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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Fri, 06/11/2021 - 15:05
Source:
जल-जीवन मिशन: नगरीय अनुभवों से सीखें गांव
प्रचार वाक्य ’हर घर जल’ और जल जीवन मिशन द्वारा ग्राम पंचायतों और पानी समितियों को दिए मार्गदर्शी निर्देश - यदि इन दो आइनों को सामने रखें तो गर्व से कहना होगा कि संवैधानिक भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है कि जब किसी केन्द्रीय सरकार ने 73वें संविधान संशोधन की लोकतांत्रिक भावना के अनुरुप स्थानीय पेयजल प्रबंधन की योजना, क्रियान्वयन, कर्मचारी, निगरानी और संस्थागत् अधिकारों को वास्तव में उन गांवों को सौंप दिया है, जिन्हे पानी पीना है।  हर घर में नल, नल से जल - यदि इस लक्ष्य वाक्य को सामने रखें, तो कहना होगा कि यह गांवों के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण सौदा है; पानी प्रबंधन ही नहीं, जीवन शैली तक बदल देने की चुनौती पेश करने वाला सौदा। नूतन पथ
Submitted by Shivendra on Fri, 06/11/2021 - 14:42
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इंडिया साइंस वायर
कोटिंग के दौरान एमएओ रिएक्शन चैंबर
एल्युमीनियम मिश्रधातुओं को जंग लगने से बचाने के लिए अधिकतर हार्ड एनोडाइजिंग (एचए) प्रक्रिया अपनायी जाती है, जिसके अंतर्गत इस मिश्रधातु पर एक इलेक्ट्रोलाइट-आधारित कोटिंग की जाती है। इसमें सल्फ्यूरिक/ऑक्सेलिक आधारित इलेक्ट्रोलाइट्स का प्रयोग करना शामिल हैं, जो न केवल जहरीले धुएं का उत्सर्जन करते हैं, बल्कि प्रसंस्करण के दौरान उनको संभालना भी जोखिम भरा होता है। इसके साथ ही यह वायु को प्रदूषित भी करता है। यह तकनीक इन चुनौतियों से निजात दिला सकती है।  माइक्रो-आर्क ऑक्सीकरण (एमएओ) एक उच्च-वोल्टेज पर संचालित की जाने वाली एनोडिक-ऑक्सीकरण प्रक्रिया है, जो एक विद्युत रासायनिक विधि के माध्यम से धातु सब्सट्रेट पर ऑक्साइड फिल्म बनाती है। अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र (एआरसीआई) टीम ने शॉट पीनिंग के लिए एक डुप्लेक्स ट्रीटमेंट को डिजाइन व विकसित किया है,
Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 13:09
Source:
इंडिया साइंस वायर
हिमालयी क्षेत्र में ब्लैक कार्बन के आकलन में मददगार हो सकता है नया अध्ययन 
शोधकर्ताओं ने पाया है कि हिमालयी क्षेत्र में ब्लैक कार्बन का सटीक आकलन ऑप्टिकल उपकरणों के उपयोग से संभव हो सकता है। यह पद्धति हिमालयी क्षेत्र के लिए मास एब्जॉर्प्शन क्रॉस-सेक्शन (एमएसी) नामक विशिष्ट मानदंड पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने एमएसी, जो कि एक आवश्यक मानदंड है, और जिसका उपयोग ब्लैक कार्बन के द्रव्यमान सांद्रता को मापने के लिए किया जाता है, का मान निकाला है। उनका कहना है कि इससे संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान एवं जलवायु मॉडल के प्रदर्शन में भी सुधार हो सकता है। यह अध्ययन आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एरीज), जो कि भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत एक स्वायत्त संस्थान है, के वैज्ञानिकों ने दिल्ली विश्वविद्यालय, आईआईटी कानपुर और इसरो के वैज्ञानिकों के सहयोग से किया है। अध्ययन में, मध्य हिमालयी क्षेत्र में ब्लैक कार्बन और एलिमेंटल कार्बन का व्यापक निरीक्षण किया गया है, और मासिक एवं तरंगदैर्ध्य आधारित एमएसी के मान का आकलन किया गया है।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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जल-जीवन मिशन: नगरीय अनुभवों से सीखें गांव

Submitted by Shivendra on Fri, 06/11/2021 - 15:05
Author
अरुण तिवारी
jal-jeevan-mission:-nagriya-anubhavon-se-sikhen-ganv
जल-जीवन मिशन: नगरीय अनुभवों से सीखें गांव
प्रचार वाक्य ’हर घर जल’ और जल जीवन मिशन द्वारा ग्राम पंचायतों और पानी समितियों को दिए मार्गदर्शी निर्देश - यदि इन दो आइनों को सामने रखें तो गर्व से कहना होगा कि संवैधानिक भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है कि जब किसी केन्द्रीय सरकार ने 73वें संविधान संशोधन की लोकतांत्रिक भावना के अनुरुप स्थानीय पेयजल प्रबंधन की योजना, क्रियान्वयन, कर्मचारी, निगरानी और संस्थागत् अधिकारों को वास्तव में उन गांवों को सौंप दिया है, जिन्हे पानी पीना है।  हर घर में नल, नल से जल - यदि इस लक्ष्य वाक्य को सामने रखें, तो कहना होगा कि यह गांवों के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण सौदा है; पानी प्रबंधन ही नहीं, जीवन शैली तक बदल देने की चुनौती पेश करने वाला सौदा। नूतन पथ

एल्युमीनियम मिश्रधातुओं का क्षरण रोकने के लिए नई तकनीक

Submitted by Shivendra on Fri, 06/11/2021 - 14:42
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इंडिया साइंस वायर
कोटिंग के दौरान एमएओ रिएक्शन चैंबर
एल्युमीनियम मिश्रधातुओं को जंग लगने से बचाने के लिए अधिकतर हार्ड एनोडाइजिंग (एचए) प्रक्रिया अपनायी जाती है, जिसके अंतर्गत इस मिश्रधातु पर एक इलेक्ट्रोलाइट-आधारित कोटिंग की जाती है। इसमें सल्फ्यूरिक/ऑक्सेलिक आधारित इलेक्ट्रोलाइट्स का प्रयोग करना शामिल हैं, जो न केवल जहरीले धुएं का उत्सर्जन करते हैं, बल्कि प्रसंस्करण के दौरान उनको संभालना भी जोखिम भरा होता है। इसके साथ ही यह वायु को प्रदूषित भी करता है। यह तकनीक इन चुनौतियों से निजात दिला सकती है।  माइक्रो-आर्क ऑक्सीकरण (एमएओ) एक उच्च-वोल्टेज पर संचालित की जाने वाली एनोडिक-ऑक्सीकरण प्रक्रिया है, जो एक विद्युत रासायनिक विधि के माध्यम से धातु सब्सट्रेट पर ऑक्साइड फिल्म बनाती है। अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र (एआरसीआई) टीम ने शॉट पीनिंग के लिए एक डुप्लेक्स ट्रीटमेंट को डिजाइन व विकसित किया है,

हिमालयी क्षेत्र में ब्लैक कार्बन के आकलन में मददगार हो सकता है नया अध्ययन 

Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 13:09
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Source
इंडिया साइंस वायर
हिमालयी क्षेत्र में ब्लैक कार्बन के आकलन में मददगार हो सकता है नया अध्ययन 
शोधकर्ताओं ने पाया है कि हिमालयी क्षेत्र में ब्लैक कार्बन का सटीक आकलन ऑप्टिकल उपकरणों के उपयोग से संभव हो सकता है। यह पद्धति हिमालयी क्षेत्र के लिए मास एब्जॉर्प्शन क्रॉस-सेक्शन (एमएसी) नामक विशिष्ट मानदंड पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने एमएसी, जो कि एक आवश्यक मानदंड है, और जिसका उपयोग ब्लैक कार्बन के द्रव्यमान सांद्रता को मापने के लिए किया जाता है, का मान निकाला है। उनका कहना है कि इससे संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान एवं जलवायु मॉडल के प्रदर्शन में भी सुधार हो सकता है। यह अध्ययन आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एरीज), जो कि भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत एक स्वायत्त संस्थान है, के वैज्ञानिकों ने दिल्ली विश्वविद्यालय, आईआईटी कानपुर और इसरो के वैज्ञानिकों के सहयोग से किया है। अध्ययन में, मध्य हिमालयी क्षेत्र में ब्लैक कार्बन और एलिमेंटल कार्बन का व्यापक निरीक्षण किया गया है, और मासिक एवं तरंगदैर्ध्य आधारित एमएसी के मान का आकलन किया गया है।

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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Source
6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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