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Submitted by HindiWater on Fri, 10/25/2019 - 12:55
उत्तराखण्ड राज्य जल नीति - 2019
जल अत्यन्त महत्वपूर्ण और अपर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों में से एक है, जो जीवन, जीवकोपार्जन, कृषि, चिरस्थायी सामाजिक विकास के साथ-साथ पारिस्थितिकीय एवं पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिये अति आवश्यक है, कि नवीकरणीय उपलब्धता सीमित तथा क्षीणता/ह्रास व अपकर्ष के प्रति वेदनीय है।

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Submitted by HindiWater on Sat, 09/07/2019 - 12:49
Source:
पाञ्चजन्य, 25 अगस्त 2019
we have to save water
सहेजना होगा नीर। दुनिया में हिस्सेदारी के लिहाज से भले ही हम खाद्यान्न, पशुधन, दूध-फल-सब्जी उत्पादन आदि में अव्वल हो गए हों, लेकिन पानी के मामले में हमारे हिस्से दुनिया भर में मौजूद पीने लायक पानी का सिर्फ चार फीसदी ही है। ऐसे में जहाँ जल संकट से उपजी चुनौतियों के लिए जल प्रबन्धन की नीतियों पर गम्भीर होना पड़ेगा, वहीं गर्त में जाते पानी की चिन्ता भी करनी होगी।
Submitted by HindiWater on Sat, 09/07/2019 - 12:03
Source:
india will revive submerged areas suffered from desertification
मरुस्थलीकरण की चपेट में आए 100 जलमग्न क्षेत्रों को जीवित करेगा भारत। भारत इस समय सदी के सबसे भीषण पानी के संकट से जूझ रहा है। बीते दस साल में 4500 से ज्यादा नदियां, लाखों तालाब, बावडियां आदि सूख गए हैं। वन क्षेत्र तेजी से घट रहा है। बढ़ते प्रदूषण, ग्रीन हाउस गैसों और जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लोबल वार्मिंग खतरनाक स्तर पर पहुंचती जा रही है। देश की राजधानी और महानगरों में न पीने को पर्याप्त पानी बचा है और न ही साफ हवा। नतीजतन देश में मरुस्थलीकरण तेजी से बढ़ने से भूमि बंजर हो रही है। बंजर होते भारत में झारखंड शीर्ष पर है, जहां 50 प्रतिशत से अधिक भूमि मरुस्थलीकरण की चपेट में है।
Submitted by HindiWater on Fri, 09/06/2019 - 11:19
Source:
web
desertification in maharashtra
खेती लायक नहीं रही 5200 हेक्टेयर जमीन। फोटो स्त्रोत-डाउन टू अर्थ झारखंड के बाद महाराष्ट्र में मरुस्थलीकरण तेजी से बढ़ रहा है। यहां सबसे भयावह स्थिति धुले जिले की है, जहां 64.2 प्रतिशत भूमि निम्नीकरण की चपेट में है। तो वहीं बीते आठ वर्षों में 5200 हेक्टेयर जमीन निम्नीकृत हो गई है। मरुस्थलीकरण पर विचार विमर्श  करने के लिए ही संयुक्त राष्ट्र का कन्वेंशन टु कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी) का काॅप 14 (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज) 2 से 13 सितंबर के बीच भारत में हो रहा है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Wed, 10/30/2019 - 15:38
पानी का पहचाना मोल, सवा सौ साल पुराने बाँध में रोका पानी।
मध्यप्रदेश के देवास जिले में बीते सालों में भीषण जल संकट का सामना कर चुके बागली के लोगों ने अब पानी के मोल को पहचान लिया है। उन्होंने कस्बे के नजदीक बहने वाली कालीसिंध नदी का गर्मियों में गहरीकरण कर गाद हटाई और अब बारिश के बाद 113 साल पुराने बाँध में 22 गेट लगाकर पानी को सहेज लिया है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 - 17:02
Source:
मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन।
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया।
Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source:
योजना, अगस्त 2019
बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं।
वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -
Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source:
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

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खासम-खास

उत्तराखण्ड राज्य जल नीति - 2019

Submitted by HindiWater on Fri, 10/25/2019 - 12:55
Source
उत्तराखण्ड सरकार
जल अत्यन्त महत्वपूर्ण और अपर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों में से एक है, जो जीवन, जीवकोपार्जन, कृषि, चिरस्थायी सामाजिक विकास के साथ-साथ पारिस्थितिकीय एवं पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिये अति आवश्यक है, कि नवीकरणीय उपलब्धता सीमित तथा क्षीणता/ह्रास व अपकर्ष के प्रति वेदनीय है।

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सहेजना होगा नीर

Submitted by HindiWater on Sat, 09/07/2019 - 12:49
Source
पाञ्चजन्य, 25 अगस्त 2019
सहेजना होगा नीर।सहेजना होगा नीर। दुनिया में हिस्सेदारी के लिहाज से भले ही हम खाद्यान्न, पशुधन, दूध-फल-सब्जी उत्पादन आदि में अव्वल हो गए हों, लेकिन पानी के मामले में हमारे हिस्से दुनिया भर में मौजूद पीने लायक पानी का सिर्फ चार फीसदी ही है। ऐसे में जहाँ जल संकट से उपजी चुनौतियों के लिए जल प्रबन्धन की नीतियों पर गम्भीर होना पड़ेगा, वहीं गर्त में जाते पानी की चिन्ता भी करनी होगी।

काॅप 14: मरुस्थलीकरण की चपेट में आए 100 जलमग्न क्षेत्रों को जीवित करेगा भारत

Submitted by HindiWater on Sat, 09/07/2019 - 12:03
मरुस्थलीकरण की चपेट में आए 100 जलमग्न क्षेत्रों को जीवित करेगा भारत।मरुस्थलीकरण की चपेट में आए 100 जलमग्न क्षेत्रों को जीवित करेगा भारत। भारत इस समय सदी के सबसे भीषण पानी के संकट से जूझ रहा है। बीते दस साल में 4500 से ज्यादा नदियां, लाखों तालाब, बावडियां आदि सूख गए हैं। वन क्षेत्र तेजी से घट रहा है। बढ़ते प्रदूषण, ग्रीन हाउस गैसों और जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लोबल वार्मिंग खतरनाक स्तर पर पहुंचती जा रही है। देश की राजधानी और महानगरों में न पीने को पर्याप्त पानी बचा है और न ही साफ हवा। नतीजतन देश में मरुस्थलीकरण तेजी से बढ़ने से भूमि बंजर हो रही है। बंजर होते भारत में झारखंड शीर्ष पर है, जहां 50 प्रतिशत से अधिक भूमि मरुस्थलीकरण की चपेट में है।

काॅप 14 : महाराष्ट्र में खेती लायक नहीं रही 5200 हेक्टेयर जमीन

Submitted by HindiWater on Fri, 09/06/2019 - 11:19
Source
web
खेती लायक नहीं रही 5200 हेक्टेयर जमीन। फोटो स्त्रोत-डाउन टू अर्थ खेती लायक नहीं रही 5200 हेक्टेयर जमीन। फोटो स्त्रोत-डाउन टू अर्थ झारखंड के बाद महाराष्ट्र में मरुस्थलीकरण तेजी से बढ़ रहा है। यहां सबसे भयावह स्थिति धुले जिले की है, जहां 64.2 प्रतिशत भूमि निम्नीकरण की चपेट में है। तो वहीं बीते आठ वर्षों में 5200 हेक्टेयर जमीन निम्नीकृत हो गई है। मरुस्थलीकरण पर विचार विमर्श  करने के लिए ही संयुक्त राष्ट्र का कन्वेंशन टु कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी) का काॅप 14 (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज) 2 से 13 सितंबर के बीच भारत में हो रहा है।

प्रयास

पानी का पहचाना मोल, सवा सौ साल पुराने रणजीत बांध में रोका पानी

Submitted by HindiWater on Wed, 10/30/2019 - 15:38
Author
मनीष वैद्य
मध्यप्रदेश के देवास जिले में बीते सालों में भीषण जल संकट का सामना कर चुके बागली के लोगों ने अब पानी के मोल को पहचान लिया है। उन्होंने कस्बे के नजदीक बहने वाली कालीसिंध नदी का गर्मियों में गहरीकरण कर गाद हटाई और अब बारिश के बाद 113 साल पुराने बाँध में 22 गेट लगाकर पानी को सहेज लिया है।

नोटिस बोर्ड

मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 - 17:02
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया।

बजट 2019 में ग्रामीण भारत के विकास की योजनाएं

Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source
योजना, अगस्त 2019
वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

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