नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

Content

Submitted by HindiWater on Fri, 08/28/2020 - 17:32
Source:
India Water Portal
ग्राउंड वाटर लेवल को नापते हुए भूजल जानकार 
साल 2012 में  Managing Aquifer Recharge and Sustaining Groundwater Use through Village level Intervention (MARVI)  की शुरुआत हुई, इसका उद्द्येश्य भारत के ग्रामीण समुदाय के लिए सिचाई के पानी की आपूर्ति सुधारना और उनकी आजीविका के अवसरों को बढ़ाना है।
Submitted by HindiWater on Fri, 08/28/2020 - 09:08
Source:
India Water Portal
भारत के जलमार्गों में एंटीबायोटिक निपटान के प्रभाव का अध्ययन
भारत में हर साल औसतन 58 हजार शिशुओं की मौत सुपरबग संक्रमण के कारण होती है, जो उनकी माताओं से उनके शरीर में प्रवेश करता है। यूरोपीय संघ में हर साल दवा प्रतिरोधी रोगजनकों के कारण 28 हजार से 38 हजार तक अतिरिक्त मौतें होती हैं।
Submitted by HindiWater on Thu, 08/27/2020 - 11:43
Source:
दुर्मीताल
उत्तराखंड के चमोली जिले में लगभग 100 साल पहले सन 1890 के आसपास एक झील बनी थी, यह झील करीब 5 किलोमीटर हुआ करती थी उस समय यहां काफी पर्यटक आया करते थे।  बताया यह जाता है कि उस समय किए एशिया की सबसे बड़ी जिलों में से एक मानी जाती थी । लेकिन साल 1971 में इस इलाके में बादल फटने की वजह से आई बाढ़ और मलबे की वजह से यह झील पूरी तरह से नष्ट हो गई । हाल ही में यहां के स्थानीय लोगों ने एक बार फिर से झील का पुनर्निर्माण करने के उद्देश्य से खुदाई का कार्य शुरू किया, करीब 5 फीट की खुदाई के दौरान यहां पर एक पुरानी नाव मिली है

प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 12/25/2020 - 10:11
सूखे बुंदेलखंड़ में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  
जखनी गांववासियों की मेहनत का ही नतीजा है कि 2012 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने जिले के 470 गांवों में जखनी माॅडल को अपनाने का आदेश दे दिया। साथ ही नीति आयोग ने जखनी को देश का पहला ‘जल-ग्राम’ घोषित किया है। इसके अलावा जखनी गांव को माॅडल बना देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 
Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
Source:
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

Latest

खासम-खास

बावडी: कुछ अनछुए पहलू

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
bavdi:-kuch-anachue-pahloo
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

Content

गाँव स्तर पर सहभागिता भूजल निगरानी कार्यक्रम

Submitted by HindiWater on Fri, 08/28/2020 - 17:32
ganv-star-par-apasi-bhagidari-sey-ek-bhujal-nigrani-karyakram-vikasit-kia-jaa-raha-hai
Source
India Water Portal
ग्राउंड वाटर लेवल को नापते हुए भूजल जानकार 
साल 2012 में  Managing Aquifer Recharge and Sustaining Groundwater Use through Village level Intervention (MARVI)  की शुरुआत हुई, इसका उद्द्येश्य भारत के ग्रामीण समुदाय के लिए सिचाई के पानी की आपूर्ति सुधारना और उनकी आजीविका के अवसरों को बढ़ाना है।

भारत के जलमार्गों में एंटीबायोटिक निपटान के प्रभाव का अध्ययन

Submitted by HindiWater on Fri, 08/28/2020 - 09:08
bharat-ke-jalmargon-mein-antibiotic-niptan-ke-prabhav-ka-adhyayan
Source
India Water Portal
भारत के जलमार्गों में एंटीबायोटिक निपटान के प्रभाव का अध्ययन
भारत में हर साल औसतन 58 हजार शिशुओं की मौत सुपरबग संक्रमण के कारण होती है, जो उनकी माताओं से उनके शरीर में प्रवेश करता है। यूरोपीय संघ में हर साल दवा प्रतिरोधी रोगजनकों के कारण 28 हजार से 38 हजार तक अतिरिक्त मौतें होती हैं।

चमोली : इतिहास को जिन्दा करने की कवायद 

Submitted by HindiWater on Thu, 08/27/2020 - 11:43
chamoli-:-itihas-ko-jinda-karane-key-kavayad
दुर्मीताल
उत्तराखंड के चमोली जिले में लगभग 100 साल पहले सन 1890 के आसपास एक झील बनी थी, यह झील करीब 5 किलोमीटर हुआ करती थी उस समय यहां काफी पर्यटक आया करते थे।  बताया यह जाता है कि उस समय किए एशिया की सबसे बड़ी जिलों में से एक मानी जाती थी । लेकिन साल 1971 में इस इलाके में बादल फटने की वजह से आई बाढ़ और मलबे की वजह से यह झील पूरी तरह से नष्ट हो गई । हाल ही में यहां के स्थानीय लोगों ने एक बार फिर से झील का पुनर्निर्माण करने के उद्देश्य से खुदाई का कार्य शुरू किया, करीब 5 फीट की खुदाई के दौरान यहां पर एक पुरानी नाव मिली है

प्रयास

सूखे बुंदेलखंड में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  

Submitted by HindiWater on Fri, 12/25/2020 - 10:11
bundelkhand-ka-jalgram-jakhni-village
सूखे बुंदेलखंड़ में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  
जखनी गांववासियों की मेहनत का ही नतीजा है कि 2012 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने जिले के 470 गांवों में जखनी माॅडल को अपनाने का आदेश दे दिया। साथ ही नीति आयोग ने जखनी को देश का पहला ‘जल-ग्राम’ घोषित किया है। इसके अलावा जखनी गांव को माॅडल बना देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है।

नोटिस बोर्ड

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
hindi-patrakaron-ke-liye-cse-aaeti-online-training-course
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
ekva-foundation-key-XIV-world-ekva-kangres
Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

भविष्य में किस तरह पानी को किया जा सकता है सुरक्षित 

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
bhavishya-mein-kiss-tarah-pani-ko-kia-jaa-sakata-hai-surakshit
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

Upcoming Event

Popular Articles