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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Thu, 04/29/2021 - 16:06
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कैसे आता है एवलांच
हिमालय में एवलांच काफी आते है लेकिन इन्हें तब भयावहक कहा जाता है। जब इनसे काफी जान-माल का नुकसान होता है। हर साल एक न एक एवलांच से कई सैनिक और स्थानीय लोग अपनी जान गवा देते हैं। 1984 से लेकर अब तक  भारत के 1000 से अधिक जवान शहीद हो चुके है। अभी हालही में उत्तराखंड के चमोली जिले में आये एवलांच में बीआरओ के 35 से  अधिक कर्मचारी लापता हो गए है जिनमें से 16 लोगों के शव मिले है 
Submitted by Shivendra on Wed, 04/28/2021 - 17:05
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मंडी रेट्स
जल संरक्षण को लेकर बढ़ रही है जागरूकता
50 साल की कमला भंडारी  किसान है। प्राकृतिक स्रोतों के सूखने के कारण पिछले कुछ सालों से उनको अपनी फसलों के लिये पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था। जिसके कारण उनकी खेती प्रभावित हो रही थी। इसके बाद कमला ने प्राकृतिक जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने के साथ बारिश के पानी को भी संरक्षित करना शुरू कर दिया। कमला ने  उन सभी जल स्त्रोतों  के आस पास पौधे रोपण किया  जिनसे उनके खेतों तक पानी पहुँचता था। और  बारिश के पानी को संरक्षित करने  के लिये पहाड़ो में बड़े बड़े  गड्ढे  किये। आखिरकार 5 साल बाद उनकी मेहनत रंग लाई और प्राकृतिक जल स्त्रोत जो सूख गए थे वह पुनर्जीवित हो गए।
Submitted by Shivendra on Wed, 04/28/2021 - 11:10
Source:
मंडी रेट्स
खेत में हाजिरी ही किसान की आमदनी को कर सकती है दोगुनी , तिगुनी और चौगुनी : किसान कपिल भाटिया
हिसार चंडीगढ़ रोड पर सूरेवाला मोड़ के नज़दीक वाकिंग डिस्टेंस पर बोर्ड दिखाई दे जाता है वी.डी. फ़ार्म फ्रेश और वी.डी. ओर्गानिक्स और यहाँ आपको मिल जायेंगे किसान कपिल भाटिया जी, जो कहते हैं कि मैं अपना फ़ार्म कभी भी छोड़ कर जब तक बहुत ही ज्यादा जरूरी ना हो कहीं नही जाता हूँ | मेरी दादी जी का नाम श्रीमती बिशन देवी था और मेरा उनसे बड़ा लगाव था मैंने 37 वर्ष की उम्र में जब खेती करनी शुरू की तो मैंने अपनी दादी जी के नाम से फ़ार्म का नाम रखा | मैंने अपने गाँव प्रभुवाला में खेती की शुरुआत करने से पहले प्राइवेट नौकरियां, अपना बिजनेस आदि सबकुछ करके देखा लेकिन मुझे कभी सुकून नही मिला फिर जीवन में एक ऐसा मोड़ आया कि मैंने बैठ कर सोचा तो महसूस किया कि नौकरी और बिजनेस से मैंने प्रबंधन के जो गुर सीखे हैं उन्हें यदि में अपने खेत में लागू कर दूं तो कुछ चमत्कार किया जा सकता है 

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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कैसे आता है एवलांच

Submitted by Shivendra on Thu, 04/29/2021 - 16:06
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कैसे आता है एवलांच
हिमालय में एवलांच काफी आते है लेकिन इन्हें तब भयावहक कहा जाता है। जब इनसे काफी जान-माल का नुकसान होता है। हर साल एक न एक एवलांच से कई सैनिक और स्थानीय लोग अपनी जान गवा देते हैं। 1984 से लेकर अब तक  भारत के 1000 से अधिक जवान शहीद हो चुके है। अभी हालही में उत्तराखंड के चमोली जिले में आये एवलांच में बीआरओ के 35 से  अधिक कर्मचारी लापता हो गए है जिनमें से 16 लोगों के शव मिले है 

जल संरक्षण को लेकर बढ़ रही है जागरूकता

Submitted by Shivendra on Wed, 04/28/2021 - 17:05
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मंडी रेट्स
 जल संरक्षण को लेकर बढ़ रही है जागरूकता
50 साल की कमला भंडारी  किसान है। प्राकृतिक स्रोतों के सूखने के कारण पिछले कुछ सालों से उनको अपनी फसलों के लिये पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था। जिसके कारण उनकी खेती प्रभावित हो रही थी। इसके बाद कमला ने प्राकृतिक जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने के साथ बारिश के पानी को भी संरक्षित करना शुरू कर दिया। कमला ने  उन सभी जल स्त्रोतों  के आस पास पौधे रोपण किया  जिनसे उनके खेतों तक पानी पहुँचता था। और  बारिश के पानी को संरक्षित करने  के लिये पहाड़ो में बड़े बड़े  गड्ढे  किये। आखिरकार 5 साल बाद उनकी मेहनत रंग लाई और प्राकृतिक जल स्त्रोत जो सूख गए थे वह पुनर्जीवित हो गए।

खेत में हाजिरी ही किसान की आमदनी को कर सकती है दोगुनी,तिगुनी और चौगुनी : किसान कपिल भाटिया

Submitted by Shivendra on Wed, 04/28/2021 - 11:10
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मंडी रेट्स
खेत में हाजिरी ही किसान की आमदनी को कर सकती है दोगुनी , तिगुनी और चौगुनी : किसान कपिल भाटिया
हिसार चंडीगढ़ रोड पर सूरेवाला मोड़ के नज़दीक वाकिंग डिस्टेंस पर बोर्ड दिखाई दे जाता है वी.डी. फ़ार्म फ्रेश और वी.डी. ओर्गानिक्स और यहाँ आपको मिल जायेंगे किसान कपिल भाटिया जी, जो कहते हैं कि मैं अपना फ़ार्म कभी भी छोड़ कर जब तक बहुत ही ज्यादा जरूरी ना हो कहीं नही जाता हूँ | मेरी दादी जी का नाम श्रीमती बिशन देवी था और मेरा उनसे बड़ा लगाव था मैंने 37 वर्ष की उम्र में जब खेती करनी शुरू की तो मैंने अपनी दादी जी के नाम से फ़ार्म का नाम रखा | मैंने अपने गाँव प्रभुवाला में खेती की शुरुआत करने से पहले प्राइवेट नौकरियां, अपना बिजनेस आदि सबकुछ करके देखा लेकिन मुझे कभी सुकून नही मिला फिर जीवन में एक ऐसा मोड़ आया कि मैंने बैठ कर सोचा तो महसूस किया कि नौकरी और बिजनेस से मैंने प्रबंधन के जो गुर सीखे हैं उन्हें यदि में अपने खेत में लागू कर दूं तो कुछ चमत्कार किया जा सकता है 

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

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