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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Fri, 10/11/2019 - 08:38
जल संरक्षण - आवश्यकता एवं उपाय।
हम सभी जानते हैं कि जल सभी जीवित प्राणियों के अस्तित्व के लिए कितना महत्त्वपूर्ण है। आपने यह भी जानकारी प्राप्त कर ली होगी कि प्रयोग करने योग्य पानी की कमी होती जा रही है। यहाँ पर पानी के संरक्षण के कुछ महत्त्वपूर्ण उपाय, प्रत्येक व्यक्ति, समुदाय तथा जल संरक्षण में सरकार का योगदान की भूमिका के बारे में जान जाएँगे।

Content

Submitted by HindiWater on Mon, 08/05/2019 - 13:22
Source:
विज्ञान प्रगति, जून 2019
air pollution in new delhi
मुरझा क्यों रहे हैं शहर। अगर यह पूछा जाए कि आखिर शहरों पर ऐसा कौन-सा कहर टूटा है, जो वे रौनक पैदा करने वाले तमाम इंतजामों के बावजूद मुरझाए-से दिखते हैं, तो इसका एक जवाब है प्रदूषण। दुनिया के ज्यादातर शहरों की तरह भारत के शहरों में भी कई कारणों से हर तरह का प्रदूषण भयानक स्तर पर पहुँच गया है। इसमें भी ज्यादा समस्या इस बात की है कि प्रदूषण को लेकर विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा आगाह किए जाने के बावजूद हमारे देश में इस क्षेत्र में सुधार की गति बेहद धीमी है।
Submitted by HindiWater on Mon, 08/05/2019 - 12:37
Source:
नवभारत टाइम्स, 28 जुलाई 2019
process of rainwater harvesting
रेनवाटर हार्वेस्टिंग करने का तरीका। जल ही जीवन है। अगर यह जीवन है तो बेशक यह अनमोल है और ऐसी अनमोल चीज की कद्र भी जरूरी है। पानी हमें हमेशा मिलता रहे, इसके लिए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जरूरी है। कैसे करें रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और क्या हैं फायदे, एक्सपटर्स से बात कर जानकारी दे रहे हैं।
Submitted by HindiWater on Sat, 08/03/2019 - 12:46
Source:
विज्ञान प्रगति, जून 2019
birds and climate change
जलवायु परिवर्तन से विलुप्त हो रहे पक्षी। भारत में एक समय था जब चिड़ियों की बारह सौ प्रजातियाँ पाई जाती थीं, लेकिन अब इसमें से 50 से अधिक प्रजातियाँ लुप्तप्राय हो गई हैं। उदाहरण के तौर पर गिद्धों की कुछ प्रजातियाँ, कठफोड़वा, ग्रेट इंडियन बस्टैर्ड जैसे पक्षियों की प्रजातियाँ लुप्त हो गई हैं या लुप्त होने के कगार पर हैं। एक अध्ययन के अनुसार पिछले 50 वर्षों में पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियाँ धरती से लुप्त हो गई और कई लुप्त होने के कगार पर हैं। विकास सम्बन्धी अस्थाई नीतियों और प्रकृति के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता के कारण भारत के कई पक्षी वास खतरे में हैं। इससे पक्षियों के लुप्त होने का खतरा और भी बढ़ गया है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Tue, 10/15/2019 - 11:15
रामवीर तंवर।
गांव से बाहरवी तक की पढ़ाई करने के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक करने लिए एक काॅलेज में दाखिला लिया। काॅलेज में पर्यावरण संरक्षण के लिए रामवीर काफी सक्रिय रहे। साथ ही उनके मन में जलाशयों को संरक्षित करने का विचार चलता रहा। बीटेक करने के बाद एक अच्छी नौकरी मिल गई, लेकिन बार बार मन तालाबों के संरक्षण के बारे में ही सोचता रहा।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 - 17:02
Source:
मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन।
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया। सभा में स्वामी सानंद के संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक कार्यनीति का निर्धारण किया तथा ध्वनिगत से निश्चय किया गया कि गंगा एक्ट बनाने का कार्य पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता वाली टीम करेगी, जिसके समन्वयक राष्ट्रीय अभिमान आन्दोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बसवराज पाटिल होंगे।
Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source:
योजना, अगस्त 2019
बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं।
वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -
Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source:
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

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खासम-खास

जल संरक्षण - आवश्यकता एवं उपाय

Submitted by HindiWater on Fri, 10/11/2019 - 08:38
हम सभी जानते हैं कि जल सभी जीवित प्राणियों के अस्तित्व के लिए कितना महत्त्वपूर्ण है। आपने यह भी जानकारी प्राप्त कर ली होगी कि प्रयोग करने योग्य पानी की कमी होती जा रही है। यहाँ पर पानी के संरक्षण के कुछ महत्त्वपूर्ण उपाय, प्रत्येक व्यक्ति, समुदाय तथा जल संरक्षण में सरकार का योगदान की भूमिका के बारे में जान जाएँगे।

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मुरझा क्यों रहे हैं शहर

Submitted by HindiWater on Mon, 08/05/2019 - 13:22
Source
विज्ञान प्रगति, जून 2019
मुरझा क्यों रहे हैं शहर।मुरझा क्यों रहे हैं शहर। अगर यह पूछा जाए कि आखिर शहरों पर ऐसा कौन-सा कहर टूटा है, जो वे रौनक पैदा करने वाले तमाम इंतजामों के बावजूद मुरझाए-से दिखते हैं, तो इसका एक जवाब है प्रदूषण। दुनिया के ज्यादातर शहरों की तरह भारत के शहरों में भी कई कारणों से हर तरह का प्रदूषण भयानक स्तर पर पहुँच गया है। इसमें भी ज्यादा समस्या इस बात की है कि प्रदूषण को लेकर विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा आगाह किए जाने के बावजूद हमारे देश में इस क्षेत्र में सुधार की गति बेहद धीमी है।

रेनवाटर हार्वेस्टिंग करने का तरीका

Submitted by HindiWater on Mon, 08/05/2019 - 12:37
Source
नवभारत टाइम्स, 28 जुलाई 2019
रेनवाटर हार्वेस्टिंग करने का तरीका।रेनवाटर हार्वेस्टिंग करने का तरीका। जल ही जीवन है। अगर यह जीवन है तो बेशक यह अनमोल है और ऐसी अनमोल चीज की कद्र भी जरूरी है। पानी हमें हमेशा मिलता रहे, इसके लिए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जरूरी है। कैसे करें रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और क्या हैं फायदे, एक्सपटर्स से बात कर जानकारी दे रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन से विलुप्त हो रहे पक्षी

Submitted by HindiWater on Sat, 08/03/2019 - 12:46
Source
विज्ञान प्रगति, जून 2019
जलवायु परिवर्तन से विलुप्त हो रहे पक्षी। जलवायु परिवर्तन से विलुप्त हो रहे पक्षी। भारत में एक समय था जब चिड़ियों की बारह सौ प्रजातियाँ पाई जाती थीं, लेकिन अब इसमें से 50 से अधिक प्रजातियाँ लुप्तप्राय हो गई हैं। उदाहरण के तौर पर गिद्धों की कुछ प्रजातियाँ, कठफोड़वा, ग्रेट इंडियन बस्टैर्ड जैसे पक्षियों की प्रजातियाँ लुप्त हो गई हैं या लुप्त होने के कगार पर हैं। एक अध्ययन के अनुसार पिछले 50 वर्षों में पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियाँ धरती से लुप्त हो गई और कई लुप्त होने के कगार पर हैं। विकास सम्बन्धी अस्थाई नीतियों और प्रकृति के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता के कारण भारत के कई पक्षी वास खतरे में हैं। इससे पक्षियों के लुप्त होने का खतरा और भी बढ़ गया है।

प्रयास

तालाबों को संरक्षित करने के लिए इंजीनियर ने छोड़ दी नौकरी

Submitted by HindiWater on Tue, 10/15/2019 - 11:15
गांव से बाहरवी तक की पढ़ाई करने के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक करने लिए एक काॅलेज में दाखिला लिया। काॅलेज में पर्यावरण संरक्षण के लिए रामवीर काफी सक्रिय रहे। साथ ही उनके मन में जलाशयों को संरक्षित करने का विचार चलता रहा। बीटेक करने के बाद एक अच्छी नौकरी मिल गई, लेकिन बार बार मन तालाबों के संरक्षण के बारे में ही सोचता रहा।

नोटिस बोर्ड

मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 - 17:02
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया। सभा में स्वामी सानंद के संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक कार्यनीति का निर्धारण किया तथा ध्वनिगत से निश्चय किया गया कि गंगा एक्ट बनाने का कार्य पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता वाली टीम करेगी, जिसके समन्वयक राष्ट्रीय अभिमान आन्दोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बसवराज पाटिल होंगे।

बजट 2019 में ग्रामीण भारत के विकास की योजनाएं

Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source
योजना, अगस्त 2019
वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

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