटरेखा का

प्रयास

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
Source:
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।
Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
Source:
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे
Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
Source:
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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खासम-खास

केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण  : कुछ तथ्य, कुछ जानकारियां

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
kendriya-bhoomi-jal-pradhikaran-:-kuchh-tathy,-kuchh-jankariyan
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

Content

बिहार बाढ़ क्या है, और क्यों नहीं रुक रहा इसका कहर

Submitted by Editorial Team on Mon, 04/04/2022 - 12:02
Source
हस्तक्षेप, 28 Aug 2021, सहारा समय
बिहार बाढ़
बिहार के दर्जनभर जिले कमोबेश हर साल बाढ़ के पानी से तबाह रहते हैं। दूसरे राज्य भी बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं‚ या जूझते रहे हैं। तमाम सरकारें बाढ़ प्रबंधन की कोशिशें करती हैं। लाखों–करोड़ों रुपये खर्च करती हैं। मगर हालात में खास परिवर्तन नहीं दिखता। एक अनुमान के मुताबिक भारत का बाढ़ संभावित क्षेत्र 1952 में 250 लाख हेक्टेयर था‚ जो अब दोगुना होकर 500 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। बाढ़ जान–माल की क्षति के साथ–साथ प्रकृति को भी हानि पहुंचाती है। 

संदर्भ बाढ़ : हिमालय से ही जमा हो रही नदियों में गाद

Submitted by Editorial Team on Sun, 04/03/2022 - 21:55
Author
सुरेश भाई
Source
हस्तक्षेप, 28 Aug 2021, सहारा समय
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र,
नदियों की ऐसी हालत कर देने से जलचर समाप्त हो रहे हैं। मछुआरे भी गाद के बीच नदी को ढूंढने लगे हैं। वह भी ऐसी स्थिति कि जब नदियों की जल राशि भी कम हो रही है‚ और ऊपर से प्रदूषण की मार भी झेल रही है। दूसरी ओर भारी खनन से भी दफन हो सकती है नदी। इसलिए 2008 में नदी बचाओ अभियान के समय अतुल शर्मा द्वारा रचित पंक्ति को ध्यान में रखना चाहिए कि ‘अब नदियों पर संकट है‚ सारे गांव इकट्ठा हों।’

भारत की तटीय रेखा का एक तिहाई भाग अपरदन का शिकार

Submitted by Editorial Team on Sat, 04/02/2022 - 01:20
Source
इंडिया साइंस वायर
रतीय तटरेखा परिवर्तन मानचित्र
पश्चिम बंगाल की 534 किलोमीटर तटरेखा के सबसे अधिक 60 प्रतिशत हिस्से में कटाव हो रहा है। वहीं, 139.64 किलोमीटर लंबी गोवा की तटरेखा का सबसे कम 19 प्रतिशत हिस्सा कटाव का सामना कर रहा है। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, जिसकी तटरेखा मात्र 41.66 किलोमीटर लंबी है, के 56 प्रतिशत हिस्से में कटाव हो रहा है। गुजरात की करीब 1946 किलोमीटर लंबी तटरेखा का 27 प्रतिशत हिस्सा, महाराष्ट्र की 739 किलोमीटर तटरेखा का

प्रयास

उदयपुर के इस गांव को वेटलैंड घोषित किया जाना तय

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
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राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
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Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित

Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
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भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे

स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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