नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

चकराता में सूखे की कगार पर पहुंचे 15 जलस्त्रोतों पर किया अध्ययन

Submitted by HindiWater on Mon, 07/15/2019 - 12:18
Source
दैनिक जागरण, 15 जुलाई 2019
बरसाती हैं हिमालयी स्त्रोत, बूंदे सहेजने की जरूरत।बरसाती हैं हिमालयी स्त्रोत, बूंदे सहेजने की जरूरत। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने हिमालयी जलस़्त्रोतों के स्त्रोत पता करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। उत्तराखंड के चकराता जोन के सूखे की कगार पर पहुंच चुके सात गांवो के 15 जलस्त्रोतों पर किये गए अध्ययन मे पता चला है कि इनमें पानी का एकमात्र स्त्रोत बारिश है। इस नतीजे तक पहंचने के लिए वैज्ञानिकों ने जलस्त्रोतों के पानी के आइसोटोप को अध्ययन किया। इसे वैज्ञानिक हिमालय के समूचे जलस्त्रोतों के संरक्षण की नजर से भी देख रहे हैं।  

नहीं लिया सबक, तो बूंद-बूंद को मोहताज होगा भारत

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 17:21
नहीं लिया सबक, तो बूंद-बूंद को मोहताज होगा भारत।नहीं लिया सबक, तो बूंद-बूंद को मोहताज होगा भारत। जगह-जगह ताल, तलैया, पोखर, झील, जल, स्त्रोत और नदियां आदि भारत की धरती को सिंचित करने का कार्य ही नहीं करते थे, बल्कि स्वच्छ जल उपलब्ध कराकर हर जीव-जन्तु और इंसान की प्यास भी बुझाते थे। धरती के ऊपरी सतह के पानी को सिंचाई सहित पीने के उपयोग में लाया जाता था। तब पानी की कमी या प्रदूषण के कारण किसी की मृत्यु नहीं होती थी। शुद्ध व स्वच्छ जल की बहुतायात उपलब्धता के कारण भारत को पानीदार देश भी कहा जाता था। यही कारण है कि आजाद भारत में वर्ष 1951 में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्ध्ता 5177 घनमीटर थी, लेकिन

तालाबों में जल सहेज कर करें साल भर खेती 

Submitted by UrbanWater on Sat, 07/13/2019 - 13:42
Source
नई दुनिया, इंदौर, 12 जुलाई 2019 
खेत-तालाब किसानों के लिए संकटमोचक सिद्ध हो सकते हैं।खेत-तालाब किसानों के लिए संकटमोचक सिद्ध हो सकते हैं। अभी पिछले कुछ वर्षों में बारिश की बारिश की तीव्रता और बारिश का पैटर्न आसामान्य हो गया है। बारिश के दिन और अंतराल भी कम या अधिक होते जा रहे हैं। इस कारण भूजल रिचार्ज, नदियों के बहाव और जलाशयों में जल उपलब्धता में बहुत तेजी से बदलाव आया है और पानी के इन स्रोतों की विश्वसनीयता खतरे में आ चुकी है। इनकी निर्भरता पर भी प्रश्न चिन्ह लग चुका है। अब ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में धरती और बारिश के पानी के पहले संपर्क बिंदु अर्थात खेत से ही बारिश के इस पानी के प्रबंधन की शुरुआत करनी होगी। जो पानी आपके खेत में वर्षा के रूप में गिरता है। उसका लगभग 0.2 हिस्सा अर्थात 20 प्रतिशत बहाव के रूप में बहकर निकलता है।

प्रयास

इंजेक्शन पद्धति से सूख चुके हैंडपंपों को किया जा रहा रिचार्ज

Submitted by UrbanWater on Fri, 07/19/2019 - 12:53
Source
दैनिक जागरण, 19 जुलाई 2019
देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है।देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। भूजल स्तर घटने के कारण सूख चुके हैंडपंपों से एक बूंद पानी नहीं निकलता। देशभर में ऐसे सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। लेकिन आपसे यदि कहा जाए कि यही हैंडपंप धरती को लाखों लीटर पानी लौटा सकते हैं, तो सुनकर अचंभा होगा। श्योपुर, मध्यप्रदेश के आदिवासी विकास खंड कराहल के चार गांवों में ऐसा होते हुए देखा जा सकता है। इन चारों गांवों के 11 सूखे हैंडपंप और दो कुएं जमीन के अंदर बारिश और गांव से उपयोग के बाद निकलने वाले दूषित पानी को फिल्टर करके जमीन के अंदर पहुंचा रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि क्षेत्र का भूजल स्तर लौट आया। गांव में जो हैंडपंप और कुएं सूखे पड़े थे, उन्होंने पानी देना शुरू कर दिया।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

Latest

खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

चकराता में सूखे की कगार पर पहुंचे 15 जलस्त्रोतों पर किया अध्ययन

Submitted by HindiWater on Mon, 07/15/2019 - 12:18
Source
दैनिक जागरण, 15 जुलाई 2019
बरसाती हैं हिमालयी स्त्रोत, बूंदे सहेजने की जरूरत।बरसाती हैं हिमालयी स्त्रोत, बूंदे सहेजने की जरूरत। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने हिमालयी जलस़्त्रोतों के स्त्रोत पता करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। उत्तराखंड के चकराता जोन के सूखे की कगार पर पहुंच चुके सात गांवो के 15 जलस्त्रोतों पर किये गए अध्ययन मे पता चला है कि इनमें पानी का एकमात्र स्त्रोत बारिश है। इस नतीजे तक पहंचने के लिए वैज्ञानिकों ने जलस्त्रोतों के पानी के आइसोटोप को अध्ययन किया। इसे वैज्ञानिक हिमालय के समूचे जलस्त्रोतों के संरक्षण की नजर से भी देख रहे हैं।  

नहीं लिया सबक, तो बूंद-बूंद को मोहताज होगा भारत

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 17:21
नहीं लिया सबक, तो बूंद-बूंद को मोहताज होगा भारत।नहीं लिया सबक, तो बूंद-बूंद को मोहताज होगा भारत। जगह-जगह ताल, तलैया, पोखर, झील, जल, स्त्रोत और नदियां आदि भारत की धरती को सिंचित करने का कार्य ही नहीं करते थे, बल्कि स्वच्छ जल उपलब्ध कराकर हर जीव-जन्तु और इंसान की प्यास भी बुझाते थे। धरती के ऊपरी सतह के पानी को सिंचाई सहित पीने के उपयोग में लाया जाता था। तब पानी की कमी या प्रदूषण के कारण किसी की मृत्यु नहीं होती थी। शुद्ध व स्वच्छ जल की बहुतायात उपलब्धता के कारण भारत को पानीदार देश भी कहा जाता था। यही कारण है कि आजाद भारत में वर्ष 1951 में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्ध्ता 5177 घनमीटर थी, लेकिन

तालाबों में जल सहेज कर करें साल भर खेती 

Submitted by UrbanWater on Sat, 07/13/2019 - 13:42
Source
नई दुनिया, इंदौर, 12 जुलाई 2019 
खेत-तालाब किसानों के लिए संकटमोचक सिद्ध हो सकते हैं।खेत-तालाब किसानों के लिए संकटमोचक सिद्ध हो सकते हैं। अभी पिछले कुछ वर्षों में बारिश की बारिश की तीव्रता और बारिश का पैटर्न आसामान्य हो गया है। बारिश के दिन और अंतराल भी कम या अधिक होते जा रहे हैं। इस कारण भूजल रिचार्ज, नदियों के बहाव और जलाशयों में जल उपलब्धता में बहुत तेजी से बदलाव आया है और पानी के इन स्रोतों की विश्वसनीयता खतरे में आ चुकी है। इनकी निर्भरता पर भी प्रश्न चिन्ह लग चुका है। अब ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में धरती और बारिश के पानी के पहले संपर्क बिंदु अर्थात खेत से ही बारिश के इस पानी के प्रबंधन की शुरुआत करनी होगी। जो पानी आपके खेत में वर्षा के रूप में गिरता है। उसका लगभग 0.2 हिस्सा अर्थात 20 प्रतिशत बहाव के रूप में बहकर निकलता है।

प्रयास

इंजेक्शन पद्धति से सूख चुके हैंडपंपों को किया जा रहा रिचार्ज

Submitted by UrbanWater on Fri, 07/19/2019 - 12:53
Source
दैनिक जागरण, 19 जुलाई 2019
देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है।देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। भूजल स्तर घटने के कारण सूख चुके हैंडपंपों से एक बूंद पानी नहीं निकलता। देशभर में ऐसे सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। लेकिन आपसे यदि कहा जाए कि यही हैंडपंप धरती को लाखों लीटर पानी लौटा सकते हैं, तो सुनकर अचंभा होगा। श्योपुर, मध्यप्रदेश के आदिवासी विकास खंड कराहल के चार गांवों में ऐसा होते हुए देखा जा सकता है। इन चारों गांवों के 11 सूखे हैंडपंप और दो कुएं जमीन के अंदर बारिश और गांव से उपयोग के बाद निकलने वाले दूषित पानी को फिल्टर करके जमीन के अंदर पहुंचा रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि क्षेत्र का भूजल स्तर लौट आया। गांव में जो हैंडपंप और कुएं सूखे पड़े थे, उन्होंने पानी देना शुरू कर दिया।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

Upcoming Event

Popular Articles