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खासम-खास

नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

Content

कृषि क्षेत्र पर सिंचाई की मार और भारत में भुखमरी

Submitted by editorial on Sat, 12/08/2018 - 13:23
Author
राकेश रंजन
कृषि क्षेत्र पर सिंचाई की मारकृषि क्षेत्र पर सिंचाई की मारपाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ ही खाद्यान्न उत्पादन में विश्व में दूसरे पायदान पर आने वाले भारत के लिये अपनी जनसंख्या का पेट भरना आज भी एक बड़ी चुनौती है। हाल ही में 119 देशों के लिये जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2018 (Global Hunger Index) में भारत 103 नम्बर पर रहा। इस मामले में भारत अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश से भी पीछे है।

नॉर्वे से सीखिए वनों का संरक्षण

Submitted by editorial on Fri, 11/16/2018 - 16:24
Author
उमेश कुमार राय
नॉर्वेनॉर्वे (फोटो साभार - रिसर्च गेट)यूरोप में 3 लाख 85 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ एक देश है। नाम है नॉर्वे। एक सौ साल पहले इस देश का भूगोल कुछ अलग था। यहाँ के पेड़-पौधे धीरे-धीरे खत्म हो रहे थे। लोग अपनी जरूरतों मसलन जलावन आदि के लिये वनों की बेतहाशा कटाई कर रहे थे। एक समय तो ऐसा भी आ गया था कि लग रहा था, यहाँ की जमीन पर एक भी पेड़ नहीं बचेगा। नॉर्वे अपने अस्तित्व बचाने के संकट से जूझने लगा था।

सीवेज का पानी और कोलार की प्यासी धरती

Submitted by editorial on Tue, 11/06/2018 - 15:18
Source
द हिन्दू, 13 अक्टूबर 2018
लक्ष्मीसागर झील में लगा ट्रीटमेंट प्लांटलक्ष्मीसागर झील में लगा ट्रीटमेंट प्लांट (फोटो साभार - द हिन्दू)इसी वर्ष जून में कोलार के किसानों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब के. सी. वैली प्रोजेक्ट द्वारा बंगलुरु शहर के गन्दे नालों के पानी को साफ कर उसकी आपूर्ति की जाने लगी। लेकिन इस खुशी की मियाद बड़ी छोटी रही। हुआ यूँ कि एक महीने बाद ही पाइप लाइन में गड़बड़ी आ गई और उससे गन्दे पानी का रिसाव होने लगा। स्थिति और भी भयावह तब हो गई जब पाइप लाइन से निकलने वाले अपशिष्ट ने झीलों के साथ ही भूजल को भी दूषित कर दिया।

प्रयास

प्लास्टिक की खाली बोतल के बदले एक रुपया इनाम

Submitted by UrbanWater on Tue, 05/21/2019 - 18:06
Source
हिंदुस्तान, गढ़वाल 21 मई 2019
 टिहरी झील क्षेत्र में प्लास्टिक मुक्त अभियान की शुरुआत करती बोट यूनियन टिहरी झील क्षेत्र में प्लास्टिक मुक्त अभियान की शुरुआत करती बोट यूनियन टिहरी झील में तैरती प्लास्टिक की खाली बोलत लाने पर बोट यूनियन बोट ऑपरेटरों को भी प्रति बोतल एक रुपये का भुगतान करेगी। बोट यूनियन की इस अनूठी मुहिम से टिहरी झील में प्लास्टिक कचरे पर लगाम लगने की उम्मीद है। टिहरी झील व इसके आस-पास बढ़ते प्लास्टिक कचरे की रोकथाम के लिए

नोटिस बोर्ड

गंगा की जय, सरकार झुकी, मातृसदन के आत्मबोधानंद का अनशन विराम

Submitted by UrbanWater on Sat, 05/04/2019 - 17:50

गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम  गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम

गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 194 दिनों से अनशन कर रहे हरिद्वार के मातृ सदन के आत्माबोधानंद ने नेशनल क्लीन मिशन फाॅर गंगा के निदेशक के लिखित आश्वासन के बाद अपने अनशन को विराम दे दिया है। हालांकि मातृ सदन ने ये भी कहा है कि लिखित आश्वासन के अनुरूप अगर काम नहीं हुआ तो मातृ सदन गंगा की अविरलता के लिए फिर से अनशन पर बैठेगा।

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
Source
फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

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नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

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कृषि क्षेत्र पर सिंचाई की मार और भारत में भुखमरी

Submitted by editorial on Sat, 12/08/2018 - 13:23
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राकेश रंजन
कृषि क्षेत्र पर सिंचाई की मारकृषि क्षेत्र पर सिंचाई की मारपाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ ही खाद्यान्न उत्पादन में विश्व में दूसरे पायदान पर आने वाले भारत के लिये अपनी जनसंख्या का पेट भरना आज भी एक बड़ी चुनौती है। हाल ही में 119 देशों के लिये जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2018 (Global Hunger Index) में भारत 103 नम्बर पर रहा। इस मामले में भारत अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश से भी पीछे है।

नॉर्वे से सीखिए वनों का संरक्षण

Submitted by editorial on Fri, 11/16/2018 - 16:24
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उमेश कुमार राय
नॉर्वेनॉर्वे (फोटो साभार - रिसर्च गेट)यूरोप में 3 लाख 85 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ एक देश है। नाम है नॉर्वे। एक सौ साल पहले इस देश का भूगोल कुछ अलग था। यहाँ के पेड़-पौधे धीरे-धीरे खत्म हो रहे थे। लोग अपनी जरूरतों मसलन जलावन आदि के लिये वनों की बेतहाशा कटाई कर रहे थे। एक समय तो ऐसा भी आ गया था कि लग रहा था, यहाँ की जमीन पर एक भी पेड़ नहीं बचेगा। नॉर्वे अपने अस्तित्व बचाने के संकट से जूझने लगा था।

सीवेज का पानी और कोलार की प्यासी धरती

Submitted by editorial on Tue, 11/06/2018 - 15:18
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द हिन्दू, 13 अक्टूबर 2018
लक्ष्मीसागर झील में लगा ट्रीटमेंट प्लांटलक्ष्मीसागर झील में लगा ट्रीटमेंट प्लांट (फोटो साभार - द हिन्दू)इसी वर्ष जून में कोलार के किसानों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब के. सी. वैली प्रोजेक्ट द्वारा बंगलुरु शहर के गन्दे नालों के पानी को साफ कर उसकी आपूर्ति की जाने लगी। लेकिन इस खुशी की मियाद बड़ी छोटी रही। हुआ यूँ कि एक महीने बाद ही पाइप लाइन में गड़बड़ी आ गई और उससे गन्दे पानी का रिसाव होने लगा। स्थिति और भी भयावह तब हो गई जब पाइप लाइन से निकलने वाले अपशिष्ट ने झीलों के साथ ही भूजल को भी दूषित कर दिया।

प्रयास

प्लास्टिक की खाली बोतल के बदले एक रुपया इनाम

Submitted by UrbanWater on Tue, 05/21/2019 - 18:06
Source
हिंदुस्तान, गढ़वाल 21 मई 2019
 टिहरी झील क्षेत्र में प्लास्टिक मुक्त अभियान की शुरुआत करती बोट यूनियन टिहरी झील क्षेत्र में प्लास्टिक मुक्त अभियान की शुरुआत करती बोट यूनियन टिहरी झील में तैरती प्लास्टिक की खाली बोलत लाने पर बोट यूनियन बोट ऑपरेटरों को भी प्रति बोतल एक रुपये का भुगतान करेगी। बोट यूनियन की इस अनूठी मुहिम से टिहरी झील में प्लास्टिक कचरे पर लगाम लगने की उम्मीद है। टिहरी झील व इसके आस-पास बढ़ते प्लास्टिक कचरे की रोकथाम के लिए

नोटिस बोर्ड

गंगा की जय, सरकार झुकी, मातृसदन के आत्मबोधानंद का अनशन विराम

Submitted by UrbanWater on Sat, 05/04/2019 - 17:50

गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम  गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम

गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 194 दिनों से अनशन कर रहे हरिद्वार के मातृ सदन के आत्माबोधानंद ने नेशनल क्लीन मिशन फाॅर गंगा के निदेशक के लिखित आश्वासन के बाद अपने अनशन को विराम दे दिया है। हालांकि मातृ सदन ने ये भी कहा है कि लिखित आश्वासन के अनुरूप अगर काम नहीं हुआ तो मातृ सदन गंगा की अविरलता के लिए फिर से अनशन पर बैठेगा।

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
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माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
Source
फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

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