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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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Submitted by HindiWater on Wed, 02/03/2021 - 17:29
Source:
द टेलीप्रिंटर
नर्मदा का इतिहास छुपाए पहाड़
भारत मे एक जगह ऐसी भी है जिसे देखकर आप भी चौक जायेगें। वह दुनिया के अजूबे में तो नहीं लेकिन उससे कम भी नही है । बात मध्यप्रदेश के देवास जिले की है। जहाँ आज एक रहस्स भरे पहाड़ में कुछ अलग तरह के अद्भुत पत्थर है। जिनकी संख्या लाखों में है । विभिन्न आकर के इन पत्थरों से अलग अलग सुर निकलते। जो वाकई में शानदार है। पत्थरों से जुड़ी ऐसी ही कुछ अद्भुत जानकरी के लिये देखे पूरा वीडियो
Submitted by HindiWater on Fri, 01/29/2021 - 16:21
Source:
Hindi Water Portal
बिहार में तटबंध: बाढ़ रोकने में सफल या विफल
बिहार में बाढ़ एक सालाना प्राकृतिक घटना है। कुछ दशक से एक भी साल ऐसा नहीं गया होगा जब बिहार ने बाढ़ का सामना ना किया हो। 6 दशकों में बिहार को भारी  नुकसान झेलना पड़ा है।  सन् 1954 का भीषण बाढ़ जिसने उत्तर बिहार का 2.46 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन को बहा डाला और  करीब 7.61 मिलियन आबादी को नुकसान पहुंचाया।    फिर से, सन 1974 में नए और बड़े बाढ़ से राज्य को सामना करना पड़ा। जो की ना केवल उत्तरी भाग बल्कि दक्षिण भाग को भी चपेट में ले लिया। जिसने 16.39 मिलियन लोग प्रभावित हुए।  वर्ष 1987, बीस वे शताब्दी का सबसे भयानक बाढ़ जो पूरे राज्य को बहा ले गयी। और इसमें 1373 लोग मारे गए। वर्ष 2004 और 2007 मे भी बहुत ज़्यादा बाढ़ आपदा हुई। अगस्त 2008, कोसी नदी के भयनक बाढ़ ने राज्य को हिल्ला के रख दिए था। वो बाढ़ जिसने पूरा आधा राज्य ग्रसित हुआ और बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा बाढ़ प्रलय माना जाता है।जो नेपाल मे किये गए तटबंध के टूटने के कारण हुआ
Submitted by HindiWater on Mon, 01/25/2021 - 17:00
Source:
इंडिया वाटर पोर्टल
2020: आपदाओं में घिरा,फिर भी उम्मीद से भरा
साल 2020  कई आपदाओं के साथ आया,ना केवल कोविड ,एक ऐसी महामारी जिसने हमारे ग्रह को ही थाम दिया बल्कि और कई  अन्य प्राकृतिक आपदाएं भी आई।इस वर्ष देश चक्रवात,अत्यधिक वर्षा बाढ़ और टिड्डियों के हमलों से भी जूझा। भारत के कई तट भी इन पांच चक्रवात  अम्फान, निसर्ग, गति, निवार और बूरवी से खासे प्रभावित हुए।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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खासम-खास

बावडी: कुछ अनछुए पहलू

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
bavdi:-kuch-anachue-pahloo
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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नर्मदा का इतिहास छुपाए पहाड़

Submitted by HindiWater on Wed, 02/03/2021 - 17:29
narmada-ka-itihas-chhupaye-pahad
Source
द टेलीप्रिंटर
नर्मदा का इतिहास छुपाए पहाड़
भारत मे एक जगह ऐसी भी है जिसे देखकर आप भी चौक जायेगें। वह दुनिया के अजूबे में तो नहीं लेकिन उससे कम भी नही है । बात मध्यप्रदेश के देवास जिले की है। जहाँ आज एक रहस्स भरे पहाड़ में कुछ अलग तरह के अद्भुत पत्थर है। जिनकी संख्या लाखों में है । विभिन्न आकर के इन पत्थरों से अलग अलग सुर निकलते। जो वाकई में शानदार है। पत्थरों से जुड़ी ऐसी ही कुछ अद्भुत जानकरी के लिये देखे पूरा वीडियो

बिहार में तटबंध: बाढ़ रोकने में सफल या विफल

Submitted by HindiWater on Fri, 01/29/2021 - 16:21
bihar-men-tatbandh:-badh-rokne-men-safal-ya-vifal
Source
Hindi Water Portal
बिहार में तटबंध: बाढ़ रोकने में सफल या विफल
बिहार में बाढ़ एक सालाना प्राकृतिक घटना है। कुछ दशक से एक भी साल ऐसा नहीं गया होगा जब बिहार ने बाढ़ का सामना ना किया हो। 6 दशकों में बिहार को भारी  नुकसान झेलना पड़ा है।  सन् 1954 का भीषण बाढ़ जिसने उत्तर बिहार का 2.46 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन को बहा डाला और  करीब 7.61 मिलियन आबादी को नुकसान पहुंचाया।    फिर से, सन 1974 में नए और बड़े बाढ़ से राज्य को सामना करना पड़ा। जो की ना केवल उत्तरी भाग बल्कि दक्षिण भाग को भी चपेट में ले लिया। जिसने 16.39 मिलियन लोग प्रभावित हुए।  वर्ष 1987, बीस वे शताब्दी का सबसे भयानक बाढ़ जो पूरे राज्य को बहा ले गयी। और इसमें 1373 लोग मारे गए। वर्ष 2004 और 2007 मे भी बहुत ज़्यादा बाढ़ आपदा हुई। अगस्त 2008, कोसी नदी के भयनक बाढ़ ने राज्य को हिल्ला के रख दिए था। वो बाढ़ जिसने पूरा आधा राज्य ग्रसित हुआ और बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा बाढ़ प्रलय माना जाता है।जो नेपाल मे किये गए तटबंध के टूटने के कारण हुआ

2020: आपदाओं में घिरा,फिर भी उम्मीद से भरा

Submitted by HindiWater on Mon, 01/25/2021 - 17:00
2020:-apadaon-men-dhira,fir-bhi-ummid-sey-bhare
Source
इंडिया वाटर पोर्टल
2020: आपदाओं में घिरा,फिर भी उम्मीद से भरा
साल 2020  कई आपदाओं के साथ आया,ना केवल कोविड ,एक ऐसी महामारी जिसने हमारे ग्रह को ही थाम दिया बल्कि और कई  अन्य प्राकृतिक आपदाएं भी आई।इस वर्ष देश चक्रवात,अत्यधिक वर्षा बाढ़ और टिड्डियों के हमलों से भी जूझा। भारत के कई तट भी इन पांच चक्रवात  अम्फान, निसर्ग, गति, निवार और बूरवी से खासे प्रभावित हुए।

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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Source
चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
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Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
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Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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