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खासम-खास

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/20/2020 - 08:26
अविरल नदी, फोटो : needpix.com
मनुष्य की विकास यात्रा का इतिहास बताता है कि मानव सभ्यता का विकास नदियों के किनारे हुआ है। यह विकास चाहे भारत में हुआ हो या मिश्र में, या अन्य और किसी जगह, या बिहार में, सब जगह उसका आधार नदी और उसका कछार ही रहा है। मानव सभ्यता का यह विकास, नदी और मनुष्य के अन्तरंग सम्बन्ध का जीता-जागता प्रमाण है लेकिन यह सम्बन्ध नदी और मनुष्य के बीच क्यों बना और क्यों विकास की धारा नदी के किनारे ही प्रवाहित हुई, पर बहुत ही कम लोगों ने विचार किया है। उससे जुडा साहित्य भी सहजता से उपलब्ध नही है। आइए उस संभावना को समझने का प्रयास करें।

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Submitted by HindiWater on Tue, 06/09/2020 - 08:52
Source:
भारत सहित विश्व में विवाद बनता जल
दुनियाभर में 279 ट्रांसबाउंड्री बेसिन हैं। खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार ‘‘805 ईसवीं से अब तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 3600 जल संधियां हो चुकी हैं।’’ 148 देश इन्हीं अंतर्राष्ट्रीय बेसिनों में स्थित हैं। इसलिए इन विवादों का कारण घटता जल और अंतर्राष्ट्रीय संधियां दोनो ही हैं।
Submitted by HindiWater on Mon, 06/08/2020 - 17:01
Source:
पहाड़ की महिलाएं और जल संकट
राज्य के 16 हजार राजस्व गांवों में से 8800 गांवों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, टिहरी और चमोली में है। उत्तराखंड़ 72 प्रतिशत महिलाओं को पानी लाने के लिए रोजाना घर से बाहर निकलना पड़ता है।
Submitted by HindiWater on Mon, 06/08/2020 - 12:13
Source:
भारत में भूजल प्रदूषण की दशा
जल प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों के चलते देश में हर साल 6 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है, लेकिन ये समस्या कम होने की बजाए और बढ़ती जा रही है। कई स्थानों पर तो लोगों को बूंद बूंद पानी के लिए मोहताज होना पड़ रहा है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Tue, 07/28/2020 - 21:11
डाकुओं को भी बनाया पर्यावरण प्रेमी, लगाए 26 लाख पौधे
वैसे तो पौधारोपण हम सभी करते हैं, लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जिनके जीवन का उद्देश्य ही पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण है। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं, विष्णु लांबा, जिनकी प्रेरणा से अभी तक 50 लाख पेड़ लगाए जा चुके हैं। साथ ही वे नदियों को खनन मुक्त कराने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने जुनून के चलते ही उन्होंने सुख्यात डाकुओं को भी पर्यावरण की मुहिम से जोड़ दिया। पर्यावरण को बचाने के लिए उन्होंने अपना घरबार भी छोड़ दिया। पर्यावरण के प्रति उनके जुनून को देखते हुए दुनिया अब उन्हें ट्रीमैन ऑफ इंडिया के नाम से जानती है। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश।

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Tue, 07/07/2020 - 17:15
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हेल्पलाइन नंबर
संजय झा ने कहा,ट्विटर पर @WRD_Bihar (जल संसाधान विभाग) को टैग करते हुए #HelloWRD के साथ लोग तटबंधों की जानकारी दे सकते हैं। सूचना मिलने पर विभाग तुरंत संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को सूचित करेगा और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।” “ट्विटर के अलावा टोल फ्री नं. 18003456145 पर कॉल कर भी जानकारी साझा की जा सकती है। ये नंबर 24X7 चालू है। इसके साथ ही एक ऐप भी लाया जा रहा है। इस ऐप के जरिए भी जानकारियां दी जा सकती हैं।”
Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 15:04
Source:
वेबिनारः कोरोनार संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 
कोरोना संकट और लॉकडाउन को हिमालय क्षेत्र के परिप्रेक्ष में समझने के लिए 21 मई, गुरुवार 4 बजे हमारे पेज Endangered Himalaya में इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक के साथ लाइव बातचीत में जुड़ें।  आप Zoom में https://bit.ly/2zmjhHs लिंक में पंजीकरण करके भी जुड़ सकते हैं। इसका आयोजन हिम धारा और रिवाइटललाइज़िग रेनफेड एग्रीकल्चर द्वारा किया जा रहा है।
Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 14:52
Source:
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ विषय पर सहगल फाउंडेशन और सीएडब्ल्यूएसटी ऑनलाइन वर्कशाप का आयोजन करने जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य वाॅश के प्रति लोगों को जागरुक करना और प्रेरित करना है। ये वेबिनार निन्मलिखित विषयों से संबंधित रहेगा - 

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खासम-खास

नदी चेतना यात्रा : समाज की प्रजातांत्रिक शक्ति और नदी के प्राकृतिक संसाधनों की बहाली 

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/20/2020 - 08:26
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
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अविरल नदी, फोटो : needpix.com
मनुष्य की विकास यात्रा का इतिहास बताता है कि मानव सभ्यता का विकास नदियों के किनारे हुआ है। यह विकास चाहे भारत में हुआ हो या मिश्र में, या अन्य और किसी जगह, या बिहार में, सब जगह उसका आधार नदी और उसका कछार ही रहा है। मानव सभ्यता का यह विकास, नदी और मनुष्य के अन्तरंग सम्बन्ध का जीता-जागता प्रमाण है लेकिन यह सम्बन्ध नदी और मनुष्य के बीच क्यों बना और क्यों विकास की धारा नदी के किनारे ही प्रवाहित हुई, पर बहुत ही कम लोगों ने विचार किया है। उससे जुडा साहित्य भी सहजता से उपलब्ध नही है। आइए उस संभावना को समझने का प्रयास करें।

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भारत सहित विश्व में विवाद बनता जल

Submitted by HindiWater on Tue, 06/09/2020 - 08:52
bharat-aur-duniya-mein-jal-vivad
भारत सहित विश्व में विवाद बनता जल
दुनियाभर में 279 ट्रांसबाउंड्री बेसिन हैं। खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार ‘‘805 ईसवीं से अब तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 3600 जल संधियां हो चुकी हैं।’’ 148 देश इन्हीं अंतर्राष्ट्रीय बेसिनों में स्थित हैं। इसलिए इन विवादों का कारण घटता जल और अंतर्राष्ट्रीय संधियां दोनो ही हैं।

पहाड़ की महिलाएं और जल संकट

Submitted by HindiWater on Mon, 06/08/2020 - 17:01
pahad-ki-mahilaen-aur-jal-sankat
पहाड़ की महिलाएं और जल संकट
राज्य के 16 हजार राजस्व गांवों में से 8800 गांवों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, टिहरी और चमोली में है। उत्तराखंड़ 72 प्रतिशत महिलाओं को पानी लाने के लिए रोजाना घर से बाहर निकलना पड़ता है।

भारत में भूजल प्रदूषण की दशा

Submitted by HindiWater on Mon, 06/08/2020 - 12:13
bharat-mein-bhujal-pradushan-ki-dasha
भारत में भूजल प्रदूषण की दशा
जल प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों के चलते देश में हर साल 6 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है, लेकिन ये समस्या कम होने की बजाए और बढ़ती जा रही है। कई स्थानों पर तो लोगों को बूंद बूंद पानी के लिए मोहताज होना पड़ रहा है।

प्रयास

डाकुओं को भी बनाया पर्यावरण प्रेमी, लगाए 26 लाख पौधे

Submitted by HindiWater on Tue, 07/28/2020 - 21:11
treeman-of-india-vishnu-lamba-rajasthan
डाकुओं को भी बनाया पर्यावरण प्रेमी, लगाए 26 लाख पौधे
वैसे तो पौधारोपण हम सभी करते हैं, लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जिनके जीवन का उद्देश्य ही पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण है। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं, विष्णु लांबा, जिनकी प्रेरणा से अभी तक 50 लाख पेड़ लगाए जा चुके हैं। साथ ही वे नदियों को खनन मुक्त कराने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने जुनून के चलते ही उन्होंने सुख्यात डाकुओं को भी पर्यावरण की मुहिम से जोड़ दिया। पर्यावरण को बचाने के लिए उन्होंने अपना घरबार भी छोड़ दिया। पर्यावरण के प्रति उनके जुनून को देखते हुए दुनिया अब उन्हें ट्रीमैन ऑफ इंडिया के नाम से जानती है। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश।

नोटिस बोर्ड

बिहार में बाढ़: आपके इलाके में तटबंध में दरार है तो ऐसे दीजिए जानकारी 

Submitted by UrbanWater on Tue, 07/07/2020 - 17:15
Author
उमेश कुमार राय
bihar-badh:-aapke-ilake-mein-tatabandh-mein-darar-hai-dijie-janakari
हेल्पलाइन नंबर
संजय झा ने कहा,ट्विटर पर @WRD_Bihar (जल संसाधान विभाग) को टैग करते हुए #HelloWRD के साथ लोग तटबंधों की जानकारी दे सकते हैं। सूचना मिलने पर विभाग तुरंत संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को सूचित करेगा और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।” “ट्विटर के अलावा टोल फ्री नं. 18003456145 पर कॉल कर भी जानकारी साझा की जा सकती है। ये नंबर 24X7 चालू है। इसके साथ ही एक ऐप भी लाया जा रहा है। इस ऐप के जरिए भी जानकारियां दी जा सकती हैं।”

वेबिनारः कोरोना संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 

Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 15:04
corona-and-lockdown-in-context-of-himalayas
वेबिनारः कोरोनार संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 
कोरोना संकट और लॉकडाउन को हिमालय क्षेत्र के परिप्रेक्ष में समझने के लिए 21 मई, गुरुवार 4 बजे हमारे पेज Endangered Himalaya में इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक के साथ लाइव बातचीत में जुड़ें।  आप Zoom में https://bit.ly/2zmjhHs लिंक में पंजीकरण करके भी जुड़ सकते हैं। इसका आयोजन हिम धारा और रिवाइटललाइज़िग रेनफेड एग्रीकल्चर द्वारा किया जा रहा है।

‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार

Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 14:52
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‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ विषय पर सहगल फाउंडेशन और सीएडब्ल्यूएसटी ऑनलाइन वर्कशाप का आयोजन करने जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य वाॅश के प्रति लोगों को जागरुक करना और प्रेरित करना है। ये वेबिनार निन्मलिखित विषयों से संबंधित रहेगा - 

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